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                <title>कृषि समाचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>कृषि समाचार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जनपद प्रयागराज के समस्त कृषकों से फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील।</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्व कर्मी आधार के अनुसार खतौनी में नहीं कर रहे संशोधन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182658/appeal-to-all-the-farmers-of-prayagraj-district-to-get"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-kisan-yojana-(19).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उप कृषि निदेशक जनपद प्रयागराज के समस्त कृषक भाइयों एवं बहनों को सूचित किया है कि भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों के लिए फार्मर रजिस्ट्री तैयार किए जाने का अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है जिसमें जनपद के 569000 कृषकों की फार्मर आई०डी० बनी है एवं लगभग एक लाख किसान भाइयों जिनकी फार्मर आई०डी० नहीं बनी है उन सभी पात्र कृषकों से अपील है कि वे शीघ्र अपनी फार्मर रजिस्ट्री बनवाकर यूनिक फार्मर आईडी प्राप्त करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फार्मर रजिस्ट्री किसानों की एक प्रमाणित डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से कृषक की आधार, भूमि अभिलेख एवं अन्य आवश्यक विवरण एकीकृत रूप से उपलब्ध रहते हैं। इससे वास्तविक पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ् प्राप्त करने में सुविधा होगी, जिसमें वर्तमान में महत्वपूर्ण खाद की उपलब्धता हेतु। कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं में प्राथमिकता। बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र एवं अन्य कृषि आदानों पर उपलब्ध अनुदान का सुगम लाभ। किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा तथा अन्य कृषि सेवाओं में सुविधा। शासन द्वारा भविष्य में संचालित की जाने वाली योजनाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ। कृषक की एकल एवं प्रमाणित डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) उपलब्ध होना। पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित होने से योजनाओं का लाभ सीधे वास्तविक किसानों तक पहुँचना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। विभिन्न कृषि योजनाओं एवं सेवाओं को क्रमिक रूप से फार्मर आईडी से जोड़ा जा रहा है, जिससे योजनाओं का लाभ केवल सत्यापित एवं पात्र किसानों को ही प्राप्त हो सके। अतः प्रत्येक कृषक भाई के लिए समय रहते फार्मर रजिस्ट्री कराना अत्यंत आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">*फार्मर रजिस्ट्री कराने हेतु आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, भूमि अभिलेख (खतौनी/गाटा विवरण) एवं आवश्यकतानुसार अन्य संबंधित अभिलेख आवश्यक है।*</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>कृषक अपनी फार्मर रजिस्ट्री   </strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने निकटतम जन सेवा केन्द्र, ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित विशेष शिविर, कृषि विभाग द्वारा आयोजित पंजीकरण शिविर, अधिकृत ऑनलाइन पोर्टल माध्यमों से करा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिन कृषकों की फार्मर आईडी में समस्त गाटों को दर्ज नहीं कराया गया है उनको शीघ्र अतिशीघ्र पोर्टल पर <a href="http://upfr.agristack.gov.in/">upfr.agristack.gov.in</a> पर जाकर स्वयं या जनसुविधा केन्द्र के माध्यम से जुडवा लें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान द्वारा फॉर्मर रजिस्ट्री कराने के बाद भी पेंडिंग रिपोर्ट दिखाई देता है जब की महीनों पहले किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।इसमें सबसे बड़ा रोड़ा तहसील का राजस्व विभाग बन गया हैजिसमे लेखपाल की भूमिका सर्वाधिक संदिग्ध और काम चोरी की मिली है।इसमें सबसे अधिक फूलपुर तहसील में रिपोर्ट पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसानों का आरोप है कि 99% खतौनी मैं सरनेम नहीं अकित है  नाम ही दर्जहै। जबकि आधार कार्ड  में नाम के आगे उसकी जाति जैसे त्रिपाठी मिश्राद दुबे  यादव भारतीय विश्व कर्मा आदि दर्ज हैं ।इसे शुद्ध करने की जिम्मेदारी लेखपाल की निर्धारित की गई है लेकिन वह इसकी आड़ में किसानों से भयादोहन और सुविधा शुल्क  की मांग कर रहा है। कहता है कि इसमें पैसा लगेगा और मुकदमा  करना पड़ेगा।जिसके  कारण से रजिस्ट्रेशन  होने के बावजूद रजिस्ट्रेशन पेंडिंग में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्योंकि प्रमाणित करने के लिए लेखपालों के पास लटका है लेकिन इस पर कोई राजस्व अधिकारी ध्यान नहीं देते जबकि कृषि विभाग बार-बार रजिस्ट्रेशन के लिए अपील करता है लेकिन  सरकारी सिस्टम को ठीक करने के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं दियाजाताहै।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:29:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दिलाया विकसित कृषि का संकल्प।।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181676/emphasis-on-increasing-the-income-of-farmers-through-natural-farming"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0182-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत सभागार, प्रयागराज में शुक्रवार को "प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उपस्थित रहे। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर किसानों की आय में भी वृद्धि करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने तथा कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यशाला में कृषि विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं, जैविक खाद के उपयोग, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को प्राकृतिक खेती से मिलने वाले लाभों एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं के बारे में भी जागरूक किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल, विधायकगण, विधान परिषद सदस्य (एमएलसी), भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष, महापौर सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कृषि क्षेत्र को अधिक उन्नत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:14:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने सहकारी समिति बसंतपुर का किया निरीक्षण, दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div>
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि0, बसन्तपुर विकास खण्ड बांसी का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा खाद वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि केन्द्र पर 500 बोरी उर्वरक का आवंटन प्राप्त हुआ है। फार्मर रजिस्ट्री के अनुसार खाद का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि खाद के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग नही होना चाहिए। टैगिंग शत-प्रतिशत बन्द है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ नियमानुसार खाद</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181049/district-magistrate-inspected-the-cooperative-society-basantpur-and-gave-instructions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781187652076.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि0, बसन्तपुर विकास खण्ड बांसी का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा खाद वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि केन्द्र पर 500 बोरी उर्वरक का आवंटन प्राप्त हुआ है। फार्मर रजिस्ट्री के अनुसार खाद का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि खाद के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग नही होना चाहिए। टैगिंग शत-प्रतिशत बन्द है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ नियमानुसार खाद वितरण कराने का निर्देश दिया।</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहर में पानी न छोड़ें जाने से किसान परेशान-जजलाल राय </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181006/farmers-upset-due-to-not-releasing-water-in-the-canal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0052.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनकी चिंता और बढ़ गई है, जिससे परेशान होकर किसान कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत पत्र दे चुके है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी न मिलने से</div><div style="text-align:justify;">धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। </div><div style="text-align:justify;">उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ने की मांग की पुरजोर मांग की है, ताकि धान की नर्सरी का कार्य समय पर पूरा किया जा सके।</div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि एक तरफ विकट गर्मी पड़ रही है जनपद में कुआं, हैंडपंप सूखे पड़े हुए हैं और गांव के तालाब भी भरने के बजाय खाली पड़े हैं </div><div style="text-align:justify;">नहर में पानी न आने के कारण किसान विवस बैठे हैं और पानी आने का राह देख रहे है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान की नाराजगी।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बेतिया। </strong>केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव, सचिव इंद्र देव कुशवाहा और गन्ना उत्पादक किसान महासभा के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />नेताओं के अनुसार नया एफआरपी 365 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे बिहार में गन्ना मूल्य करीब 400रूपए प्रति क्विंटल होगा, जबकि वर्तमान दर 390रूपए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178442/farmers-displeasure-over-the-increase-of-just-rs-10-per"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/b12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेतिया। </strong>केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव, सचिव इंद्र देव कुशवाहा और गन्ना उत्पादक किसान महासभा के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />नेताओं के अनुसार नया एफआरपी 365 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे बिहार में गन्ना मूल्य करीब 400रूपए प्रति क्विंटल होगा, जबकि वर्तमान दर 390रूपए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य इससे अधिक है, जिससे बिहार के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।<br />किसानों ने गन्ना मूल्य 600 रूपए प्रति क्विंटल करने की मांग दोहराते हुए चेतावनी दी कि 10 मई को स्थापना दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालयों में मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऋतुराज बसंत की बासंती सौंदर्य की निखर रही है प्राकृतिक सुषमा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:-</strong>    पिछले दिनों प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हल्की वर्षा से इन दिनों मौसम सुहाना होता दिख रहा है। हालांकि पाकुड़िया के आसमान पर यदा-कदा हल्के घने सफेद बादलों और धूप में 'आंख मिचौली' भी होती दिख रही है। विगत दिनों हुई हल्की वर्षा से भारी क्षति होने की सूचना नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं प्रखण्ड के किसानों ने पूछने पर बताया कि इससे फसलों को नुकसान नहीं हुआ बल्कि आम फसल को लाभ होता दिख रहा है।ज्ञात हो इस साल भी पिछले वर्ष की तरह आम की फसल अच्छी होने की संभावना है यदि मौसम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173488/natural-sushma-is-shining-with-spring-beauty-of-rituraj-basant"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/news-15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड, झारखण्ड:-</strong>  पिछले दिनों प्रखण्ड मुख्यालय पाकुड़िया सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हल्की वर्षा से इन दिनों मौसम सुहाना होता दिख रहा है। हालांकि पाकुड़िया के आसमान पर यदा-कदा हल्के घने सफेद बादलों और धूप में 'आंख मिचौली' भी होती दिख रही है। विगत दिनों हुई हल्की वर्षा से भारी क्षति होने की सूचना नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं प्रखण्ड के किसानों ने पूछने पर बताया कि इससे फसलों को नुकसान नहीं हुआ बल्कि आम फसल को लाभ होता दिख रहा है।ज्ञात हो इस साल भी पिछले वर्ष की तरह आम की फसल अच्छी होने की संभावना है यदि मौसम अनुकूल रहे तब। कृषकों ने कहा कि जिस प्रकार घने सफेद बादल छाए रहे तथा बिजली भी कड़कती रही, उससे लगा कि वर्षा अधिक होगी तो खेतों में पड़े सरसों और पक रही गेहूं फसल को क्षति होती और महुआ फसल भी प्रभावित होता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हल्की बारिश से वृक्षों की डालियों में नई पत्तियां निकलने से फिलहाल मौसम सुहाना होता दिख रहा है। समाचार संप्रेषण करने तक पाकुड़िया के आकाश पर घने सफेद बादल छाए रहे जिससे वर्षा होने की संभावना देखी गई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 18:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिल्कीपुर: बारिश से खेत में गिरी धान की फसल, किसान हुए चिंतित कि बेकार न हो जाए पूरी मेहनत</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मिल्कीपुर-अयोध्या।</strong></p>
<p>मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में शुक्रवार की देर रात तेज हवा के साथ जोरदार बारिश हुई। बारिश ने गर्मी से ताे लोगों को राहत दिलाई, लेकिन किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।</p>
<p>तेज बारिश के दौरान हवाएं चलने से खेतों में खड़ी धान की फसल बिछ गई है। इससे किसानाें को उत्पादन प्रभावित होने की आशंका सता रही है। वहीं अगर आगे भी बारिश होती है तो दाना बदरंग भी हो जाएगा। इससे किसानों को धान की कीमत भी बेहतर नहीं मिल सकेगी।</p>
<p><br />तेज हवा के साथ हुई मूसलाधार बारिश से अगेती धान की खेती करने वाले किसानों की धान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135006/milkipur-paddy-crop-fell-in-the-field-due-to-rain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/b2f18b2b07c44ab68eda51a4a6b35e861665226550621490_original.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मिल्कीपुर-अयोध्या।</strong></p>
<p>मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में शुक्रवार की देर रात तेज हवा के साथ जोरदार बारिश हुई। बारिश ने गर्मी से ताे लोगों को राहत दिलाई, लेकिन किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।</p>
<p>तेज बारिश के दौरान हवाएं चलने से खेतों में खड़ी धान की फसल बिछ गई है। इससे किसानाें को उत्पादन प्रभावित होने की आशंका सता रही है। वहीं अगर आगे भी बारिश होती है तो दाना बदरंग भी हो जाएगा। इससे किसानों को धान की कीमत भी बेहतर नहीं मिल सकेगी।</p>
<p><br />तेज हवा के साथ हुई मूसलाधार बारिश से अगेती धान की खेती करने वाले किसानों की धान की फैसले गिर गई है और खेतों में पानी भर गए हैं। </p>
<p><br />किसान रामदेव, राजकुमार, राजाराम मौर्या, दीपक कुमार मौर्य, राम सजीवन, शिव प्रसाद, राधेश्याम गुप्ता रामदीन, राम केवल,शिव राम, प्रदीप कुमार, श्याम  पाण्डेय, जगत बहादुर सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि खेतों में खड़ी धान की फसल में बाली भी आ चुकी है। इसके चलते अब हरी फसल में वजन अधिक हो गया है। </p>
<p><br />शुक्रवार रात को तेज हवा के साथ जोरदार बारिश हुई। इसके चलते पहले से ही बाली से लदी धान की फसल खेतों में ही बिछ गई है। किसानों ने कहा कि धान में जब बालियां आ रही थी तब भी मूसलाधार बारिश हुई थी। तभी काफी नुकसान हुआ अब धान की फैसले खेत में तैयार हो गई ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह में धान की कटाई करनी थी।</p>
<p><br /> लेकिन उससे पहले तेज हवा के साथ हुई बारिश से धान की तैयार फसलें खेतों में बिछ गई है। पानी निकासी की व्यवस्था की जा रही है लेकिन खेतों में चारों ओर पानी ही भरा है यदि पानी समय से नहीं निकला जाएगा तो बालिया अंकुरित भी हो जाने का खतरा बढ़ गया है l</p>
<p>अभी मौसम भी साफ नहीं दिखाई पड़ रहा है। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक सीताराम मिश्रा ने बताया कि आगामी 24 घंटे में पूर्वी उत्तर प्रदेश में हल्के मध्य बादल छाए रहने के साथ-साथ 53.6 मि0मी0 वर्षा होने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Sep 2023 09:23:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मौसम की बेरुखी से किसान परेशान, कम समय के लिए बिजली की उपलब्धता भी बनी किसानों की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>मिल्कीपुर-अयोध्या</strong>।</div>
<div>  </div>
<div>मौसम की बेरुखी से (अन्नदाता) किसान परेशान है। अगस्त माह से शुरुआती सप्ताह में कुछ बारिश हो जाने के कारण किसानों की आशाओं को पंख लग गए थे। उन्हें फसल के अच्छी पैदावार की उम्मीद जग गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>लेकिन कुछ दिनों से बारिश न होने और बढ़ते लगातार तापमान के कारण ब फसल सूखने लगी है। धान के पौधों के पत्तियों के ऊपर नोक से पीले पड़ने लगी है। जिससे पौधों में खैरा रोग पनप रहा है।</div>
<div>  </div>
<div>  मिट्टी सूख जाने के कारण मोटी- मोटी दरारें पड़ गई सामान्य किसानों को लग रहा है कि इस बार अच्छी</div>
<div> </div>
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<div>खेतों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134389/due-to-the-indifference-of-lord-indra-the-farmers-are"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/982ee0e57b3ea25feec49815b7207db51661954031555455_original.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मिल्कीपुर-अयोध्या</strong>।</div>
<div> </div>
<div>मौसम की बेरुखी से (अन्नदाता) किसान परेशान है। अगस्त माह से शुरुआती सप्ताह में कुछ बारिश हो जाने के कारण किसानों की आशाओं को पंख लग गए थे। उन्हें फसल के अच्छी पैदावार की उम्मीद जग गई थी।</div>
<div> </div>
<div>लेकिन कुछ दिनों से बारिश न होने और बढ़ते लगातार तापमान के कारण ब फसल सूखने लगी है। धान के पौधों के पत्तियों के ऊपर नोक से पीले पड़ने लगी है। जिससे पौधों में खैरा रोग पनप रहा है।</div>
<div> </div>
<div> मिट्टी सूख जाने के कारण मोटी- मोटी दरारें पड़ गई सामान्य किसानों को लग रहा है कि इस बार अच्छी फसल की उम्मीद बहुत कम है क्योंकि उन्हें बिजली पर्याप्त मात्रा में मिल नहीं पा रही है और डीजल के दाम बहुत ज्यादा हैं। खरीफ के सीजन में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ने लगी है।</div>
<div> </div>
<div> मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र की किसान पिंटू सिंह, नरसिंह नारायण, शीतला प्रसाद, तुलसीराम, आदित्य प्रताप, मोहम्मद अयूब, अशोक कुमार, सुदामा मौर्या, बलराम, तिवारी, वेद प्रकाश, शिव कुमार राजित राम कहते हैं कि इस बार बारिश न होने से अच्छी फसल मिल पाना दूर की बात है।</div>
<div> </div>
<div>खेतों में पानी नहीं मिल पा रहा है बिजली की सप्लाई बहुत मुश्किल से 6 से 7 घंटे मिल पा रही है। दूसरी तरफ डीजल ₹90 को पार कर गया है जिससे सिंचाई कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा है खेतों में दरारें पड़ने लगी है धान के पौधे के ऊपर से पत्तियां पीली पड़ कर मुरझाने लगी है। जिसके चलते खैरा रोग खेतों में तेजी से फैल रहा है। जब पौधे ही स्वस्थ नहीं रहेंगे तो पैदावार कैसे अच्छी संभव है।</div>
<div> </div>
<div>कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ सीताराम मिश्रा के मुताबिक वर्ष 2020 में जून माह में सामान्य से ज्यादा 132 के सापेक्ष 230 मिली मीटर बरसात हुई थी, जबकि जुलाई माह में 292 के सापेक्ष 254 मिनी की पानी गिरा। 2021 में 132 के सापेक्ष 214 मिली मीटर बरसात हुई जुलाई माह में नॉर्मल से नीचे 39 प्रतिशत की बरसात हो पाई थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Sep 2023 19:25:25 +0530</pubDate>
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