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                <title>Exam Reforms - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक: 'भरोसा' कब लीक होना बंद होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi">  घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi">  लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  हजार अभ्यर्थियों का</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/education.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से लटका दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये कोई पहली बार नहीं है। सवाल वही है: आखिर पेपर लीक से छुटकारा कब मिलेगा</span>? 27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की सुबह का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवंडी में छापा- </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को सुबह </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">का पेपर बेचा जा रहा है। छापेमारी में संदिग्धों के पास से जो प्रश्नपत्र मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो असली </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। परीक्षा रद्द-  महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने तुरंत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा स्थगित कर दी। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारियां- भिवंडी पुलिस ने कम से कम </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को हिरासत में लिया है और केस दर्ज कर जांच शुरू की है। ये पहली बार नहीं: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कहानी-  महाराष्ट्र में </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक अब आदत बन चुका है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> कोल्हापुर में  </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर की परीक्षा से पहले </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोग गिरफ्तार। गिरोह </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में पेपर बेच रहा था। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठाणे/भिवंडी में </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा से </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले पेपर लीक। </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कोल्हापुर केस के बाद भी परिषद ने कहा था कि "पेपर छपाई बेहद गोपनीय होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोषागार में </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे निगरानी रहती है"। फिर भी लीक हो गया। कौन फंस रहा है बीच में</span>? 4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख शिक्षक अभ्यर्थी। इस बार करीब </span>4.28<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख उम्मीदवार परीक्षा देने वाले थे। इसमें </span>2.26<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख वो शिक्षक भी शामिल थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन के लिए फिर से परीक्षा दे रहे थे। एक अभ्यर्थी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बर्बाद। फीस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग सब गया। और सबसे बड़ा नुकसान: स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती फिर लटकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीक होता कैसे है</span>? '<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया का मॉडल</span>'- <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच और पुराने केस देखें तो पैटर्न साफ है। व्हाट्सएप चेन- </span>HSC <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड पेपर लीक में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टेक वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सीलेंट ट्यूशन क्लासेस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हुए स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचता था। प्राइवेट कोचिंग का रोल- नागपुर बोर्ड केस में एक प्राइवेट कोचिंग से जुड़े व्यक्ति ने पैसे लेकर पेपर साझा किया था। अंदरूनी सांठगांठ- बिना छपाई वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या कोषागार/ट्रांसपोर्ट लेवल पर पेपर निकलना। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भी पेपर परीक्षा से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पहले व्हाट्सएप पर भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                  राजनीति शुरू: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक सरकार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप- कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा: "पेपर लीक अब अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी सरकार की पहचान बन गया है। ठाणे में ही टैट का पेपर लीक... किसका राजनीतिक संरक्षण है</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर लीक से छुटकारा कब</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सजा का कानून-  </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह महाराष्ट्र में भी </span>'Public Examination Act' <span lang="hi" xml:lang="hi">को दांत वाला बनाना। गिरफ्तार लोग </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में जमानत पर बाहर न आएं। टेक्नोलॉजी से निगरानी- पेपर को ब्लॉकचेन या एन्क्रिप्टेड </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड से ट्रैक करना। हर हैंडलिंग पर बायोमेट्रिक लॉग। कोचिंग माफिया पर कार्रवाई-  ट्यूशन क्लासेस में छापे और व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग। पैसे लेकर पेपर बेचने वालों का लाइसेंस रद्द। परिषद की जवाबदेही- हर लीक पर </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">के शीर्ष अधिकारी से स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी तय। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का मामला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पल्ला झाड़ना बंद। अभ्यर्थियों को मुआवजा-परीक्षा रद्द होने पर फीस वापस + अगली परीक्षा फ्री + ट्रैवल खर्च। ताकि सिस्टम को दर्द हो। </span>NEET, HSC, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>TET... <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बार सरकार कहती है "जांच होगी"। पर अभ्यर्थी हर बार नई तारीख का इंतजार करता है। जब तक पेपर लीक करने वाले को नौकरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेल और </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का बैन मिलना तय नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। क्या महाराष्ट्र को हर परीक्षा के लिए </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद को सुधारेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हर परीक्षा से पहले लीक का डर परीक्षार्थियों को सताने लगा है। और जब वह किसी परीक्षा की तैयारियां करते हैं तो एक सवाल जरूर मन में उठता है कि कहीं परीक्षा लीक न हो जाए। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कानून को और सख्त बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:27:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'यूपीएससी में कभी नहीं हुआ पेपर लीक, एनटीए को सीखने की जरूरत' : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180331/there-was-never-any-paper-leak-in-upsc-nta-needs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/supream-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">नीट-यूजी  2026 परीक्षा रद्द किए जाने और पेपर लीक विवाद से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि जब तक स्पष्ट और व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती रहेंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ एनटीए को भंग करने और उसकी संरचना में व्यापक बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि एनटीए को उन संस्थाओं से सीखने की जरूरत है जो बड़े पैमाने पर परीक्षाएं बिना किसी पेपर लीक के सफलतापूर्वक आयोजित करती हैं।जस्टिस नरसिम्हा ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपीएससी की परीक्षाओं में कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। एनटीए को उससे सीखने की जरूरत है।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि वास्तविक समाधान तभी संभव है जब यह स्पष्ट हो कि किसी विफलता की जिम्मेदारी किस व्यक्ति पर है। केवल संस्थागत जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर बताए कि एनटीए में “संस्थागत निरंतरता” विकसित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में एजेंसी के पास परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने की क्षमता और विशेषज्ञता उपलब्ध रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान 2024 में गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन भी अदालत में उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और लगभग 60 अल्पकालिक सिफारिशें दी थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। हालांकि अदालत ने पूछा कि यदि सुधार लागू किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया की पूरी श्रृंखला की समीक्षा की गई और नई कमजोरियों की पहचान कर सुधारात्मक उपाय तैयार किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने लाखों छात्रों पर पड़े प्रभाव का भी उल्लेख किया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों का समय और भावनाएं लगाने वाले छात्रों के लिए ऐसी घटनाएं बेहद पीड़ादायक और आघातकारी होती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एनटीए को विश्वविद्यालयों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ स्थायी सहयोग विकसित करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को लगातार बेहतर बनाया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इसके बाद कई डॉक्टर संगठनों और छात्र समूहों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए एनटीए को भंग करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी जगह एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण गठित करने और भविष्य की परीक्षाओं की न्यायिक निगरानी की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर विचार किया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:19:55 +0530</pubDate>
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