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                <title>बाजार व्यवस्था - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>बाजार व्यवस्था RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दम तोड़ती कुम्हारों की परंपरा: मिट्टी से जुड़ी संस्कृति और आजीविका पर गहराता संकट डॉ. मणि शंकर द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक व्यवसायों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सदियों से यह कला भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही है। कभी गांवों की सुबह मिट्टी के घड़ों के शीतल जल से और शाम दीयों की मधुर रोशनी से आबाद होती थी। मटके, सुराही, कुल्हड़, दीये तथा अन्य मिट्टी के बर्तन प्रत्येक घर की आवश्यकता हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के कारण यह परंपरा आज अस्तित्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181019/the-potters-tradition-is-dying-the-clay-related-culture-and-livelihood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0139.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक व्यवसायों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सदियों से यह कला भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही है। कभी गांवों की सुबह मिट्टी के घड़ों के शीतल जल से और शाम दीयों की मधुर रोशनी से आबाद होती थी। मटके, सुराही, कुल्हड़, दीये तथा अन्य मिट्टी के बर्तन प्रत्येक घर की आवश्यकता हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के कारण यह परंपरा आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।</div><div style="text-align:justify;">कुम्हार समुदाय की पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। आर्थिक दृष्टि से यह व्यवसाय पहले की अपेक्षा कम लाभकारी रह गया है। मिट्टी के बर्तन तैयार करने में अत्यधिक श्रम, समय और कौशल की आवश्यकता होती है, लेकिन उसके अनुरूप आय नहीं मिल पाती। अच्छी गुणवत्ता की मिट्टी जुटाने, उसे तैयार करने, बर्तन बनाने, सुखाने और भट्ठी में पकाने की पूरी प्रक्रिया कठिन और खर्चीली है।</div><div style="text-align:justify;">करछना क्षेत्र के चाका गांव निवासी 76 वर्षीय रामलाल प्रजापति, जो 1970 के दशक से इस व्यवसाय से जुड़े हैं, बताते हैं कि मिट्टी के बर्तनों का बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसके कारण कुम्हार परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव नई पीढ़ी पर पड़ा है, जो अब इस पारंपरिक कला में कोई विशेष रुचि नहीं दिखा रही है।</div><div style="text-align:justify;">वहीं डांडी गांव के नंद किशोर के अनुसार मिट्टी की उपलब्धता और उसका प्रबंधन आज कुम्हारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उनका कहना है कि उपयुक्त मिट्टी की व्यवस्था करने में काफी समय और पूंजी खर्च होती है, जबकि सरकार और समाज दोनों इस समस्या के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कुम्हार समुदाय से जुड़े गेमराज का कहना है कि आज भी अधिकांश कुम्हार स्थानीय हाट-बाजारों तक ही सीमित हैं, जबकि देश में आधुनिक व्यापारिक नेटवर्क और बड़े बाजार विकसित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम सामग्रियों से बने सस्ते उत्पादों के बढ़ते प्रचलन ने मिट्टी के बर्तनों की मांग को काफी हद तक प्रभावित किया है।</div><div style="text-align:justify;">कौंधियारा के राम भरोसे का मानना है कि यदि कुम्हारों को विद्युत चालित चाक, गुणवत्तापूर्ण मिट्टी, आधुनिक भट्ठियां और संगठित बाजार व्यवस्था में भागीदारी का अवसर मिले, तो उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है। साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से मिट्टी के उत्पाद पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। जब पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, तब मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक, जैविक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में उभरते हैं। इसलिए कुम्हारों की समस्या केवल एक समुदाय की आजीविका का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण का भी विषय है।</div><div style="text-align:justify;">समय की मांग है कि सरकार, कॉर्पोरेट क्षेत्र, स्वयंसेवी संस्थाएं और समाज मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करें। कुम्हारों को आधुनिक डिजाइन, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, आसान ऋण, डिजिटल विपणन और स्थायी बाजार उपलब्ध कराए जाएं, ताकि यह परंपरा नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सके।</div><div style="text-align:justify;">कुम्हारों के चाक की गति केवल मिट्टी को आकार नहीं देती, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता को भी आकार देती है। आवश्यकता इस बात की है कि समय रहते इस अमूल्य विरासत को संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी मिट्टी की सोंधी खुशबू और उससे जुड़ी भारतीयता को महसूस कर सकें।</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:32:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीद से बचने की अपील, डीएम ने सर्राफा व्यापारियों संग की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत सरकार द्वारा नागरिकों से बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचने की अपील के क्रम में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना ने की, जिसमें संबंधित अधिकारियों, व्यापार मंडल और सर्राफा व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था और बाजार व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने आमजन से संयमित व्यवहार अपनाने और अनावश्यक रूप</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179519/dm-appeals-to-avoid-unnecessary-purchase-of-bullion-and-gold"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260518-wa0062.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत सरकार द्वारा नागरिकों से बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचने की अपील के क्रम में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना ने की, जिसमें संबंधित अधिकारियों, व्यापार मंडल और सर्राफा व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था और बाजार व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने आमजन से संयमित व्यवहार अपनाने और अनावश्यक रूप से सोना एवं बुलियन खरीदने से बचने की अपील की है, ताकि बाजार पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और आर्थिक संतुलन बना रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने सर्राफा व्यापारियों की समस्याओं को विस्तार से सुना और भरोसा दिलाया कि उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कोविड काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। उस दौरान व्यापार जगत भी प्रभावित हुआ था, लेकिन सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार ने वैक्सीनेशन, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभाला था।टैरिफ नीति 2025 का जिक्र करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि कठिन समय स्थायी नहीं होता और परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से जारी गाइडलाइन और अपील का जिम्मेदार नागरिक के रूप में पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार में हो रहे उतार-चढ़ाव पर भी विस्तार से चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने स्वर्ण कारोबारियों को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी किसी अन्य व्यवसाय में भी हाथ आजमाना चाहते हैं तो इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं को नोट कर लिया गया है और शासन की अपील का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बस्ती जिले का सहयोग हमेशा सकारात्मक रहा है। आर्थिक मंदी जैसे हालात में सभी को संयम और तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान सर्राफा व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी प्रशासन के सामने रखीं। इस पर पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और संबंधित चौकी प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, उपायुक्त वाणिज्यकर प्रभाकर सरोज, उपायुक्त प्रशासन राज्यकर उपेन्द्र यादव, जिलाध्यक्ष सर्राफा कुन्दन वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष व्यापार संगठन जगदीश अग्रहरि, विश्वनाथ वर्मा सहित अन्य व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:11:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिक्रमण से सिकुड़ी सुरियावा फाटक गली, जाम से लोगों का निकलना हुआ मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सुरियावा। </strong>नगर पंचायत सुरियावा के वार्ड नंबर 11 शेखर आजाद नगर स्थित अभिया रोड से चौक तक जाने वाली पश्चिम रेलवे फाटक गली इन दिनों अतिक्रमण और जाम की गंभीर समस्या से जूझ रही है। सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण और मनमाने ढंग से खड़ी की जा रही बाइकें राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बन गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शादी-विवाह के सीजन और बाजार में बढ़ती भीड़ के बीच हालात और भी बदतर हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंच रहे लोगों को गली से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178752/suriyawa-gate-shrunk-due-to-encroachment-and-it-became-difficult"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/6d09f520-7df4-4a96-bb7f-d73f6991be45_1776750502754.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सुरियावा। </strong>नगर पंचायत सुरियावा के वार्ड नंबर 11 शेखर आजाद नगर स्थित अभिया रोड से चौक तक जाने वाली पश्चिम रेलवे फाटक गली इन दिनों अतिक्रमण और जाम की गंभीर समस्या से जूझ रही है। सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण और मनमाने ढंग से खड़ी की जा रही बाइकें राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बन गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शादी-विवाह के सीजन और बाजार में बढ़ती भीड़ के बीच हालात और भी बदतर हो गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खरीदारी करने पहुंच रहे लोगों को गली से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार जाम की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत और पुलिस प्रशासन की अनदेखी के चलते अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़क पर कब्जे और बेतरतीब वाहन खड़े होने से आए दिन राहगीरों और दुकानदारों के बीच नोकझोंक की स्थिति भी पैदा हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगरवासियों ने नगर पंचायत सुरियावा और पुलिस विभाग से तत्काल अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने तथा नियमित यातायात व्यवस्था लागू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:58:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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