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                <title>jawaharlal nehru - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>भारतवर्ष की गुरु-शिष्य सनातनी परंपरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180749/indias-guru-disciple-sanatani-tradition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करवाया था ।जब खड़कपुर आईआईटी की स्थापना की गई थी तब उन्होंने अतिथि के रूप में अपने भाषण में कहा की भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने का दायित्व इन्हीं आई,आई,टी की कक्षाओं शिक्षकों एवं छात्राओं का होगा, वे राष्ट्र को तकनीकी दिशा में मील का पत्थर बनाने में साबित होंगेl</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारत आज अंतरिक्ष की बड़ी शक्तियों की कतार में शामिल हैl इसके पीछे भारत के कई वैज्ञानिक सीवी रमन ,विक्रम साराभाई, सतीश धवन जैसे बड़े वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इसरो संस्थान है जिसकी कक्षाओं में मंगल तक भारतीय तिरंगे को लहराया. भाभा एटॉमिक परमाणु शक्ति बन गया हैl वैश्विक स्तर पर हर बड़े स्पेस रिसर्च सेंटर पर भारत की इंजीनियर और वैज्ञानिक अपनी सेवाएं दे रहे हैंl</p>
<p style="text-align:justify;">आज अमेरिका आर्थिक महाशक्ति बनने के पीछे उसके विश्वविद्यालय ,संस्थाएं हैं। हावर्ड बिजनेस स्कूल विश्व स्तरीय व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता हैl आर्थिक सामाजिक तथा वैज्ञानिक शोध संस्थाओं में अधिकाधिक धनराशि खर्च करके अमेरिका, रूस, ब्रिटेन ,चीन, ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा ने विश्व में सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी दिए हैंl यह तो तय है कि कोई भी देश का भाग्य तभी उन्नत तथा विकसित होगा जब वहां के छात्र शिक्षक एवं आमजन न्याय, समता ,प्रबुद्धता के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता रखें। आने वाली पीढ़ी यानी कि वर्तमान के बच्चे और भविष्य के नागरिक ही किसी देश का भविष्य निर्माण करते हैं और यह भी तय रहता है कि बुद्धिमान शिक्षक अपने छात्रों के माध्यम से किसी महान राष्ट्र की नींव रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी महान राष्ट्र का निर्माण रातों-रात नहीं होता है इसके लिए पीढीयो का योगदान और श्रेष्ठ शिक्षक एवं छात्रों की लग्न शीलता और मेहनत की प्रतिबद्धता होती है। 1960 और 70 के दशक में चीन में गठित सांस्कृतिक क्रांति कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों ,कारखानों को एकता में बांधकर सक्रिय नीति का प्रयोग कर सभी को एक सूत्र में बांधा गया था। जापान तो प्राथमिक कक्षाओं से उपजे राष्ट्रवाद, अनुशासन तथा कर्तव्य बोध के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रहा है, जापान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पराजय का कड़वा घूंट पीने के पश्चात कमजोर एवं मृतप्राय जापान को एक शक्तिशाली आर्थिक राष्ट्र बना दिया। इसके विपरीत वर्तमान कक्षाएं प्रेम, अनुशासन ,करुणा जैसे पाठ ना सिखा कर ईर्ष्या, कंपटीशन, हिंसा ,कटुता जैसे अध्याय सिखा कर राष्ट्र के भविष्य को गर्त में ले जा रही है ।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के अनेक विश्वविद्यालय हड़ताल ,हिंसा, जाति भेदभाव, आपत्तिजनक नारों जैसे विसंगतियों का सामना कर रहे हैं। कक्षाओं का नैतिकता, सहिष्णुता ,अनुशासन से कटाव केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में इसका फैलाव हो चुका है। अमेरिका तथा यूरोपीय देशों में स्कूलों का कक्षाओं में गोली कांड इसके बड़े विकृत उदाहरण हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने ट्रीस्ट विद डेस्टिनी के भाषण में भूख, भय ,बीमारी, अज्ञान से पूर्णता मुक्ति की बात को भारत की नियति या डेस्टिनी कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए की कक्षाओं को चरित्र निर्माण ,अनुशासन ,उत्कृष्ट नवाचार ,लोकतांत्रिक विचार संरचना का केंद्र बनाकर इसकी शिक्षा दीक्षा दी जानी चाहिए। कक्षाओं से बच्चे आर्थिक रूप से प्रौद्योगिकी स्थापित कर स्वयं अपने पैरों पर खड़े होकर आने वाले वर्षों में कई युवाओं को रोजगार देकर संपूर्ण मानवता ,पर्यावरण की रक्षा तथा राष्ट्र के उत्कर्ष को सही दिशा देने का काम करेंगे। जिससे राष्ट्रीय चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रीयता की भावना को एक मजबूत आधार प्राप्त हो सकेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:47:12 +0530</pubDate>
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                <title>रिकार्ड तोड मोदी के लिए नेहरू अब भी चुनौती !</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं और पीछे उनकी बेटी श्रीमती इंदिरा गांधी. मोदी जी ने श्रीमती इंदिरा गाँँधी के शासन का रिकार्ड पार कर लिया लेकिन वे पूरा कस-बल लगाकर भी न नेहरू जितनी कीर्ति अर्जित कर पाए और न नेहरू जितना शासन कर पाए. नेहरू ने सत्ता के साथ देश और दुनिया के दिलों पर भी शासन किया था.मोदी जी को सत्ता में रहते हुए 11 साल और 60 दिन पूरे हो चुके हैं। इस तरह उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक और रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/153476/nehru-still-challenged-for-modi-breaking-record"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-07/sdaa.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू हैं और पीछे उनकी बेटी श्रीमती इंदिरा गांधी. मोदी जी ने श्रीमती इंदिरा गाँँधी के शासन का रिकार्ड पार कर लिया लेकिन वे पूरा कस-बल लगाकर भी न नेहरू जितनी कीर्ति अर्जित कर पाए और न नेहरू जितना शासन कर पाए. नेहरू ने सत्ता के साथ देश और दुनिया के दिलों पर भी शासन किया था.मोदी जी को सत्ता में रहते हुए 11 साल और 60 दिन पूरे हो चुके हैं। इस तरह उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक और रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। पीएम मोदी अब सिर्फ जवाहरलाल नेहरू से पीछे चल रहे हैं जिन्होंने लगातार 16 साल 286 दिन तक प्रधानमंत्री की कुर्सी अपने पास रखी थी।</p>
<p><br />वैसे यह जरूर है कि दोनों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने चार बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन इतना फर्क जरूर रहा कि नेहरू लगातार जीतते रहे और सत्ता पर काबिज रहे, वहीं इंदिरा गांधी को आपातकाल के बाद कुछ समय के लिए अपनी सत्ता गंवानी पड़ी थी।लेकिन बात अगर  प्रधानमंत्री शपथ लेने की आएगी तो प्रधानमंत्री मोदी अभी भी जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से पीछे चल रहे हैं क्योंकि नेहरू और इंदिरा ने चार बार पीएम पद की शपथ ली है, ऐसे में अभी पीएम मोदी को एक बार फिर पीएम पद की शपथ लेनी होगी।वैसे इस मामले में मोदी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के पीछे चल रहे हैं,<br />मोदीजी को नेहरू और इंदिरा गांधी से बडा नेता बताने वाले उनके समर्थक रिकार्ड बनाने और कीर्ति अर्जित करने के भेद को समझ नही पा रहे.कई मामलों में उन्होंने उन दोनों को भी पीछे छोड़ दिया है। मोदी जी ने देश की आजादी की लडाई नहीं लडी. वे आपातकाल में भी जेल नहीं गये जबकि नेहरू ने टुकडों में 13साल जेलों में बिताये. उनकी बेटी इंदिरा गांधी ने भी जेल यात्राएं की. हाँ मोदीजी पिछले 24 साल से सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और लगातार चुनाव जीतते हुए आ रहे हैं।वे 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और फिर उसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली।मुमकिन है कि उन्हे जेल यात्रा पद से हटने के बाद करने का योग हो.</p>
<p><br />ये  सही है कि मोदी  पहले गैर कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार दो कार्यकाल अपने पूरे किए हैं। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी भी भाजपा नेता थे लेकिन उनका कार्यकाल सिर्फ 6 साल का रहा लेकिन अटल जी ने तीन बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, इसलिए मोदी जी का ये रिकार्ड भी बेकार गया.<br />मोदीजी को नेहरू और इंदिरा के बराबर खडा करने की कोशिश करने वाले भूल जाते हैं कि नेहरू और इंदिरा गांधी ने कभी बैशाखियों के सहारे कोई सरकार नहीं चलाई. इन दोनों के कार्यकाल में कभी 80 करोड लोग रोटी के लिए सरकार के मोहताज नहीं बने. इंदिरा गांधी ने 1971 में पाकिस्तान को तोडकर बांग्लादेश बनवाया लेकिन मोदी ने 2019  में इंदिरा गांधी की बराबरी करने की सनक में क्शमीर के ही तीन टुकड़े कर दिए, जो आज भी राज्य बनने के लिए तडप रहे हैं. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है.</p>
<p><br />नेहरू और गांधी ने कभी डबल इंजन लगाकर राज्य सरकारें नहीं चलाईं किंतु मोदी जी को मजबूरन एक के पीछे एक इंजन लगाना पडा. हाँ मोदी जी ने दुनिया के 25 देशों के नागरिक सम्मान जरूर हासिल किए लेकिन नेहरू और इंदिरा गांधी अपने ही देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान लेकर संतुष्ट रहे. मोदीजी को अब इस दिशा में मेहनत करना पडेगी, अन्यथा ब पिता-पुत्री का मुकाबला कैसे कर पाएंगे.<br />पिता -पुत्री की जोडी की बराबरी करना मोदी जी के लिए कदाचित आसान है भी नही.जैसे नेहरूजी 75 साल के होते ही परलोक चले गये. इंदिरा गांधी ने सत्ता में रहते हुए शहादत दी. इस रिकार्ड की बराबरी मोदी जी को भूलकर भी नहीं करना चाहिए, अन्यथा उनके शुभचिंतक उन्हे पानी पर चढा सकते है.नेहरू और इंदिरा गांधी ने दुश्मन के खिलाफ सीधे लडाई लडी जबकि मोदी जी सर्जीकल स्ट्राइक और आपरेशन सिंदूर से आगे नहीं बढ पाए. नेहरू और इंदिरा गांधी के समय में दुनिया के किसी भी देश ने ये दावा नहीं किया कि कोई युद्ध बंदी या सीजफायर उसने कराई है्.किंतु तीन दिन के आपरेशन सिंदूर के बाद सीजफायर को लेकर अमरीका के राष्ट्रपति दो दर्जन बार दावे कर चुके हैं.</p>
<p>ये सच है कि नेहरू और इंदिरा गांधी भारत को दुनिया की चौथी बडी अर्थव्यवस्था नही बना पाए लेकिन मोदीजी ने बना दिया. इसके लिए उन्हें बधाई दी जा सकती है, किंतु इससे भारत को मिला क्या? भारत के पास जो था, वो अस्मिता, संप्रभुता, समरसता, सब जख्मी हो चुकी है. मोदीजी के नेतृत्व में न देश हिंदू बन सका और न जैसा था वैसा रह सका. मोदीजी द्वारा बनाए गये तमाम रिकार्ड देश के लिए कितने फायदेमंद हैं इसका आकलन मोदीजी के बाद ही होगा. अभी तो जितने भी प्रयास हैं वे 'अहो रूपम, अहो ध्वनि'की कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं<br />.मोदीजी का जो असल रिकॉर्ड है उसका जिक्र किसी ने नहीं किया.मोदीजी के कार्यकाल में आजादी के बाद का सबसे बडा ककिसान आंदोलन हुआ. 750 किसान मरे.मोदी के राज में सबसे ज्यादा सांसद निलंबित हुए, सबसे ज्यादा असंवैधानिक इलेक्टोरल बांड से चुनावी चंदा वसूल किया गया.</p>
<p>सबसे ज्यादा उद्योगपति देश का धन लेकर विदेश भागे. सबसे ज्यादा कालाधन मोदीजी के राज में बढा. सबसे ज्यादा समय तक मणिपुर जला लेकिन मोदीजी वहां कभी नहीं गये. मोदीजी का ही रिकॉर्ड है कि संसद के चलते एक उप राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया. लेकिन इन रिकार्ड्स से मोदीजी की कीर्ति नहीं बढी उलटे बदनामी ही हुई. मोदी जी का सबसे बडा रिकॉर्ड ये है कि उन्होने एक भी पत्रकार वार्ता में हिस्सा नहीं लिया.बहरहाल मोदीजी को शासन करने में इंदिरा गांधी से आगे निकलने पर बधाइयाँ. वे नेहरू का भी रिकॉर्ड तोडें, पुतिन का भी तोडें, शी जिन पिंग का भी तोडें, साथ ही देश की कीर्ति भी बढाएं. रिकार्ड तो हमारे खिलाडी खेल, खेल में तोड देते हैं.</p>
<p><strong>राकेश अचल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 16:22:27 +0530</pubDate>
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                <title>नेहरू से नरेंद्र तक प्रगति की बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आज कोरी गप्प नहीं लिख रहा । आंकड़े दे रहा हूँ ।  जिससे आप जान सकें कि भारत बैलगाड़ी युग से कहाँ तक आ गया है।पहले आम चुनाव में पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को चुनाव प्रचार केलिए 1612  किमी रेल से ,5682  मील कार से 18348  किमी हवाई जहाज से और 90  किमी की यात्रा नाव से करना पड़ी थी ।  उस जमाने में नेहरू के भारत में इतना पैसा नहीं था की इसरो के रॉकेट ढोने के लिए किसी ट्रक का इंतजाम किया जा सके,बेचारे वैज्ञानिक बैलगाड़ियों पर राकेट लांचर लादकर चलते थे। ये सब नेहरू की गलत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133984/congratulations-on-progress-from-nehru-to-narendra"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/नेहरू-से-नरेंद्र-तक-प्रगति-की-बधाई.jpg" alt=""></a><br /><p>आज कोरी गप्प नहीं लिख रहा । आंकड़े दे रहा हूँ ।  जिससे आप जान सकें कि भारत बैलगाड़ी युग से कहाँ तक आ गया है।पहले आम चुनाव में पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को चुनाव प्रचार केलिए 1612  किमी रेल से ,5682  मील कार से 18348  किमी हवाई जहाज से और 90  किमी की यात्रा नाव से करना पड़ी थी ।  उस जमाने में नेहरू के भारत में इतना पैसा नहीं था की इसरो के रॉकेट ढोने के लिए किसी ट्रक का इंतजाम किया जा सके,बेचारे वैज्ञानिक बैलगाड़ियों पर राकेट लांचर लादकर चलते थे। ये सब नेहरू की गलत नीतियों की वजह से हुआ,लेकिन आज परिदृश्य बदल चुका है। आज भारत के पास सब कुछ है ।  चुनाव प्रचार के लिए प्रधानमंत्री को सेना का विमान किराये से नहीं लेना पड़ता। सीएजी उनके विमान खर्च का हिसाब नहीं ले सकता।</p>
<p>भारत की असली प्रगति दरअसल 2014  से शुरू हुई। आजाद भारत के पहले प्र्धानमंत्री ने अपनी आर्थिक नीतियों से भारत को इतना मजबूत बनाया की हम अपने प्रधानमंत्री  के लिए 8400  करोड़ रूपये का विमान खरीदने के लायक हो गए। आप इसे विमान कहें तो ठीक ,मै तो इसे प्रधानमंत्री की बाइक यानि फटफटिया कहता हूँ,क्योंकि वे कभी इसके नीचे उतरते ही नहीं। नेहरू के पास ये सब कहाँ था ? हालाँकि कहते हैं की उनके कपडे पेरिस से धुलकर आते थे । अब ये पेरिस किसी लाउंड्री का नाम था या देश का भगवान जाने।  </p>
<p>भारत में बीते 76  साल में कांग्रेस के 8 ,भाजपा के 2 ,और जनता पार्टी,समाजवादी जनता पार्टी और इंडियन नेशनल कांग्रेस [आर] के एक-एक प्रधानमंत्री हुए लेकिन नरेंद्र मोदी जी को छोड़ किसी की हिम्मत नहीं हुई जो 8400  करोड़ रूपये का विमान प्रधानमंत्री के लिए खरीद सके। देश का डंका बजाने के लिए आज जितनी जरूरत चनदयान-3  की है उतनी ही जरूरत 8400  करोड़ रूपये के विमान की भी है। ये  आलोचना का विषय नहीं है ।  ये प्रतिष्ठा का विषय है।  हमें मोदी जी का अहसान मानना चाहिए की उन्होंने अमृतकाल में सबसे मंहगा विमान खरीदकर देश का मान बढ़ाया।</p>
<p>मोदी जी के आलोचकों से मुझे बहुत चिढ है ।  वे खामखा मोदी जी से चिढ़ते है।  कांग्रेस ने यानि इंदिरा गांधी ने भारत से गरीबी हटाओ का नारा दिया लेकिन गरीबी हटी नहीं बल्कि गरीब बढ़ गयी ।  इंदिरा गांधी का बोया अब मोदी जी को काटना पड़ रहा है ।  गरीबी  तो वे भी नहीं हटा पाए लेकिन बन्दा 80  करोड़ गरीबों को पांच किलो मुफ्त का अन्न देने की क्षमता तो रखता है। इतनी बड़ी चुनौती का सामना  करते हुए अपने लिए 8400  करोड़ का विमान खरीदना और चंद्रयान -3  के लिए इसरो को 615  करोड़ रूपये देना कोई आसान काम नहीं है ।  मै पूरे यकीन से कह सकता हूं कि यदि मोदी जी न होते तो इसरो को आज भी अपना चंद्रयान -3  चन्द्रमा तक पहुँचाने केलिए किस बैलगाड़ी को किराये पर लेना पड़ता।</p>
<p>कायदे से इस उपलब्धि के लिए माननीय मोदी जी को भारतरत्न देने की घोषणा हो जाना चाहिए ।  नेहरू, गांधी तो बिना कुछ किये ही भारत रत्न का तमगा अपने गले में लटका चुके हैं। अटल बिहारी बाजपेयी जी को भी बहुत पापड़ बेलने पड़े थे भारतरत्न पाने के लिए। लेकिन मोदी जी ने सचमुच काम किया है। वे देश को 5  ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने जा रहे हैं ,लेकिन शर्त एक ही है कि देशवासी उन्हें  तीसरी बार भी देश का प्रधानमंत्री बनाये । यदि देश ने किसी पदयात्री को ये मौक़ा दिया तो तय मानिये कि देश की अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठ जाएगा इस देश ने पहले भी तो नेहरू और इंदिरा गाँधी को तीन बार प्रधानमंत्री बनाने की गलती की है । एक बार एक गलती और सही। क्या फर्क पड़ता है किसी उत्साही को आजमाने में ?</p>
<p>देश के तमाम प्रधानमंत्री ऐसे थे जिन्होने दूसरे और तीसरे टर्म के लिए कोशिश ही नहीं की ।  या उन्हें मौक़ा नहीं मिला ।  लाल बहादुर शास्त्री हों,मोरारजी भाई देसाई हों,चौधरी चरण सिंह हों, राजीव गांधी ,विश्वनाथ प्रताप सिंह ,चंद्रशेखर, पीव्ही नरसिम्हा राव, देवगौड़ा ,इंद्र कुमार गुजराल ऐसे ही प्रधानमंत्री थे ।  ये अपने लिए महंगा विमान कैसे खरीदते ।  अटल जी और डॉ मनमोहन सिंह दो बार प्रधानमंत्री बने भी तो इतना महंगा विमान खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।जिस देश में आधी आबादी मुफ्त के अन्न पर गुजर-बसर करती हो उस देश में 8400  करोड़ रूपये का विमान खरीदने की हिम्मत जुटाना कोई हंसी-खेल है ?</p>
<p>मै अपने प्रधानमंत्री की हिम्मत की हमेशा दाद देता हूँ।  वे कम से कम इतनी हिम्मत तो रखते हैं की ब्रिक्स सम्मेलन में जाएँ और यदि उनका स्वागत करने राष्ट्रपति न आये तो वे अपने महंगे विमान से नीचे नहीं  उतरे ।  कम से कम दक्षिण अफ्रिका को महंगे विमान की  इज्जत का तो ख्याल रखना चाहिए था ।  ये तो हमारे प्रधानमंत्री जी की दरियादिली है कि वे बाद में उपराष्ट्रपति से अपनी अगवानी कराने पर मान गए। दक्षिण अफ्रीका की हंसी न उड़े इसलिए उन्होंने दरियादिली दिखाई। अन्यथा दक्षिण अफ्रिका वाले तो शी जिनपिंग को भी परेशां करने से पीछे नहीं रहते ।  उन्होंने शी के अंग रक्षकों को रेड कार्पेट पर पांव नहीं रखने दिए ।  बेचारे सही के ऊपर क्या गुजरी होगी ? उनके अंग बिना रक्षको के कैसे सुरक्षित रहे होंगे ?  </p>
<p>हमारे प्रधानमंत्री जिस तरह राजनीति से ऊपर उठकर सबको साथ लेकर सबका विकास कर रहे हैं उसी तरह मान-अपमान से ऊपर उठकर विदेश यात्राएं भी करते है।  कभीकोई उनके पांव छूता है तो कभी कोई नहीं भी छूता। इससे क्या फर्क पड़ता है ।  प्रधान जी की दरियादिली के एक ढूंढो तो सौ उदाहरण मिल सकते है।  प्रधानमंत्री जी की दरियादिली   है कि जिस अमेरिका ने प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्हें अमेरिका जाने के लिए वीजा तक नहीं दिया था उसी अमेरिका के उम्रदराज राष्ट्रपति के भारत दौरे के समय वे दिल्ली को चार दिन की छुट्टी पर भेज रहे हैं। अमेरिका ने तो कभी भारत के प्रधानमंत्री के लिए वाशिंगटन में चार दिन की तो छोड़िये एक दिन की भी छुट्टी घोषित नहीं की ! लेकिन हम तो हम हैं। सब भुला देते हैं। हमें तो अपना डंका बजाने से मतलब है।</p>
<p>मै मानता  हूँ तो आप भी माने ये जरूरी नहीं कि हमारे प्रधानमंत्री जी पक्के कर्मयोगी है।  वीतरागी है।  आपने देखा वे 24  में से 18  घंटे काम करते हैं। लगातार चुनाव प्रचार करते है। उद्घाटन,शिलान्यास करते है।  ये सब विकास के लिए ही तो किया जाता है।  आपने देखा हमारा मणिपुर तीन महीने से ज्यादा समय तक जला ,[आज भी जल रहा है ] लेकिन प्रधानमंत्री जी एक दिन भी विचलित हुए । उन्होंने किसी से कुछ कहा ? संसद में हंगामा होता रहा लेकिन उन्होंने अपनी मौन साधना भंग नहीं होने दी। वे बोले,  लेकिन तब बोले जब उनका मन हुआ ।  वे अपने मन की सुनते है।  पक्के मनमौजी है।  मन की मौज न हो तो सब बेकार है ।  मन मौजी होने में और मनमानी करने  में अंतर् है। ठीक वैसा ही अंतर् जैसा पेरिस और पेरिस लॉन्ड्री में।</p>
<p>इस समय देश से ज्यादा देश का विपक्ष प्रधानमंत्री जी से डरा हुआ है ।  विपक्ष को आशंका  है कि प्र्धानमंत्री जी कहीं आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में चंद्रयान-3  की कामयाबी  को उसी तरह न भुना लें जैसे वे पुलवामा को भुना चुके हैं। सवाल ये है कि प्रधानमंत्री जी को ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए ? उन्हें पूरा हक बनता है कि वे चंद्रयान-3  की कामयाबी को चुनावों में जितना चाहें  भुनाए ।  वे आखिर देश के प्र्धानमंत्री हैं। उन्हें यदि किसी भी घटना-दुर्घटना को भुनाना आता है तो किसी को आपत्ति क्यों ? मुझे तो बिलकुल नहीं हैं। </p>
<p>मै तो चाहता हूँ कि चंद्रयान-3  की कामयाबी के बदले जितने ज्यादा से ज्यादा वोट प्रधानमंत्री जी को और उनकी पार्टी को मिल सकते हैं,जरूर मिलें। विपक्ष को इसका कोई हक नहीं है कि वो प्रधानमंत्री जी को चंद्रयान-3  की कामयाबी को भुनाने से रोके। विपक्ष का काम है सड़कें  नापना  सो  शौक  से नापे  ,किसी ने रोका  है क्या ? बहरहाल पधानमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाइयां ,शुभकामनाएं।</p>
<p><strong>राकेश अचल </strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 14:34:04 +0530</pubDate>
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