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                <title>apda in himanchal pradesh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>apda in himanchal pradesh RSS Feed</description>
                
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                <title>मदुरीपथार फॉरेस्ट रिज़र्व में लगी भीषण आग</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> सिलापथार के मदुरीपाथर में स्थित सीसी आरक्षित वनांचल में आज दिन के करीब 11 बजे एक अग्निकांड के खबर आते हैं। स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग को अग्निकांड के ख़बर दी। देखते ही देखते आग ने बृहत  इलाके को तबाह कर दिया। असम और अरुणाचल प्रदेश से आई दो अग्निशमन विभाग के गाड़ी और लिकाबाली आर्मी की दो गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत कर आग बुझाने में कामयाब हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी दुष्ट चक्र ने ऐसा काम किया है, इस से पहले भी नदी गाई नदी किनारे में किसीने कुछ दिन पहले आग लगा दी</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171376/a-massive-fire-broke-out-in-maduripathar-forest-reserve"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1000499583.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> सिलापथार के मदुरीपाथर में स्थित सीसी आरक्षित वनांचल में आज दिन के करीब 11 बजे एक अग्निकांड के खबर आते हैं। स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग को अग्निकांड के ख़बर दी। देखते ही देखते आग ने बृहत  इलाके को तबाह कर दिया। असम और अरुणाचल प्रदेश से आई दो अग्निशमन विभाग के गाड़ी और लिकाबाली आर्मी की दो गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत कर आग बुझाने में कामयाब हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी दुष्ट चक्र ने ऐसा काम किया है, इस से पहले भी नदी गाई नदी किनारे में किसीने कुछ दिन पहले आग लगा दी थी। समय पर आग में काबू पाने पर जंगल किनारे बसे आवासीक घरों और आर्मी कैंप के फेंसिंग वाल को भारी क्षतिग्रस्त होता।।</div>]]>
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                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 20:36:11 +0530</pubDate>
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                <title>Federation of Central Universities Staff (FOCUS) के राष्ट्रीय सचिव पद पर देवाशीष चक्रवर्ती मनोनीत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>Federation of Central Universities Staff (FOCUS) (फोकस) के राष्ट्रीय सचिव पद पर देवाशीष चक्रवर्ती को मनोनीत किया गया है। वह वर्तमान में Assam University Non-Teaching Employees Association (AUNTIA) (आनटिया) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अब वे अखिल भारतीय स्तर पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए नेतृत्व प्रदान करेंगे। जानकारी के अनुसार, उन्हें सितंबर 2025 से सितंबर 2030 तक पाँच वर्षों के लिए फोकस का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित फोकस की राष्ट्रीय बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। देश</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171331/devashish-chakraborty-nominated-for-the-post-of-national-secretary-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001333490.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>Federation of Central Universities Staff (FOCUS) (फोकस) के राष्ट्रीय सचिव पद पर देवाशीष चक्रवर्ती को मनोनीत किया गया है। वह वर्तमान में Assam University Non-Teaching Employees Association (AUNTIA) (आनटिया) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अब वे अखिल भारतीय स्तर पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए नेतृत्व प्रदान करेंगे। जानकारी के अनुसार, उन्हें सितंबर 2025 से सितंबर 2030 तक पाँच वर्षों के लिए फोकस का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित फोकस की राष्ट्रीय बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आए केंद्रीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में लिया गया यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देवाशीष चक्रवर्ती लंबे समय से कर्मचारियों के न्यायसंगत अधिकारों, कार्यसंस्कृति के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी संगठनात्मक क्षमता और दूरदर्शी सोच के सम्मानस्वरूप उन्हें यह दायित्व दिया गया है, ऐसा उनके सहयोगियों का मत है। इस मनोनयन की खबर सामने आते ही असम विश्वविद्यालय परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कुलपति से लेकर विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों ने उन्हें बधाई दी। गत २४ फरवरी (मंगलवार) को आनटिया की ओर से विश्वविद्यालय में एक सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंथ की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में देवाशीष चक्रवर्ती के साथ-साथ फोकस के कार्यकारी सदस्य के रूप में मनोनीत होने पर आनटिया के सहायक कोषाध्यक्ष कानु धर को भी गर्मजोशी से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने आशा व्यक्त की कि देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण समस्याएं—जैसे पदोन्नति नीति, वेतन संरचना, रिक्त पदों की पूर्ति तथा कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे—के समाधान में देवाशीष निर्णायक भूमिका निभाएंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वक्ताओं ने यह भी कहा कि देवाशीष चक्रवर्ती और कानु धर को मिली यह जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि आनटिया और असम विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है। उनके नेतृत्व में फोकस और अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनेगा, ऐसी आशा सभी ने व्यक्त की।कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक सुप्रबीर दत्तराय, वित्त अधिकारी शुभदीप धर, पूर्व अध्यक्ष साग्निक चौधरी, रणेंद्र चक्रवर्ती, अनुप कुमार वर्मा, सुचरिता राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन किंकर पुरकायस्थ ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन रंजीत दास ने प्रस्तुत किया।</div>]]>
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                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 19:10:19 +0530</pubDate>
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                <title>सामाजिक माध्यम में टी एम पी के कि खिलाफ अफवाह फैलने वालो पर थाने में शिकायत दर्ज</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> कुछ दिनों से सामाजिक माध्यम में असम के द्वितीय बृह जनजातीय समुदाय टी एम पी के कि खिलाफ अफवाह फैलने वाले आठ लोगों के खिलाफ टी एम पी के सिलापथार जिला समिति ने थाने में शिकायत दर्ज कराया। जिसमें 114 नंबर जोनाई विधानसभा चुनावी क्षेत्र के विधायक भुवन पेगू के  एक पुराने वीडियो के साथ में आसामिया पेपर कटिंग संलग्न कर सामाजिक माध्यम फेसबुक, इंस्ट्राग्राम में प्रचार करने वाले भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">टी एम पी के सिलापथार डिस्ट्रिक्ट कमिटी ने आज सिलापथार थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।टी एम पी के का कार्यकताओं ने मीडिया को दिए</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171184/complaint-filed-in-police-station-against-those-spreading-rumors-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1000498818.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> कुछ दिनों से सामाजिक माध्यम में असम के द्वितीय बृह जनजातीय समुदाय टी एम पी के कि खिलाफ अफवाह फैलने वाले आठ लोगों के खिलाफ टी एम पी के सिलापथार जिला समिति ने थाने में शिकायत दर्ज कराया। जिसमें 114 नंबर जोनाई विधानसभा चुनावी क्षेत्र के विधायक भुवन पेगू के  एक पुराने वीडियो के साथ में आसामिया पेपर कटिंग संलग्न कर सामाजिक माध्यम फेसबुक, इंस्ट्राग्राम में प्रचार करने वाले भी शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">टी एम पी के सिलापथार डिस्ट्रिक्ट कमिटी ने आज सिलापथार थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।टी एम पी के का कार्यकताओं ने मीडिया को दिए जानकारी में उल्लेख किया कि विधायक भुवन पेगू संघटन का पूर्व अध्यक्ष थे उनके मार्ग   दर्शन में हम चल रहे हैं। जनजातीय समुदाय के लिए एवं जोनाई सत्रों के जनप्रिय विधायक के रूप में परिचित पेगू के भाभमूर्ति को विनष्ट करने के लिया समाज में ऐसे कार्य करने वाले लोगों को 24 घंटे की भीतर प्रशाशन से गिरफ्तार करने की मांग की।</div>]]>
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                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 18:52:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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            <item>
                <title>असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोग पर पाँच दिवसीय शिविर संपन्न</title>
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                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि-</strong> असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग विषय पर पाँच दिवसीय 23वाँ शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण विभाग, थ्री-डी प्रिंटिंग प्रयोगशाला तथा उद्यम विकास केंद्र के सहयोग से आयोजित इस शिविर का आयोजन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिलचर द्वारा किया गया। कार्यक्रम को जेट एयरोस्पेस एविएशन रिसर्च सेंटर तथा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र आईएचएफसी का प्रायोजन प्राप्त था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">17 से 21 फरवरी तक आयोजित इस शिविर के उद्घाटन सत्र में कृषि अभियंत्रण विभाग की प्रमुख डॉ. अजीता तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि तीव्र गति से विकसित हो रही मानव रहित हवाई यान प्रौद्योगिकी</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171043/five-day-camp-on-drone-technology-and-applications-concluded-in-assam"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001329845.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि-</strong> असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग विषय पर पाँच दिवसीय 23वाँ शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय के कृषि अभियंत्रण विभाग, थ्री-डी प्रिंटिंग प्रयोगशाला तथा उद्यम विकास केंद्र के सहयोग से आयोजित इस शिविर का आयोजन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिलचर द्वारा किया गया। कार्यक्रम को जेट एयरोस्पेस एविएशन रिसर्च सेंटर तथा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र आईएचएफसी का प्रायोजन प्राप्त था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">17 से 21 फरवरी तक आयोजित इस शिविर के उद्घाटन सत्र में कृषि अभियंत्रण विभाग की प्रमुख डॉ. अजीता तिवारी ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि तीव्र गति से विकसित हो रही मानव रहित हवाई यान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तकनीकी दक्षता बढ़ाने और नवाचार की भावना विकसित करने के लिए यह पाँच दिवसीय बूटकैंप एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के दौरान मानव रहित हवाई यान प्रणाली, ड्रोन डिजाइन, संचालन, नियामक प्रावधानों तथा व्यावहारिक उपयोग पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशेष रूप से बीटेक और एमटेक विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ करना तथा उभरती ड्रोन तकनीक में नवाचार को प्रोत्साहित करना इसका मुख्य उद्देश्य रहा। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंथ उपस्थित थे। उन्होंने युवाओं में उद्यमशीलता की भावना और नवीन अनुसंधान दृष्टिकोण के विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं का कौशल विकास आत्मनिर्भर भारत की प्रमुख प्रेरक शक्ति है और विद्यार्थियों को अपनी सृजनात्मकता तथा दक्षता को सार्थक पहल में रूपांतरित करने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ड्रोन एवं संबद्ध प्रौद्योगिकी केंद्र की समन्वयक प्रोफेसर शाहीन आरा बेगम ने ड्रोन संबंधी सरकारी नीतियों और युवाओं के लिए इसके संभावनाशील क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर त्रिगुणा सेन प्रौद्योगिकी विद्यालय के अधिष्ठाता प्रोफेसर सुदीप्त राय, एनआईटी के डॉ. रणजय हाजरा, डॉ. मुरुगन आर तथा डॉ. बादल सोनी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का समन्वयन असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देवमाल्य घोष और डॉ. अजीता तिवारी ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहयोगी संस्थानों के विशेषज्ञों ने ड्रोन की संरचना, नियंत्रण प्रणाली, पेलोड एकीकरण तथा कृषि, निगरानी, मानचित्रण और आपदा प्रबंधन में इसके उपयोग पर तकनीकी सत्र संचालित किए। प्रतिभागियों को ड्रोन असेंबली, कैलिब्रेशन और उड़ान संचालन का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ। यह पहल उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास, शोध सहयोग और क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो भारत के विकसित हो रहे ड्रोन पारितंत्र को और सुदृढ़ करेगी।</div>]]>
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                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 19:58:04 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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            <item>
                <title>श्रीभूमि जिले के सीपाछड़ा में पारिवारिक जमीन विवाद में झूठे बदनाम करने के आरोपों को गाँववासियों और 4 नंबर वार्ड सदस्य ने किया खारिज</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि- </strong>श्रीभूमि जिले के सीपाछड़ा में पारिवारिक जमीन विवाद को लेकर लगाए गए आरोपों को गाँववासियों और 4 नंबर वार्ड सदस्य ने सिरे से खारिज कर दिया है। श्रीभूमि जिला के अंतर्गत दुल्लभछड़ा खंड विकास क्षेत्र की दुल्लभछड़ा ग्राम पंचायत के सीपाछड़ा गाँव के 4 नंबर वार्ड के ग्रामीणों और वार्ड सदस्य ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसी गाँव के निवासी रंजू तेली ने मीडिया के समक्ष शिकायत की थी कि पारिवारिक जमीन विवाद में दीप नारायण ग्वाला, मिलन तेली और टिंकू माला की संलिप्तता</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170151/villagers-and-ward-number-4-member-rejected-the-allegations-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001318653.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि- </strong>श्रीभूमि जिले के सीपाछड़ा में पारिवारिक जमीन विवाद को लेकर लगाए गए आरोपों को गाँववासियों और 4 नंबर वार्ड सदस्य ने सिरे से खारिज कर दिया है। श्रीभूमि जिला के अंतर्गत दुल्लभछड़ा खंड विकास क्षेत्र की दुल्लभछड़ा ग्राम पंचायत के सीपाछड़ा गाँव के 4 नंबर वार्ड के ग्रामीणों और वार्ड सदस्य ने संयुक्त रूप से प्रेस को संबोधित कर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसी गाँव के निवासी रंजू तेली ने मीडिया के समक्ष शिकायत की थी कि पारिवारिक जमीन विवाद में दीप नारायण ग्वाला, मिलन तेली और टिंकू माला की संलिप्तता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि ग्रामीणों और संबंधित वार्ड सदस्य का कहना है कि यह मामला पूर्णतः पारिवारिक है और उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप झूठे, बेबुनियाद तथा उद्देश्यपूर्ण हैं। उनका यह भी दावा है कि अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न के आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। गाँववासियों के अनुसार, राम शंकर तेली ने विवादित जमीन पर किसी प्रकार का कब्ज़ा नहीं किया है। जलजमाव की समस्या के कारण वे कई वर्ष पूर्व ऊपरी टीले पर रहने लगे थे, जिसे उनकी पैतृक संपत्ति बताया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में रंजू तेली उक्त जमीन पर कब्ज़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में 17 फरवरी (मंगलवार) को 4 नंबर वार्ड के कम्युनिटी हॉल में आयोजित बैठक के निर्णय की प्रति थाना में जमा कराई जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में उपस्थित वरिष्ठ ग्रामीणों ने बताया कि पूर्वजों के बीच भूमि बंटवारे के अनुसार राम शंकर तेली के पिता और रंजू तेली के पिता को अलग-अलग हिस्से प्राप्त हुए थे। जिस जमीन को लेकर वर्तमान में विवाद उत्पन्न हुआ है, वह राम शंकर तेली का पैतृक हिस्सा ही है। उनका यह भी कहना है कि इस भूमि पर उनका परिवार कई वर्षों से अधिकारपूर्वक काबिज है। वहीं ग्राम पंचायत सदस्य टिंकू माला ने मीडिया को बताया कि जमीन विवाद के मामले में उन्हें, दीप नारायण गोयाला और मिलन तेली को जानबूझकर झूठे मामले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला पूर्णतः पारिवारिक है और इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सदैव गाँव के लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। झूठे आरोपों के विरोध में उन्होंने मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कीमती सुपारी के पेड़ को काटना पूर्णतः अनुचित कार्य है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।बैठक में यह भी बताया गया कि रंजू तेली का विवाह ईचाबिले में हुआ था और पति की मृत्यु के बाद वे मायके में आकर रहने लगीं। ग्रामीणों के एक वर्ग का आरोप है कि इसके बाद ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ।राम शंकर तेली ने कहा कि उन्होंने कोई पेड़ नहीं काटा और उनके खिलाफ दर्ज मामला पूरी तरह निराधार है। उनका आरोप है कि उन्हें कई झूठे मामलों में फँसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कानूनी समाधान की मांग की है। घटना को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण मामले के न्यायसंगत समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 23:56:46 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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            <item>
                <title>असम के उत्तर करीमगंज में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> असम में आगामी 26वीं विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के संभावित प्रत्याशी अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर करीमगंज क्षेत्र में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है।मतदाताओं के एक वर्ग की राय है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार जमीनी स्तर से जुड़ी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय किसी महिला को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में समाजसेवी मुन्नी छेत्री का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें क्षेत्र में एक संभावित मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।</div></div></div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169999/political-activity-increased-regarding-womens-representation-in-north-karimganj-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001316571.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> असम में आगामी 26वीं विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के संभावित प्रत्याशी अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर करीमगंज क्षेत्र में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है।मतदाताओं के एक वर्ग की राय है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार जमीनी स्तर से जुड़ी और सामाजिक कार्यों में सक्रिय किसी महिला को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में समाजसेवी मुन्नी छेत्री का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें क्षेत्र में एक संभावित मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, मुन्नी छेत्री पिछले कई वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि जमीनी स्तर पर निरंतर कार्य और आम जनता से जुड़ाव के कारण उन्होंने क्षेत्र में व्यापक समर्थन हासिल किया है।जानकारी के मुताबिक, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से उत्तर करीमगंज सीट के लिए टिकट की मांग की है। हालांकि अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बेरोजगारी, बाढ़ नियंत्रण, आधारभूत संरचना और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे स्थानीय मुद्दे चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक दल क्षेत्र में सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता दे सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिलता, तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।बराक घाटी में भी महिला दावेदारों को लेकर चर्चा जारी है। बड़खला, काटिगढ़ा, हाइलाकांडी, पाथारकांडी और उत्तर करीमगंज समेत विभिन्न क्षेत्रों से महिला उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि इस बार महिला प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय स्तर पर यह धारणा व्यक्त की जा रही है कि अब तक उत्तर करीमगंज से किसी महिला को प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिला है। ऐसे में यदि किसी महिला उम्मीदवार को टिकट दिया जाता है, तो इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है।क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं—खराब सड़कें, जल निकासी की दिक्कतें और बेरोजगारी—अब भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। मतदाताओं का एक वर्ग मानता है कि इन समस्याओं को समझने और उठाने वाले जमीनी कार्यकर्ता को इस बार अवसर मिलना चाहिए। मुन्नी छेत्री का नाम इसी संदर्भ में चर्चा में है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उनके समर्थन में आवाजें उठ रही हैं, वहीं कुछ स्थानीय महिलाओं ने भी प्लेकार्ड के माध्यम से महिला प्रतिनिधि की मांग रखी है।अब सबकी निगाहें आगामी टिकट वितरण और उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार उत्तर करीमगंज को स्वतंत्रता के बाद पहली बार जमीनी स्तर से उभरी किसी महिला को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है या नहीं देखने वाली बात है।</div>
</div>
</div>]]>
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                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 19:55:07 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>श्रीभूमि जिले के सिपाछड़ा गाँव में न्याय के लिए भटक रही बेसहारा महिला</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>श्रीभूमि जिला के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दुल्लभछड़ा जीपी के सिपाछड़ा गाँव की 4 नंबर वार्ड निवासी बेसहारा महिला रंजू तेली ने न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए मीडिया के सामने अपनी व्यथा रखी। रंजू तेली अपने दिवंगत पति गैरी शंकर तेली पिछले लगभग 70 वर्षों से सिपाछड़ा गाँव में रह रही हैं। उनका आरोप है कि गाँव के ही कुछ लोगों—दीप नारायण गोयाला, टिंकू मालाह और निर्मल तेली—द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने गत 17 जनवरी को राताबाड़ी थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला</div></div></div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/169765/destitute-woman-wandering-for-justice-in-sipachhra-village-of-shribhoomi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/1001311607.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि : </strong>श्रीभूमि जिला के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दुल्लभछड़ा जीपी के सिपाछड़ा गाँव की 4 नंबर वार्ड निवासी बेसहारा महिला रंजू तेली ने न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए मीडिया के सामने अपनी व्यथा रखी। रंजू तेली अपने दिवंगत पति गैरी शंकर तेली पिछले लगभग 70 वर्षों से सिपाछड़ा गाँव में रह रही हैं। उनका आरोप है कि गाँव के ही कुछ लोगों—दीप नारायण गोयाला, टिंकू मालाह और निर्मल तेली—द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने गत 17 जनवरी को राताबाड़ी थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला ने बताया कि उन्होंने दुल्लभछड़ा ग्राम पंचायत की अध्यक्ष देव कुमार कुर्मी से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रंजू तेली के अनुसार, गत 12 फरवरी को विरोधियों के उकसावे पर रमाशंकर तेली के परिवार के सदस्यों ने उनके घर के एक हिस्से से लगभग 150 कीमती सुपारी और अन्य पेड़ों को धारदार हथियारों से काटकर अपने घर ले गए। हथियारों के भय के कारण वह उन्हें रोक नहीं सकीं। इसके बाद उन्होंने पुनः राताबाड़ी थाने में एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि उनका आरोप है कि अब तक पुलिस प्रशासन या ग्राम पंचायत की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिला ने बताया कि गत 20 अप्रैल 2021 को भी उक्त भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय पुलिस हस्तक्षेप के कारण आरोपियों को पीछे हटना पड़ा था। उनके पास उस एफआईआर की प्रति भी मौजूद है। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया में बुजुर्ग महिला ने बताया कि रंजू तेली का परिवार लंबे समय से उस भूमि पर रह रहा है और उसका उपयोग करता आ रहा है। वहीं, ग्राम पंचायत अध्यक्ष देव कुमार कुर्मी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने दोनों पक्षों को आपसी समझौते से विवाद सुलझाने की सलाह दी थी, लेकिन संबंधित पक्षों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। इस विषय में पीड़ित महिला ने न्याय के लिए जिला पुलिस अधीक्षक (SP) का ध्यान आकर्षित किया, ताकि जल्द से जल्द न्याय मिल सके।</div>
</div>
</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/169765/destitute-woman-wandering-for-justice-in-sipachhra-village-of-shribhoomi</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 21:26:28 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारत में जलवायु परिवर्तन का भयंकर प्रभाव: तूफानी बाढ़ प्रेरित आपदा </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>  </p>
<p>आज जलवायु बहुत तेजी से बदल रही है और दुनिया के लिए वैश्विक खतरा पैदा कर रही है। वहाँ बहुत सारे कारण इस समस्या के पीछे हैं, जिसका एक प्रमुख कारण वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन है। इस वैश्विक खतरे के और कई कारण हैं, उनमें से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन (जीएचजी) भी एक कारण है। इसके अलावा वनों की कटाई, भूमि उपयोग परिवर्तन, सल्फेट एयरोसोल और ब्लैक कार्बन, ओजोन परत की कमी और बदलती जलवायु का कारण अन्य प्रमुख कारण हैं। हम जानते हैं कि कार्बन उत्सर्जन के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है और बहुत सी आपदाएँ भी नियमित</p>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134305/severe-impact-of-climate-change-in-india-storm-flood-induced"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/भारत-में-जलवायु-परिवर्तन-का-भयंकर-प्रभाव-तूफानी-बाढ़-प्रेरित-आपदा-.jpeg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>आज जलवायु बहुत तेजी से बदल रही है और दुनिया के लिए वैश्विक खतरा पैदा कर रही है। वहाँ बहुत सारे कारण इस समस्या के पीछे हैं, जिसका एक प्रमुख कारण वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन है। इस वैश्विक खतरे के और कई कारण हैं, उनमें से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन (जीएचजी) भी एक कारण है। इसके अलावा वनों की कटाई, भूमि उपयोग परिवर्तन, सल्फेट एयरोसोल और ब्लैक कार्बन, ओजोन परत की कमी और बदलती जलवायु का कारण अन्य प्रमुख कारण हैं। हम जानते हैं कि कार्बन उत्सर्जन के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है और बहुत सी आपदाएँ भी नियमित रूप से घटित होती रहती हैं। दिन-ब-दिन गरमी बढ़ने का माहौल बन रहा है तथा इस अप्राकृतिक और अचानक तापमान वृद्धि के कारण ही ग्लेशियर पिघल रहे हैं, और ऐसे में क्षेत्रीय स्थानों में अचानक गर्मी बढने तूफ़ान आ जाते हैं और इस परिवर्तन  से  अचानक बाढ़ आ जाती है। </p>
<p>ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है। इससे दुनिया भर में अनाज की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है | जलवायु परिवर्तन से भूमि और साथ ही समुद्र का तापमान जैसे बढ़ता है, वैसे ही वर्षा की मात्रा और पैटर्न को बदल देता है। यह लेख में विस्तृत रूप से जलवायु परिवर्तन की वर्तमान स्थिति और इसके मानव जीवन पर पड़ने वाले भयंकर प्रभावों के कारणों को प्रस्तुत करता है और जलवायु परिवर्तन की शमन कार्रवाई के विषय में कैसे इसे नियंत्रित किया जाए पर भी चर्चा की गई है।</p>
<p><strong>1.0 ग्लेशियर और बर्फ का तेजी से पिघलना</strong></p>
<p>विगत तीन –चार दसको से ग्लेशियर और बर्फ का पिघलना सामान्य परिवर्तनों से कहीं अधिक तीव्र गति से हो रहा है। यह परिवर्तन है सभी बर्फीले ध्रुवों और बर्फ से ढके क्षेत्रों में हो रहा है उदाहरणार्थ: अंटार्कटिका ध्रुव, आर्कटिक ध्रुव, ग्रीनलैंड, और दुनिया भर के अन्य हिमाच्छादित क्षेत्रों में सबसे बड़ा तीसरा वर्फ की स्थान "हिमालय" है । इसके तीजे से पिघलने के परिणामस्वरुप पहले से ही क्षेत्र काफी प्रभावित हैं और इससे भी अधिक भयंकररूप में प्रभावित होने की उम्मीद है। हालाँकि, वर्फ के तीजे से पिघलना ही नहीं हो रहा है और यह न ही केवल उन क्षेत्रों के लिए एक समस्या है जहां यह होता है, बल्कि पृथ्वी की जलवायु प्रणाली के ग्लेशियर, बर्फ और बर्फ की चट्टाने जो एक महत्वपूर्ण घटक हैं, में परिवर्तन हो रहा है | </p>
<p>वैश्विक स्तर तापमान में बढ़ोतरी के कारण दुनिया के सभी क्षेत्रों में वर्फ में पिघलन महसूस की जा रही है और जिससे न केवल समुद्र के स्तर में वृद्धि व समुद्रीजल के तापमान में वृद्धि और उसमें वाष्पीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कुछ नई घटनाओं के निर्माण भी तेजी से हो रहा है, जैसे लेखक के अनुसार, हरे वाष्प आकाश में स्थिर होना । इसके अलावा, जो आर्कटिक महासागर पर गर्मियों में बर्फ का आवरण नष्ट हो गया है, इससे सूर्य से ऊष्मा का अधिक अवशोषण हो रहा है। इससे आसपास का आर्कटिक तेजी से पिघल रहा है और पर्माफ्रॉस्ट से बहुत बड़ी मात्रा में वातावरण में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड व मीथेन के निकलने का खतरा है |</p>
<p>इस लेख में, हम विश्व का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं कि मेल्टिंग आइस के रूप में बर्फ के पिघलने से लेकर क्रायोस्फीयर की दुर्दशा जैसे क्षेत्रीय स्थलों से लेकर ग्लोबल वेक-अप कॉल तक । यह भी संक्षेप में प्रस्तुत किये जाने की सम्भावना है कि यह कितनी तेजी से  पिघल रहा है, और यह पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन को कैसे प्रभावित करेगा। समुद्र और जमीन पर बर्फ के रूप में जाने वाले हिस्से को क्रायोस्फीयर का हिस्सा मना जाता है। बर्फ और ग्लेशियर पृथ्वी के जलवायु प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक हैं और विशेष रूप से ग्लोबल वार्मिंग के प्रति संवेदनशील व प्रभावित होते हैं। फीडबैक प्रक्रियाओं के माध्यम से बर्फ और ग्लेशियर की कमी ग्लोबल वार्मिंग में तेजी लाने में अधिक योगदान प्रदान करती है। बर्फ और हिमपात से दुनिया भर में संस्कृतियों को नुकसान व लोगों की आजीविका पर प्रभाव पड़ेगा ।</p>
<p><strong>2.0 बर्फ और ग्लेशियर में हो रहे परिवर्तन से वैश्विक तापमान वितरण को अधिक प्रभावित </strong></p>
<p>बर्फ और ग्लेशियर अधिकांश सौर विकिरण को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर देते हैं, जबकि खुले समुद्र और नंगी जमीन अधिकांश सौर विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं । गर्मी के रूप में विकिरण. जब बर्फ और ग्लेशियर गायब हो जाते हैं, तो सामान्य रूप से कवर किए गए क्षेत्र भी गर्म होंगे, जो आगे बढ़ने में योगदान देंगे । हम यह भी जानते हैं कि बड़ी मात्रा में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) विश्व के पर्माफ्रॉस्ट क्षेत्रों में संग्रहीत हैं। कब जमी हुई ज़मीन का पिघलना, ये ग्रीनहाउस गैसें हैं वातावरण में छोड़ा गया, एक और आत्म-सुदृढ़ीकरण प्रभाव जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ा सकता है । समुद्र का पिघलना और भूमि की बर्फ समुद्र के तापमान और लवणता को प्रभावित करती है, जो विकास के प्रमुख और महासागरीय धाराओं की गति में परिवर्तन के महत्वपूर्ण कारक हैं। इसमें कोई भी परिवर्तन, वैश्विक तापमान पैटर्न व समुद्र की वर्तमान प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं ।</p>
<p>3.0 बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से होने वाले परिवर्तन से लोगों के घरों और आजीविका प्रभावित <br />दुनिया भर में समुद्र के स्तर में वृद्धि, भूमि पर बर्फ पिघलने के सबसे स्पष्ट परिणामों में से एक है। यहां तक कि बर्फ का मामूली पिघलना भी तटीय समुदायों, शहरों व राज्य आदि में रहने वाले लोगों और उनके बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर विध्वन्सक प्रभाव डालेगे।</p>
<p>उच्च पर्वतीय ग्लेशियरों के पिघलने से कृषि के लिए पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। घरेलू उपयोग की वस्तुओं, पनबिजली स्टेशन और उद्योग पर भी उच्च पर्वतीय ग्लेशियरों के पिघलने का भी कारण बन सकता है। मानव आबादी और उनकी गतिविधियाँ को विशेष रूप से ग्लेशियर झील से निकलने वाली बाढ़ के रूप में एक खतरनाक स्थितियाँ पैदा कर सकती हैं। </p>
<p>ध्रुवीय और पर्वतीय क्षेत्र में, पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता भी बर्फ और ग्लेशियर का आवरण कम होने से क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है, जंहा पर लोग प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं। इन क्षेत्रों को इन परिवर्तनों के अनुरूप ढलने की आवश्यकता होगी। बर्फ और ग्लेशियर गायब होने से, संसाधनों तक पहुंच आसान हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और प्रदूषण के मुद्दों के संबंध में चुनौतियां भी अधिक पैदा हो सकती हैं। आर्कटिक महासागर में, उदाहरण के लिए, आर्कटिक समुद्री बर्फ, समुद्री परिवहन और तेल और गैस संसाधनों तक पहुंच में मुख्य बाधा है।</p>
<p><strong>4.0 भारत में जलवायु प्रभाव</strong></p>
<p>एशियाई क्षेत्र विशेषकर भारत तीन (3) तरफ समुद्र से और चौथी तरफ से घिरा हुआ है । हिमालय की पहाड़ियों से आजीविका को भारी नुकसान हो सकता है, इसका उल्लेख पहले ही लिखित पुस्तक में किया जा चुका है। इस लेख के लेखक (संदर्भ ग्लोबल वार्मिंग - कारण, प्रभाव और उपचार, आईएसबीएन 978-953-51-0934-1, अप्रैल 2015 में इनटेक, रिजेका, क्रोएशिया द्वारा प्रकाशित पृष्ठ 39-40, अध्याय शीर्षक: आर्कटिक सागर के निरंतर सिकुड़न पर प्रभावों का अध्ययन ।<br />अब हम पश्चिम बंगाल से लेकर गुजरात तक अत्यधिक वर्षा का सामना कर रहे हैं, जिससे 300-500 किलोमीटर की दूरी प्रभावित हो रही है। तटीय क्षेत्र और हिमालय की बर्फ की चादरें ढह रही हैं, जिससे बादल फटने की संज्ञा दी जा रही हैं। प्रमुख का एक रिकॉर्ड 2013-14 के बाद से चक्रवाती प्रभाव नीचे सूचीबद्ध हैं:</p>
<p><br /><strong>4.1)केदारनाथ त्रासदी</strong></p>
<p><br />यह 16-17 जून 2013 की शाम को तबाह हो गया था। सुबह भूस्खलन के कारण और अचानक आई बाढ़ से उत्तराखंड में 5000 लोग अधिक मौतें हुईं।</p>
<p><strong>4.2) चक्रवाती तूफान फेलिन ओडिशा, 12 अक्टूबर 2013</strong></p>
<p><br />भीषण चक्रवाती तूफ़ान "फैलिन" वो 12 अक्टूबर 2013, को ओडिशा के तट से टकराया, बहुत तेज़ रफ़्तार लेकर आया। राज्य के तटीय जिले में, हवाओं और भारी वर्षा के कारण विशेष रूप से मकान, खड़ी फसलें, बिजली और में संचार अवसंरचना व्यापक क्षति हुई।</p>
<p><strong>4.3) चक्रवाती तूफान हुदहुद आंध्र प्रदेश, 12 अक्टूबर 2014</strong></p>
<p><br />11 अक्टूबर को, हुदहुद में तेजी से तीव्रता आई और उसपर एक नजर केंद्र द्वारा रखी गई। अगले घंटों में, तूफान न्यूनतम तीव्रता के साथ अपनी चरम तीव्रता पर पहुंच गया। 950 एमबार (28.05 इंच एचजी) का दबाव और तीन मिनट की औसत हवा की गति 185 किमी/घंटा (115 मील प्रति घंटे)।</p>
<p><strong>4.4) गुजरात में चक्रवाती तूफान नीलोफर, 31 अक्टूबर 2014</strong></p>
<p><br />26-28 के अंत में अरब सागर में तीसरा सबसे शक्तिशाली चक्रवात वां अक्टूबर 2014, पहुँचे<br />चरम अधिकतम निरंतर हवाएं 205 किमी/घंटा (125 मील प्रति घंटे) और 215 किमी/घंटा के बीच अनुमानित हैं (130 मील प्रति घंटे)।</p>
<p><strong>4.5) भीषण चक्रवाती तूफान चपला, केरल, महाराष्ट्र और गुजरात 28 अक्टूबर 2015</strong></p>
<p><br />उत्तरी हिंद महासागर में सीज़न का तीसरा चक्रवात नामित तूफान, यह विकसित हुआ और 28 अक्टूबर 2015, को मानसून ट्रफ से भारत के पश्चिमी तट पर टकराया । रिकॉर्ड द्वारा ईंधन गर्म पानी के तापमान के कारण, प्रणाली तेजी से तीव्र हो गई और इसे भारत में चपला नाम दिया गया ।<br /> <br /><strong>4.6) ओडिशा में चक्रवात तितली, 11 अक्टूबर, 2018</strong></p>
<p><br />चक्रवात तितली ने आंध्र प्रदेश में कम से कम आठ लोगों की जान ले ली और विनाश का निशान छोड़ दिया । 11 अक्टूबर, 2018 की सुबह-सुबह ओडिशा में भूस्खलन के बाद, तितली ने बहुत भयंकर चक्रवाती तूफान 130-140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आया।</p>
<p><strong>4.7) फेथाई धूल भरी आँधी से बाढ़, केरल, 19 दिसंबर, 2018</strong></p>
<p><br />चक्रवात फेथाई ने आंध्र प्रदेश में दस्तक दी, जिससे हजारों लोग विस्थापित हो गए। यह चक्रवात गाजा द्वारा पड़ोसी राज्य तमिलनाडु, केरल, और पांडिचेरी में तबाही मचाने के ठीक एक महीने बाद आया है।</p>
<p><br /><strong>4.8) ओडिशा में चक्रवाती तूफान फानी 03 मई 2019</strong></p>
<p><br />एक विशाल उष्णकटिबंधीय चक्रवात ने शुक्रवार को पूर्वी भारत में तटीय शहर के पास दस्तक दी। पुरी का, उस क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है जो लाखों लोगों का घर है। ऐसा माना जाता है कि <br />चक्रवात फानी ("फ़ोनी") नामक तूफ़ान, 115 मील (175 किमी) प्रति घंटे (श्रेणी 3 के तूफ़ान के बराबर) से अधिक की हवाओं के साथ तट से टकराया।</p>
<p><strong>4.9) गुजरात में समुद्री तूफ़ान वायु, 12 जून 2019</strong></p>
<p><br />भारत में दशकों बाद 170 किमी प्रति घंटा (100 मील प्रति घंटा) की रफ़्तार के साथ, प्रशांत महासागरीय वायु उत्तर पश्चिम पर हमला करने वाला सबसे शक्तिशाली तूफान वायु बन सकता है । तूफान की शक्ति से छह करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं, जो उत्तर-पश्चिम भारत की ओर से बढ़ोतरी हो रही है और शुरुआत में गुजरात के समुद्र तट से टकरायेगा और गुरुवार सुबह, लगभग 300,000 लोगों को 700 शरणास्थलो में ले जाया जाएगा और क्षेत्र के स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे ।</p>
<p><strong>4.10) चक्रवात अम्फान 2020 का पहला उत्तर भारतीय चक्रवाती तूफान है</strong></p>
<p><br />1737 के बाद से सबसे खराब तूफान ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 20-23 मई 2020 आया ।<br />समुद्री चक्रवात का मौसम और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाला पहला 'सुपर साइक्लोन' विनाशकारी व अत्यधिक भीषण चक्रवात अम्फान, 190 किमी प्रति घंटे (121 मील प्रति घंटे)  की रफ्तार से चलने वाली हवाएँ ने 20 मई 2020 को पश्चिम बंगाल में जोरदार बारिश की और तबाही मचाई। विनाश के इस चक्रवात से पहले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कम से कम 6.58 लाख लोगों को निकाला गया।</p>
<p>4.11) चक्रवात TAUKTUE ने कार्ला, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात को प्रभावित किया (13-19 मई 2021)<br />ताउकता भारतीय राज्यों केरल, कर्नाटक और के तटों के समानांतर शुरू हुआ और महाराष्ट्र, गुजरात में यह बहुत भीषण चक्रवाती तूफान 15-19 मई 2021 को तेजी से बढा |  </p>
<p><strong>4.12) चक्रवात यास - ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 23-28 मई 2021 </strong></p>
<p><br />चक्रवात यास के भूस्खलन के दौरान समुद्र का पानी 26 मई, 2021 को बालासोर का चांदीपुर क्षेत्र में एक घर की सीमाओं से होकर प्रवेश करता है । चक्रवात ने बालासोर और मयूरभंज जिलों में वृक्ष आवरण को बड़ी क्षति पहुंचाने की सूचना दी गई । नीलगिरी इलाके में हजारों पेड़ों की गिरे होने की सूचना मिली हैं ।</p>
<p>5. हरित भूमि की वैश्विक स्थिति (द्वीप- आर्कटिक और अंटार्कटिका सागर)<br />यह 51.7 मिलियन वर्ग किलोमीटर पृथ्वी की सतह का केवल 10% है और अब:</p>
<p><strong>5.1). उत्तरी ध्रुव की बर्फ (न्यूनतम)</strong></p>
<p><br />•    2010 में 4.100 मिलियन वर्ग किमी 5.17 मिलियन के मुकाबले 78% बर्फ बची थी | <br />•    2019 में 1.560 मिलियन वर्ग किमी 30% बर्फ बची है<br />•    2021 में  1.384 मिलियन वर्ग किमी 17% बर्फ बची है</p>
<p><strong>5.2). दक्षिणी ध्रुव की बर्फ (न्यूनतम)</strong></p>
<p><br />      गर्मियों में अधिकतम 7.2 मिलियन वर्ग किमी और सबसे कम 1.1 मिलियन वर्ग किमी<br />5.3). चादरों की औसत मोटाई 4.8 किमी है जो समुद्र के जल स्तर को 63 मीटर (200 फीट) तक बढ़ा सकती है।</p>
<p><strong>6.0 कौन लाया पहाड़ पर बर्बादी, बेरहम विकास या बढ़ती आबादी?</strong></p>
<p><br />हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड तक में 'विकास का जाल बिछ गया' है। इस जाल में फंसा है तो इन पहाड़ी राज्यों का भविष्य, जो अब बारिश की एक बूंद भी बर्दाश्त कर पाने के काबिल नहीं है। पहाड़ों में ब्लास्ट, भारी मशीनों का इस्तेमाल और विकास के लिए बनाई जा रही सुरंगे-सड़कें इन राज्यों के लिए मुसीबत बन रही हैं। हिमाचल प्रदेश में अगस्त का महीना भयानक आपदा लेकर आया है। पहाड़ों में कोहराम मचा है। घर, सड़क, मंदिर, स्कूल और पहाड़ कांच के टुकड़ों की तरह टूटकर बिखर रहे हैं। हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ का पोर-पोर टूट रहा है। बारिश की बूंदें गिरते ही लाखों सालों से जमे पहाड़ धराशाई हो रहे हैं। सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्यों हो रहा है? सवाल ये भी है कि क्या ये विनाश हिमाचल और उत्तराखंड के कुछ शहरों तक ही सीमित है या देश के कई विख्यात शहर इसकी चपेट में हैं? सवाल ये भी है कि कौन लाया पहाड़ पर बर्बादी बेरहम विकास या बढ़ती आबादी? <br /> <br /><strong>6.1 सड़क की जाल बन रही जान का जंजाल</strong></p>
<p><br />हिमाचल प्रदेश की स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में हिमाचल प्रदेश में लैंडस्लाइड के 16 बड़े मामले दर्ज हुए थे लेकिन 2021 में 100 से ज्यादा बड़े स्तर की लैंडस्लाइड की घटनाएं हुईं । 2022 में पहाड़ दरकने के कम से कम 117 ऐसे मामले सामने आए जिनमें जानमाल का नुकसान हुआ । पहाड़ों को सिर्फ सड़कों के लिए ही नहीं तोड़ा जा रहा । पहाड़ों की चूल-चूल हिलाने का काम वो टनल कर रही हैं, जो तेजी से पहाड़ी राज्यों में बनाई जा रही हैं ।<br /><strong>6.2  बारिश, लैंडस्लाइड ने पहाड़ी राज्य में मचाई तबाही</strong></p>
<p>हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में लैंडस्लाइड का डरावना मंजर दिखाई दिया । यहां के समरहिल इलाके में शिमला नगर निगम का स्लॉटर हाउस जमींदोज हो गया । तस्वीरें विचलित कर देने वाली हैं । पहले एक बड़ा पेड़ गिरा, फिर ताश के पत्तों की तरह स्लॉटर हाउस ढलान की तरफ सरकता चला गया और फिर शिमला के स्लॉटर हाउस के साथ लगे पांच घर भी जमींदोज हो गए । चीख पुकार मच गई. जगह-जगह लैंडस्लाइड और बादल फटने से राजधानी शिमला को जोड़ने वाली कई सड़कें टूट गईं । रेल की पटरियां हवा में झूलने लगीं. कई इमारतें ढह गईं ।</p>
<p><br />पिछले 3 दिनों में टूटे कहर के बाद अकेले मंडी शहर में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है । पहाड़ टूटने के बाद कई लोग लापता हो गए हैं । जगह-जगह लैंडस्लाइड के बाद कुल्लू-मनाली को जोड़ने वाला हाइवे बंद होने से सैकड़ों पर्यटक फंस गए हैं । हिमाचल प्रदेश के शहरों पर कुदरत की मार है या ये इंसान का ही प्रहार है? आज ये सोचने की जरूरत है कि हमने इन पहाड़ों के साथ ऐसा क्या किया है? जो बारिश की बूंदें पड़ते ही बुरी तरह टूटकर बिखर रहे हैं । हिमाचल प्रदेश के सिर्फ शिमला ही नहीं, कई शहरों के वजूद पर संकट खड़ा हो गया है।</p>
<p><br /><strong>7. आपदा प्रबंधन</strong></p>
<p><br />यह तथ्य हमें ज्ञात है कि आपदा एक अचानक, विनाशकारी घटना है जो गंभीर रूप से बाधित करती है, किसी समुदाय या समाज की कार्यप्रणाली और मानवीय, भौतिक और आर्थिक या का कारण बनती है | पर्यावरणीय हानियाँ जो समुदाय या समाज की अपनी क्षमता से निपटने की क्षमता से अधिक हो संसाधन। हालाँकि आपदाएँ अक्सर प्रकृति के कारण होती हैं, फिर भी आपदाएँ मानवीय उत्पत्ति की हो सकती हैं। वहाँ तीन आपदा के प्रकार हैं – <br />•    प्राकृतिक - तूफान, बवंडर, भूकंप, बाढ़, ज्वालामुखी, आग आदि।<br />•    तकनीकी - रासायनिक उत्सर्जन, बिजली कटौती, प्राकृतिक गैस विस्फोट, आदि।<br />•    मानव निर्मित - आतंकवादी हमले, जातीय दंगे, सामूहिक गोलीबारी, आदि।</p>
<p>आपदा प्रबंधन का उद्देश्य आपदाओं की घटना को कम करना और इसके प्रभाव को कम करना है, जिन्हें रोका नहीं जा सकता । इन खतरों से होने वाले संभावित नुकसान को कम करने या उससे बचने के लिए है, आश्वासन दिया जाता है। आपदा पीड़ितों को त्वरित एवं उचित सहायता प्रदान करना तथा त्वरित एवं प्रभावी ढंग से लक्ष्य हासिल करना सबसे आवश्यक है। इसमें सरकारी हस्तक्षेप के साथ - साथ उचित योजना के लिए फंडिंग को उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि यह आवश्यक नहीं है कि ये आपदाएँ हमेशा अप्रत्याशित हों।</p>
<p><strong>8). निष्कर्ष- </strong></p>
<p><br />प्राथमिक कार्य प्राकृतिक आपदा के दौरान समाज को सुरक्षित रखना है, तो उपयुक्त तैयारी सुरक्षा युक्तियाँ से ही कर सकते हैं । अतएव भयंकर तूफानो को रोकने और आपात्कालीन स्थिति में बदलाव लाने हेतु निम्नलिखित बिन्दुओ से अवगत रहें:<br />किसी भी आपातकालीन स्थिति से सूचित रहें।<br />•    राहत के लिए एक योजना बनाएं। <br />•    आपातकालीन उपयोगिताएँ / किट हाथ में रखें। <br />•    अनावश्यक जोखिमों से बचें जैसे: मछुआरे को बाहर निकालना।<br />•    समुद्री / सामाजिक दूरियाँ बनाए रखें । <br />•    लोगों या जानवरों को सबसे सुरक्षित क्षेत्र में रखना / अपने घर में बंद कर देना।</p>
<p>वर्ष 2045-50 तक कोयले की अनुपलब्धता के कारण ताप विद्युत उत्पादन कम होने वाला है। और हमें अधिक अधिक से नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ना होगा । संभावना है कि वर्ष 2045-50 तक पृथ्वी पर ग्लेशियर अथवा वर्फ़ गायब हो जायेगी। पहाड़ी क्षेत्रो में घाटियाँ ध्वस्त हो जायेंगी, वहाँ के निवासियों को पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित होना होगा ।उत्तर-प्रदेश व बिहार मानसूनी वारिश न होने से रेगिस्तान बन सकता है । ऐसी स्थिति में सबसे अधिक मानवता प्रभावित होगी और 45% से 50% तक जीवों के समाप्त होने कि संभावना से नकारा नहीं जा सकता है। ऐसी ही स्थिति सम्पूर्ण विश्व में रहेगी । </p>]]>
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                <pubDate>Sat, 02 Sep 2023 21:40:28 +0530</pubDate>
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