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                <title>ISRO - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ISRO RSS Feed</description>
                
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                <title>भारतवर्ष की गुरु-शिष्य सनातनी परंपरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180749/indias-guru-disciple-sanatani-tradition"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़ बनाता हैl स्वतंत्रता के बाद विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी के स्वप्न दृष्टा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के भावी भविष्य को पहचानते हुए बुनियादी कक्षाओं की राष्ट्रवाद के निर्माण में भूमिका को सहजता से पहचान लिया और अमेरिका की तर्ज पर भारत को तकनीकी तौर पर एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए अमेरिका के एमआईटी की तर्ज पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करवाया था ।जब खड़कपुर आईआईटी की स्थापना की गई थी तब उन्होंने अतिथि के रूप में अपने भाषण में कहा की भारत को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने का दायित्व इन्हीं आई,आई,टी की कक्षाओं शिक्षकों एवं छात्राओं का होगा, वे राष्ट्र को तकनीकी दिशा में मील का पत्थर बनाने में साबित होंगेl</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में भारत आज अंतरिक्ष की बड़ी शक्तियों की कतार में शामिल हैl इसके पीछे भारत के कई वैज्ञानिक सीवी रमन ,विक्रम साराभाई, सतीश धवन जैसे बड़े वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इसरो संस्थान है जिसकी कक्षाओं में मंगल तक भारतीय तिरंगे को लहराया. भाभा एटॉमिक परमाणु शक्ति बन गया हैl वैश्विक स्तर पर हर बड़े स्पेस रिसर्च सेंटर पर भारत की इंजीनियर और वैज्ञानिक अपनी सेवाएं दे रहे हैंl</p>
<p style="text-align:justify;">आज अमेरिका आर्थिक महाशक्ति बनने के पीछे उसके विश्वविद्यालय ,संस्थाएं हैं। हावर्ड बिजनेस स्कूल विश्व स्तरीय व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता हैl आर्थिक सामाजिक तथा वैज्ञानिक शोध संस्थाओं में अधिकाधिक धनराशि खर्च करके अमेरिका, रूस, ब्रिटेन ,चीन, ऑस्ट्रेलिया ,कनाडा ने विश्व में सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी दिए हैंl यह तो तय है कि कोई भी देश का भाग्य तभी उन्नत तथा विकसित होगा जब वहां के छात्र शिक्षक एवं आमजन न्याय, समता ,प्रबुद्धता के प्रति अपनी अडिग प्रतिबद्धता रखें। आने वाली पीढ़ी यानी कि वर्तमान के बच्चे और भविष्य के नागरिक ही किसी देश का भविष्य निर्माण करते हैं और यह भी तय रहता है कि बुद्धिमान शिक्षक अपने छात्रों के माध्यम से किसी महान राष्ट्र की नींव रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी महान राष्ट्र का निर्माण रातों-रात नहीं होता है इसके लिए पीढीयो का योगदान और श्रेष्ठ शिक्षक एवं छात्रों की लग्न शीलता और मेहनत की प्रतिबद्धता होती है। 1960 और 70 के दशक में चीन में गठित सांस्कृतिक क्रांति कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों ,कारखानों को एकता में बांधकर सक्रिय नीति का प्रयोग कर सभी को एक सूत्र में बांधा गया था। जापान तो प्राथमिक कक्षाओं से उपजे राष्ट्रवाद, अनुशासन तथा कर्तव्य बोध के लिए सर्वश्रेष्ठ उदाहरण रहा है, जापान में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पराजय का कड़वा घूंट पीने के पश्चात कमजोर एवं मृतप्राय जापान को एक शक्तिशाली आर्थिक राष्ट्र बना दिया। इसके विपरीत वर्तमान कक्षाएं प्रेम, अनुशासन ,करुणा जैसे पाठ ना सिखा कर ईर्ष्या, कंपटीशन, हिंसा ,कटुता जैसे अध्याय सिखा कर राष्ट्र के भविष्य को गर्त में ले जा रही है ।</p>
<p style="text-align:justify;">देश के अनेक विश्वविद्यालय हड़ताल ,हिंसा, जाति भेदभाव, आपत्तिजनक नारों जैसे विसंगतियों का सामना कर रहे हैं। कक्षाओं का नैतिकता, सहिष्णुता ,अनुशासन से कटाव केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में इसका फैलाव हो चुका है। अमेरिका तथा यूरोपीय देशों में स्कूलों का कक्षाओं में गोली कांड इसके बड़े विकृत उदाहरण हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने ट्रीस्ट विद डेस्टिनी के भाषण में भूख, भय ,बीमारी, अज्ञान से पूर्णता मुक्ति की बात को भारत की नियति या डेस्टिनी कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान में इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए की कक्षाओं को चरित्र निर्माण ,अनुशासन ,उत्कृष्ट नवाचार ,लोकतांत्रिक विचार संरचना का केंद्र बनाकर इसकी शिक्षा दीक्षा दी जानी चाहिए। कक्षाओं से बच्चे आर्थिक रूप से प्रौद्योगिकी स्थापित कर स्वयं अपने पैरों पर खड़े होकर आने वाले वर्षों में कई युवाओं को रोजगार देकर संपूर्ण मानवता ,पर्यावरण की रक्षा तथा राष्ट्र के उत्कर्ष को सही दिशा देने का काम करेंगे। जिससे राष्ट्रीय चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रीयता की भावना को एक मजबूत आधार प्राप्त हो सकेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:47:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>चंद्रयान-5 मिशन-</strong>    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष, एस. सोमनाथ ने घोषणा की है कि भारत सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त परियोजना के रूप में कार्य करेगा।</p>
<p>सोमनाथ ने रविवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए तीन दिन पहले मंजूरी मिली है। इसे हम जापान के साथ मिलकर करेंगे।" इस मिशन में चंद्रयान-3 के मुकाबले एक बड़ा और भारी रोवर भेजा जाएगा। चंद्रयान-5 का रोवर चंद्रयान-3 के रोवर 'प्रज्ञान' से दस गुना भारी होगा, जो कि 25 किलो वजन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150059/chandrayaan-5-mission-central-government-approves-a-joint-project-between-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/download-(12)2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चंद्रयान-5 मिशन-</strong>  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष, एस. सोमनाथ ने घोषणा की है कि भारत सरकार ने चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त परियोजना के रूप में कार्य करेगा।</p>
<p>सोमनाथ ने रविवार को बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, "हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए तीन दिन पहले मंजूरी मिली है। इसे हम जापान के साथ मिलकर करेंगे।" इस मिशन में चंद्रयान-3 के मुकाबले एक बड़ा और भारी रोवर भेजा जाएगा। चंद्रयान-5 का रोवर चंद्रयान-3 के रोवर 'प्रज्ञान' से दस गुना भारी होगा, जो कि 25 किलो वजन का था। चंद्रयान-5 मिशन से पहले, चंद्रयान-4 को 2027 में लॉन्च किया जाएगा। चंद्रयान-4 का उद्देश्य चंद्रमा से नमूने इकट्ठा करना है।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/download-(11)3.jpg" alt="चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान के बीच एक संयुक्त प्रोजेक्ट, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी" width="275" height="183"></img>चंद्रयान मिशन का इतिहास</strong><br />चंद्रयान मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह का अध्ययन करना है। चंद्रयान-1, जिसे 2008 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था, ने चंद्रमा की रासायनिक, खनिज और फोटो-जीओलॉजिकल मैपिंग की थी।</p>
<p>चंद्रयान-2 मिशन (2019) 98 प्रतिशत सफल रहा था, लेकिन मिशन के अंतिम चरणों में केवल 2 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो सका था। हालांकि, चंद्रयान-2 का ऑनबोर्ड उच्च-रिज़ोल्यूशन कैमरा अभी भी सैकड़ों चित्र भेजता है, जैसा कि सोमनाथ ने बताया।</p>
<p>चंद्रयान-3, जो चंद्रयान-2 का फॉलो-अप मिशन था, ने ISRO की चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और रोविंग करने की क्षमता को प्रमाणित किया। 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक 'सॉफ्ट लैंडिंग' की थी, जिससे भारत केवल पांचवां देश बन गया था, जिसने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की है (अमेरिका, रूस, चीन और जापान के साथ)।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूरोप</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Mar 2025 15:51:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो द्वारा जारी की गयी सैटेलाइट फोटो, महाकुंभ की भव्यता को देख दिल हो जाएगा बाग-बाग</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="ads_slot"><strong>सैटेलाइट इमेज में महाकुंभ की छटा</strong></div>
<div class="descriptionC">
<p>ISRO ने बुधवार को महाकुंभ नगर में टेंट सिटी की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में महाकुंभ के दौरान संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए तैयार की गई व्यवस्था, सड़कें, पीपा पुल और अन्य बुनियादी ढांचा नजर आ रहा है। इसके अलावा इन तस्वीरों में प्रयागराज में स्थित शिवालय पार्क का निर्माण भी दिखाया गया है जो 12 एकड़ में फैला है और महाकुंभ के प्रमुख आकर्षणों में से एक होगा।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/16_37_167003403photos.jpg" alt="16_37_167003403photos" width="640" height="420" />महाकुम्भ का आयोजन </strong>भारत में हर 12 साल में आयोजित होने वाला महाकुंभ इस बार 144</p></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147773/satellite-photo-released-by-isro-seeing-the-grandeur-of-mahakumbh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/2025_1image_16_38_394861040isrooooooooo-ll.jpg" alt=""></a><br /><div class="Headlines mb-3">
<div class="Headlines mb-3">
<div class="ads_slot"><strong>सैटेलाइट इमेज में महाकुंभ की छटा</strong></div>
<div class="descriptionC">
<p>ISRO ने बुधवार को महाकुंभ नगर में टेंट सिटी की पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में महाकुंभ के दौरान संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए तैयार की गई व्यवस्था, सड़कें, पीपा पुल और अन्य बुनियादी ढांचा नजर आ रहा है। इसके अलावा इन तस्वीरों में प्रयागराज में स्थित शिवालय पार्क का निर्माण भी दिखाया गया है जो 12 एकड़ में फैला है और महाकुंभ के प्रमुख आकर्षणों में से एक होगा।</p>
<p><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/16_37_167003403photos.jpg" alt="16_37_167003403photos" width="640" height="420"></img>महाकुम्भ का आयोजन </strong>भारत में हर 12 साल में आयोजित होने वाला महाकुंभ इस बार 144 साल के बाद भव्य रूप से मनाया जा रहा है। 13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ अब 26 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। इस बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने महाकुंभ की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं जो महाकुंभ के दौरान संगम की भव्यता को और भी खूबसूरती से दर्शाती हैं।</p>
<p>महाकुंभ 2025 में आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन के लिए पूरे शहर में टेंट सिटी और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया है। ISRO ने महाकुंभ मेला के लिए स्थापित की गई इस टेंट सिटी की टाइम सीरीज तस्वीरें भी जारी की हैं जो महाकुंभ के आयोजन को लेकर तैयारियों का पूरा विवरण देती हैं।</p>
</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 17:38:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में लहराया तिरंगा, भाजपा ने किया चंद्र विजय का जय घोष</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात, जिला ब्यूरो। मध्यप्रदेश। </strong></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"><strong>बालाघाट। </strong></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में लहराया तिरंगा, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश भारत। अभी और रचेंगे इतिहास। आखिरकार दशकों की मेहनत का फल भारत के वैज्ञानिकों को मिल गया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत ये कीर्तिमान रचते हुए देश-दुनिया की धड़कन चंद्रयान 3 मिशन पर टिकी थीं। इसरो के मून मिशन 'चंद्रयान-3' की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' सफल हो गई है। इससे गगन में छुपे रहस्याओं का उजागर तो होगा वही संसार की उन्नति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा। </p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-08/save_20230823_194743.jpg" alt="Bjp balaghat" /></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">देश की उपलब्धि पर भोपाल प्रवास पर गए भारतीय जनता पार्टी के</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133913/tricolor-hoisted-in-space-bjp-hails-chandra-vijay"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/save_20230823_194804.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात, जिला ब्यूरो। मध्यप्रदेश। </strong></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"><strong>बालाघाट। </strong></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अंतरिक्ष में लहराया तिरंगा, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश भारत। अभी और रचेंगे इतिहास। आखिरकार दशकों की मेहनत का फल भारत के वैज्ञानिकों को मिल गया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">भारत ये कीर्तिमान रचते हुए देश-दुनिया की धड़कन चंद्रयान 3 मिशन पर टिकी थीं। इसरो के मून मिशन 'चंद्रयान-3' की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 'सॉफ्ट लैंडिंग' सफल हो गई है। इससे गगन में छुपे रहस्याओं का उजागर तो होगा वही संसार की उन्नति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा। </p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-08/save_20230823_194743.jpg" alt="Bjp balaghat"></img></p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">देश की उपलब्धि पर भोपाल प्रवास पर गए भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल ने दूरभाष पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। देश की ऐतिहासिक चंद्र विजय पर इसरो के वैज्ञानिकों, समूचे देश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमिट इच्छा शक्ति का आभार जताते हुए जिला भारतीय जनता पार्टी कार्यालय के परिसर में भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारी ने हर्ष जाहिर किया। जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर भारत माता की जय, वंदे मातरम, चंद्र विजय की जय, जैसे गगन बेदी जय घोषों से माहौल को सराबोर कर दिया।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस गौरवामयी क्षण में संजय खंडेलवाल, अनिल अग्रवाल, सुमित यादव, भूपेन्द्र सोहगपुरे, विजय बिसेन, योगराज टेंभरे, जैनेंद्र कटरे, पंकज कुर्वे, अमन गांधी, अखिलेश चौरे, शशि तेवर, मोहित राणा, हिमांशु चौकसे, सोनू कसार, चेतन मराठा, विशाल मेश्रम, प्रणय डहरवाल, सिद्धार्थ बाजपेई, करन बिसेन, अनमोल रामटेके, खिमेन्द्र गौतम समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 21:57:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्रयान-3 चंद्रयान-3 ने सीना ठोककर खटखटाई चांद की कुंडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p>भारत ने इतिहास रच दिया है. चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ली है. चंद्रयान-3 के साथ ही भारत चांद के साउथ पोल पर यान उतारने वाला पहला देश बन गया है. जबकि चांद के किसी भी हिस्से में सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है. भारत से पहले अमेरिका, सोवियत संघ (अभी रूस) और चीन ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं. चांद पर पहुंचकर चंद्रयान-3 ने मैसेज भेजा- मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं.</p>
<p>        चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग को एक्टर प्रकाश राज ने बताया</p>
<p>चंद्रयान-3</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133927/chandrayaan-3-chandrayaan-3-knocked-the-moons-latch-by-thumping-its-chest"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/chandrayan-3.png" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:</strong></p>
<p>भारत ने इतिहास रच दिया है. चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ली है. चंद्रयान-3 के साथ ही भारत चांद के साउथ पोल पर यान उतारने वाला पहला देश बन गया है. जबकि चांद के किसी भी हिस्से में सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश है. भारत से पहले अमेरिका, सोवियत संघ (अभी रूस) और चीन ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं. चांद पर पहुंचकर चंद्रयान-3 ने मैसेज भेजा- मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं.</p>
<p>    चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग को एक्टर प्रकाश राज ने बताया गौरव का क्षण, लिखा- जिन्होंने इसे संभव बनायाचंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग को एक्टर प्रकाश राज ने बताया गौरव का क्षण, लिखा- जिन्होंने इसे संभव बनाया</p>
<p>चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग को पीएम मोदी ने साउथ अफ्रीका से वर्चुअली देखा. सफल लैंडिंग के बाद पीएम मोदी ने इसरो और देश को बधाई दी. पीएम मोदी ने कहा कि चंदा मामा अब दूर के नहीं, टूर के हैं.</p>
<h4><strong>ऐसे हुई लैंडिंग</strong></h4>
<p>चंद्रयान-3 के लैंडिंग की शुरुआत 5 बजकर 30 मिनट पर हुई. रफ लैंडिंग बेहद कामयाब रही. इसके बाद 5 बजकर 44 मिनट पर लैंडर ने वर्टिकल लैंडिग की. तब चंद्रयान-3 की चंद्रमा से दूरी 3 किमी रह गई थी. इसके 20 मिनट में चंद्रमा की अंतिम कक्षा से चंद्रयान-3 ने 25 किमी का सफर पूरा किया. फिर लैंडर को धीरे-धीरे नीचे उतारा गया. शाम 6 बजकर 04 मिनट पर लैंडर ने चांद पर पहला कदम रखा. इस तरह भारत चांद के साउथ पोल पर कदम रखने वाला दुनिया का पहला देश बन गया.</p>
<h4><strong>पीएम मोदी ने क्या कहा?</strong></h4>
<p>पीएम मोदी ने देश को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा, "यह क्षण भारत के सामर्थ्य का है. यह क्षण भारत में नई ऊर्जा, नए विश्वास, नई चेतना का है. ये क्षण अविस्मरणीय है. ये क्षण नए भारत के जयघोष का है. ये क्षण जीत के चंद्र पट पर चलने का है. ये क्षण 140 करोड़ भारतीयों का है. ये क्षण भारत में नई ऊर्जा भरने का है. अमृतकाल में अमृतवर्षा हुई है. हमने धरती पर संकल्प लिया और चांद पर उसे साकार किया. हम अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने हैं."</p>
<h4><strong>अब रोवर के निकलने का है इंतजार</strong></h4>
<p>चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम के सफलतापूर्वक चांद पर उतरने के बाद अब इसके अंदर से रोवर प्रज्ञान के निकलने का इंतजार है. इसमें करीब 1 घंटा 50 मिनट लगेगा. डस्ट सेटल होने के बाद विक्रम चालू होगा और कम्युनिकेट करेगा. फिर रैंप खुलेगा और प्रज्ञान रोवर रैंप से चांद की सतह पर आएगा. इसके बाद इसके व्हील चांद की मिट्‌टी पर अशोक स्तंभ और ISRO के लोगो की छाप छोड़ेंगे. फिर 'विक्रम' लैंडर 'प्रज्ञान की फोटो खींचेगा और प्रज्ञान विक्रम की तस्वीर लेगा. ये फोटो वे पृथ्वी पर भेजेंगे.</p>
<h4><strong>स्पेस पावर के रूप में उभरा भारत</strong></h4>
<p><br />चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग से भारत स्पेस पावर के रूप में उभरा है. इसके साथ ही ISRO का दुनिया की अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों के मुकाबले कद कहीं ऊंचा हो गया है. देशवासी ISRO के वैज्ञानिकों को बधाई दे रहे हैं और उनके काम की जमकर सराहना कर रहे हैं. <br /> </p>
<h4><strong>सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की बाढ़</strong></h4>
<p><br />सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों का तांता लगा है. देशभर में मिठाई बांटकर और आतिशबाजी करके इस गौरव के क्षण का जश्न मनाया जा रहा है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>एशिया</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 21:46:34 +0530</pubDate>
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