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                <title>अनुशासन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अनुशासन RSS Feed</description>
                
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                <title>खेल युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास का कर रहे हैं संचार: डाक्टर राजेश्वर सिंह </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरोजनीनगर विधायक डॉ राजेश्वर सिंह द्वारा आयोजित सरोजनी नगर स्पोर्ट्स लीग के अंतर्गत खेले जा रहे इंटर स्कूल एवं इंटर स्पोर्ट्स क्लब क्रिकेट मुकाबले लगातार क्षेत्र के युवाओं में खेल भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास का संचार कर रहे हैं। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंटर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता के दूसरे मुकाबले में कृष्णा पब्लिक स्कूल ने रेड रोज इंटर कॉलेज को 7 विकेट से पराजित किया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए रेड रोज इंटर कॉलेज की टीम मात्र 38 रन पर ऑल आउट हो गई और कृष्णा पब्लिक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182233/dr-rajeshwar-singh-is-instilling-discipline-and-confidence-in-sports"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000455482.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरोजनीनगर विधायक डॉ राजेश्वर सिंह द्वारा आयोजित सरोजनी नगर स्पोर्ट्स लीग के अंतर्गत खेले जा रहे इंटर स्कूल एवं इंटर स्पोर्ट्स क्लब क्रिकेट मुकाबले लगातार क्षेत्र के युवाओं में खेल भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास का संचार कर रहे हैं। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इंटर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता के दूसरे मुकाबले में कृष्णा पब्लिक स्कूल ने रेड रोज इंटर कॉलेज को 7 विकेट से पराजित किया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए रेड रोज इंटर कॉलेज की टीम मात्र 38 रन पर ऑल आउट हो गई और कृष्णा पब्लिक स्कूल को 39 रनों का लक्ष्य मिला। लक्ष्य का पीछा करते हुए कृष्णा पब्लिक स्कूल ने शानदार बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन कर आसानी से जीत दर्ज की। इस मैच में अंशुल ने 4 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तीसरे मुकाबले में पीजेंट डे एकेडमी इंटर कॉलेज और यूनिवर्सल सिटी कॉन्वेंट, मौंदा के बीच रोमांचक मुकाबला खेला गया। टॉस जीतकर यूनिवर्सल सिटी कॉन्वेंट ने पहले गेंदबाज़ी का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पीजेंट डे एकेडमी इंटर कॉलेज ने 105 रन बनाए और विपक्षी टीम को 106 रनों का लक्ष्य दिया। शानदार गेंदबाज़ी के दम पर पीजेंट डे एकेडमी ने यूनिवर्सल सिटी कॉन्वेंट को 62 रनों से पराजित कर प्रभावशाली जीत दर्ज की। कृष्ण पाल ने 4 विकेट और 16 रन बनाकर ऑलराउंड प्रदर्शन किया तथा मैन ऑफ द मैच बने।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चौथे मुकाबले में के.डी. पब्लिक स्कूल की अनुपस्थिति के कारण मैच आयोजित नहीं हो सका। प्रतियोगिता नियमों के अनुसार अंबेडकर विद्या मंदिर जूनियर हाई स्कूल को वॉकओवर प्रदान कर अगले चरण में प्रवेश दिया गया। इंटर स्पोर्ट्स क्लब क्रिकेट प्रतियोगिता के अंतर्गत खेले गए मुकाबलों में भी खिलाड़ियों और क्लबों का उत्साह देखने योग्य रहा। खिलाड़ी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान अयोग्य खिलाड़ियों की सहभागिता पाए जाने पर लखनऊ लायंस क्रिकेट क्लब को अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप रणीपुर क्रिकेट क्लब को मैच प्रदान करते हुए दूसरे चरण में प्रवेश दिया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इसी क्रम में पात्रता मानकों पर खरा न उतरने के कारण लायंस 11 क्रिकेट क्लब को भी अयोग्य घोषित किया गया। प्रतियोगिता नियमों के अनुसार वेस्ट 11 क्रिकेट क्लब को वॉकओवर प्रदान कर दूसरे चरण में प्रवेश दिया गया। सातवें मुकाबले में लखनऊ नाइट राइडर्स क्रिकेट क्लब और देशी दबंग क्रिकेट क्लब के बीच मुकाबला खेला गया। टॉस जीतकर लखनऊ नाइट राइडर्स ने पहले गेंदबाज़ी करने का निर्णय लिया। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए देशी दबंग क्रिकेट क्लब ने 63 रन बनाए और 64 रनों का लक्ष्य रखा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ नाइट राइडर्स क्रिकेट क्लब ने शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 9 विकेट से एकतरफा जीत दर्ज की। आर्यन यादव के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सरोजनी नगर स्पोर्ट्स लीग आज युवाओं के लिए केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उनके सपनों, संघर्ष और प्रतिभा को नई दिशा देने का सशक्त मंच बन चुकी है। खेल मैदानों में उमड़ता उत्साह इस बात का प्रमाण है कि सरोजनीनगर का युवा खेलों के माध्यम से अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच के साथ अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:36:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देवनहरी के अमन पाल बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, बढ़ाया प्रयागराज का  मान </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181380/aman-pal-of-devnahari-became-lieutenant-in-indian-army-increased"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0087.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">थरवई थाना क्षेत्र के देवनहरी गांव के होनहार युवा अमन पाल ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे प्रयागराज जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से गांव, क्षेत्र और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों ने अमन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देवनहरी गांव निवासी अमन पाल ऐसे परिवार से आते हैं, जहां बचपन से ही देशसेवा और अनुशासन का वातावरण रहा है। उनके पिता महाराजदीन पाल पुलिस विभाग में घुड़सवार पुलिस के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता सुनीता पाल गृहणी हैं। वहीं उनके चाचा बाबादीन पाल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार के सदस्यों की राष्ट्रसेवा से प्रेरित होकर अमन ने भी सेना में अधिकारी बनने का सपना देखा और उसे साकार कर दिखाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन पाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में प्राप्त की। बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी और अनुशासित छात्र रहे हैं। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएससी में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनने का था और उन्होंने इस दिशा में लगातार मेहनत जारी रखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत रहते हुए अमन ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। एनडीए में चयन के बाद उन्होंने कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अपनी योग्यता, परिश्रम तथा दृढ़ संकल्प के बल पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद हासिल करने में सफलता प्राप्त की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन बताते हैं कि उनके पिता की तैनाती पुलिस लाइन में होने के कारण उनका बचपन कैंट क्षेत्र के वातावरण में बीता। वहां सेना के अधिकारियों की कार्यशैली, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को देखकर उनके मन में भी सेना में अधिकारी बनने की प्रेरणा जगी। यही प्रेरणा आगे चलकर उनके जीवन का लक्ष्य बन गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपनी सफलता पर अमन पाल ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता, परिवार के सदस्यों और शिक्षकों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं से भी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने का संदेश दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमन की इस उपलब्धि से देवनहरी गांव में हर्ष व्याप्त है। ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने इसे पूरे इलाके के लिए गौरव  बताया है। लोगों का कहना है कि अमन की सफलता से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी देशसेवा और उच्च पदों पर पहुंचने की प्रेरणा मिलेगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:45:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से खुलते बड़े सफलता के द्वार।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">  मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178860/small-continuous-efforts-open-doors-to-big-success"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/47.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> मानव जीवन संघर्ष, परिश्रम, धैर्य और निरंतर प्रयासों की एक लंबी कहानी है। संसार में जितने भी महान व्यक्ति हुए  उनकी सफलता किसी एक दिन की चमत्कारी घटना नहीं थी, बल्कि वर्षों तक किए गए छोटे-छोटे सतत प्रयासों का बड़ा परिणाम थी। सफलता का कोई सुगम और सरल नहीं होता। वह धीरे-धीरे तपकर, गिरकर, संभलकर और निरंतर आगे बढ़ने से प्राप्त होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार छोटी-छोटी बूंदें मिलकर विशाल सागर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार मनुष्य के छोटे-छोटे प्रयास जीवन में बड़ी उपलब्धियों का आधार बनते हैं। किसी शायर ने कहा है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />"पानी की छोटी बूंदों ने बढ़कर समंदर बना दिया,<br />छोटे-छोटे प्रयासों ने आदमी का मुकद्दर बना दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;"><br />आज का समय त्वरित परिणामों का समय माना जाता है। लोग चाहते हैं कि उन्हें बिना संघर्ष के तुरंत सफलता मिल जाए। किंतु प्रकृति का नियम है कि हर बड़ी उपलब्धि के पीछे लंबे समय तक किया गया श्रम और अनुशासन छिपा होता है। किसान बीज बोने के बाद प्रतिदिन उसकी देखभाल करता है। वह जानता है कि फसल एक दिन में नहीं उगेगी, परंतु यदि उसका प्रयास निरंतर रहेगा तो एक दिन खेत अवश्य लहलहाएगा। यही नियम मनुष्य के जीवन पर भी लागू होता है।<br />महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन ने बिजली के बल्ब का आविष्कार करने से पहले हजारों बार असफलताएँ झेली थीं। जब उनसे पूछा गया कि वे हजार बार असफल कैसे हुए, तब उन्होंने कहा कि</p>
<p style="text-align:justify;"><br />मैं असफल नहीं हुआ, मैंने केवल हजार ऐसे तरीके खोजे जो काम नहीं करते।<br />यह कथन हमें सिखाता है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सफलता की ओर बढ़ने का एक चरण होती है। यदि मनुष्य हर असफलता के बाद पुनः प्रयास करता रहे, तो अंततः सफलता उसके कदम चूमती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार महात्मा गांधी ने भी सत्य और अहिंसा के मार्ग पर निरंतर संघर्ष करते हुए भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प और सतत प्रयास किसी भी बड़ी शक्ति को झुका सकते हैं। गांधीजी का प्रसिद्ध कथन है</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह कथन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। जब कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करता है, तो प्रारंभ में लोग उसका उपहास उड़ाते हैं, किंतु अंततः वही व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />          भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जीवन भी छोटे-छोटे प्रयासों की महान कहानी है। साधारण परिवार में जन्म लेने वाले कलाम साहब ने कठिन परिस्थितियों में समाचार पत्र बाँटे, पढ़ाई की और अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। निरंतर परिश्रम और अनुशासन के बल पर वे “मिसाइल मैन” कहलाए और देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे। उन्होंने कहा था</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सपना वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपना वह है जो आपको सोने न दे। उनका यह विचार युवाओं को निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। केवल सपना देखने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए प्रतिदिन कर्म करना पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे आवश्यक है एक स्पष्ट लक्ष्य। बिना लक्ष्य के प्रयास दिशाहीन हो जाते हैं। जिस प्रकार नाविक बिना दिशा के समुद्र में भटक जाता है, उसी प्रकार लक्ष्यहीन मनुष्य भी अपने जीवन की ऊर्जा व्यर्थ कर देता है। यदि मनुष्य एक निश्चित लक्ष्य तय कर ले और उस दिशा में प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा कार्य करता रहे, तो धीरे-धीरे सफलता उसके निकट आने लगती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इतिहास गवाह है कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास और निरंतर कर्म का संदेश दिया था। उनका प्रसिद्ध वाक्य—<br />“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह केवल प्रेरणादायक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का मूल मंत्र है। मनुष्य को कठिनाइयों, आलोचनाओं और असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का मार्ग है।<br />        प्रकृति भी हमें यही शिक्षा देती है। नदी पर्वतों से टकराकर रुकती नहीं, बल्कि अपना मार्ग स्वयं बना लेती है। चींटी बार-बार गिरने के बाद भी दीवार पर चढ़ने का प्रयास करती रहती है। सूर्य प्रतिदिन उगता है और अंधकार को दूर करता है। संसार का प्रत्येक जीव अपने सतत कर्म से जीवन का संतुलन बनाए रखता है। मनुष्य यदि प्रकृति से यह सीख ले ले कि निरंतरता ही सफलता का रहस्य है, तो उसका जीवन बदल सकता है।<br />            आज अनेक विद्यार्थी, युवा और कर्मचारी थोड़ी असफलता मिलते ही निराश हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि शायद सफलता उनके भाग्य में नहीं है। जबकि सत्य यह है कि सफलता भाग्य से अधिक परिश्रम और निरंतरता पर निर्भर करती है। भाग्य अवसर दे सकता है, किंतु उस अवसर को उपलब्धि में बदलने का कार्य केवल परिश्रम करता है।नेल्सन मंडेला ने 27 वर्षों तक जेल में रहने के बाद भी अपने संघर्ष को नहीं छोड़ा। अंततः वही व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका का राष्ट्रपति बना और विश्वभर में मानवाधिकारों का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा था<br />मैं कभी नहीं हारता। या तो जीतता हूँ या सीखता हूँ।<br />यह विचार मनुष्य को हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहने की प्रेरणा देता है।<br />वास्तव में बड़ी सफलता कोई कठिन कार्य नहीं है। आवश्यकता केवल मजबूत इच्छाशक्ति, स्पष्ट योजना, अनुशासन और निरंतर प्रयास की होती है। यदि मनुष्य प्रतिदिन अपने लक्ष्य की ओर एक छोटा कदम भी बढ़ाता रहे, तो समय के साथ वही कदम उसे महान उपलब्धियों तक पहुँचा देते हैं।<br />अतः यह कहना बिल्कुल उचित है कि छोटे-छोटे निरंतर प्रयास ही बड़ी सफलताओं के द्वार खोलते हैं। सफलता अचानक नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे हमारे प्रयासों की सीढ़ियों पर चढ़कर हमारे जीवन में प्रवेश करती है। इसलिए मनुष्य को कभी निराश नहीं होना चाहिए। कठिनाइयाँ आएँगी, असफलताएँ मिलेंगी, लोग आलोचना करेंगे, किंतु जो व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अडिग रहता है और निरंतर कर्म करता रहता है, वही अंततः इतिहास रचता है। यही जीवन का सबसे बड़ा सत्य है।<br /><br />संजीव ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिंतक,स्तंभकार,रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</p>
<div style="text-align:justify;">कविता,</div>
<div style="text-align:justify;">संजीव-नी।<br /><br />सफलता के इंद्रधनुष।<br /><br />धीरे-धीरे<br />ओस की बूंदों-सी<br />मन के आँगन में उतरती सफलता।<br />वह शोर मचाकर नहीं आती,<br />न ही किसी ऊँचे<br />सिंहासन पर विराज कर<br />अपना परिचय देती ।<br /><br />वो चुपचाप<br />थके हुए हाथों की लकीरों में<br />मुस्कान बनकर खिलती ।<br /><br />नन्हे-नन्हे प्रयासों की<br />सुगंध जब<br />हर सुबह के साथ<br />थोड़ा-थोड़ा आकाश थामने लगती ,<br />तब कहीं जाकर<br />सफलता का इंद्रधनुष<br />जीवन की देहरी पर उतरता है।<br /><br />एक दीपक<br />हर रोज़ थोड़ा-सा दीप्त होता ,<br />तभी तो<br />अंधेरों से भरी रात<br />धीरे-धीरे उजाले में<br />परिणीत होती।<br /><br />कोई नदी भी<br />पहले ही सागर नहीं बनती,<br />पहले<br />पत्थरों से बातें करती हुई,<br />फिर राहों को सहलाती हुई,<br />धीमे-धीमे मचलती आगे बढ़ती।<br /><br />सपनों की मिट्टी में<br />विश्वास के बीज बोने पड़ते ,<br />फिर धैर्य की फुहारें<br />उन्हें सींचती रहती ,<br />तब<br />उम्मीद के फूलों पर<br />सफलता की खुशबू पनपती ।<br /><br />कितना सुंदर लगता<br />जब संघर्ष भी<br />प्रार्थना-सा शांत हो जाए,<br />और मेहनत<br />मां की लोरी सी<br />भली लगने लगे।<br /><br />सफलता<br />एक दिन में नहीं,<br />पर एक दिन<br />ज़रूर मिलती<br />जब मन थककर,<br />रुककर चलना नहीं छोड़ता,<br />जब उम्मीद<br />आख़िरी दीप की तरह<br />धीमे-धीमे जलती रहती ।<br /><br />तब जीवन के नभ पर<br />रंग बिखेरता<br />सफलता का वह इंद्रधनुष,<br />जो संदेश देता<br />छोटे-छोटे कदम ही<br />एक दिन<br />लंबी यात्राओं का<br />उत्सव बन जाते ।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415,</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:58:42 +0530</pubDate>
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