<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/92774/legal-update" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Legal Update - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/92774/rss</link>
                <description>Legal Update RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, खारिज करदी।  कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं।   कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक जमीन पर कथित अतिक्रमण कर और सड़कों को बाधित करके बनाए गए चैंबरों के संबंध में ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।  जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उस पर वकीलों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186503/supreme-court-rejects-petition-against-demolition-of-lawyers-chambers-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/supream-court1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में वकीलों के चैंबर गिराने के खिलाफ याचिका, खारिज करदी।  कहा- अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं।   कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सार्वजनिक जमीन पर कथित अतिक्रमण कर और सड़कों को बाधित करके बनाए गए चैंबरों के संबंध में ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।  जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उस पर वकीलों का कब्जा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने निर्माण की जगह को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "यह निर्माण कहां स्थित है पहले यह बताइए। मुख्य सड़क पर क्यों?" जस्टिस नाथ ने कहा कि किसी बार एसोसिएशन के निर्वाचित पदाधिकारी होने के आधार पर भी अनधिकृत निर्माण को बनाए रखने का अधिकार नहीं मिल जाता।  उन्होंने कहा, "आप अवैध निर्माण करते हैं और फिर कहते हैं कि मैं एसोसिएशन का निर्वाचित अध्यक्ष हूं और संचालन समिति का सदस्य हूं, इसलिए मुझे इसे जारी रखने का अधिकार है? नहीं, सभी अवैध निर्माण हटाए जाने चाहिए।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जस्टिस नाथ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ जस्टिस के रूप में अपने कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद अदालत परिसर के आसपास की स्थिति देखी है और उन्हें पता है कि किस तरह सड़कों पर निर्माण करके यातायात बाधित किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के 6 अगस्त के आदेश से जुड़ा है। हाईकोर्ट के सामने करीब 72 कथित अतिक्रमणकर्ताओं का मामला था जिनमें ज्यादातर अधिवक्ता बताए गए हैं। आरोप था कि लखनऊ जिला अदालत परिसर के आसपास सार्वजनिक रास्तों या सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर चैंबर और अन्य निर्माण किए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को संबंधित कब्जाधारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। उन्हें निर्माण खाली करने या जमीन और निर्माण पर अपना वैध अधिकार साबित करने का अवसर दिया गया था। ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में निर्माण गिराने का निर्देश दिया गया था। ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रस्तावित कार्रवाई 30 अगस्त को किए जाने की बात सामने आई थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में  मंगलवार की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट आदिश अग्रवाला ने प्रभावित वकीलों को वैकल्पिक जगह दिए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने की संभावना भी रखी। हालांकि, जस्टिस नाथ इस सुझाव से सहमत नजर नहीं आए। उन्होंने सवाल किया, "वकीलों के साथ मध्यस्थता?" पीठ ने अदालत परिसरों को अतिक्रमण से बचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। जस्टिस नाथ ने कहा कि अगर अदालत परिसर पर ही अतिक्रमण हो जाए तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186503/supreme-court-rejects-petition-against-demolition-of-lawyers-chambers-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186503/supreme-court-rejects-petition-against-demolition-of-lawyers-chambers-in</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 21:12:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/supream-court1.jpg"                         length="133092"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: ।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (</span>CrPC) <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता। जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">याचिकाकर्ता पुलिसकर्मियों ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ अभियोजन चलाने से पहले सरकार की मंजूरी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि कथित घटनाएं उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़ी हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुसूचित जाति समुदाय से संबंध रखने वाले 24 वर्षीय पंकज वैष्णव को 19 दिसंबर 2015 को स्कूटर चोरी के मामले में पूछताछ के लिए इंदौर के एमआईजी थाने लाया गया। उसी रात उसकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">घटना के बाद </span>CrPC <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 176 के तहत स्वतंत्र जांच कराई गई। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में निष्कर्ष निकाला गया कि यह मामला आपराधिक मानव वध का प्रतीत होता है।इसके बाद दो आरक्षकों और एक थाना प्रभारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवैध निरुद्ध करने और झूठे साक्ष्य देने सहित विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दायर किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 197 के संरक्षण का लाभ तभी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब आरोपित कृत्य और सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के बीच स्पष्ट और उचित संबंध हो। लेकिन वर्तमान मामले में ऐसा कोई संबंध नहीं पाया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">यह ऐसा मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पुलिसकर्मी किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे और बल प्रयोग करते हुए अपनी सीमा से आगे बढ़ गए हों। यहां आरोपित बल प्रयोग उस समय किया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब मृतक पुलिस हिरासत में था और थाने के नियंत्रण में था। ऐसी स्थिति में बल प्रयोग या शारीरिक हमला करने का कोई औचित्य नहीं था।”</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पुलिस को कुछ विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हिंसक भीड़ को तितर-बितर करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारी</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का भी उल्लेख किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें कहा गया कि हिरासत में हिंसा और मौत सभ्य समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से हैं तथा यह व्यक्ति के मूल मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने आरक्षकों की पुनरीक्षण याचिका खारिज की और स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा जैसे मामलों में धारा 197 के तहत अभियोजन मंजूरी का संरक्षण उपलब्ध नहीं होगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181536/prosecution-sanction-is-not-necessary-in-cases-of-custodial-death</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:57:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/hindi-divas7.jpg"                         length="173958"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो पासपोर्ट मामले में अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:Mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">चर्चित दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180327/big-relief-to-abdullah-azam-in-two-passport-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ab_1576478568.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-family:Mangal, serif;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong></span><span lang="hi" xml:lang="hi">चर्चित दो पासपोर्ट मामले में सपा नेता अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को उनकी अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस मामले में उनकी जमानत भी मंजूर कर ली है। फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज कराया गया था। शहर विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए थे। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चली थी। कोर्ट ने पांच दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें सात साल की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ बचाव पक्ष की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल की गई थी। वहीं अभियोजन पक्ष ने भी सजा बढ़ाने की मांग करते हुए अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शुक्रवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार ने फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी और अब्दुल्ला आजम को इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने उनकी जमानत भी मंजूर कर ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब्दुल्ला के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि निचली अदालत ने सात साल की सजा का आदेश पारित किया था। इसके खिलाफ विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अब कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि हर मामला अपने अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होता है। न्यायालय पर पूरा भरोसा है और आगे भी न्याय मिलने की उम्मीद है। इस दाैरान अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दो पैन कार्ड में सात साल की सजा के चलते जेल में होने के कारण वह बाहर नहीं आ सकते।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180327/big-relief-to-abdullah-azam-in-two-passport-cases</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180327/big-relief-to-abdullah-azam-in-two-passport-cases</guid>
                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:17:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/ab_1576478568.jpg"                         length="51216"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        