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                <title>प्रेरक विचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>प्रेरक विचार RSS Feed</description>
                
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                <title>संतराम बी०ए० जन चेतना समिति द्वारा संतराम बी०ए०का 38 वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 31 मई 2026 संतराम बी०ए० जन चेतना समिति के तत्वाधान में आज हरिहर नगर के इंदिरा नगर में महान समाज सुधारक जाति -पाति तोड़क मंडल के संस्थापक एवं स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक परम श्रद्धेय संतराम बी०ए० का 38 वां परिनिर्वाण दिवस श्रद्धा एवं संकल्प के साथ बनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सतीश चंद्र प्रजापति राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक समझदार पार्टी  एवं अरविंद कुमार प्रजापति द्वारा अध्यक्षता संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ संतराम बी०ए० जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने उद्बोधन में सतीश चंद्र प्रजापति जी ने संतराम</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180891/the-38th-death-anniversary-of-santram-ba-was-celebrated-by"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/530579-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>राजधानी लखनऊ में 31 मई 2026 संतराम बी०ए० जन चेतना समिति के तत्वाधान में आज हरिहर नगर के इंदिरा नगर में महान समाज सुधारक जाति -पाति तोड़क मंडल के संस्थापक एवं स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक परम श्रद्धेय संतराम बी०ए० का 38 वां परिनिर्वाण दिवस श्रद्धा एवं संकल्प के साथ बनाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सतीश चंद्र प्रजापति राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक समझदार पार्टी  एवं अरविंद कुमार प्रजापति द्वारा अध्यक्षता संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ संतराम बी०ए० जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने उद्बोधन में सतीश चंद्र प्रजापति जी ने संतराम बी०ए०जी को महान व्यक्तित्व के साथ एक महान विचारक थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपना पूरा जीवन जाति-पात के भेदभाव को मिटाने और  महिलाओं की शिक्षा के प्रबल समर्थक। आज उनके विचार उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर एस.एन. कश्यप, सतीश कुमार कश्यप, राजीव रतन चन्द्र अति पिछड़ा महासभा समाज के सचिव,</div>
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<div>जयराम प्रजापति, अरविंद कुमार  द्वारा  कार्यक्रम की अध्यक्षता, श्यामलाल महासचिव द्वारा मंच का संचालन सर्वश्री बलिराम प्रजापति, राम अचल प्रजापति, राम आधार प्रजापति, शांति स्वरूप वर्मा एवं अन्य स्थानीय नागरिक एवं महिलाएं  उपस्थित रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने संतराम बी०ए० के जीवन संघर्ष उनके सामाजिक योगदान एवं क्रांतिकारी विचारों पर प्रकाश डाला और सदस्यों ने उनके आदर्श विचारों को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविंद कुमार प्रजापति अधीक्षण अभियंता सेवानिवृत्त द्वारा महान संत के विचारों एवं कृतियों पर प्रकाश डाला गया तथा उनको उनके विचारों को अपने जीवन में धारण करने और उन पर चलने का समाज के लोगों से विनम्र आग्रह किया।</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 21:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से खुलते बड़े सफलता के द्वार।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178860/small-continuous-efforts-open-doors-to-big-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/47.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर बना दिया,<br />छोटे-छोटे प्रयासों ने आदमी का मुकद्दर बना दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आज का समय त्वरित परिणामों का समय माना जाता है। लोग चाहते हैं कि उन्हें बिना संघर्ष के तुरंत सफलता मिल जाए। किंतु प्रकृति का नियम है कि हर बड़ी उपलब्धि के पीछे लंबे समय तक किया गया श्रम और अनुशासन छिपा होता है। किसान बीज बोने के बाद प्रतिदिन उसकी देखभाल करता है। वह जानता है कि फसल एक दिन में नहीं उगेगी, परंतु यदि उसका प्रयास निरंतर रहेगा तो एक दिन खेत अवश्य लहलहाएगा। यही नियम मनुष्य के जीवन पर भी लागू होता है।<br />महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार करने से पहले हजारों बार असफलताएँ झेली थीं। जब उनसे पूछा गया कि वे हजार बार असफल कैसे हुए, तब उन्होंने कहा कि</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हजार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।<br />यह कथन हमें सिखाता है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक चरण होती है। यदि मनुष्य हर असफलता के बाद पुनः प्रयास करता रहे, तो अंततः सफलता उसके कदम चूमती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार महात्मा गांधी ने भी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते हुए भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और सतत प्रयास किसी भी बड़ी शक्ति को झुका सकते हैं। गांधीजी का प्रसिद्ध कथन है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कथन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करता है, तो प्रारंभ में लोग उसका उपहास उड़ाते हैं, किंतु अंततः वही व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />          भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी छोटे-छोटे प्रयासों की महान कहानी है। साधारण परिवार में जन्म लेने वाले कलाम साहब ने कठिन परिस्थितियों में समाचार पत्र बाँटे, पढ़ाई की और अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। निरंतर परिश्रम और अनुशासन के बल पर वे “मिसाइल मैन” कहलाए और देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे। उन्होंने कहा था</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सपना वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह है जो आपको सोने न दे। उनका यह विचार युवाओं को निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। केवल सपना देखने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए प्रतिदिन कर्म करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे आवश्यक है एक स्पष्ट लक्ष्य। बिना लक्ष्य के प्रयास दिशाहीन हो जाते हैं। जिस प्रकार नाविक बिना दिशा के समुद्र में भटक जाता है, उसी प्रकार लक्ष्यहीन मनुष्य भी अपने जीवन की ऊर्जा व्यर्थ कर देता है। यदि मनुष्य एक निश्चित लक्ष्य तय कर ले और उस दिशा में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कार्य करता रहे, तो धीरे-धीरे सफलता उसके निकट आने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इतिहास गवाह है कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास और निरंतर कर्म का संदेश दिया था। उनका प्रसिद्ध वाक्य—<br />“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह केवल प्रेरणादायक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का मूल मंत्र है। मनुष्य को कठिनाइयों, आलोचनाओं और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का मार्ग है।<br />        प्रकृति भी हमें यही शिक्षा देती है। नदी पर्वतों से टकराकर रुकती नहीं, बल्कि अपना मार्ग स्वयं बना लेती है। चींटी बार-बार गिरने के बाद भी दीवार पर चढ़ने का प्रयास करती रहती है। सूर्य प्रतिदिन उगता है और अंधकार को दूर करता है। संसार का प्रत्येक जीव अपने सतत कर्म से जीवन का संतुलन बनाए रखता है। मनुष्य यदि प्रकृति से यह सीख ले ले कि निरंतरता ही सफलता का रहस्य है, तो उसका जीवन बदल सकता है।<br />            आज अनेक विद्यार्थी, युवा और कर्मचारी थोड़ी असफलता मिलते ही निराश हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि शायद सफलता उनके भाग्य में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि सफलता भाग्य से अधिक परिश्रम और निरंतरता पर निर्भर करती है। भाग्य अवसर दे सकता है, किंतु उस अवसर को उपलब्धि में बदलने का कार्य केवल परिश्रम करता है।नेल्सन मंडेला ने 27 वर्षों तक जेल में रहने के बाद भी अपने संघर्ष को नहीं छोड़ा। अंततः वही व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति बना और विश्वभर में मानवाधिकारों का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा था<br />मैं कभी नहीं हारता। या तो जीतता हूँ या सीखता हूँ।<br />यह विचार मनुष्य को हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देता है।<br />वास्तव में बड़ी सफलता कोई कठिन कार्य नहीं है। आवश्यकता केवल मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट योजना, अनुशासन और निरंतर प्रयास की होती है। यदि मनुष्य प्रतिदिन अपने लक्ष्य की ओर एक छोटा कदम भी बढ़ाता रहे, तो समय के साथ वही कदम उसे महान उपलब्धियों तक पहुँचा देते हैं।<br />अतः यह कहना बिल्कुल उचित है कि छोटे-छोटे निरंतर प्रयास ही बड़ी सफलताओं के द्वार खोलते हैं। सफलता अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे हमारे प्रयासों की सीढ़ियों पर चढ़कर हमारे जीवन में प्रवेश करती है। इसलिए मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए। कठिनाइयाँ आएँगी, असफलताएँ मिलेंगी, लोग आलोचना करेंगे, किंतु जो व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है और निरंतर कर्म करता रहता है, वही अंततः इतिहास रचता है। यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक,स्तंभकार,रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</p>
<div style="text-align:justify;">कविता,</div>
<div style="text-align:justify;">संजीव-नी।<br /><br />सफलता के इंद्रधनुष।<br /><br />धीरे-धीरे<br />ओस की बूंदों-सी<br />मन के आँगन में उतरती सफलता।<br />वह शोर मचाकर नहीं आती,<br />न ही किसी ऊँचे<br />सिंहासन पर विराज कर<br />अपना परिचय देती ।<br /><br />वो चुपचाप<br />थके हुए हाथों की लकीरों में<br />मुस्कान बनकर खिलती ।<br /><br />नन्हे-नन्हे प्रयासों की<br />सुगंध जब<br />हर सुबह के साथ<br />थोड़ा-थोड़ा आकाश थामने लगती ,<br />तब कहीं जाकर<br />सफलता का इंद्रधनुष<br />जीवन की देहरी पर उतरता है।<br /><br />एक दीपक<br />हर रोज़ थोड़ा-सा दीप्त होता ,<br />तभी तो<br />अंधेरों से भरी रात<br />धीरे-धीरे उजाले में<br />परिणीत होती।<br /><br />कोई नदी भी<br />पहले ही सागर नहीं बनती,<br />पहले<br />पत्थरों से बातें करती हुई,<br />फिर राहों को सहलाती हुई,<br />धीमे-धीमे मचलती आगे बढ़ती।<br /><br />सपनों की मिट्टी में<br />विश्वास के बीज बोने पड़ते ,<br />फिर धैर्य की फुहारें<br />उन्हें सींचती रहती ,<br />तब<br />उम्मीद के फूलों पर<br />सफलता की खुशबू पनपती ।<br /><br />कितना सुंदर लगता<br />जब संघर्ष भी<br />प्रार्थना-सा शांत हो जाए,<br />और मेहनत<br />मां की लोरी सी<br />भली लगने लगे।<br /><br />सफलता<br />एक दिन में नहीं,<br />पर एक दिन<br />ज़रूर मिलती<br />जब मन थककर,<br />रुककर चलना नहीं छोड़ता,<br />जब उम्मीद<br />आख़िरी दीप की तरह<br />धीमे-धीमे जलती रहती ।<br /><br />तब जीवन के नभ पर<br />रंग बिखेरता<br />सफलता का वह इंद्रधनुष,<br />जो संदेश देता<br />छोटे-छोटे कदम ही<br />एक दिन<br />लंबी यात्राओं का<br />उत्सव बन जाते ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:58:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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