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                <title>Kabul - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Kabul RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अफगानिस्तान में अब तक 1400 से अधिक लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का कुनार प्रांत रविवार आधी रात के बाद एक भयानक भूकंप से दहल उठा। भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई और इसका केंद्र कुनार की राजधानी असदाबाद के पास लगभग 27 किलोमीटर गहराई में था। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने अब तक 1,411 लोगों की जान ले ली है और 3,124 लोग घायल हुए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस दुखद घटना की पुष्टि की और बताया कि अब तक कुनार में 5,412 घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। सरकार की ओर से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/154378/more-than-1400-people-killed-in-afghanistan-so-far"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/image.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान का कुनार प्रांत रविवार आधी रात के बाद एक भयानक भूकंप से दहल उठा। भूकंप की तीव्रता 6.1 मापी गई और इसका केंद्र कुनार की राजधानी असदाबाद के पास लगभग 27 किलोमीटर गहराई में था। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने अब तक 1,411 लोगों की जान ले ली है और 3,124 लोग घायल हुए हैं। तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने इस दुखद घटना की पुष्टि की और बताया कि अब तक कुनार में 5,412 घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं। सरकार की ओर से लगातार राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर के ज़रिए घायलों को निकाला जा रहा है ताकि उन्हें तुरंत इलाज मिल सके। इससे पहले अफ़ग़ान रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने मरने वालों की संख्या 1,124 बताई थी और कहा था कि करीब 3,251 लोग घायल हुए हैं। संस्था ने यह भी कहा था कि 8,000 से ज़्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है और बहुत से लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। यही कारण है कि राहत कार्य तेज़ी से चल रहे हैं और मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पंजशीर प्रांत में इस भूकंप से आर्थिक नुकसान हुआ</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कुनार प्रांत इस भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है। यहां के अस्पतालों में इतनी भीड़ है कि घायलों को ज़मीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। कई लोगों को सामूहिक रूप से दफनाया गया है क्योंकि परिवारों के पास न तो संसाधन हैं और न ही समय। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बच्चे जो अपने घरों से बेघर हो गए हैं वे खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं।नंगरहार, लघमन और नूरिस्तान जैसे पड़ोसी प्रांतों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए और वहां भी कुछ मौतें व घायल होने की सूचना मिली है। वहीं पंजशीर प्रांत में इस भूकंप से आर्थिक नुकसान हुआ है लेकिन किसी के मारे जाने की सूचना नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप के झटके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल तक महसूस किए गए। इसके साथ ही पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में भी कंपन दर्ज की गई। इसने साबित कर दिया कि भूकंप की तीव्रता कितनी अधिक थी और इसका प्रभाव कितना व्यापक रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूरदराज़ के इलाकों में पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। तालिबान सरकार के पास संसाधनों की कमी है और जिन इलाकों में सड़कें नष्ट हो चुकी हैं वहां हेलीकॉप्टरों के माध्यम से घायलों को निकाला जा रहा है।<br />स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने तुरंत सहायता पहुंचाने की बात कही है। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं लेकिन अब भी हज़ारों लोग भोजन, पानी और दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भूकंप के बाद की ज़िंदगी</strong><br />भूकंप के बाद जो लोग बचे हैं उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। अपने प्रियजनों को खोने का दुख, घर उजड़ने की पीड़ा और भविष्य की अनिश्चितता ने लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्चों की पढ़ाई छूट गई है और महिलाएं व बुज़ुर्ग खुले में जीवन बिता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:52:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच अचानक कैसे बिगड़ गए रिश्ते </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>International:</strong> पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सबकुछ ठीक नहीं है। दरअसल, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो रहे हैं और 18 मार्च की घटना के बाद यह और खराब होना तय है। इस्लामाबाद ने पुष्टि की कि उसने पड़ोसी देश में खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था, जिसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई। जवाब में तालिबान सरकार ने सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर गोलीबारी की।</p>
<p>अब, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगा रहा है और तालिबान इस आरोप से इनकार कर रहा है। दरअसल,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139611/how-relations-between-afghanistan-and-pakistan-suddenly-deteriorated"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/download2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>International:</strong> पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर सबकुछ ठीक नहीं है। दरअसल, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच संबंध खराब हो रहे हैं और 18 मार्च की घटना के बाद यह और खराब होना तय है। इस्लामाबाद ने पुष्टि की कि उसने पड़ोसी देश में खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था, जिसमें आठ नागरिकों की मौत हो गई। जवाब में तालिबान सरकार ने सीमा पर पाकिस्तानी सैनिकों पर गोलीबारी की।</p>
<p>अब, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगा रहा है और तालिबान इस आरोप से इनकार कर रहा है। दरअसल, यह पाकिस्तान सरकार और अफगानिस्तान में तालिबान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का एक और अध्याय होगा।</p>
<p>लेकिन वास्तव में क्या हुआ? और यह घटना इस्लामाबाद और काबुल के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को कैसे प्रभावित करती है? 18 मार्च की तड़के, पाकिस्तान ने पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिका और खोस्त प्रांतों में दो हवाई हमले किए। तालिबान अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में तीन बच्चों सहित कम से कम आठ लोग मारे गए।</p>
<p>तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने घटना की पुष्टि करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अपने क्षेत्र में नियंत्रण की कमी और समस्याओं के लिए अफगानिस्तान को दोष न दे। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बहुत बुरे परिणाम हो सकते हैं जो पाकिस्तान के नियंत्रण में नहीं होंगे।</p>
<p>कुछ घंटों बाद, पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने भी हमलों की पुष्टि की और कहा कि उसने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों के अंदर खुफिया-आधारित आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था। इसमें आगे कहा गया कि हाफिज गुल बहादुर समूह से संबंधित आतंकवादी उसके ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य थे।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ ये आतंकवादी पाकिस्तान के अंदर कई आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार थे, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों नागरिकों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों की मौत हुई।</p>
<p>कुछ घंटों बाद तालिबान ने हमलों की निंदा की। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने लिखा कि अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात इन हमलों की कड़ी निंदा करता है और इस लापरवाह कार्रवाई को अफगानिस्तान के क्षेत्र का उल्लंघन बताता है। अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात, जिसके पास दुनिया की महाशक्तियों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का लंबा अनुभव है, किसी को भी अपने क्षेत्र पर आक्रमण करने की अनुमति नहीं देता है। </p>
<p>हालाँकि, पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर इस तरह के हमले कोई नई बात नहीं है। हाल के वर्षों में, विश्व स्तर पर नामित आतंकवादी समूह और काबुल में सत्तारूढ़ तालिबान के करीबी सहयोगी माने जाने वाले टीटीपी द्वारा पाकिस्तानी धरती पर हमले बढ़ गए हैं। वास्तव में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, 2023 में देश में आतंकवादी हिंसा में 17 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और कुल 306 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 693 लोग मारे गए।</p>
<p>रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि आतंकवादियों के बढ़ते हमलों से संकेत मिलता है कि टीटीपी और उसके सहयोगी पाकिस्तान को बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने के लिए 'मजबूर' करने के उद्देश्य से तीव्र आतंकवाद हमले का सहारा लेना जारी रखेंगे।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Mar 2024 17:51:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगान-पाकिस्‍तान के बीच मड़रा रहे जंग के बादल</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>अफगानिस्‍तान में तालिबान के सत्ता संभालने के एक साल बाद समाजिक व आर्थिक हालात बहुत दयनीय हैं। एक तरफ अफगान सीमा पर जहां पाकिस्‍तान और तालिबान के बीच जंग जैसे हालात हैं, वहीं राजधानी काबुल में पाकिस्‍तानी राजदूत को जान से मारने की कोशिश हुई है। इस बीच भारत  का जादू बहुत तेजी से तालिबान सरकार पर चला और यहां उसकी पकड़ फिर से मजबूत हो गई है। यही नहीं भारत के हरी झंडी दिखाने के बाद अब जापान भी अफगानिस्‍तान में दूतावास खोलने जा रहा है। जापान ने इस साल जब अफगानिस्‍तान में फिर से दूतावास खोलने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126021/war-clouds-hovering-between-afghan-pakistan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/tali.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>अफगानिस्‍तान में तालिबान के सत्ता संभालने के एक साल बाद समाजिक व आर्थिक हालात बहुत दयनीय हैं। एक तरफ अफगान सीमा पर जहां पाकिस्‍तान और तालिबान के बीच जंग जैसे हालात हैं, वहीं राजधानी काबुल में पाकिस्‍तानी राजदूत को जान से मारने की कोशिश हुई है। इस बीच भारत  का जादू बहुत तेजी से तालिबान सरकार पर चला और यहां उसकी पकड़ फिर से मजबूत हो गई है। यही नहीं भारत के हरी झंडी दिखाने के बाद अब जापान भी अफगानिस्‍तान में दूतावास खोलने जा रहा है। जापान ने इस साल जब अफगानिस्‍तान में फिर से दूतावास खोलने पर विचार शुरू किया था तब उसने भारत से सलाह ली थी ताकि जमीनी हालात की सटीक जानकारी ली जा सके। </p>
<p>भारत ने इस साल जून 2022 में ही अपने दूतावास को सीमित रूप से खोल दिया था। भारत की सलाह के बाद जापान ने भी अपनी योजना को आगे बढ़ाया और 21 अक्‍टूबर को इसका ऐलान कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक  भारत ने एक बार फिर से तालिबान राज में भी अफगानिस्‍तान में अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया है। हालांकि भारत की अफगानिस्‍तान में अभी भी मौजूदगी एक संवेदनशील मामला है। भारत ने अभी एक तकनीकी टीम को ही भेजा है। पाकिस्‍तान का करीबी तालिबानी गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्‍कानी भी कह चुका है कि वह भारत विरोधी तत्‍वों के खिलाफ ऐक्‍शन लेगा। भारत ने अफगानिस्‍तान की जनता के लिए बड़े पैमाने पर गेहूं भेजा है। भारत विकास परियोजनाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की स्थिति अच्‍छी है लेकिन उसे सतर्कतापूर्वक कदम उठाने होंगे।</p>
<p>इससे पहले तालिबान राज आने के ठीक पहले भारत ने खुद को पूरी तरह से काबुल से निकाल लिया था। भारत के इस कदम पर विदेशी मामलों के विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे। भारत के जाने के बाद इस बात की आशंका बढ़ गई थी कि पाकिस्‍तान अफगानिस्‍तान का खुलकर इस्‍तेमाल करेगा। पाकिस्‍तान की हमेशा से ही कोशिश रही है कि वह अफगानिस्‍तान में भारत के प्रभाव को कम करे। साथ ही अफगानिस्‍तान को कश्‍मीर में सक्रिय आतंकियों के लिए पनाहगार के रूप में इस्‍तेमाल करे।भारत के इस डर की वजह पाकिस्‍तानी सेना, ISI और तालिबान के बीच करीबी रिश्‍ते थे। यही नहीं सितंबर 2021 में तालिबान सरकार आने के बाद ISI के तत्‍कालीन चीफ फैज हामिद ने काबुल का दौरा भी किया था। हालांकि एक साल में अब हालात बहुत बदल चुके हैं।</p>
<p> <br />अफगानिस्‍तान में तालिबान राज आने के बाद पाकिस्‍तान को उम्‍मीद थी कि वह अब इस युद्धग्रस्‍त देश पर पर्दे के पीछे से राज करेगा। यही वजह थी कि पाकिस्‍तान की सरकार और सेना ने तालिबान की खुलकर मदद की।पाकिस्‍तानी सेना और तालिबान के बीच आए दिन सीमा पर भीषण गोलाबारी और हवाई हमले हो रहे हैं। तालिबान ने पाकिस्‍तान को अलग करने वाली डूरंड लाइन को मानने से इंकार कर दिया है। यही नहीं तालिबान के राज में तहरीक-ए-तालिबान आतंकियों ने पाकिस्‍तान पर हमले तेज कर दिया है। TTP और पाकिस्‍तानी सेना के बीच तालिबान की मध्‍यस्‍थता से हुआ शांति समझौता भी टूट गया है। TTP के अफगानिस्‍तान में 4000 आतंकी सक्रिय हैं। TTP ने फिर से खून बहाना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार TTP ने इस्‍लामिक स्‍टेट खुरासान प्रांत से हाथ मिला लिया है  इसी   ने काबुल में पाकिस्‍तानी राजदूत को मारने की कोशिश की है। तालिबान राज आने के बाद पाकिस्‍तान में हमलों में 50 फीसदी की तेजी आई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 12:13:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काबुल में हुए पाकिस्तानी दूतावास पर हमले की जिम्मेदारी ISIS-K ने ली </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दूतावास पर हुए हमले की जिम्मेदारी  इस्लामिक स्टेट खुरासन (ISIS-K) ने ली है। इस हमले में पाकिस्तान के दूतावास के प्रभारी राजदूत तो बच गए थे, लेकिन उनका एक सुरक्षाकर्मी जख्मी हो गया था। ISIS खुरासन शाखा ने शनिवार देर रात अरबी भाषा में जारी किए संक्षिप्त बयान में दावा किया कि उसके दो लड़ाकों ने पाकिस्तानी दूतावास के प्रभारी राजदूत और उनके सुरक्षा कर्मियों पर तब हमला किया, जब वे पाकिस्तानी दूतावास के परिसर में थे। इस हमले में एक सुरक्षाकर्मी जख्मी हुआ और इमारत को नुकसान पहुंचा। उसने इससे ज्यादा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/126019/isis-k-claimed-responsibility-for-the-attack-on-pakistani-embassy-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2022-12/pak.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p>पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दूतावास पर हुए हमले की जिम्मेदारी  इस्लामिक स्टेट खुरासन (ISIS-K) ने ली है। इस हमले में पाकिस्तान के दूतावास के प्रभारी राजदूत तो बच गए थे, लेकिन उनका एक सुरक्षाकर्मी जख्मी हो गया था। ISIS खुरासन शाखा ने शनिवार देर रात अरबी भाषा में जारी किए संक्षिप्त बयान में दावा किया कि उसके दो लड़ाकों ने पाकिस्तानी दूतावास के प्रभारी राजदूत और उनके सुरक्षा कर्मियों पर तब हमला किया, जब वे पाकिस्तानी दूतावास के परिसर में थे। इस हमले में एक सुरक्षाकर्मी जख्मी हुआ और इमारत को नुकसान पहुंचा। उसने इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी।</p>
<p>अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शुक्रवार को हुए हमले में पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी इसरार मोहम्मद जख्मी हो गए थे। वह सेना की कमांडो इकाई से संबंधित हैं। मगर दूतावास के प्रभारी राजदूत उबैद-उर-रहमान निज़ामी सुरक्षित बच गए थे। यह हमला ऐसे वक्त में हुआ था, जब इस्लामाबाद का दावा है कि अफगानिस्तान में छुपी पाकिस्तान विरोधी ताकतें हमलों को अंजाम दे रही हैं। इस दावे को लेकर दोनों देशों में तनाव पैदा हो गया है।</p>
<p>इस्लामाबाद में विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस्लामिक स्टेट के दावे की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है। विदेश कार्यालय ने कहा, "स्वतंत्र रूप से और अफगान अधिकारियों के परामर्श से, हम इन रिपोर्ट की सत्यता की पुष्टि कर रहे हैं।" उसने कहा, "इसके बावजूद, आतंकवादी हमला उस खतरे की याद दिलाता है कि अफगानिस्तान और क्षेत्र में आतंकवाद शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करता है।” विदेश कार्यालय ने कहा, “ हमें इस खतरे को हराने के लिए सामूहिक तौर पर दृढ़ता से कार्रवाई करनी चाहिए।”  </p>
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                <pubDate>Mon, 05 Dec 2022 11:57:20 +0530</pubDate>
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