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                <title>West Bengal news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>West Bengal news RSS Feed</description>
                
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                <title>तारापीठ में होटल में भीषण आग, सात लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>बीरभूम, स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार तड़के तारापीठ मंदिर के पास स्थित एक चार मंजिला होटल में भीषण आग लग गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के समय होटल में ठहरे अधिकांश लोग सो रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि आग सुबह करीब पांच बजे होटल के भूतल से शुरू हुई। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185636/major-fire-in-hotel-in-tarapith-seven-people-died"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>बीरभूम, स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सोमवार तड़के तारापीठ मंदिर के पास स्थित एक चार मंजिला होटल में भीषण आग लग गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के समय होटल में ठहरे अधिकांश लोग सो रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि आग सुबह करीब पांच बजे होटल के भूतल से शुरू हुई। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए रामपुरहाट सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शुरुआत में अस्पताल की ओर से पांच लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। बाद में पुलिस ने मृतकों की संख्या बढ़कर सात होने की पुष्टि की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार हादसे में अब तक सात लोगों की जान जा चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">होटल प्रबंधन ने आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने का दावा किया है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की ओर से आग के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में कुछ श्रद्धालु भी शामिल हैं, जो तारापीठ के प्रसिद्ध काली मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 22:18:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टूटती तृणमूल कांग्रेस और ममता: संगठनात्मक कमजोरी और जनविश्वास का संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181935/disintegrating-trinamool-congress-and-mamta-organizational-weakness-and-crisis-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(4).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p>पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीन दशक से छाई तृणमूल कांग्रेस आज अंदरूनी दरारों और संगठनात्मक टूटन के दौर से गुजर रही है। 2011 में 34 साल पुराने वाम मोर्चे को उखाड़ फेंकने वाली पार्टी अब खुद अपने ही वजन तले डगमगा रही दिखती है। तृणमूल की सबसे बड़ी समस्या बन गई है नेताओं की लगातार नाराजगी और दल-बदल। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी कई विधायक, सांसद और जिला स्तर के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों में चले गए। शुभेंदु अधिकारी, मुकुल रॉय, राजीव बनर्जी जैसे कद्दावर नेताओं का जाना संगठन में भरोसे की कमी को दर्शाता है। नीचे के स्तर पर भी ब्लॉक और पंचायत स्तर पर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।</p>
<p><br />नियोग, कोयला, गोरू तस्करी और राशन घोटाले जैसे मामलों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए। ED और CBI की कार्रवाई ने संगठन की साख को नुकसान पहुंचाया। आम लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि सत्ता के साथ भ्रष्टाचार भी जड़ें जमा चुका है। इससे जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं और मतदाता का एक हिस्सा विकल्प तलाश रहा है।<br />                  टीएमसी आज भी पूरी तरह ममता बनर्जी के व्यक्तित्व पर टिकी है। पार्टी का ढांचा संस्थागत कम, परिवार और करीबी नेताओं के इर्द-गिर्द ज्यादा केंद्रित है। अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद ने भी पुराने नेताओं में असहजता पैदा की है। जब कोई संगठन एक व्यक्ति पर निर्भर हो जाता है, तो उस व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और राजनीतिक रणनीति ही पार्टी का भविष्य तय करने लगती है। फिलहाल ताजा खबर यह है कि टीएमसी एक और बड़ी टूट की कगार पर खड़ी है और यह निश्चित हो गया है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब टीएमसी को उभरने का मौका शायद ही मिल सके। कल सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नज़र आईं तो वहीं दावा है कि उनकी पार्टी के 20 सांसदो ने बगावत कर दी है। सूचना है कि पार्टी के कई सांसद भाजपा नेताओं से मिलकर बगावत की रणनीति बना रहे थे।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर सोमवार को ही टीएमसी के कई सांसदों ने मुलाकात के बाद अलग गुट बनाने का दावा किया है। पता चला है कि इस बैठक में टीएमसी के पांच सांसद मौजूद रहे। इनमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश बसुनिया, कालिपद सोरेन व अनूप चक्रवर्ती शामिल हैं। टीएमसी के लोकसभा में 28 व राज्यसभा में 12 सांसद हैं। सूत्र बताते हैं कि बागी सांसदों ने रविवार को एक बैठक की थी, और उसी वक्त अलग गुट बनाने का ऐलान कर टीएमसी को झटका दिया जाने पर विचार हुआ है।</p>
<p>जब विधायक दल में टूट हुई थी तो सांसदों के बग़ावत की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया था। ऐसा बताया जा रहा है कि बाग़ी सांसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भी संपर्क में हैं और बहुत ही जल्द एक नये गुट का ऐलान हो सकता है। टीएमसी की सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि बागी सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है और लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। कोई भी पार्टी जब चुनाव हारती है तब उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है</p>
<p>अपनी पार्टी को टूट से बचाने की क्यों कि हर कोई सत्ता के लड्डू खाना चाहता है, बेकार में विपक्ष में अब कोई बैठना नहीं चाहता है। इसके लिए केंद्र में कांग्रेस में टूट, दिल्ली में आप में टूट उत्तर प्रदेश में सपा में टूट और महाराष्ट्र का उदाहरण देखा जा सकता है। यही संकट अब इस समय टीएमसी के ऊपर मंडरा रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को टूटने से कितना बचा पातीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्ता जाते ही ममता के अपने ही बागी हो गए! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आपने एक पुरानी कहावत तो जरूर सुनी होगी कंगाली में आटा गीला। यह ममता बनर्जी के साथ बिल्कुल खरी साबित हो रही है एक ओर वह सत्ता से बाहर हो गयीं हैं दूसरे ओर उनके अपने ही उनके खिलाफ मुखर हो गएं हैं। आपको बता दें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक और कानूनी परेशानियां मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। पार्टी के भीतर बड़ी बगावत और कानूनी मुकदमों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी की बढ़ती परेशानियों की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180755/as-soon-as-she-lost-power-mamatas-own-people-became"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/6a1fc76a46895-mamata-banerjee-031916703-16x9.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपने एक पुरानी कहावत तो जरूर सुनी होगी कंगाली में आटा गीला। यह ममता बनर्जी के साथ बिल्कुल खरी साबित हो रही है एक ओर वह सत्ता से बाहर हो गयीं हैं दूसरे ओर उनके अपने ही उनके खिलाफ मुखर हो गएं हैं। आपको बता दें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक और कानूनी परेशानियां मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद से लगातार बढ़ रही हैं। पार्टी के भीतर बड़ी बगावत और कानूनी मुकदमों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी की बढ़ती परेशानियों की वजह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस  अपने 28 साल के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है। पार्टी के 58 विधायकों ने बागी रुख अपनाते हुए निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  चुन लिया है, जिसे विधानसभा स्पीकर ने मंजूरी भी दे दी है। इसके साथ ही, लगभग 20 से अधिक टीएमसी सांसदों के भी भाजपा  के संपर्क में होने की खबरें सामने आ रही हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी पर पकड़ ढीली होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि संकट के बीच ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई हाई-लेवल बैठक में 80 में से केवल 8 विधायक और 41 में से सिर्फ 6 सांसद ही शामिल हुए। ज्यादातर निर्वाचित प्रतिनिधियों ने इस बैठक से दूरी बना ली, जो उनके नेतृत्व को एक सीधा चैलेंज माना जा रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक मोर्चे के साथ-साथ ममता बनर्जी अब कानूनी पचड़े में भी फंस गई हैं। चुनाव के दौरान दिए गए उनके बयानों और "बांग्लादेश में हुई राजनीतिक हत्या के मामले को केंद्र सरकार से जोड़ने" को लेकर उनके खिलाफ सिलीगुड़ी और कोलकाता में राजद्रोह  और हेट स्पीच की शिकायतें व पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसे देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सत्ता हाथ से जाने के बाद जमीनी स्तर पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भगदड़ मची हुई है। उनके बेहद करीबी माने जाने वाले कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम और बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा राज्यभर में 100 से ज्यादा टीएमसी पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता बनर्जी को अपने ही गढ़ भवानीपुर सीट से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के हाथों 15,105 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। राज्य में 15 साल पुराने टीएमसी शासन का अंत हो गया है और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की नई सरकार का गठन हो चुका है।  ममता बनर्जी इन सभी विपरीत हालातों के खिलाफ सड़कों से लेकर हाइकोर्ट तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम एक माह पूर्व 4 मई को सामने आए थे। इनमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को निराशा का मुंह देखना पड़ा था। 294 सीटों वाली इस विधानसभा में उसे 80 सीटें ही मिली थीं। इस तरह 15 वर्ष तक प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं ममता का शासन खत्म हो गया था। ममता ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लम्बी अवधि तक वह इसके साथ जुड़ी रहीं, परन्तु 28 वर्ष पूर्व 1998 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) का गठन किया था और कम्युनिस्ट पार्टियों के तीन दशकों से भी अधिक प्रदेश में चले आ रहे लम्बे शासन को खत्म करने के लिए बड़ी दिलेरी और दृढ़ता से उसका मुकाबला किया था। इस समय लोकसभा में इनके 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं, परन्तु विगत लम्बी अवधि से इस पार्टी के भीतर ममता की तानाशाही और टकराव वाली नीतियों के कारण असंतोष और असहमति चल रही थी, परन्तु उनकी प्रशासन पर सख्त पकड़ और कठोर फैसलों से यह बग़ावत अंदर-अंदर ही सुलगती रही थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को अपने साथ राजनीति में लाकर उसे अधिक शक्तियां दे दी थीं। बनर्जी के काम करने के ढंग-तरीके से भी पार्टी गलियारों में असंतोष था, जिसके संबंध में ममता को लगातार उनकी पार्टी के नेताओं द्वारा अवगत करवाया जाता रहा था परन्तु ममता ने इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया। अपनी ताकत के दम पर उन्होंने बड़ी राष्ट्रीय नेता होने का भ्रम भी पाल लिया था, जिस कारण राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों ही पार्टियों द्वारा बनाए गए 'इंडिया गठबंधन' की वह सदस्य ज़रूर बनी रही थीं, परन्तु इसमें शामिल अलग-अलग पार्टियों के सभी नेताओं से ऊंचा कद होने का भ्रम उन्होंने पाल रखा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसलिए विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी किसी भी सहयोगी पार्टी के साथ गठबंधन करने से इन्कार कर दिया था। उनके शासन के समय प्रदेश की आर्थिकता भी बेहद कमज़ोर हो गई थी और यह पूरी तरह कर्ज में डूब चुका था। केन्द्र के साथ लगातार टकराव रहने के कारण और उद्योग को समर्थन न मिलने के कारण प्रदेश की आर्थिकता डावांडोल हो गई थी। इसके साथ ही बेरोज़गारी की दर भी बढ़ चुकी थी, परन्तु पिछला पूरा समय केन्द्र और अन्य पार्टियों के साथ टकराव बने रहने के कारण भी उनकी प्रशासनिक तौर पर पकड़ ढीली पड़ चुकी थी। ऐसी स्थिति लोगों के भीतर निराशा में बदलती गई। लगातार सरकार विरोधी भावनाओं के बढ़ने का अनुमान लगाने में वह असमर्थ रहीं और न ही वह दीवार पर लिखे को पढ़ सकीं, जिस कारण उन्हें चुनाव में निराशा का मुंह देखना पड़ा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हार के बाद भी उन्होंने खुले मन से आत्म-मंथन करने की बजाए अपनी पार्टी के भीतर असंतोष को अनदेखा किए रखा जो अंत में उनके लिए हानिकारक सिद्ध हुई। आंतरिक यह चिंगारी उस समय लपटें बन गई, जब उन्होंने ज्यादातर पार्टी नेताओं को अनदेखा करके अभिषेक बनर्जी के कहने पर विधानसभा में विपक्ष के नेता के लिए सैमन देव का नाम स्पीकर को भेज दिया, परन्तु ज्यादातर विधायक इस पद के लिए रिताव्रता बनर्जी के पक्ष में थे, परन्तु ममता ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और इस पद के लिए स्पीकर को विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भेज दिया, जिस कारण ज्यादातर नेताओं ने बग़ावत का मार्ग अपना लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले को लेकर ही बुधवार को पार्टी के 80 विधायकों में से 59 विधायकों ने विधानसभा के स्पीकर से सम्पर्क किया। अपने हस्ताक्षरों वाला पत्र उन्हें सौंपा और अपने गुट को असली तृणमूल कांग्रेस बताया। पार्टी के 28 वर्ष के के इतिहास में ममता पर पहली बार इतना बड़ा हमला हुआ है। इसकी उदाहरण महाराष्ट्र से मिलती है, जब 20 जून, 2022 को वहां शिव सेना के 55 में से 40 विधायकों ने एकनाथ शिंदे का उस समय साथ दिया था, जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे। उसके सप्ताह भर बाद ही शिंदे वहां भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए थे। अब दो तिहाई सदस्यों के एकजुट होने से विधानसभा में ममता के समर्थक सदस्य 2 दर्जन से भी कम रह गए हैं, जिससे उनकी राजनीतिक हालत और भी दयनीय हो गई प्रतीत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी तरफ भाजपा को बड़ी जीत प्राप्त होने के कारण उसके नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के बागियों के साथ कोई भी समझौता करने से इंकार कर दिया है। रिताव्रता बनर्जी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी विद्यार्थी संगठन से की थी। 34 वर्ष की उम्र में वह राज्यसभा के सदस्य बन गए थे और बाद में वह टी.एम.सी. में शामिल हो गए थे। ममता ने ही उन्हें वर्ष 2024 में राज्यसभा में भेजा था। विधानसभा चुनाव में वह उलबेरिया सीट से विधायक चुने गए हैं। चाहे ममता ने इस बड़ी चुनौती के समक्ष भी अपना हौसला कायम रखते हुए इन बागियों और भाजपा को ललकारा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही उन्होंने भाजपा विरोधी पार्टियों से सम्पर्क करने की बात भी की है, परन्तु अब यह देखना शेष होगा, कि वह निकट भविष्य में प्रदेश और देश की राजनीति में किस तरह विचरण करेंगी।स्पष्ट है कि आज की राजनीति में साम दाम दंड भेद सब का चलन बढ़ गया है सत्ता में सबको समेट रखने की ताकत है लेकिन सत्ता से बाहर होते ही अपने सगे साथियों की हकीकत सामने आ जाती है कि उनके दिल में कितना खार छुपाए बैठे थे यह बदलते दौर की राजनीति की नंगी तस्वीर है इस को स्वीकार करना ही होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 18:53:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल: अभिषेक बनर्जी के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर पर लगी चोट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180387/tmc-mp-kalyan-banerjee-attacked-after-west-bengal-abhishek-banerjee"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/attack-on-kalyan-banerjee-1780211370965.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोका। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के बाद तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद पर कथित रूप से हमला हुआ है। सांसद कल्याण बनर्जी चंडीतला पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और कथित तौर पर मारपीट की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने सांसद कल्याण बनर्जी का रास्ता रोकते हुए उन्हें काले झंडे दिखाए। तस्वीरों में नजर आया कि कल्याण बनर्जी भीड़ का सामना कर रहे थे। बड़ी संख्या में लोग उनके खिलाफ नारे लगा रहे थे। इस दौरान कथित रूप से उनके सिर पर चोट लगी। वे थोड़ी देर बाद जमीन पर गिर गए। हमले के बाद जमीन पर लेटे कल्याण बनर्जी फोन पर बात करते हुए नजर आए। इस दौरान सुरक्षाबलों को स्थिति को संभालने का प्रयास करते हुए भी देखा गया। वहीं, टीएमसी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी को संभाला और उन्हें भीड़ से दूर ले जाने का प्रयास किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं अकेला आ रहा था। मेरे साथ कोई नहीं था। बीजेपी सदस्यों ने गाली-गलौज की और मेरे सिर पर बॉल से मारा। मेरे सिर से खून बह रहा है।" उन्होंने कहा, "अब लोग तय करेंगे कि यह सही है या गलत कि सांसदों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले, शनिवार को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। वे चुनाव के बाद शनिवार को हिंसा में मारे गए एक तृणमूल कार्यकर्ता के परिवार से मिलने सोनारपुर गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उनके काफिले पर अंडे व ईंट के टुकड़े फेंके और नारे लगाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा, "फिलहाल इलाज घर पर ही किया जाएगा। जितनी जरूरत होगी, सलाइन और ऑक्सीजन घर पर ही दी जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो अभिषेक को इलाज के लिए हैदराबाद ले जाया जाएगा।"पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के सीने में ब्लड क्लॉट जम गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय अभिषेक के सिर पर हेलमेट नहीं होता, तो घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 19:06:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंगाल में उन सीटों पर पुनर्मतदान हो जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178551/re-polling-should-be-held-in-bengal-on-those-seats-where"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/tasuezpp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने, 100 से अधिक सीटों पर परिणामों में हेरफेर करने का आरोप है। यह संस्थागत चुनावी लूट है। लोकतांत्रिक संकट के इस निर्णायक क्षण में ‘इंडिया’ गठबंधन स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़ा है। ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का उनका संकल्प सुनियोजित हेराफेरी के खिलाफ संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा को दर्शाता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, "...ज़रा उनके टूलकिट पर नज़र डालिए: पहले कीचड़ फैलाया जाता है; फिर कमल खिलता है। अगर आप और मैं सही समय पर नहीं जागे तो ठीक यही होगा।" खेड़ा ने आगे कहा, "...इलेक्शन कमीशन का काम था कि इस कीचड़ को फैलने से रोके, हेट स्पीच का सख्ती से जवाब दे, एक्शन ले, और शिकायतों पर ध्यान दे। इसके बजाय, खुद उसी कीचड़ में लोटकर, इलेक्शन कमीशन ने डेमोक्रेसी को तार-तार कर दिया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन इसको लेकर एकमत है कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ वह चुनाव परिणाम नहीं है, बल्कि हेरफेर के माध्यम से थोपा गया एक मनगढ़ंत जनादेश है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जैसे महाराष्ट्र में लक्षित करके लाखों वोट जोड़े गए थे, वैसे ही पश्चिम बंगाल और असम में 'टारगेट' कर लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर के तहत हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। यानी सबकुछ सामने है, दूध का दूध और पानी का पानी।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि इनमें से बहुत से लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें उच्चतम न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि वो संविधान को ध्यान में रखते हुए न्याय करेगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:14:51 +0530</pubDate>
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