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                <title>इंडिया गठबंधन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>इंडिया गठबंधन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुरुक्षेत्र: राहुल को प्रतिरोध का नारा बनाएगा विपक्ष का चेहरा, 2029 में PM मोदी और नेता विपक्ष का सीधा मुकाबला।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181388/kurukshetra-will-make-rahul-a-slogan-of-resistance-face-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/43.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर्चा लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीबीएसई की गड़बडी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत अमेरिका व्यापार समझौता </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपस्तीन फाइल,खाड़ी युद्ध में भारत की विदेश नीति और अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत जैसे  हर ज्वलंत मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री मोदी को ही घेर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल का वक्त है लेकिन राजनीति जिस दिशा में चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे साफ जाहिर है कि न सिर्फ 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव बल्कि अब 2029 तक जितने भी चुनाव होंगे सब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच ही सीधा मुकाबला होगा।नतीजतन राहुल गांधी खुद खुलकर मैदान में आ गये हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल गांधी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में कहा कि अब देश में चुनावों की परंपरागत राजनीति से आगे प्रतिरोध की राजनीति का युग आ गया है। प्रतिरोध की राजनीति से राहुल गांधी का सीधा मतलब है कि मोदी सरकार को संसद के साथ-साथ विपक्ष अब सड़क पर भी घेरेगा। राहुल ने कहा कि सभी संस्थाएं सरकार के कब्जे में हैं और चुनावों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए कांग्रेस को प्रतिरोध की राजनीति के अपने पुराने दौर में लौटना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">राहुल ने सिर्फ एलान ही नहीं किया बल्कि उन्होंने प्रतिरोध की राजनीति की शुरुआत करते हुए सबसे पहले युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद करने के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है।इसकी शुरुआत वह कोटा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना और दिल्ली में छात्र युवा सम्मेलन से कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा और एनडीए तो 2014 से ही चाहे लोकसभा हो या विधानसभा का चुनाव नरेंद्र मोदी को आगे करके उनके नाम पर ही हर चुनाव लड़ रहा है। सत्ता पक्ष के लिए नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और नाम चुनावों में जीत का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि इसके विपरीत कांग्रेस मोदी के मुकाबले अपने किसी भी नेता को आगे करके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी तरह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी इंडिया गठबंधन भी मोदी के मुकाबले बिना कोई चेहरा आगे लाए ही मैदान में उतरा था। लेकिन अब कांग्रेस जिस राह पर चल पड़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे यह साफ है कि अब उसे नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल गांधी को आगे करने में कोई गुरेज नहीं है। अब राहुल गांधी खुद आगे बढ़कर सरकार के खिलाफ होने वाली लड़ाई की कमान संसद के साथ सड़क पर भी संभालने के लिए तैयार हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उधर विपक्षी खेमे की तस्वीर अब खासी बदल गई है। हाल ही में हुए पांच विधानसभा चुनावों में प.बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एमके स्टालिन के किले ढह गए और इसके पहले बिहार में तेजस्वी यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे भाजपा के हाथों हार चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस भी 2024 के बाद हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र और असम में भाजपा से हारी है लेकिन केरल में उसकी जीत और तमिलनाडु में डीएमके को छोड़कर टीवीके सरकार में शामिल होने से पार्टी को फिर आक्सीजन मिल गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए अब मामला कांग्रेस और क्षत्रपों के बीच बराबरी का हो गया है और अब कोई भी क्षत्रप कांग्रेस को यह उलाहना नहीं दे सकता कि भाजपा का मुकाबला क्षेत्रीय दल ही सफलता पूर्वक कर पाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षत्रपों में अब झारखंड में हेमंत सोरेन अकेले ऐसे नेता हैं जो दो बार लगातार भाजपा को चुनावी मात दे चुके हैं और कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन है जबकि 2014</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2017</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2019 और 2022 में लगातार भाजपा के हाथों चुनावी हार झेल चुके अखिलेश यादव ने 2024 में लोकसभा चुनावों में भाजपा को पटखनी देकर फिर से 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए खम ठोंक रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब 2027 में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां चुनाव में भाजपा का सपा से मुकाबला होगा और कांग्रेस उसकी सहयोगी पार्टी होगी। वहीं पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का सीधा मुकाबला होगा क्योंकि यहां भाजपा अभी अपनी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है और अकाली दल के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले सारे राज्यों उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिमाचल प्रदेश</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला होगा। वहीं तेलंगाना में कांग्रेस बीआरएस और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होगा। यहां भी कांग्रेस मुख्य किरदार होगी</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span></strong></p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में उन सीटों पर पुनर्मतदान हो जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178551/re-polling-should-be-held-in-bengal-on-those-seats-where"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/tasuezpp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने, 100 से अधिक सीटों पर परिणामों में हेरफेर करने का आरोप है। यह संस्थागत चुनावी लूट है। लोकतांत्रिक संकट के इस निर्णायक क्षण में ‘इंडिया’ गठबंधन स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़ा है। ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का उनका संकल्प सुनियोजित हेराफेरी के खिलाफ संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा को दर्शाता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, "...ज़रा उनके टूलकिट पर नज़र डालिए: पहले कीचड़ फैलाया जाता है; फिर कमल खिलता है। अगर आप और मैं सही समय पर नहीं जागे तो ठीक यही होगा।" खेड़ा ने आगे कहा, "...इलेक्शन कमीशन का काम था कि इस कीचड़ को फैलने से रोके, हेट स्पीच का सख्ती से जवाब दे, एक्शन ले, और शिकायतों पर ध्यान दे। इसके बजाय, खुद उसी कीचड़ में लोटकर, इलेक्शन कमीशन ने डेमोक्रेसी को तार-तार कर दिया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन इसको लेकर एकमत है कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ वह चुनाव परिणाम नहीं है, बल्कि हेरफेर के माध्यम से थोपा गया एक मनगढ़ंत जनादेश है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जैसे महाराष्ट्र में लक्षित करके लाखों वोट जोड़े गए थे, वैसे ही पश्चिम बंगाल और असम में 'टारगेट' कर लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर के तहत हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। यानी सबकुछ सामने है, दूध का दूध और पानी का पानी।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि इनमें से बहुत से लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें उच्चतम न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि वो संविधान को ध्यान में रखते हुए न्याय करेगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:14:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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