<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/87486/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Bsecurity" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Cyber Safety - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/87486/rss</link>
                <description>Cyber Safety RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>करोड़ों की ठगी, करोड़ों का खर्च और फिर भी नाकाफी रिकवरी; डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बनता साइबर अपराध*</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/41.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div>डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी इसी तकनीक को अपने अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, यूपीआई, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग ने आम नागरिकों की सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन इसके साथ ही साइबर ठगी के मामलों में भी विस्फोटक वृद्धि देखने को मिल रही है। राजस्थान से सामने आए हालिया आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट और नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक वर्ष में राजस्थान में 77 हजार से अधिक लोग साइबर ठगी का शिकार हुए और ठगों ने लगभग 354 करोड़ रुपए की रकम हड़प ली। चिंताजनक बात यह है कि इस भारी-भरकम ठगी में से केवल 39 करोड़ रुपए ही रिकवर किए जा सके हैं, जबकि साइबर सुरक्षा और साइबर थानों के संचालन पर राज्य सरकार का सालाना खर्च 102 करोड़ रुपए से अधिक है।</div>
<div>यह स्थिति केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। देश के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच जितनी तेजी से बढ़ी है, उससे कहीं अधिक तेजी से साइबर अपराधियों के तौर-तरीके विकसित हुए हैं। आज अपराधी किसी बैंक डकैती या चोरी के बजाय मोबाइल फोन और लैपटॉप के जरिए हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे नकली निवेश योजनाओं, फर्जी कस्टमर केयर, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी, नौकरी, टास्क फ्रॉड और क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसे अनेक तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।</div>
<div>राजस्थान के आंकड़े बताते हैं कि हर घंटे लगभग दस लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिन्होंने वर्षों की मेहनत से अपनी बचत जमा की थी। कई मामलों में लोगों की जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उनके खातों से गायब हो गई। पीड़ितों में युवा, व्यापारी, नौकरीपेशा वर्ग, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। विशेष रूप से 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे अधिक निशाना बन रहे हैं, क्योंकि यही वर्ग डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा उपयोग करता है।</div>
<div>साइबर अपराध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाते रहते हैं। जैसे ही पुलिस और बैंकिंग संस्थाएं किसी एक तरीके पर नियंत्रण करने का प्रयास करती हैं, ठग कोई नया तरीका खोज लेते हैं। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फर्जी शेयर मार्केट निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों रुपए की ठगी सामने आई है। अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे रकम ट्रांसफर करा लेते हैं।</div>
<div>सवाल यह भी उठता है कि जब साइबर थानों और साइबर सुरक्षा तंत्र पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तब रिकवरी की दर इतनी कम क्यों है। राजस्थान में 354 करोड़ रुपए की ठगी के मुकाबले केवल 39 करोड़ रुपए की रिकवरी होना व्यवस्था की सीमाओं को दर्शाता है। इसका एक कारण यह है कि ठग रकम को तुरंत कई फर्जी खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। इन खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई राज्यों और कई बार विदेशों तक पहुंच जाती है, जिससे उसे ट्रेस करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अलावा साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अंतरराज्यीय समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी कई बार जांच को प्रभावित करती है।</div>
<div>बैंकों की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित ग्राहकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंक शामिल हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं, लेकिन यह जरूर दर्शाता है कि ग्राहकों को जागरूक बनाने और संदिग्ध लेनदेन पर त्वरित कार्रवाई की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा के अनेक स्तर मौजूद हैं, फिर भी यदि ग्राहक स्वयं सतर्क नहीं रहेगा तो अपराधी किसी न किसी तरीके से उसे भ्रमित कर सकते हैं।</div>
<div>आज साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या बैंक की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। यह प्रत्येक नागरिक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बन चुकी है। अधिकांश मामलों में ठग लोगों की तकनीकी कमजोरी का नहीं बल्कि उनकी भावनाओं, लालच, डर या जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। कोई व्यक्ति यदि अनजान लिंक पर क्लिक करता है, ओटीपी साझा करता है, स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करता है या फर्जी निवेश योजना में अधिक मुनाफे के लालच में पैसा लगाता है, तो वह स्वयं जोखिम बढ़ा देता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।</div>
<div>सरकार और पुलिस प्रशासन भी लगातार लोगों को जागरूक करने के प्रयास कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठगी होने के बाद पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि पीड़ित तुरंत हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए तो रकम को फ्रीज कराने और रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। दुर्भाग्यवश कई लोग शर्म, घबराहट या जानकारी के अभाव में शिकायत करने में देर कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रकम निकालने का पर्याप्त समय मिल जाता है।</div>
<div>देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों लोग रोजाना ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाना होगा। केवल नए साइबर थाने खोलना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और बैंकिंग संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी होगा। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने होंगे ताकि लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।</div>
<div>वर्तमान समय में साइबर अपराध किसी महामारी से कम नहीं है। यह अपराध बिना हथियार, बिना हिंसा और बिना किसी भौतिक उपस्थिति के लोगों को आर्थिक रूप से तबाह कर रहा है। राजस्थान के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, पुलिस, बैंक, तकनीकी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस चुनौती का सामना करें। डिजिटल क्रांति तभी सफल मानी जाएगी जब लोगों का धन और उनका विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा साइबर ठगों का यह बढ़ता साम्राज्य आम जनता की मेहनत की कमाई को इसी तरह निगलता रहेगा और सुरक्षा तंत्र पर सवाल लगातार खड़े होते रहेंगे।</div>
<div>          *कांतिलाल मांडोत*</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181068/fraud-worth-crores-expenditure-of-crores-and-still-inadequate-recovery</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:31:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/41.jpg"                         length="239353"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महराजगंज तराई पुलिस की तत्परता से साइबर ठगी के 3,800 रुपये पीड़ित को मिले वापस</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong>  साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर,</strong> साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना महराजगंज तराई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के शिकार एक व्यक्ति के 3,800 रुपये वापस दिलाने में सफलता हासिल की है। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित ने पुलिस की संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यवाही की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार ग्राम छतुवापुर निवासी मोहम्मद अफजल के भाई सलाउद्दीन का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया था। हैकर ने सलाउद्दीन बनकर अफजल से 3,800 रुपये की मांग की, जिसे उन्होंने अपने भाई का समझकर भेज दिया। बाद में जानकारी होने पर पता चला कि व्हाट्सएप अकाउंट हैक किया गया था और उनके साथ साइबर ठगी हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने 12 मई 2026 को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होने पर थाना महराजगंज तराई की साइबर हेल्पडेस्क ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की और संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर आरोपी के खाते में पहुंची धनराशि को होल्ड करा दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित बैंक को धनराशि वापस कराने के लिए एसओपी के अनुसार पत्राचार किया गया। बैंक द्वारा कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी 3,800 रुपये की रकम पीड़ित के खाते में वापस कर दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रुपये वापस मिलने पर पीड़ित ने महराजगंज तराई पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिस टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कार्रवाई में साइबर हेल्पडेस्क के उपनिरीक्षक आदित्य कुमार, आरक्षी धीरज तिवारी तथा आरक्षी अर्जुन प्रसाद वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर धनराशि वापस कराई जा सके।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb" style="text-align:justify;"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180965/due-to-the-promptness-of-maharajganj-terai-police-the-victim</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:24:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260609-wa0508.jpg"                         length="268952"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां : डर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/3vmjtsfo_jaipur-bomb-threat_625x300_09_december_25.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बम धमकियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने आम जनता, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले इस प्रकार की घटनाएं बहुत कम सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब स्कूलों, एयरपोर्ट, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और एयरलाइंस को लगातार धमकी भरे ई-मेल और सोशल मीडिया संदेश भेजे जा रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 40 और वर्ष 2025 में 69 धमकी भरे संदेश सामने आए। इस वर्ष भी जनवरी से अब तक लगभग 40 धमकियां मिल चुकी हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि समाज में बढ़ती असुरक्षा और डिजिटल अपराधों की गंभीर चेतावनी हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा प्रभावित जयपुर रहा, जहां स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी परिसरों को उड़ाने की धमकियां दी गईं। कई बार पूरी इमारतों को खाली करवाना पड़ा, बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई, यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और सुरक्षा एजेंसियों को घंटों जांच करनी पड़ी। बाद में अधिकांश धमकियां फर्जी साबित हुईं, लेकिन हर सूचना को गंभीरता से लेना प्रशासन की मजबूरी होती है क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं अपराधियों को भी नई ताकत दी है। पहले अपराधी फोन या पत्र के जरिए धमकी देते थे, लेकिन अब ई-मेल, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, वीपीएन और विदेशी सर्वर का उपयोग कर पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। कई बार अपराधी केवल अफवाह फैलाने या मजाक करने के उद्देश्य से भी ऐसे संदेश भेज देते हैं, लेकिन उनका यह मजाक हजारों लोगों को परेशानी में डाल देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्कूलों को मिलने वाली धमकियां सबसे अधिक चिंताजनक हैं। जब किसी स्कूल में बम होने की सूचना मिलती है तो तुरंत बच्चों को बाहर निकाला जाता है, अभिभावकों में डर फैल जाता है और पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन जाता है। छोटे बच्चों के मन पर इसका गहरा मानसिक प्रभाव पड़ता है। कई बार बच्चे लंबे समय तक भय महसूस करते हैं। इसी तरह एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन को धमकी मिलने पर सुरक्षा जांच इतनी सख्त करनी पड़ती है कि यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं और उड़ानें प्रभावित हो जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि असली और फर्जी धमकी में अंतर कैसे किया जाए। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदेश को हल्के में नहीं ले सकतीं। यदि सूचना को नजरअंदाज किया गया और घटना सच निकली तो भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए हर ई-मेल, कॉल या सोशल मीडिया पोस्ट की जांच की जाती है। बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वॉड और साइबर विशेषज्ञ तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इससे प्रशासनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान सरकार द्वारा विशेष मॉनिटरिंग यूनिट का गठन किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है। साइबर विशेषज्ञों की मदद से ऐसे संदेशों की निगरानी की जा रही है। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अन्य शहरों में बम निरोधक दस्ते सक्रिय रखे गए हैं। इसके अलावा ई-मेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखने के लिए तकनीकी टीमों को मजबूत किया जा रहा है। फिर भी चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि अपराधी भी नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर ऐसे संदेश भेजने वाले पकड़े क्यों नहीं जाते। इसका मुख्य कारण डिजिटल दुनिया की जटिलता है। कई अपराधी फर्जी नाम से ई-मेल बनाते हैं, इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस छिपाने के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं या विदेशी सर्वर के जरिए संदेश भेजते हैं। कई बार वे साइबर कैफे, सार्वजनिक वाई-फाई या चोरी किए गए मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना कठिन हो जाता है। हालांकि यह असंभव नहीं है। साइबर विशेषज्ञ डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करके अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब कोई धमकी भरा ई-मेल आता है तो साइबर टीम सबसे पहले उसका आईपी एड्रेस और सर्वर जानकारी निकालने का प्रयास करती है। ई-मेल हेडर से कई तकनीकी जानकारियां मिलती हैं। सोशल मीडिया संदेशों के मामले में संबंधित प्लेटफॉर्म से डेटा मांगा जाता है। मोबाइल नंबर, लोकेशन, लॉगिन समय और डिवाइस की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ती है। कई मामलों में सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट उपयोग रिकॉर्ड और बैंकिंग जानकारी भी मददगार साबित होती है। यदि अपराधी ने कहीं गलती की हो तो पुलिस उसके करीब पहुंच जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई बार अपराधी किशोर या युवा भी होते हैं जो मजाक या ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसा करते हैं। उन्हें यह अंदाजा नहीं होता कि उनकी हरकत कितनी गंभीर है। एक फर्जी धमकी के कारण हजारों लोग डर जाते हैं, सरकारी संसाधन बर्बाद होते हैं और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ जाता है। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में साइबर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। युवाओं को यह समझाना होगा कि ऑनलाइन अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना वास्तविक दुनिया का अपराध।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम लोगों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि किसी को संदिग्ध ई-मेल, संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट मिले तो उसे तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए। बिना पुष्टि के अफवाह फैलाना गलत है। कई बार लोग डर के कारण सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे दहशत और बढ़ जाती है। किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ नहीं लगाना चाहिए और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्कूलों, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों में नियमित मॉक ड्रिल होनी चाहिए। प्रवेश द्वारों पर आधुनिक स्कैनर और निगरानी कैमरे लगाए जाने चाहिए। साइबर सेल को अत्याधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध कराने होंगे। सोशल मीडिया कंपनियों और ई-मेल सेवा प्रदाताओं को भी जांच एजेंसियों के साथ तेजी से सहयोग करना चाहिए ताकि अपराधियों की पहचान जल्दी हो सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी स्तर पर भी सख्ती आवश्यक है। फर्जी धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और त्वरित सजा से दूसरों को भी संदेश जाएगा कि ऐसी हरकतें मजाक नहीं बल्कि गंभीर अपराध हैं। सूचना प्रौद्योगिकी कानून और आपराधिक कानूनों के तहत ऐसे मामलों में जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझते।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजस्थान में बढ़ती बम धमकियां केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि यह डिजिटल युग की नई चुनौती का संकेत हैं। तकनीक का गलत उपयोग समाज में भय और अस्थिरता पैदा कर सकता है। इसलिए सरकार, पुलिस, तकनीकी विशेषज्ञों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि जागरूकता, तकनीकी क्षमता और कानूनी सख्ती को साथ लेकर चला जाए तो इस तरह की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178738/fear-of-increasing-bomb-threats-in-rajasthan</guid>
                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/3vmjtsfo_jaipur-bomb-threat_625x300_09_december_25.webp"                         length="77882"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        