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                <title>Education Reform - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Education Reform RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वानचुंग को उठाए जाने के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन ने प्रदर्शन किया राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>  ब्यूरो प्रयागराज,</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">परीक्षाओं में धाँधली और पेपर लीक के खिलाफ़ दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध तरीके से उठाए जाने और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन की ओर से इलाहाबाद में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के संजय ने कहा कि दिल्ली पुलिस लगातार नागरिकों के जनवादी अधिकारों पर हमले कर रही है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रतिरोध हमारा जनवादी अधिकार हैं लेकिन मौजूद सरकार इसको भी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183660/disha-student-organization-demonstrated-against-the-lifting-of-wanchung-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260718-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज,</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परीक्षाओं में धाँधली और पेपर लीक के खिलाफ़ दिल्ली के जन्तर-मन्तर पर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध तरीके से उठाए जाने और अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन की ओर से इलाहाबाद में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के संजय ने कहा कि दिल्ली पुलिस लगातार नागरिकों के जनवादी अधिकारों पर हमले कर रही है। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रतिरोध हमारा जनवादी अधिकार हैं लेकिन मौजूद सरकार इसको भी बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोनम वांगचुक को अगवा करने के बाद दिल्ली पुलिस लगातार दिल्ली हाईकोर्ट का हवाला दे रही है। लेकिन सच्चाई यह है की दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की जान बचाने का निर्देश दिया था न कि अगवा करने का। अगर दिल्ली पुलिस और केंद्र तथा दिल्ली की सरकार सोनम की ज़िंदगी को लेकर इतना ही चिंतित थी तो उसे सोनम से वार्ता करने आना चाहिए। लेकिन वार्ता करने की जगह पर अलोकतांत्रिक तरीके से कार्यकर्ताओं को अलावा करना निंदनीय हैं। हम इसकी भर्त्सना करते हैं और सभी इंसाफपसंद लोगों से अपील करते हैं कि देश में लोकतान्त्रिक मूल्यों की बहाली के लिए आगे आयें। </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन में जय, हर्ष, अमन, धोनी, सुहानी, पूजा, आरती, विंदरेश, प्रेमचंद, अधिवक्ता अनीस सहित दर्जनों छात्र मौजूद रहे। </div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:17:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बेसिक शिक्षा विभाग की जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक सम्पन्न।</title>
                                    <description><![CDATA[जिलाधिकारी ने विद्यालयों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों के तार को हटाये  जाने के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182144/review-meeting-of-district-task-force-of-basic-education-department"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260627-wa0075.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को संगम सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक मे शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने  खण्ड शिक्षा अधिकारी करछना व कोरांव के द्वारा कार्य में लापरवाही बरतने व बैठक में अनुपस्थित रहने पर उनसे स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा बताया गया कि शिक्षा विभाग के द्वारा पैसा जमा करने बावजूद भी 26 विद्यालयों में भवनों के ऊपर से हाइटेंशन तार का अभी तक शिफ्ट करने का कार्य नहीं कराया गया है, इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी एवं चेतावनी देते हुए सम्बंधित अधिशासी अभियंताओं को हाईटेंशन तार के शिफ्ट करने की कार्यवाही को शीघ्रता से सुनिश्चित किए जाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की घटना घटित होती है, तो सम्बंधित अधिशासी अभियंता की पूर्ण जिम्मेदारी होगी और उनके विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत किया जायेगा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह से शिक्षा विभाग के द्वारा पैसा जमा करने के बावजूद भी 218 विद्यालयों में विद्युत संयोजन का कार्य अभी तक नहीं कराये जाने पर ने सम्बंधित अधिशासी अभियंताओं को चेतावनी देते हुए विद्यालयों में विद्युत संयोजन के कार्य को शीघ्रता से पूर्ण कराये जाने का निर्देश दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने 01 जुलाई से 15 जुलाई तक चलने वाले दूसरे स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराये जाने  कोई भी बच्चा स्कूल जाने से छूटने न पाये। उन्होंने कहा कि कक्षा-5 एवं कक्षा-8 पास होने वाले विद्यार्थियों का क्रमशः कक्षा-6 एवं कक्षा-9 में अनिवार्य रूप से नामांकन सुनिश्चित कराया जाये। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नामांकन की कार्यवाही पोर्टल एप पर अपडेट भी होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने तथा नामांकन एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता न होकर शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाना होना चाहिए। जिलाधिकारी ने नए शैक्षिक सत्र के प्रारंभ होने पर विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन एवं पठन-पाठन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय, मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय-करछना तथा अन्य निर्माणाधीन विद्यालयों के कार्यों के प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्था यूपीसिडको को निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए निर्धारित समय में निर्माण कार्य को पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए है। कायाकल्प योजना के अंतर्गत जिन विद्यालयों में कार्य अभी अधूरे हैं, उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। कहा कि जिन कार्यों का निर्माण कार्य शुरू होना है उनके जल्द से जल्द जनपद प्रतिनिधियों से शिलान्यास  करा कर निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने आपरेशन कायाकल्प की समीक्षा करते हुए आपरेशन कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटरों के संतृप्तीकरण किए जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने ब्लाकवार आपरेशन कायाकल्प के पैरामीटरों के संतृप्तीकरण की समीक्षा करते हुए सभी विद्यालयों में फर्नीचर, विद्युतीकरण, दिव्यांग शौचालय, बाउंड्रीवॉल सहित सभी कार्यों को पूर्ण कराये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के साथ-साथ विद्यालयों में छायादार पौधे लगाये जाने के भी निर्देश दिए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिषदीय विद्यालयों में नवीन नामांकन की समीक्षा करते हुए सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों में ज्यादा से ज्यादा बच्चों का नवीन नामांकन कराये जाने, पीएम श्री विद्यालयों में नवीन नामांकन में प्रगति लाये जाने तथा कक्षा-8 पास होने वाले छात्रों का कक्षा-9 में प्रवेश अवश्य सुनिश्चित करने के लिए कहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> मध्यान्ह भोजन क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण तथा दिवस वार मीनू व मानक के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने निपुण भारत मिशन के अन्तर्गत निपुण प्लस एप पर फीडिंग कम पाये जाने वाले सम्बंधित खण्ड शिक्षा अधिकारियों को कार्य में तेजी लाये जाने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों एवं शैक्षिक नवाचारों से जोड़ते हुए शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, जिला पंचायत राज्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी,  खंड शिक्षा अधिकारीगण, जिला समन्वयकसहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 19:33:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्या को लेकर त्याग पत्र दें धर्मेन्द्र प्रधान-पुनीत पाठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में कांग्रेस कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता पुनीत पाठक ने कहा कि पेपरलीक मामलों में केन्द्र सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग पत्र की मांग को अनसुना कर देना चिन्ताजनक है। कहा कि कांग्रेस लगातार शिक्षा के सवाल को लेकर संघर्षरत है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपरलीक के मामले को प्रमुखता से उठाया, छात्रों का हौसला बढाया और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों से मिले किन्तुं परीक्षा में सुझाव देने वाले प्रधानमंत्री खामोश हैं और अनगिनत खामियों के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182057/dharmendra-pradhan-puneet-pathak-should-resign-over-paper-leak-and-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0096.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में कांग्रेस कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता पुनीत पाठक ने कहा कि पेपरलीक मामलों में केन्द्र सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग पत्र की मांग को अनसुना कर देना चिन्ताजनक है। कहा कि कांग्रेस लगातार शिक्षा के सवाल को लेकर संघर्षरत है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपरलीक के मामले को प्रमुखता से उठाया, छात्रों का हौसला बढाया और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों से मिले किन्तुं परीक्षा में सुझाव देने वाले प्रधानमंत्री खामोश हैं और अनगिनत खामियों के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा त्याग पत्र न दिया जाना लोकतांत्रिक नैतिकता के विरूद्ध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुये पुनीत पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट परीक्षा के अलावा सीबीएससी की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में चाहे लेखपाल भर्ती परीक्षा हो, यूपीएसआई, पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा हो, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा हो. एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा हो, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा हो, ऐसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के माध्यम से भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयीं। हाल ही में हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा आवाज उठाने एवं सड़कों पर संघर्ष करने के चलते सरकार को पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। राजस्थान में प्रदीप मेघवाल, दिल्ली में अंशिका पाण्डेय, उ०प्र० में रितिक मिश्रा व शिवानी यादव, गोवा में सिद्धार्थ हेगडे, कर्नाटक में भाग्यश्री, मध्य प्रदेश में आकांक्षा चतुर्वेदी, राजस्थान में उमेश माली और रेणु मीणा, उत्तराखण्ड में रिया कुमारी थापा, तमिलनाडु में अनुकीर्तना, गुजरात में कहान पटेल ने मानसिक तनाव में अपनी जान दे दी।दुर्भाग्यपूर्ण है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र छपने के बाद बिचौलियों के जरिए परीक्षा से पहले बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र बेंचे जाते हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जांच में कुछ छात्रों ने बताया है कि उन्होने लीक पेपर के लिए 25हजार से 40 लाख रूपये तक चुकाये। पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं यानी लगभग हर वर्ष दो पेपर लीक हुए हैं। अब तक देश भर में लगभग 90 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर है। कांग्रेस इन सवालों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है।कांग्रेस नेता वृजेश आर्य, शौकत अली नन्हू, डा. वाहिद अली सिद्दीकी , संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ एक वसूली तन्त्र बनकर रह गया है। इन्हीं पीड़ाओं को लेकर राहुल गांधी पूरे देश में छात्रों की गूंज कार्यकम अभियान के माध्यम से निष्पक्ष और सस्ती-बेहतर शिक्षा प्रणाली की आवाज बनेंगे। छात्रों की गूंज अभियान पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के अग्रिम संगठन एनएसयूआई और युवा और युवा कांग्रेस के माध्यम से चलाया जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से साधू शरन आर्य, अलीम अख्तर, सुधीर यादव, राहुल चौधरी, प्रशान्त पाठक, संजय कुमार, अवनीश पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश की शिक्षा प्रणाली एक्सटोर्शन मशीन, बच्चों को दबाती-कुचलती है, इसे बदलना होगा: राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181544/the-countrys-education-system-is-an-extortion-machine-that-oppresses"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas10.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग हब</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों की गूंज</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को ‘प्रेशराइज’ (दबाव में) करता है। यह उन्हें ‘स्ट्रेस’ (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि आगे से किसी भी बच्चे को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मघाती</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कदम न उठाना पड़े।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि उनकी छात्रों और युवाओं के साथ इस संवाद का मकसद राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। इसमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी कि इसमें क्या कमियां हैं और क्या सुधार करने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">यह बैठक आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह शाम आपके बारे में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन चुनौतियों के बारे में जिनका आप हर दिन सामना कर रहे हैं।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे पांच छात्रों को मंच पर बुलाया और उनसे बात की। उन्होंने एक छात्रा और उसके अभिभावकों से भी मंच पर बात की। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हम अभी आज राजनीतिक बात नहीं कर रहे हैं। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आपके भविष्य की बात कर रहा हूं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देश के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमें इस (शिक्षा) प्रणाली को बदलना होगा और इस प्रणाली को ठीक करना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का मौका दे और उसे पूरा करे। सबसे बड़ी बात आपका यह सपना न्यूनतम लागत पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना आपकी जेब से लाखों करोड़ रुपये छीने करना चाहिए। उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">देश की शिक्षा प्रणाली हिंदुस्तान के सबसे गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से एक परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितना शिक्षा का बजट है और पांच बड़ी परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितने पांच बड़े मंत्रालयों को बजट मिलता है। ये शर्मनाक है। हमें इसे बदलना होगा।’’</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा</span>, ‘‘<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की शिक्षा प्रणाली शोषण (एक्सटोर्शन) मशीन है। ये आपसे पैसे लेने का ‘सिस्टम’ है। ये सिर्फ शिक्षा देने का ‘सिस्टम’ नहीं है। ये परीक्षा के आधार पर आपसे लाखों करोड़ रुपये छीनने का ‘सिस्टम’ है।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्यक्रम इस आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से इससे जुड़ने और अपने सुझाव देने की अपील की कि हम इस प्रणाली को कैसे बदलें।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का दिया धरना और दिया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को एन.आई.सी.परिसर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग), प्रतापगढ़ के जिलाध्यक्ष अशोक राय के नेतृत्व में विशाल भीड़ एकत्रित होकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री,केन्द्रीय शिक्षा मंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री  को सम्बोधित सेवारत शिक्षक शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया।  कार्यक्रमों का संचालन जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">उपस्थित शिक्षक समूह को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अशोक राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 27जुलाई2011और केन्द्रीय सेवाओं में 23 अगस्त 2010 के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181511/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260618-wa0119.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़। </strong>अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को एन.आई.सी.परिसर में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (प्राथमिक संवर्ग), प्रतापगढ़ के जिलाध्यक्ष अशोक राय के नेतृत्व में विशाल भीड़ एकत्रित होकर जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री,केन्द्रीय शिक्षा मंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री  को सम्बोधित सेवारत शिक्षक शिक्षिकाओं को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया।  कार्यक्रमों का संचालन जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">उपस्थित शिक्षक समूह को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अशोक राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 27जुलाई2011और केन्द्रीय सेवाओं में 23 अगस्त 2010 के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों, शिक्षिकाओं के लिए भी उच्चतम न्यायालय, द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किया जाना सरासर अन्याय है और यह नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। उन शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता एक जबर्दस्ती थोपी गई व्यवस्था है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है।माध्यमिक संवर्ग के अध्यक्ष प्रभात त्रिपाठी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2017 के संसद के जिस संशोधन के आधार पर बेसिक शिक्षकों को बीस-पच्चीस साल तक नौकरी करने के बाद पुनः पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्णय दिया है , देश में वैसा उदाहरण मिलना असम्भव है। इसमें मानवीय पक्ष को पूरी तरह नकार दिया गया है।माध्यमिक संवर्ग के पूर्व प्रान्तीय कार्यकारी अध्यक्ष अरुण शुक्ल ने कहा कि संसद सर्वोच्च है और  उच्चतम न्यायालय के निर्णय से बड़ी विसंगति पैदा हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">विशाल एकत्रीकरण कार्यक्रम एवं ज्ञापन कार्यक्रम में आज उपस्थित अन्य प्रमुख पदाधिकारियों में वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक वैश्य, उपाध्यक्ष डा.राज श्री पाण्डेय,जिला महामंत्री जय प्रकाश पाण्डेय,सह संगठन मंत्री गौरव त्रिपाठी, जिला संयुक्त महामंत्री/सदर ब्लाक अध्यक्ष डा.अजय सिंह, जिला मंत्री/बाबा गंज महामंत्री अरूण द्विवेदी,जिला मंत्री/शिवगढ़ अध्यक्ष सुशील द्विवेदी, क्रीड़ा भारती के जिलाध्यक्ष ध्रुव शर्मा,ब्लॉक अध्यक्ष गण-सुरेन्द्र पाण्डेय,रामेन्द्र सिंह, देवेन्द्र पति तिवारी,डा.कामेश्वर मणि त्रिपाठी, रमेश सिंह,अखिलेश सिंह, जीतेन्द्र सिंह, विनोद शर्मा,भागवत प्रसाद, महामंत्री गण-धर्मेन्द्र सिंह, राकेश वर्मा,  मनोज मिश्र, बिहार, राजीव कौशल, मनोज मिश्र,कुण्डा,लालजी यादव विद्याशंकर,बालचन्द्र,अनीस हैदर रिजवी, प्राचार्य कृपाशंकर पाण्डेय,इन्द्र देव सिंह, मीना भारती, कुसुम कुमारी, अनुराधा उपाध्याय,मंजू चौरसिया,जय प्रकाश सिंह आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:43:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का बाजारीकरण और छात्रों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180637/commercialization-of-education-and-the-future-of-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में भेज रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यही उनके भविष्य का एकमात्र रास्ता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार आज भारत में लगभग 27 से 33 प्रतिशत छात्र किसी न किसी प्रकार की निजी शिक्षा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह संख्या और अधिक है। दिल्ली जैसे शहरों में लगभग 39 प्रतिशत छात्र इन संस्थानों से जुड़े हुए पाए गए हैं। यह आंकड़ा केवल शिक्षा की स्थिति नहीं बताता बल्कि उस मानसिक दबाव को भी दिखाता है जिसमें समाज जी रहा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों पर भरोसा कम हुआ है और इन व्यापारिक केंद्रों को सफलता का संक्षिप्त मार्ग मान लिया गया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस उद्योग का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा विपणन पर टिका हुआ है। आज आभासी माध्यमों से छात्रों को जोड़ने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। एक प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 62 प्रतिशत प्रवेश अब अंतर्जाल आधारित प्रचार के माध्यम से हो रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि शिक्षा अब विज्ञापन और पहचान निर्माण के उसी प्रतिरूप पर चल रही है जिस पर कोई बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलता है। फर्क केवल इतना है कि यहां उत्पाद कोई वस्तु नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इन संस्थानों की सबसे बड़ी चाल उनका चयन प्रदर्शन होता है। हजारों और लाखों छात्रों की भीड़ में यदि 5 या 10 छात्रों का चयन हो जाए तो वही चेहरे हर विज्ञापन पट्ट पर दिखाई देने लगते हैं। ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि हर छात्र को लगे कि अगला चेहरा उसी का होगा। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि बाकी हजारों छात्रों का क्या हुआ। वे छात्र जो वर्षों तक शुल्क भरते रहे, जो किराये के कमरों में रहकर तैयारी करते रहे, जिनके परिवार कर्ज में डूब गए, उनका संघर्ष किसी विज्ञापन में जगह नहीं पाता।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यहां सबसे बड़ा खेल संख्या का है। कुछ संस्थान कम शुल्क रखकर गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की भारी भीड़ जुटाते हैं। 1000 या 2000 रुपये का शुल्क सुनकर छात्रों को लगता है कि उन्हें बहुत बड़ा अवसर मिल रहा है। लेकिन जब ऐसे लाखों छात्र जुड़ते हैं तो वही छोटी रकम करोड़ों का कारोबार बना देती है। कम शुल्क का मतलब सेवा भावना नहीं होता। कई बार यह भीड़ इकट्ठा करने की रणनीति होती है। जितनी बड़ी भीड़, उतना बड़ा मुनाफा और उतनी ही बड़ी सफलता की कहानी।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि छात्र मेहनत अपनी करते हैं लेकिन श्रेय पूरा संस्थान ले जाता है। यदि कोई छात्र सफल हो जाए तो संस्था कहती है कि यह उसकी शिक्षा का परिणाम है। लेकिन यदि लाखों छात्र असफल हो जाएं तो उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। असफल छात्र को कहा जाता है कि उसने पर्याप्त मेहनत नहीं की। इस तरह सफलता संस्थान की और असफलता छात्र की बना दी जाती है। आज इस उद्योग ने छात्रों की मानसिकता भी बदल दी है। पहले शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करना होता था। अब शिक्षा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180637/commercialization-of-education-and-the-future-of-students</link>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बौद्धिक,आर्थिक प्रगति को छिन्न-भिन्न करती रूढ़िवादिता और अंधविश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">धार्मिक रूढ़िवादिता,कट्टरपंथी धर्मांधता हमारी प्रगति के बड़े बाधको में से एक है। यह हमारी राहों के कंटक और रोड़े साबित हुए हैं।  उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पाना होगा। बुनियादी शिक्षा के प्रचार प्रसार से इसके अवरोधों को जनमानस के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए ।जो विषय वस्तु आजाद विचारों मान्यताओं को बर्दाश्त नहीं करती उन्हें समाप्त हो जाना चाहिए, ऐसी अन्य और मानवीय कमजोरियां हैं, जिन पर हमें विजय प्राप्त करनी है। इस कार्य के लिए सभी समुदायों के क्रांतिकारी उत्साही नौजवानों की आवश्यकता है। यह बात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180139/conservatism-and-superstition-disrupting-intellectual-and-economic-progress"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/410.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">धार्मिक रूढ़िवादिता,कट्टरपंथी धर्मांधता हमारी प्रगति के बड़े बाधको में से एक है। यह हमारी राहों के कंटक और रोड़े साबित हुए हैं।  उनसे हमें हर हाल में छुटकारा पाना होगा। बुनियादी शिक्षा के प्रचार प्रसार से इसके अवरोधों को जनमानस के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए ।जो विषय वस्तु आजाद विचारों मान्यताओं को बर्दाश्त नहीं करती उन्हें समाप्त हो जाना चाहिए, ऐसी अन्य और मानवीय कमजोरियां हैं, जिन पर हमें विजय प्राप्त करनी है। इस कार्य के लिए सभी समुदायों के क्रांतिकारी उत्साही नौजवानों की आवश्यकता है। यह बात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह ने अपने संगठन नौजवान भारत सभा के लाहौर में प्रकाशित घोषणा पत्र में लिखी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">शहीद भगत सिंह ने अपने जीवन का बलिदान कर भारत को आजादी दिलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी, पर आजादी के बाद भी भारत का जनमानस उन्हीं अंधविश्वास धर्मांधता तथा रूढ़िवाद पर फंसा हुआ है।और अभी भी इस युग में अंधविश्वास का बोलबाला दिखाई देता है। बिल्ली रास्ता काट दे तो यह समझना कि राह में दुर्घटना होने की संभावना हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">घर से निकलते समय कोई छींक दे तो यह समझना कि होने वाला काम बिगड़ जाएगा,और घर में कौवे के बोलने से यह अर्थ निकाला जाए कि घर में मेहमान आने वाले हैं। छोटी चिड़िया यदि मिट्टी की धूल से खेल रही हो तो यह समझा जाए की घनघोर बारिश होने वाली है, आदि इत्यादि ऐसी कई धारणाएं हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक तथा सामाजिक प्रमाण, तर्क या आधार मौजूद नहीं है। फिर भी बड़ी संख्या में लोग इन बातों पर विश्वास करके अपनी नियति तय करने में जुट जाते हैं, अपने विवेक का प्रयोग किए बिना ही इन बातों पर विश्वास कर लेना ही अंधविश्वास माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोग तेरा के अंक को अशुभ मानते हैं, तो कई देश किस अंग को शुभ भी मानते हैं। मृत्यु के बाद भी अनेक तरह के अंधविश्वास जी एवं आडंबर संयुक्त कर्मकांड किए जाते हैं। एवं इन कर्मकांड को नहीं किए जाने पर मनुष्य की आत्मा भूत बनकर इर्द गिर्द मंडराती है। और इस तरह के भूत मनुष्य जाति को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं, ऐसी मान्यताएं अंधविश्वास के साक्षात प्रमाण हैं। अधिकतर भारतीय ग्रामीण अभी भी यह मानते हैं कि पृथ्वी शेषनाग पर टिकी हुई है और भूकंप आने पर वह इस बात का दावा करते हैं कि शेषनाग नाराजगी कारण पृथ्वी हिलने लगी है,और भी पूजा पाठ करने में लग जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र ग्रहण तथा सूर्य ग्रहण के समय भी ग्रामीण क्षेत्र में लोगों द्वारा ऐसे ही कयास लगाए जाते हैं, और फिर ग्रहों की पूजा की जाती है। पूजा करना बहुत अच्छी बात है,ईश्वर में आस्था होनी चाहिए यह एक तरह की एकाग्रता तथा अदृश्य शक्ति के प्रति आप का समर्पण भाव दिखाती है। ईश्वर से लगाओ तथा ईश्वरीय शक्ति के आगे समर्पण एक स्तुत्य के कार्य है। पर इसके पीछे अंधविश्वास को पुष्पित पल्लवित करना खतरनाक भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रह के चक्कर को दूर करने के लिए किसी विशेष जाति अथवा पत्थर की अंगूठी पहनना विशेष मंत्र वाला ताबीज पहनना जादू टोना तथा टोटका करवाना आदि अंधविश्वास के बड़े उदाहरण हैं ।</p>
<p style="text-align:justify;">और इन सब अंधविश्वास के चक्कर में अनेक लोग धोखाधड़ी तथा शोषण के शिकार होते देखे गए हैं। अंधविश्वास धर्मांधता एक सामाजिक बुराई की तरह दिखाई देती है, जो निश्चित तौर पर देश के विकास के लिए बड़ी बाधा बन जाती है। संत कबीर दास ने बड़ी बेबाकी से इस अंधविश्वास पर अपनी कविता के माध्यम से गहरा कटाक्ष किया है, अरिहरन की चोरी करै, करे सुई का दान, ऊंचा चढ़ी के देखता,केतिक दूर विमान।</p>
<p style="text-align:justify;">दोहे का अर्थ है, मानव कुमार्ग के पथ पर चलकर कमाए गए अनैतिक धन का बहुत छोटा सा भाग दान कर आकाश की ओर देखता है कि उसको स्वर्ग ले जाने वाला विमान कितनी दूर है। अज्ञानी मानव का यह सोचना एक बड़े अंधविश्वास को दर्शाता है। किसी भी गरीब स्त्री की जमीन जायजाद को हड़पने के लिए जमीदारों या मुखिया द्वारा गांव में उसे डायन घोषित कर देना या ईश्वर को खुश करने के लिए मनुष्य की नरबलि दे देना या पशुओं की बलि देना एक बड़ा अंधविश्वास माना जाता है। इन सब अंधविश्वास से समाज में विसंगति फैलती है एवं जो साक्षरता तथा मानवता के लिए बड़े खतरे और विकास के लिए अवरोध पैदा करने के तथ्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर इनको सजा देकर समाज में अंधविश्वास के खिलाफ सरकार को एक स्वस्थ संदेश देने की आवश्यकता है। समाचार पत्र, टीवी चैनल, इंटरनेट इन सब में राशिफल, वास्तु शास्त्र हाथ में पहनने वाले पत्थरो के बारे में जोर शोर से प्रचार प्रसार किया जाता है, जबकि इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इनके चलते बड़े-बड़े जालसाज तथा ठग लोगों से पैसा तथा सोने चांदी की ठगी करने से नहीं चूकते। यह अंधविश्वास यद्यपि सिर्फ भारत में ही नहीं है बल्कि ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया कनाडा अमेरिका तथा साउथ अफ्रीका में भी इसी बड़े पैमाने पर व्याप्त है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि अशिक्षित मनुष्य अंधविश्वासों को मानता है तो यह बात समझ में आती है कि वह वास्तविकता से अशिक्षा के कारण अनभिज्ञ है, एवं इनके परिणामों के बारे में नहीं जानता है। किंतु यह विडंबना तथा अफसोस की बात है कि इस वैज्ञानिक युग में उच्च शिक्षित लोग अनेक प्रकार के अंधविश्वासों से घिरे हुए हैं। शिक्षा अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर विवेकपूर्ण सोचने की शक्ति प्रदान करती है, इसके बाद ही मनुष्य विज्ञान तथा तर्क के आधार पर इसको परख कर किसी बात को मान्यता देता है। अतः अंधविश्वास धर्मांधता के खिलाफ शिक्षा जगत तथा शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में इस विषय को शामिल कर अशिक्षित तथा शिक्षित दोनों को अंधविश्वास के प्रति सचेत कर इसके दुष्परिणामों के बारे में अच्छे से समझा देना चाहिए तभी अंधविश्वास समाज से दूर हो पाएगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:33:30 +0530</pubDate>
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