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                <title>paper leak issue - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>प्रयागराज में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज का आयोजन बेहद सफल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ब्यूरो प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के  शनिवार को प्रयागराज में केपी ग्राउंड में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों की अपार भीड़ और सीधे सीधे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अडानी के साथ मोहन भागवत अर्थात आरएसएस पर तीखे हमले से लखनऊ और दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार की चूलें हिल गयी हैं और सत्ता पार्टी में बदहवासी का माहौल उत्पन्न हो गया है । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी का बैंक बैलेंस 150 करोड़ था, आज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184993/rahul-gandhis-students-echo-event-organized-in-prayagraj-very-successful"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001917752.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्यूरो प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के  शनिवार को प्रयागराज में केपी ग्राउंड में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्रों की अपार भीड़ और सीधे सीधे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अडानी के साथ मोहन भागवत अर्थात आरएसएस पर तीखे हमले से लखनऊ और दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार की चूलें हिल गयी हैं और सत्ता पार्टी में बदहवासी का माहौल उत्पन्न हो गया है । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रयागराज में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बीजेपी का बैंक बैलेंस 150 करोड़ था, आज 10 हजार करोड़ हो गया। सरकार ने चक्र बिहु में फंसा दिया ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1001917745.jpg" alt="1001917745" width="524" height="349"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरएसएस के वाइस चांसलर  बैठाकर  हर संस्था में आरएसएस के प्रचारक बैठाए गए हैं। ब्यूरोक्रेसी में पैरामिलिट्री में प्रचारक, विश्वविद्यालय,न्यायपालिका,मीडिया में प्रचारक बैठाए गए हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अडानी ने रोजगार खत्म किया। राहुल गांधी ने कहा कि डाटा युवाओं का, क्षमता युवाओं की, लेकिन सिस्टम ने उन्हीं युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा रखा है। देश के युवा पढ़ाई करते हैं, इसमें परिवारों का लाखों-करोड़ रुपया खर्च होता है। फिर सिस्टम एक सर्टिफिकेट देता है, लेकिन उससे आपको रोजगार नहीं मिलता है। आज 1,000 में से सिर्फ 12 लोगों को ही पक्की नौकरी मिलती है लोगों से उनका डाटा छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया जाता है। फिर आपको कहा जाता है- रील और कन्टेंट बनाइए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के युवा इस देश की सबसे बड़ी ताकत है और इनकी संभावना दुनिया में बेजोड़ हैं। उन्होंने कहा कि आप भारत की ताकत और गर्व हो। देश के युवाओं ने अंधेरे में रोशनी जलाने का काम किया है। हिंदुस्तान के युवाओं ने डर का सामना कर, देश को बदलने का काम किया है। हमें प्यार से इस करप्ट सिस्टम को बदलना होगा। राहुल गांधी ने हजारों छात्रों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आज आपसे आपके दर्द, डेटा और दौलत के बारे में बात करना चाहता हूं। हिंदुस्तान में 40 करोड़ युवा हैं, जो इस देश की ताकत हैं। इसलिए 21वीं सदी में देश दो चीजों के कारण आगे बढ़ सकता है। पहला, युवाओं की ताकत और दूसरा, युवाओं का डाटा। युवा + डाटा = 21वीं सदी की इकॉनमी। आपके डाटा के बिना AI का कोई मतलब नहीं है। डाटा से AI बनाया जा सकता है, लेकिन AI से डाटा नहीं बनाया जा सकता। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने आगे कहा कि भारत के 40 करोड़ युवा इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं और अमेरिका, चीन और रूस कोई भी भारत के युवाओं की संभावना का मुकाबला नहीं कर सकता। लेकिन भारत में रोजगार के सारे दरवाजे बंद हैं। उन्होंने देश में शैक्षणिक योग्यता के मूल्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि आज भारत में शिक्षा का प्रमाण पत्र का कोई मतलब नहीं है क्योंकि ये आपको नौकरी नहीं दे सकते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा कि डाटा युवाओं का, क्षमता युवाओं की, लेकिन सिस्टम ने उन्हीं युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा रखा है। देश के युवा पढ़ाई करते हैं, इसमें परिवारों का लाखों-करोड़ रुपया खर्च होता है। फिर सिस्टम एक सर्टिफिकेट देता है, लेकिन उससे आपको रोजगार नहीं मिलता है। आज 1,000 में से सिर्फ 12 लोगों को ही पक्की नौकरी मिलती है लोगों से उनका डाटा छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया जाता है। फिर आपको कहा जाता है- रील और कन्टेंट बनाइए। लेकिन आप जान लीजिए- रील 21वीं सदी का नया नशा है इन सबके बाद, युवाओं से कहा जाता है कि ब्लिंकिट, उबर में काम करो। मजदूरी करो, रील बनाओ, लेकिन आपको इस देश में नौकरी नहीं मिल सकती। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा कि दर्द आपका, डाटा आपका, दौलत इनकी। पूरा सिस्टम बीजेपी-आरएसएस -पूंजीपतियों के फायदे के लिए चलाया जाता है। पैसा: अडानी की आमदनी 10 साल में 30 गुना बढ़ी। सत्ता: बीजेपी का बैंक बैलेंस 150 करोड़ रुपये से 10 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच गया। सोच: संस्थाओं में आरएसएस के प्रचारक फिट किए जा रहे हैं। कॉलेज में, विश्वविद्यालय में, ब्यूरोक्रेसी में, मीडिया में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी-आरएसएस के इस सिस्टम ने रोजगार खत्म किया, विश्वविद्यालयों पर कब्जा किया, आपके ऊपर हमला किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम में स्टेज पर बुलाकर कुछ प्रतियोगी छात्रों से भी बात की। एक अभ्यर्थी ने कहा कि राहुल गांधी जी, मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं, क्योंकि आप हम छात्रों और युवाओं की आवाज उठा रहे हैं। देश के युवा आपके साथ हैं। जब से योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, तब से लगातार पेपर लीक हो रहा है। इन सभी पेपर लीक के मामले मैं उंगलियों पर गिना सकता हूं। जैसे: 2017 दरोगा भर्ती परीक्षा पेपर लीक, 2018 यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक, 2020-21 यूपी SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक, 2022 लेखपाल भर्ती परीक्षा पेपर लीक, 2023 RO/ARO भर्ती परीक्षा पेपर लीक, 2023 यूपी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पटना से आई एक छात्र नेता ने कहा कि दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों और युवाओं पर हुई बर्बरता के खिलाफ 22 जुलाई को छात्र पटना में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले थे। लेकिन बिहार सरकार और बिहार पुलिस ने उनके साथ क्रूरता की। छात्रों को मारा-पीटा गया और उन्हें रातों-रात गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया। बिहार में ये सिलसिला कई दिनों तक चला। फिर सीवान में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर AK-47 से फायर कर दिया जाता है, जिसमें छात्र गंभीर रूप में घायल हुए। हम छात्र हैं, प्रोटेस्टर नहीं। आज छात्रों की हालत ये है कि पहले वो पढ़ाई करें, लेकिन जब पेपर लीक हो जाए और हक के लिए प्रोटेस्ट करे तो उनपर लाठीचार्ज किया जाता है। देश के युवा इसी चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अखबार कार्यक्रम में एक और छात्र ने कहा कि यूपी सरकार के पास पद हैं, लेकिन वो भर्ती ही नहीं निकाल रही है। हमने कई बार धरना दिया, लाठियां खाईं और कईयों को ज्ञापन दिया, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। यूपी में कई सारी भर्तियां ऐसी हैं, जो लटकी हुई हैं और जब पेपर लीक होता है तो हम छात्र किसी से अपना दुख तक बयां नहीं कर पाते। हमारी मांग यही है कि सरकार समय पर भर्तियां निकाले, एग्जाम कैलेंडर फिक्स करे- ताकि युवाओं का समय और पैसा बर्बाद न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि हम नफरत और हिंसा से कभी काम नहीं करेंगे। हिंदुस्तान की संस्कृति सत्य और अहिंसा की है। किसी भी स्टूडेंट के दिल में नफरत नहीं, सिर्फ मोहब्बत होनी चाहिए। हमें प्यार और मोहब्बत से इस करप्ट सिस्टम को खत्म.. टाटा, बाय-बाय करना है। जो भी युवा अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, मै उनके साथ हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Aug 2026 22:08:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एबीवीपी होशियारपुर ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में सुधारों की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>होशियारपुर-</strong>  अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), होशियारपुर ने पंजाब के राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन सहायक आयुक्त, होशियारपुर को सौंपा। ज्ञापन में पंजाब की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए पेपर लीक की लगातार घटनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, स्थायी शिक्षकों की भर्ती, छात्रवृत्तियों के समय पर वितरण, छात्रसंघ चुनावों की बहाली, शैक्षणिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा, नशामुक्त शैक्षणिक परिसर तथा रोजगारोन्मुख शिक्षा जैसी प्रमुख मांगें रखी गईं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर एबीवीपी पंजाब के प्रदेश सह मंत्री अंकित कुंद्रा ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184333/abvp-hoshiarpur-demands-reforms-in-punjabs-education-system"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1000974385-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>होशियारपुर-</strong> अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), होशियारपुर ने पंजाब के राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन सहायक आयुक्त, होशियारपुर को सौंपा। ज्ञापन में पंजाब की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए पेपर लीक की लगातार घटनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, स्थायी शिक्षकों की भर्ती, छात्रवृत्तियों के समय पर वितरण, छात्रसंघ चुनावों की बहाली, शैक्षणिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा, नशामुक्त शैक्षणिक परिसर तथा रोजगारोन्मुख शिक्षा जैसी प्रमुख मांगें रखी गईं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर एबीवीपी पंजाब के प्रदेश सह मंत्री अंकित कुंद्रा ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने लाखों मेहनती विद्यार्थियों का विश्वास तोड़ा है और पंजाब की परीक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के अनेक दावों के बावजूद विद्यार्थी आज भी असुरक्षित और निराश महसूस कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंकित कुंद्रा ने कहा कि वर्ष 2022 में विजिलेंस ब्यूरो को भेजे गए पेपर लीक के मामले आज भी लंबित हैं। उन्होंने प्रश्न उठाया कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इन मामलों में ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि सभी लंबित मामलों की समयबद्ध जांच पूरी कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने सुरक्षित एवं पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, एनईपी-2020 के पूर्ण तंत्र क्रियान्वयन, स्थायी शिक्षकों की भर्ती, छात्रवृत्तियों के समय पर वितरण, छात्रसंघ चुनावों की बहाली, फीस नियंत्रण, करियर एवं प्लेसमेंट सेल तथा उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद छात्रों के हितों के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी और शिक्षा व्यवस्था में सार्थक सुधार होने तक अपनी आवाज़ बुलंद करती रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर अंकित कुंद्रा (प्रदेश सह मंत्री, एबीवीपी पंजाब), रितेश शर्मा (नगर सह मंत्री, एबीवीपी होशियारपुर) तथा अभिषेक कुमार (इकाई सदस्य, एबीवीपी होशियारपुर) उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:25:58 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रामपुरखास को सर्वश्रेष्ठ क्षेत्र बनाने के लिए परियोजनाओं का तेजी से जारी रखने का लिया है संकल्प - मोना</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> क्षेत्रीय विधायक एवं कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा है कि रामपुरखास को बहुमुखी विकास से मजबूती प्रदान करने के लिए यहां हर परियोजनाओं का संचालन मजबूती से दिखेगा। बुधवार को क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों के साथ संवाद करते हुए उन्होने कहा कि हाल ही में लगभग दस करोड़ की लागत से मंगापुर में स्टेडियम की मंजूरी खेल के क्षेत्र के साथ युवाओं को विभिन्न भर्तियों में भी शारीरिक ऊर्जा मिलने में लाभप्रद होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कृषि क्षेत्र में करोड़ो की लागत से कृषि कल्याण केन्द्र के भी निर्माण से क्षेत्रीय किसानों को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184291/resolved-to-continue-the-projects-rapidly-to-make-rampurkhas-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260729-wa0092.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज, प्रतापगढ़।</strong> क्षेत्रीय विधायक एवं कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने कहा है कि रामपुरखास को बहुमुखी विकास से मजबूती प्रदान करने के लिए यहां हर परियोजनाओं का संचालन मजबूती से दिखेगा। बुधवार को क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों के साथ संवाद करते हुए उन्होने कहा कि हाल ही में लगभग दस करोड़ की लागत से मंगापुर में स्टेडियम की मंजूरी खेल के क्षेत्र के साथ युवाओं को विभिन्न भर्तियों में भी शारीरिक ऊर्जा मिलने में लाभप्रद होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं कृषि क्षेत्र में करोड़ो की लागत से कृषि कल्याण केन्द्र के भी निर्माण से क्षेत्रीय किसानों को खेती के क्षेत्र में सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होने कहा कि सांसद प्रमोद तिवारी के सहयोग से रामपुरखास को विकास तथा सुरक्षा व शांति के वातावरण से आदर्श क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। एक दिवसीय दौरे में उन्होने लालगंज में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि पेपरलीक पर संसद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस छात्रों के साथ हुए अन्याय का मोदी सरकार से जबाब मांग रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार अभी भी जबाबदेही लेने से कतरा रही है। सीएलपी नेता मोना ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर में चढ़ावा चंदा चोरी के मामले को भी गंभीर ठहराते हुए कहा कि कांग्रेस विधानसभा सत्र में प्रदेश सरकार के गैर जबाबदेही का मुद्दा जोर शोर से उठाएगी। बाबा घुइसरनाथ धाम में दर्शन पूजन करते हुए विधायक आराधना मिश्रा मोना ने यहां आज गुरूवार से श्रावण माह को लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी अवलोकन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, लालगंज प्रमुख अमित सिंह पंकज, सांगीपुर प्रमुख अशोक सिंह बबलू, मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल, केडी मिश्र, आशीष उपाध्याय, पप्पू तिवारी, छोटे लाल सरोज, दृगपाल यादव, भुवनेश्वर शुक्ल, रवीन्द्र मिश्र, डॉ0 अमिताभ शुक्ल, रामकृपाल पासी, राकेश चतुर्वेदी, धर्मपाल गौतम, शेरू खां, महेन्द्र प्रताप सिंह, संतराम चौरसिया, लालजी पाण्डेय, इंद्र नारायण शुक्ल, त्रिभु तिवारी, मुरलीधर तिवारी, अभिनव शुक्ल, अतुल शुक्ला, अक्षत तिवारी, सिंटू मिश्र, रामू मिश्र, राजू पाण्डेय, हृदय नारायण मिश्र, बृजेश द्विवेदी, राजेश शुक्ला आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 22:12:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>वांगचुक का अनशन समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div class="m_-2093172014009432956WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक और युवाओं के बढ़ते असंतोष को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। इस आंदोलन को नई ऊर्जा तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi">  दिनों तक चले इस अनशन ने सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया और आम जनता का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित किया। अब जब सोनम वांगचुक ने सरकार से कुछ आश्वासनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह</span></p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184009/wangchuks-fast-ends"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="m_-2093172014009432956WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक और युवाओं के बढ़ते असंतोष को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना दिया है। इस आंदोलन को नई ऊर्जा तब मिली जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों तक चले इस अनशन ने सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया और आम जनता का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित किया। अब जब सोनम वांगचुक ने सरकार से कुछ आश्वासनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इससे छात्र आंदोलन कमजोर पड़ जाएगा या फिर आंदोलन किसी नए चरण में प्रवेश करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है। किसी भी बड़े जन आंदोलन का भविष्य केवल एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसकी जड़ें कितनी गहरी हैं और लोगों का समर्थन कितना व्यापक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अधिक महत्वपूर्ण होता है। सोनम वांगचुक ने अपना अनशन सरकार से बातचीत और कुछ लिखित आश्वासनों के बाद समाप्त किया। बताया गया कि सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे बिंदुओं पर सहमति जताई। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह "भूख का अंत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जवाबदेही की शुरुआत" है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंदोलन से जुड़े छात्र संगठनों और युवा नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल अनशन समाप्त होने का अर्थ आंदोलन समाप्त होना नहीं है। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी अन्य प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक विरोध जारी रहेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास भी बताता है कि कई आंदोलनों में किसी प्रमुख नेता का अनशन समाप्त होने के बाद भी आंदोलन जारी रहा है। कई बार अनशन केवल सरकार का ध्यान आकर्षित करने का माध्यम होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि असली संघर्ष उसके बाद शुरू होता है। यदि जनता और आंदोलनकारी संगठित रहें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन आगे भी प्रभावी बना रह सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी सच है कि सोनम वांगचुक इस आंदोलन का एक बड़ा नैतिक चेहरा बन चुके थे। उनके अनशन ने पूरे देश में छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उनके अनशन समाप्त होने के बाद कुछ लोगों में यह धारणा बन सकती है कि अब सरकार और आंदोलन के बीच संवाद शुरू हो गया है। इससे कुछ प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम हो सकता है और आंदोलन की तीव्रता अस्थायी रूप से घट सकती है। सरकार के लिए भी यह एक अवसर है। यदि वह अपने आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाती है और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन धीरे-धीरे शांत हो सकता है। लेकिन यदि वादे केवल आश्वासन बनकर रह जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन पहले से अधिक व्यापक रूप ले सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। विभिन्न विपक्षी दल छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है। इस पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह केवल एक परीक्षा या एक पेपर लीक का मुद्दा नहीं रह गया है। यह युवाओं के भविष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है। यही कारण है कि आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ा और इसमें केवल छात्र ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अभिभावक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षाविद और समाज के अन्य वर्ग भी शामिल होने लगे। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने से छात्र आंदोलन खत्म हो जाएगा। अधिक संभावना यही है कि आंदोलन का स्वरूप बदल सकता है। सड़क पर विरोध के साथ-साथ अब वार्ता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानूनी प्रक्रिया और नीतिगत सुधारों की मांग पर भी अधिक जोर दिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि सरकार और छात्र संगठनों के बीच सार्थक संवाद आगे बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो समाधान की संभावना मजबूत हो सकती है। लेकिन यदि अपेक्षित सुधार नहीं हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आंदोलन फिर से तेज हो सकता है। सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल समाप्त करना आंदोलन का अंत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक नए चरण की शुरुआत माना जा सकता है। इससे तत्काल आंदोलन की रणनीति में बदलाव संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन छात्रों की मूल समस्याएं और उनकी मांगें अभी भी कायम हैं। इसलिए आने वाले दिनों में यह सरकार की कार्रवाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवाद की गंभीरता और सुधारों की गति पर निर्भर करेगा कि यह आंदोलन शांत होता है या फिर और व्यापक रूप लेता है।</span></p>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 16:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कानपुर में उठी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर के अध्यक्ष हाजी फजल महमूद के नेतृत्व में आज पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था, लगातार हो रहे पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और छात्रों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा। ज्ञापन जिलाधिकारी की प्रतिनिधि शिखा शुक्ला, एसीएम-6 को सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर हाजी फजल महमूद ने कहा कि आज देश का छात्र अपने भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा परेशान है। मेहनत से पढ़ाई करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य लगातार पेपर लीक और परीक्षाओं में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183816/demand-for-resignation-of-education-minister-raised-in-kanpur"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002112938.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर के अध्यक्ष हाजी फजल महमूद के नेतृत्व में आज पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने देश की बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था, लगातार हो रहे पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और छात्रों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ के विरोध में राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा। ज्ञापन जिलाधिकारी की प्रतिनिधि शिखा शुक्ला, एसीएम-6 को सौंपा गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर हाजी फजल महमूद ने कहा कि आज देश का छात्र अपने भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा परेशान है। मेहनत से पढ़ाई करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य लगातार पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ियों की वजह से बर्बाद हो रहा है, लेकिन केंद्र सरकार जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि बार-बार परीक्षा रद्द होने से छात्रों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं और उनका भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठता जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी केंद्र सरकार से पूछना चाहती है कि आखिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है। जब देशभर के छात्र परेशान हैं और लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, तब भी सरकार न किसी की जिम्मेदारी तय कर रही है और न ही शिक्षा मंत्री से इस्तीफा ले रही है। सरकार को देश के युवाओं के भविष्य के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाजी फजल महमूद ने कहा कि आज जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस के जरिए छात्रों के साथ बेहद बर्बर व्यवहार किया। अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सरकार ने छात्रों की बात सुनने के बजाय उन पर लाठियां चलवाकर अपनी तानाशाही सोच का परिचय दिया है। समाजवादी पार्टी इस घटना की कड़ी निंदा करती है और पूरे मामले की न्यायिक जांच तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती है।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अध्यक्ष हाजी फजल महमूद,पूर्व विधायक सतीश निगम,वरिष्ठ उपाध्यक्ष शैलेंद्र यादव मिन्टू,महासचिव संजय सिंह बंटी सेंगर,के के शुक्ला,दीपक खोटे,शादाब आलम,सुधांशु मिश्रा,इशरत इराकी,मेराज अहमद आदि लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:26:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूपी का चुनावी मैदान: मुकाबला फिर से भाजपा बनाम सपा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi">  साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi">  का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi">  के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi">  सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो।</span>'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182451/up-electoral-battle-again-between-bjp-vs-sp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं खासकर अपने कड़े फैसले को लेकर। इसलिए विधानसभा चुनाव के गणित को अलग तरीकों से देखना होगा। भाजपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रिपल अटैक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की तैयारी- भाजपा यूपी में </span>2017<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। उसका कोर नैरेटिव </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> चीजों पर टिका है: हिंदुत्व + विकास: अयोध्या में राम मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काशी विश्वनाथ कॉरिडोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज कुंभ को भाजपा अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। साथ में एक्सप्रेसवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोएडा फिल्म सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे विकास प्रोजेक्ट फ्रंट पर हैं। लॉ एंड ऑर्डर: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया राज खत्म</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बुलडोजर मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी हथियार बना है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक इसे कानून-व्यवस्था की गारंटी के रूप में बेचा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र + राज्य का तालमेल: मोदी का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर और योगी का चेहरा राज्य स्तर पर। यह </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' 2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में कुछ सीटों पर झटका खाने के बाद भी संगठन के लिए सबसे बड़ा भरोसा है। भाजपा की चुनौती: किसानों की नाराजगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और आरक्षण जैसे मुद्दे। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में पिछड़ा-दलित वोट में हुई सेंध को वापस लाना संगठन की प्राथमिकता है। सपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">फॉर्मूले से वापसी की कोशिश- अखिलेश यादव ने </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद अपनी राजनीति को पूरी तरह रीसेट किया। सपा अब </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एम-वाई समीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से आगे बढ़कर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी पिछड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यक के फॉर्मूले पर खेल रही है। सोशल इंजीनियरिंग: भाजपा के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-यादव </span>OBC + <span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-जाटव दलित</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल को काटने के लिए सपा ने कुर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निषाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाटव के अलावा मुस्लिम वोट को एकजुट करने की कोशिश की। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में इसका असर दिखा भी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और महंगाई: पेपर लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और महंगाई को सपा मुख्य मुद्दा बना रही है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी भत्ता</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुरानी पेंशन बहाली जैसे वादे इसी दिशा में हैं। अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व: मंदिर जाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कावड़ यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और समाजवादी पीडीए पंचायत से सपा उस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">तुष्टीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के टैग को तोड़ने की कोशिश कर रही है जो उसे पहले घेरता था। सपा की चुनौती: संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवारवाद के आरोप से बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मुस्लिम+यादव के बाहर दूसरे पिछड़ों को स्थायी तौर पर जोड़ना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी दल कहाँ हैं</span>? - <span lang="hi" xml:lang="hi">बसपा: मायावती अभी भी दलित वोट की सबसे बड़ी ध्रुव हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर </span>2022 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में उनका वोट बैंक खिसका। अगर वो अकेले लड़ती हैं तो वो भाजपा या सपा में से एक का नुकसान करेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर खुद सत्ता की रेस से बाहर दिख रही हैं। कांग्रेस: राहुल-प्रियंका के यूपी फोकस के बाद भी संगठन जमीन पर कमजोर है। वो कुछ सीटों पर सपा को फायदा या नुकसान दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मुख्य मुकाबला नहीं। </span>RLD + <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य: जयंत चौधरी </span>NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">में हैं। निषाद पार्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपना दल भाजपा के साथ। ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा के साथ। ये सब वोट कटवा या वोट ट्रांसफर का काम करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर फ्रेम भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा ही रहेगा। तो फैसला क्या होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी में चुनाव हमेशा जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और कानून-व्यवस्था के मिश्रण से तय होता है। </span>2027 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी फ्रेम यही रहेगा। भाजपा का दांव: हिंदुत्व + विकास + लॉ एंड ऑर्डर + मोदी-योगी का डबल चेहरा। सपा का दांव : पीडीए एकता + बेरोजगारी-महंगाई + </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">की मोमेंटम। बसपा का वोट जिस तरफ शिफ्ट हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया </span>vs OBC-<span lang="hi" xml:lang="hi">दलित-मुस्लिम का ध्रुवीकरण जिस हद तक हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी पर सीटों का गणित बनेगा। जमीन पर चाहे जितने दल पोस्टर लगाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोटर के दिमाग में लड़ाई दो ही खेमों के बीच है। एक तरफ योगी-मोदी की भाजपा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ अखिलेश की सपा। यूपी </span>2027 = <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा। बाकी सब असर डालने वाले खिलाड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य खिलाड़ी ये दो ही हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182451/up-electoral-battle-again-between-bjp-vs-sp</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्या को लेकर त्याग पत्र दें धर्मेन्द्र प्रधान-पुनीत पाठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में कांग्रेस कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता पुनीत पाठक ने कहा कि पेपरलीक मामलों में केन्द्र सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग पत्र की मांग को अनसुना कर देना चिन्ताजनक है। कहा कि कांग्रेस लगातार शिक्षा के सवाल को लेकर संघर्षरत है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपरलीक के मामले को प्रमुखता से उठाया, छात्रों का हौसला बढाया और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों से मिले किन्तुं परीक्षा में सुझाव देने वाले प्रधानमंत्री खामोश हैं और अनगिनत खामियों के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182057/dharmendra-pradhan-puneet-pathak-should-resign-over-paper-leak-and-suicide"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260624-wa0096.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में कांग्रेस कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता पुनीत पाठक ने कहा कि पेपरलीक मामलों में केन्द्र सरकार की चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है। कुछ छात्रों की आत्महत्या और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग पत्र की मांग को अनसुना कर देना चिन्ताजनक है। कहा कि कांग्रेस लगातार शिक्षा के सवाल को लेकर संघर्षरत है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पेपरलीक के मामले को प्रमुखता से उठाया, छात्रों का हौसला बढाया और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों से मिले किन्तुं परीक्षा में सुझाव देने वाले प्रधानमंत्री खामोश हैं और अनगिनत खामियों के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा त्याग पत्र न दिया जाना लोकतांत्रिक नैतिकता के विरूद्ध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुये पुनीत पाठक ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट परीक्षा के अलावा सीबीएससी की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में चाहे लेखपाल भर्ती परीक्षा हो, यूपीएसआई, पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा हो, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा हो. एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा हो, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा हो, ऐसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के माध्यम से भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयीं। हाल ही में हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा आवाज उठाने एवं सड़कों पर संघर्ष करने के चलते सरकार को पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कांग्रेस जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। राजस्थान में प्रदीप मेघवाल, दिल्ली में अंशिका पाण्डेय, उ०प्र० में रितिक मिश्रा व शिवानी यादव, गोवा में सिद्धार्थ हेगडे, कर्नाटक में भाग्यश्री, मध्य प्रदेश में आकांक्षा चतुर्वेदी, राजस्थान में उमेश माली और रेणु मीणा, उत्तराखण्ड में रिया कुमारी थापा, तमिलनाडु में अनुकीर्तना, गुजरात में कहान पटेल ने मानसिक तनाव में अपनी जान दे दी।दुर्भाग्यपूर्ण है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र छपने के बाद बिचौलियों के जरिए परीक्षा से पहले बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र बेंचे जाते हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जांच में कुछ छात्रों ने बताया है कि उन्होने लीक पेपर के लिए 25हजार से 40 लाख रूपये तक चुकाये। पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं यानी लगभग हर वर्ष दो पेपर लीक हुए हैं। अब तक देश भर में लगभग 90 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर है। कांग्रेस इन सवालों को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है।कांग्रेस नेता वृजेश आर्य, शौकत अली नन्हू, डा. वाहिद अली सिद्दीकी , संदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ एक वसूली तन्त्र बनकर रह गया है। इन्हीं पीड़ाओं को लेकर राहुल गांधी पूरे देश में छात्रों की गूंज कार्यकम अभियान के माध्यम से निष्पक्ष और सस्ती-बेहतर शिक्षा प्रणाली की आवाज बनेंगे। छात्रों की गूंज अभियान पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के अग्रिम संगठन एनएसयूआई और युवा और युवा कांग्रेस के माध्यम से चलाया जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से साधू शरन आर्य, अलीम अख्तर, सुधीर यादव, राहुल चौधरी, प्रशान्त पाठक, संजय कुमार, अवनीश पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 16:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>​&quot;प्रतियोगी परीक्षाओं का निरस्तीकरण और परीक्षार्थियों की मनोदशा&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">​प्रतियोगी परीक्षाएँ आज केवल आजीविका प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का मुख्य द्वार भी हैं। इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना युवाओं के सपनों, आत्मसम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने का आधार बन चुका है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहकर कठिन परिश्रम, आर्थिक संघर्ष और मानसिक दबाव के बीच तैयारी करते हैं। ऐसे में जब कोई प्रश्नपत्र लीक होता है या अनियमितताओं के कारण परीक्षा निरस्त की जाती है, तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित नहीं रहता।</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179254/cancellation-of-competitive-examinations-and-the-mood-of-the-candidates"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/exam-2_20260513024607.webp" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​प्रतियोगी परीक्षाएँ आज केवल आजीविका प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई हैं, बल्कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का मुख्य द्वार भी हैं। इन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना युवाओं के सपनों, आत्मसम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की दिशा तय करने का आधार बन चुका है। लाखों विद्यार्थी वर्षों तक अपने घर और परिजनों से दूर रहकर कठिन परिश्रम, आर्थिक संघर्ष और मानसिक दबाव के बीच तैयारी करते हैं। ऐसे में जब कोई प्रश्नपत्र लीक होता है या अनियमितताओं के कारण परीक्षा निरस्त की जाती है, तो उसका प्रभाव केवल प्रशासनिक निर्णयों तक सीमित नहीं रहता। इसका सर्वाधिक प्रहार परीक्षार्थियों की मनोदशा पर पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​विशेषकर वे परीक्षार्थी अधिक आहत होते हैं, जिनके पेपर अच्छे गए थे और जिनके चयन की प्रबल संभावना थी। उनके मन में कई कई  तरह के प्रश्न जन्म लेने लगते हैं: क्या आगामी परीक्षा का स्तर पहले से कठिन होगा? क्या वे पुनः उसी दक्षता के साथ प्रदर्शन कर पाएंगे? वहीं दूसरी ओर, जिनके पेपर अच्छे नहीं हुए थे, उनके लिए यह एक नए अवसर के रूप में आता है। हालांकि, परीक्षा के बाद जो मानसिक विश्राम की स्थिति आती है, उससे निकलकर पुनः उसी लय और एकाग्रता के साथ परीक्षा तैयारी करना एक बड़ी चुनौती होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में, जहाँ सीमित अवसरों के बीच आरक्षण नीति और तीव्र प्रतिस्पर्धा मौजूद है, इन परीक्षाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। एक-एक पद के लिए लाखों अभ्यर्थी संघर्ष करते हैं। कई परिवार कर्ज लेकर बच्चों को बड़े शहरों में कोचिंग कराते हैं। ऐसी स्थिति में परीक्षा का निरस्त होना उनके लिए केवल एक सूचना नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और आर्थिक आघात होता है।​जब परीक्षा निरस्त होती है, तो परीक्षार्थियों में गहरा मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। वर्षों की तैयारी अचानक निरर्थक लगने लगती है। नई तिथि की अनिश्चितता और फिर से उसी दबाव भरे चक्र में लौटना अत्यंत कष्टकारी होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई परीक्षार्थी अवसाद , निराशा और क्रोध का शिकार हो जाते हैं। विशेष रूप से वे अभ्यर्थी, जो आर्थिक रूप से विपन्न हैं या अपनी आयु-सीमा के अंतिम पड़ाव पर हैं, उनके लिए यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक होती है। उन्हें महसूस होता है कि व्यवस्था की लापरवाही ने उनकी मेहनत का मूल्य छीन लिया है।​इसका दूसरा बड़ा प्रभाव व्यवस्था के प्रति अविश्वास के रूप में प्रकट होता है। बार-बार पेपर लीक और भ्रष्टाचार की खबरें युवाओं का भरोसा चयन प्रणाली से उठा देती हैं। जब ईमानदार परिश्रम का परिणाम संदिग्ध हो जाए, तो समाज में एक नैतिक संकट उत्पन्न होना स्वाभाविक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समस्या विकराल होती जा रही है। अनिद्रा, चिंता  और सामाजिक अलगाव के साथ-साथ कई बार सोशल मीडिया पर फैली अफवाहें तनाव को और बढ़ा देती हैं। अत्यंत संवेदनशील मामलों में यह हताशा आत्मघाती विचारों तक ले जाती है, जो राष्ट्र के लिए चिंताजनक है।​इसके साथ ही, आर्थिक क्षति भी एक बड़ा पक्ष है। विद्यार्थियों को यात्रा, आवास और अध्ययन सामग्री पर बार-बार व्यय करना पड़ता है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह दोहरा आर्थिक बोझ उनके भविष्य की योजनाओं को डगमगा देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">​इस समस्या के समाधान के लिए परीक्षा नियामक निकायों में स्वच्छ छवि वाले और ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति अनिवार्य है। इसके साथ ही आवश्यक हैं ​(अ)नकल माफिया और दोषियों के विरुद्ध त्वरित अदालती कार्यवाही और कठोर सजा प्रावधान(ब) प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी और आधुनिक तकनीक का उपयोग।(स)परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और कोचिंग सेंटरों की निगरानी व जवाबदेही सुनिश्चित करना।(द) परीक्षार्थियों के लिए सरकारी स्तर पर हेल्पलाइन और परामर्श की व्यवस्था।</div>
<div style="text-align:justify;">​</div>
<div style="text-align:justify;">अतः प्रतियोगी परीक्षाओं को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर 'राष्ट्रीय प्रतिभा' के संरक्षण की प्रक्रिया समझा जाना चाहिए। यदि देश का युवा व्यवस्था पर विश्वास करेगा, तभी वह सकारात्मक ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान दे पाएगा। पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध परीक्षा प्रणाली आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
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<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 21:25:33 +0530</pubDate>
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