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                <title>bijli sankat - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>bijli sankat RSS Feed</description>
                
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                <title>बकाया भुगतान को लेकर अडानी ग्रुप का बांग्लादेश को पत्र, बिजली संकट की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168714/adani-groups-letter-to-bangladesh-regarding-payment-of-dues-warning"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/adani.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ढाका/नई दिल्ली।</strong></p><p style="text-align:justify;"><br />अडानी ग्रुप और बांग्लादेश सरकार के बीच बिजली आपूर्ति को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अडानी पावर लिमिटेड ने बांग्लादेश के पावर डेवलपमेंट बोर्ड (PDB) को करीब <strong>112.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक)</strong> के बकाया भुगतान को लेकर चेतावनी भरा पत्र भेजा है। कंपनी ने कहा है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो देश में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।</p><p style="text-align:justify;">मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को अडानी पावर के वाइस प्रेसिडेंट अविनाश अनुराग ने पीडीबी के चेयरमैन को पत्र लिखकर बकाया राशि के तत्काल भुगतान की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिजली संयंत्र के नियमित संचालन के लिए इस राशि का भुगतान अत्यंत आवश्यक है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बकाया राशि का विवरण</strong></h3><p style="text-align:justify;">पत्र के मुताबिक, कुल बकाया रकम में</p><ul style="text-align:justify;"><li><p><strong>53.2 मिलियन डॉलर</strong> जून तक का पुराना बकाया,</p></li><li><p>जबकि <strong>59.6 मिलियन डॉलर</strong> अक्टूबर तक की बिजली आपूर्ति का भुगतान शामिल है।</p></li></ul><p style="text-align:justify;">कंपनी का कहना है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद अब तक पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ता आर्थिक दबाव</strong></h3><p style="text-align:justify;">अडानी ग्रुप ने पत्र में यह भी कहा है कि बढ़ते बकाये के कारण बिजली उत्पादन, रखरखाव और सहयोगी कंपनियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। यदि भुगतान में और देरी हुई, तो बिजली आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।</p><p style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार, आर्थिक संकट की स्थिति में बिजली उत्पादन और वितरण प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>पहले भी हो चुका है विवाद</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह विवाद पहले भी सामने आ चुका है। नवंबर 2025 में अडानी ग्रुप ने भुगतान न मिलने पर बिजली सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने करीब <strong>100 मिलियन डॉलर</strong> का भुगतान कर स्थिति को संभाला था।</p><p style="text-align:justify;">हालांकि, दिसंबर के बाद से फिर बकाया बढ़ने लगा और पुराने भुगतान का पूरा निपटारा नहीं हो सका। अब एक बार फिर बिजली संकट की आशंका गहराने लगी है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव से पहले बढ़ी चिंता</strong></h3><p style="text-align:justify;">यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बांग्लादेश में आगामी <strong>12 फरवरी को संसदीय चुनाव</strong> होने हैं। देश पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। चुनावी माहौल में बिजली संकट की आशंका ने सरकार की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।</p><p style="text-align:justify;">वर्तमान में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार सत्ता में है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के चलते राजनीतिक हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका</strong></h3><p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो इसका नकारात्मक असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और निवेश पर पड़ सकता है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन और व्यापार गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही, यह विवाद भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक और ऊर्जा सहयोग पर भी असर डाल सकता है।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार</strong></h3><p style="text-align:justify;">फिलहाल बांग्लादेश सरकार और पावर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही अडानी ग्रुप से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेगी, ताकि चुनाव से पहले किसी बड़े संकट से बचा जा सके।</p><hr /><p style="text-align:justify;">अगर आप चाहें, तो मैं इसे आपके अखबार के नाम के साथ <strong>फ्रंट पेज लीड</strong>, <strong>संक्षिप्त कॉलम</strong>, या <strong>ब्रेकिंग न्यूज फॉर्मेट</strong> में भी तैयार कर दूँ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 19:55:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>गोंडा में बिजली संकट: कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोंडा। </strong>गोंडा ज़िले, खासकर गौरा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों बिजली की किल्लत से लोग परेशान हैं। सरकार जहाँ मंचों से 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करती है, वहीं हक़ीक़त यह है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जनता घंटों कटौती, लो वोल्टेज और अव्यवस्थित सप्लाई से जूझ रही है।युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव अभिषेक तिवारी नीरज ने कहा कि जिले की जनता अंधेरे में जीने को मजबूर है। उनके अनुसार — बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, किसानों की सिंचाई बाधित है, छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का कामकाज ठप पड़ रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि राम के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/156246/electricity-crisis-in-gonda-congress-targeted-the-government"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/light-gul1.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोंडा। </strong>गोंडा ज़िले, खासकर गौरा विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों बिजली की किल्लत से लोग परेशान हैं। सरकार जहाँ मंचों से 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करती है, वहीं हक़ीक़त यह है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जनता घंटों कटौती, लो वोल्टेज और अव्यवस्थित सप्लाई से जूझ रही है।युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव अभिषेक तिवारी नीरज ने कहा कि जिले की जनता अंधेरे में जीने को मजबूर है। उनके अनुसार — बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, किसानों की सिंचाई बाधित है, छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का कामकाज ठप पड़ रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि राम के नाम पर सत्ता में आई सरकार नवरात्र जैसे पावन पर्व पर भी लोगों को नियमित बिजली नहीं दे पा रही है। “जब पूरे प्रदेश में त्योहारों की रौनक होनी चाहिए, तब गौरा विधानसभा की गलियाँ अंधेरे में डूबी हैं। यह सरकार की संवेदनहीनता और नाकामी को दर्शाता है,” नीरज ने कहा। युवा कांग्रेस नेता ने जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि जनता ने जिनको सेवा के लिए चुना था, वे इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्होंने तंज कसा, “अगर सरकार वाकई 24 घंटे बिजली दे रही है तो गोंडा और गौरा विधानसभा की जनता अंधेरे में क्यों है? क्या यहाँ के लोग दूसरे दर्ज़े के नागरिक हैं?” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिजली आपूर्ति की समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Sep 2025 17:01:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> दीपावली से पहले लग सकता है ईंधन अधिभार शुल्क का करंट</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>प्रयाग राज न्यूज़।</strong></p>
<p><br />उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दीपावली से पहले ईंधन अधिभार शुल्क का करंट लग सकता है क्योंकि पावर कॉरपोरेशन के शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं से आपत्ति मांगी है। उन्हें तीन सप्ताह का वक्त दिया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को 28 पैसे से एक रुपये प्रति यूनिट तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इसे अक्तूबर से लागू किया जा सकता है।</p>
<p>पावर कॉरपोरेशन की ओर से ईंधन अधिभार लगाने के लिए 26 जुलाई को नियामक आयोग में प्रस्ताव दिया गया था। इसमें उपभोक्ताओं से कुल 1437 करोड़ की वसूली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134259/fuel-surcharge-fee-may-be-imposed-before-diwali"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-09/light-gul.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong><br /><strong>प्रयाग राज न्यूज़।</strong></p>
<p><br />उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को दीपावली से पहले ईंधन अधिभार शुल्क का करंट लग सकता है क्योंकि पावर कॉरपोरेशन के शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं से आपत्ति मांगी है। उन्हें तीन सप्ताह का वक्त दिया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को 28 पैसे से एक रुपये प्रति यूनिट तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इसे अक्तूबर से लागू किया जा सकता है।</p>
<p>पावर कॉरपोरेशन की ओर से ईंधन अधिभार लगाने के लिए 26 जुलाई को नियामक आयोग में प्रस्ताव दिया गया था। इसमें उपभोक्ताओं से कुल 1437 करोड़ की वसूली करने की बात कही है। इसके लिए 61 पैसा प्रति यूनिट के आधार पर अलग-अलग श्रेणीवार औसत बिलिंग की दर तैयार की गई है। इस पर उपभोक्ता परिषद ने आयोग में याचिका दायर कर कहा कि विद्युत निगमों पर उपभोक्ताओं का करीब 33122 करोड़ रुपया निकल रहा है।</p>
<p> इस हिसाब से 30 पैसे से लेकर एक रुपये प्रति यूनिट बिजली बिल कम किया जाए। लेकिन नियामक आयोग ने 28 अगस्त को विद्युत वितरण निगमों के लिए दाखिल ईंधन अधिभार शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए बिजली कंपनियों के प्रस्ताव को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा गया है कि तीन हफ्ते तक कोई भी विद्युत उपभोक्ता अपनी आपत्ति दाखिल कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2023 12:59:49 +0530</pubDate>
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