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                <title>पशुपालन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पशुपालन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पशु चिकित्सा विभाग लखनऊ पशुधन संरक्षण, गौसंवर्धन और ग्रामीण समृद्धि की उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊः</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग लखनऊ जनपद में पशुधन संरक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, गौसंवर्धन, डेयरी विकास तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग ने पशुपालकों की आय वृद्धि, पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, निराश्रित गोवंश संरक्षण तथा विभिन्न पशुधन विकास योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग की योजनाएं केवल उपचार सेवाओं तक सीमित न रहकर पशुधन आधारित आजीविका, संरक्षण और समावेशी विकास का मजबूत माध्यम बनकर उभरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण, रोग नियंत्रण तथा कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाओं के माध्यम से पशुधन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184371/veterinary-department-lucknow-livestock-protection-cow-promotion-and-rural-prosperity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-19.15.33.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊः</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग लखनऊ जनपद में पशुधन संरक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, गौसंवर्धन, डेयरी विकास तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग ने पशुपालकों की आय वृद्धि, पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, निराश्रित गोवंश संरक्षण तथा विभिन्न पशुधन विकास योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विभाग की योजनाएं केवल उपचार सेवाओं तक सीमित न रहकर पशुधन आधारित आजीविका, संरक्षण और समावेशी विकास का मजबूत माध्यम बनकर उभरी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण, रोग नियंत्रण तथा कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाओं के माध्यम से पशुधन को सुरक्षित और उत्पादक बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। खुरपका-मुंहपका, ब्रूसेलोसिस तथा अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु व्यापक टीकाकरण अभियान चलाए गए, जिससे पशुधन संरक्षण को बल मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />निराश्रित बेसहारा गौवंश संरक्षण योजना के अंतर्गत जनपद लखनऊ में पिछले 09 वर्षों में 31,343 गौवंशों का संरक्षण 101 गौ आश्रय स्थलों में किया गया है। यह उपलब्धि गौसंरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण, पोषण और उपचार के लिए आश्रय स्थलों की स्थापना तथा संचालन ने पशु कल्याण और सामाजिक सहभागिता दोनों को बढ़ावा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />गौसंरक्षण को और मजबूत बनाने की दिशा में वृहद गौ संरक्षण केंद्र निर्माण योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में जनपद लखनऊ में 14 वृहद गौ संरक्षण केंद्रों का निर्माण रु. 16.11 करोड़ की लागत से कराया गया है। यह आधारभूत संरचना न केवल निराश्रित गोवंश संरक्षण को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि पशु कल्याण की स्थायी व्यवस्था भी विकसित कर रही है। इन केंद्रों के निर्माण से गोवंश संरक्षण के लिए व्यवस्थित और दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />दुग्ध उत्पादन संवर्धन और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में नंदिनीधमनी नंदिनी योजना भी महत्वपूर्ण रही है। इस योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में जनपद लखनऊ में 09 लाभार्थियों को मिनी नंदिनी योजना का लाभ प्रदान किया गया है। यह योजना डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित कर रही है। इसी प्रकार नेशनल लाइव स्टॉक मिशन के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में जनपद लखनऊ में 09 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। इस मिशन के माध्यम से पशुधन आधारित आजीविका, नस्ल सुधार, उत्पादन क्षमता वृद्धि और आधुनिक पशुपालन को प्रोत्साहन मिला है। यह मिशन पशुधन क्षेत्र में नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />कुक्कुट विकास योजना 2022 के अंतर्गत भी जनपद लखनऊ में 09 लाभार्थियों को लाभ प्रदान किया गया है। इस योजना ने मुर्गी पालन को स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में प्रोत्साहित किया है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए कुक्कुट पालन आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभावी साधन बनकर उभरा है।पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों, संतुलित आहार, रोग प्रबंधन और डेयरी संचालन संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। इन प्रयासों से पशुपालकों की दक्षता बढ़ी है और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />नस्ल सुधार के क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि और पशुपालकों की आय में सुधार देखने को मिला है। विभाग द्वारा पशुधन को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग द्वारा मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स तथा ग्रामीण पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ क्षेत्रों तक उपचार सुविधा पहुंचाई गई है। समय पर उपचार और आपातकालीन सेवाओं ने पशुधन हानि को कम करने में सहायता की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />लखनऊ में पशुपालन आधारित आजीविका को सशक्त बनाने के लिए डेयरी, बकरी पालन तथा कुक्कुट पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों की आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित हुए हैं। महिला सशक्तीकरण में भी पशुपालन योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महिलाओं को डेयरी और लघु पशुपालन गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया गया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी इन योजनाओं को गति मिली है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पशु चिकित्सा विभाग द्वारा चारा विकास, पशु पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों पर भी विशेष बल दिया गया है। संतुलित पोषण और वैज्ञानिक प्रबंधन से पशुओं की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों में सुधार हुआ है। यदि उपलब्धियों को समग्र रूप में देखें तो गौसंरक्षण, पशुधन विकास, डेयरी प्रोत्साहन, कुक्कुट पालन और आधारभूत संरचना विकास जैसे क्षेत्रों में विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति की है। 31,343 गौवंश संरक्षण, 101 गौ आश्रय स्थल, 14 वृहद गौ संरक्षण केंद्रों का निर्माण, 16.11 करोड़ रुपये की लागत से आधारभूत संरचना विकास, तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को सहायता विभाग की सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभाग की सफलता में नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी क्रियान्वयन और योजनाओं की सतत समीक्षा की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समय-समय पर निरीक्षण और समीक्षा के माध्यम से योजनाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित की गई है। आज पशु चिकित्सा विभाग लखनऊ केवल पशु उपचार तक सीमित न रहकर पशुधन आधारित आर्थिक विकास, सामाजिक सहभागिता और ग्रामीण समृद्धि का प्रमुख माध्यम बन चुका है। विभाग की योजनाएं किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को सशक्त बना रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पशु चिकित्सा विभाग लखनऊ ने विगत 09 वर्षों में पशुधन संरक्षण, गौसंवर्धन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। निराश्रित गौवंश संरक्षण योजना, मिनी नंदिनी योजना, नेशनल लाइव स्टॉक मिशन, कुक्कुट विकास योजना तथा वृहद गौ संरक्षण केंद्र निर्माण जैसी पहलें विभाग की प्रभावी कार्यशैली और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ये उपलब्धियां लखनऊ के समग्र विकास और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) जिला सूचना अधिकारी मण्डलीय</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong> जिला सूचना कार्यालय लखनऊ ।</strong></p>
</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 19:37:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है: सांसद जगदंबिका पाल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 50वीं वाहिनी बलरामपुर द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र के महादेव बुजुर्ग के मानपुर गांव में गुरुवार को निःशुल्क पशु चिकित्सा का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। समय पर उपचार, टीकाकरण और उचित देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एसएसबी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183054/livestock-is-the-backbone-of-rural-economy-mp-jagdambika-pal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1783607381981.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 50वीं वाहिनी बलरामपुर द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र के महादेव बुजुर्ग के मानपुर गांव में गुरुवार को निःशुल्क पशु चिकित्सा का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना, पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना रहा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डुमरियागंज सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। समय पर उपचार, टीकाकरण और उचित देखभाल से पशुओं की उत्पादकता बढ़ती है, जिससे पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में एसएसबी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी गतिविधियों की सराहना करते हुए ऐसे शिविरों को बेहद उपयोगी बताया।शिविर के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया। पशुपालकों को टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छता, रोगों की रोकथाम और वैज्ञानिक पशुपालन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर सीवीओ एसजी एसएचक्यू गोरखपुर चंदन तालुकदार, 50वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट एवं मेडिकल अधिकारी अरुण चौधरी, सहायक कमांडेंट अजय कुमार, संजय के.पी.दीपक चंद,  बढ़नी नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी,अनिल अग्रहरि, सूर्य प्रकाश पाण्डेय,नीलू चौधरी,बरकत, लक्की,रमेश गुप्ता,रामपाल सिंह, संजय दूबे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और पशुपालकों ने भाग लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 22:43:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>जिलाधिकारी की अध्यक्षता में डीसीसी डीएलआरसी की बैठक हुई आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
<div class="clear">
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात:⁠-मनोज पाण्डेय </strong></div>
<div>  </div>
<div><strong>सुलतानपुर</strong>।</div>
<div>  </div>
<div>जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में डीसीसी डीएलआरसी की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में पीएम स्वनिधि योजना, बैंकों में आधार बनाने की प्रगति, वार्षिक ऋण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,</div>
<div>  </div>
<div>किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, पीएमईजीपी योजना, ऋण जमानुपात, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैण्डअप इंडिया योजना, अटल पेंशन योजना एवं एनआरएलएम योजना की प्रगति सहित अन्य बिन्दुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा हुई। </div>
<div>  </div>
<div>    बैठक में पीएम स्वनिधि योजना में पंजाब नेशनल बैंक</div>
<div> </div>
<div>एनआरएलएम</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133978/dcc-dlrc-meeting-was-organized-under-the-chairmanship-of-district"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/img-20230824-wa0289.jpg" alt=""></a><br /><div class="mail-message-content collapsible zoom-normal mail-show-images">
<div class="clear">
<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात:⁠-मनोज पाण्डेय </strong></div>
<div> </div>
<div><strong>सुलतानपुर</strong>।</div>
<div> </div>
<div>जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में डीसीसी डीएलआरसी की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में पीएम स्वनिधि योजना, बैंकों में आधार बनाने की प्रगति, वार्षिक ऋण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना,</div>
<div> </div>
<div>किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद योजना, पीएमईजीपी योजना, ऋण जमानुपात, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैण्डअप इंडिया योजना, अटल पेंशन योजना एवं एनआरएलएम योजना की प्रगति सहित अन्य बिन्दुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा हुई। </div>
<div> </div>
<div>  बैठक में पीएम स्वनिधि योजना में पंजाब नेशनल बैंक में 310 और भारतीय स्टेट बैंक में 231 वितरण हेतु लंबित पत्रावलियाँ रहने पर जिलाधिकारी महोदया द्वारा गम्भीरता से लिया गया। डाक अधीक्षक द्वारा बैठक में प्रतिभाग न किये जाने से डाकघर में बनने वाले आधार की समीक्षा नहीं सकी और जिलाधिकारी महोदया द्वारा पत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण जारी करने हेतु निर्देशित किया गया।</div>
<div> </div>
<div>एनआरएलएम योजनान्तर्गत बड़ौदा यू0पी0 बैंक द्वारा कम क्रेडिट लिंकेज किये जाने पर जिलाधिकारी महोदया द्वारा असंतोष व्यक्त किया गया। बैठक में यूको बैंक, एक्सिस बैंक, इण्डिया पोस्ट पेमेन्ट्स बैंक से प्रतिभाग न किये जाने जिलाधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने हेतु अग्रणी जिला प्रबन्धक, सुलतानपुर निर्देशित किया गया। </div>
<div> </div>
<div>इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वि0रा0 मनोज कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी पीओ डूड संजीव यादव, उप कृषि निदेशक रामश्रय यादव, जिला विकास अधिकारी अजय कुमार पाण्डेय, एलडीओ भारतीय रिजर्व बैंक नितिन कुमार, जिला विकास प्रबन्धक नाबार्ड अभिनव द्विवेदी, अग्रणी जिला प्रबन्धक अनुराग संखवार, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबन्धक रोहित बाजपेई सहित अन्य सम्बन्धित उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/133978/dcc-dlrc-meeting-was-organized-under-the-chairmanship-of-district</link>
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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 15:45:14 +0530</pubDate>
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