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                <title>अमित शाह - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अमित शाह RSS Feed</description>
                
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                <title>नए भारत का स्वर्णिम अध्याय: नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में विकास, शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा की गाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178327/the-golden-chapter-of-new-india-the-story-of-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01634.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। 2026 तक भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है और 7.4 से 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए हुए है। यह उपलब्धि सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन में अमित शाह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत करते हुए भाजपा को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया। मोदी और शाह की जोड़ी ने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है। सड़कों का विस्तार, हाईवे का निर्माण, रेलवे का आधुनिकीकरण और हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि—इन सभी ने भारत को एक नए युग में प्रवेश कराया है। आधुनिक ट्रेनों, विद्युतीकरण और सुरक्षा तकनीकों ने यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है। गांवों तक सड़क और बिजली पहुंचाना विकास को समावेशी बनाने का प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है। यूपीआई जैसी व्यवस्था ने देश को डिजिटल भुगतान में अग्रणी बना दिया है। आज सरकारी सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कल्याण की योजनाओं ने भी करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलों ने गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। यह केवल योजनाएं नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ट्रैक का तेजी से विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, और सुरक्षा प्रणाली का विकास—इन सभी ने भारतीय रेलवे को नई पहचान दी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी रेलवे ने सौर ऊर्जा, एलईडी लाइटिंग और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कदम उठाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्विकास भी इस दौर की एक विशेष पहचान रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन दिया है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी और नीतिगत सुधारों ने भी देश की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों ने सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। इन निर्णयों को समर्थक जहां साहसिक कदम मानते हैं, वहीं आलोचक इनके प्रभावों पर चर्चा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने एक नई पहचान बनाई है। “भारत प्रथम” के सिद्धांत पर आधारित नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में पार्टी की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर पार्टी ने प्रभावी कार्य किया है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना इसकी सफलता का आधार रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस विकास यात्रा में चुनौतियां भी मौजूद हैं। रोजगार सृजन, आय असमानता और कृषि क्षेत्र की समस्याएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन यह भी सच है कि सरकार इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सुधार की दिशा में प्रयासरत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है—एक ऐसा दृष्टिकोण जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखता है। “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य इसी सोच का परिणाम है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमित शाह की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल ने इस दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करते हुए उसे हर स्तर पर सशक्त बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को लेकर भी आश्वस्त है। यह आत्मविश्वास पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने जिस गति से प्रगति की है, वह न केवल देशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक उदाहरण है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि यही दिशा और प्रयास जारी रहे, तो भारत जल्द ही एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह दौर केवल राजनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि एक युग निर्माण का दौर है, जिसमें भारत अपनी नई पहचान गढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:22:47 +0530</pubDate>
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                <title>नक्सलवाद की समाप्ति के बाद भी बहुत कुछ करना होगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी पहले   केंद्र सरकार  ने  घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। मार्च 2026 की  अवधि से  एक दिन    पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बड़ी घोषणा की । नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने  कहा कि  देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है।  आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार  नक्सल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174666/a-lot-needs-to-be-done-even-after-the-end"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/b40843a0-3641-11f0-8519-3b5a01ebe413.jpg.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी पहले   केंद्र सरकार  ने  घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा। मार्च 2026 की  अवधि से  एक दिन    पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बड़ी घोषणा की । नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने  कहा कि  देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है।  आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तेजी से विकास करा  रही है। शिक्षा के लिए स्कूल और उपचार के लिए  वहां अस्पताल खुल रहे हैं। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें खत्म हो रही हैं और आदिवासियों की आवाज अब संसद तक पहुंची है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने समस्या को बढ़ने दिया। मोदी सरकार के फैसलों से हालात बदले हैं। उन्होंने कहा कि नक्सल विचारधारा आदिवासियों को गुमराह करती है और अब देश नक्सलवाद मुक्त बनने की ओर बढ़ रहा है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने नक्सलियों से बातचीत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें खत्म कर विकास को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि जो हथियार उठाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों का पूरा केंद्रीय नेतृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पोलित ब्यूरो और कमेटी अब खत्म हो चुकी है। काफी मारे गए</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">  बहुतों </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> ने सरेंडर किया । कुछ अभी फरार हैं। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने कहा कि देश अब नक्सल मुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि कई बड़े ऑपरेशन जैसे बुढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थंडरस्टॉर्म और ब्लैक फॉरेस्ट चलाए गए।  इनमें भारी मात्रा में हथियार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईईडी फैक्ट्री और अनाज बरामद हुआ। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना और ओडिशा के बड़े इलाके अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुके हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की भूमिका को उन्होंने अहम बताया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्रीय  गृहमंत्री ने  बताया  कि  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आजादी के समय देश संसाधनों की कमी और विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। कई दूर-दराज के इलाकों तक सरकार की पहुंच नहीं थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़कों और सुविधाओं का अभाव था। ऐसे हालात में कुछ संगठनों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। जहां राज्य की पकड़ कम थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हीं इलाकों को रेड कॉरिडोर बनाया गया। भोले-भाले आदिवासियों को भेदभाव और शोषण के नाम पर भड़काया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध भेदभाव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास की कमी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका इस्तेमाल कर हिंसा को बढ़ावा दिया गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने ऑल एजेंसी अप्रोच अपनाई</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें सीएपीएफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाया गया। फंडिंग और स्पोर्ट सिस्टम पर प्रहार किया गया। सरेंडर नीति लागू की गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसमें आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक मदद और पुनर्वास दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर गांव तक अपनी पहुंच बनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे नक्सलवाद कमजोर हुआ।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने  दावा किया   कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास हुआ। हजारों किलोमीटर सड़कें बनीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोबाइल टावर लगाए गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एटीएम और डाकघर खोले गए। शिक्षा के लिए एकलव्य स्कूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईटीआई और कौशल केंद्र बनाए गए। उन्होंने कहा कि विकास ही नक्सलवाद खत्म करने का सबसे बड़ा कारण बना।</span><br /><span lang="hi" xml:lang="hi"></span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शाह ने कहा कि नक्सलवाद गरीबी से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विचारधारा से पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती और बंदूक के जरिए सत्ता चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथ में हथियार दिए गए और विकास को रोका गया। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री ने कहा कि सरकार आगे भी सख्ती और विकास दोनों पर काम जारी रखेगी। उन्होंने आदिवासी समाज को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अब देश बंदूक से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संविधान से चलेगा और यही असली जीत है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">गृह मंत्री के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस "रेड कॉरिडोर" का विस्तार कभी पशुपति से तिरुपति तक माना जाता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह अब सिमटकर केवल कुछ जिलों तक रह गया है। 2014 में जहाँ 126 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं 2025-26 तक यह संख्या घटकर मात्र एक अंक में रह गई है। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब वह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है और वहां विकास की किरणें पहुँच रही हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार के इन दावों की पुष्टि जमीनी आंकड़ों से भी होती है। पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 70  प्रतिशत  से अधिक की कमी आई है। सुरक्षा बलों की शहादत के आंकड़ों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। "ऑपरेशन कगार" और "ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट" जैसे लक्षित अभियानों के माध्यम से सुरक्षा बलों ने नक्सली नेतृत्व की कमर तोड़ दी है। 2025 के दौरान ही 300 से अधिक नक्सली मारे गए ।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इनमें कई शीर्ष कमांडर शामिल थे। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों की संख्या में कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> यह समर्पण इस बात का प्रतीक है कि अब इस विचारधारा का आकर्षण खत्म हो रहा है।  इतना सब होने के बावजूद ,</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इन सफलताओं के बावजूद नक्सलवाद की चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक विषमता है। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे घने वन क्षेत्र आज भी सुरक्षा बलों के लिए कठिन परीक्षा बने हुए हैं। नक्सलियों ने अपने पैर पीछे जरूर खींचे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे अक्सर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों का लाभ उठाकर छापामार हमले करने की ताक में रहते हैं। इसके अलावा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">अर्बन नक्सलिज्म" या वैचारिक उग्रवाद एक नई चुनौती बनकर उभरा है। शहरों में बैठे कुछ बौद्धिक समूह नक्सलियों को वैचारिक और रसद सहायता प्रदान करते हैं</span><span lang="hi" xml:lang="hi">।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे इस समस्या की जड़ें गहरी बनी रहती हैं। जब तक इन वैचारिक और वित्तीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक उग्रवाद के पुनर्जीवित होने का खतरा बना रहेगा।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक अन्य महत्वपूर्ण चुनौती स्थानीय आदिवासियों के बीच विश्वास की बहाली है। दशकों से विकास की मुख्यधारा से कटे होने के कारण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई क्षेत्रों में ग्रामीण अब भी सुरक्षा बलों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं। नक्सली अक्सर इस अविश्वास का फायदा उठाते हैं और ग्रामीणों को ढाल के रूप में उपयोग करते हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता के बीच के इस "गवर्नेंस वैक्यूम" को भरना एक लंबी प्रक्रिया है। केवल सड़कों या मोबाइल टावरों का निर्माण पर्याप्त नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को यह महसूस कराना होगा कि सरकार उनकी संस्कृति और अधिकारों की रक्षक है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय की कमी भी कई बार बाधा बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि नक्सली एक राज्य में दबाव बढ़ने पर दूसरे राज्य की सीमा में शरण ले लेते हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विकास के मोर्चे पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार को "नियत नेल्लानार" (आपका अच्छा गांव) जैसी योजनाओं को और विस्तार देना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने पर केंद्रित हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण सबसे प्रभावी हथियार है। जब आदिवासियों के बच्चों के पास स्कूल होंगे और उनके युवाओं के पास रोजगार के अवसर होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नक्सलियों की भर्ती प्रक्रिया स्वतः ही बंद हो जाएगी। कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना नक्सली विचारधारा के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वन अधिकारों (</span><span lang="hi" xml:lang="hi">फोरेस्ट राइट  एक्ट</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा  ताकि  आदिवासियों को अपनी जमीन पर मालिकाना हक का अहसास हो और वे उग्रवाद के बहकावे में न आएं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मान्यता है कि </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन केवल बंदूकों के दम पर संभव नहीं है</span><span lang="hi" xml:lang="hi">। वास्तव में ऐसा भी  नही हैं। कभी श्रीलंका में लिट्टे   बहुत मजबूत संगठन था।   उसके  लड़ाके बेमिसाल थे। श्रीलंका के साथ भारतवर्ष को भी  वह प्रभावित कर रहा था। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर भारतीय प्रधानमंत्री</span> <a title="राजीव गांधी" href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5_%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80"><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव गांधी</span></a> (1991), <span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीलंकाई राष्ट्रपति</span> <a title="प्रेमदासा रनसिंघे (पृष्ठ मौजूद नहीं है)" href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%98%E0%A5%87?action=edit&amp;redlink=1"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेमदासा रनसिंघे</span></a> (1993) <span lang="hi" xml:lang="hi">सहित कई लोगों  की हत्या का आरोप है। श्रीलंका सरकार  से  इस संगठन को खत्म करने का  निर्णय  लिया। एक झटके में 2009 में लिट्टे  पूरी तरह खत्म हो  गया। न श्रीलंका   सरकार ने उसके लड़ाकों को फुसलाया।  न समर्पण के लिए कहा। बंदूक के बल पर लिट्टे को खत्म कर दिया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत  सरकार   तो नक्सलवाद को खत्म करने के लिए इन्हें समझाने  और आत्म समर्पण  के लिए  प्रेरित कर रही है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार को अपनी आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति को और अधिक उदार और प्रभावी बनाना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भटक चुके युवा बिना किसी डर के मुख्यधारा में लौट सकें। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस सबके लिए तकनीकी और खुफिया तंत्र को भी मजबूत करना होगा। आधुनिक तकनीक का उपयोग करके नक्सली गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें समय रहते रोकना संभव है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि नक्सलवाद कई राज्यों में फैला हुआ है। इससे निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों की जरूरत होती है। मजबूत इच्छा शक्ति की भी  आवश्यक्ता  है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:25:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>पूरे देश में संदेश दो उत्तर प्रदेश भाजपा का गढ़ इसे कोई ढाह नहीं सकताःअमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</p>
<p>धर्मेन्द्र राघव<br /><strong>अलीगढ़,।</strong></p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनता से आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 की 80 लोकसभा सीट बीजेपी को जिताने की अपील की।</p>
<p><br />उन्होंने कहा कि आज मैं सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राम भक्त, पिछड़ों का कल्याण करने वाले कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं। मैं देश के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133845/give-a-message-to-the-whole-country-that-uttar-pradesh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/rajneeti1.jpg" alt=""></a><br /><p>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</p>
<p>धर्मेन्द्र राघव<br /><strong>अलीगढ़,।</strong></p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनता से आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 की 80 लोकसभा सीट बीजेपी को जिताने की अपील की।</p>
<p><br />उन्होंने कहा कि आज मैं सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, राम भक्त, पिछड़ों का कल्याण करने वाले कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने आया हूं। मैं देश के करोड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कुशल शासक के साथ-साथ पिछड़ों का कल्याण करने वाले थे। जब प्रधान मंत्री मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास किया था, तो मैंने स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को फोन किया।<br />उन्होंने कहा था कि आज मेरा जीवन धन्य हो गया। कल्याण सिंह गौपालक, श्री राम मंदिर आंदोलन को गति देने वाले, भारतीय जनता पार्टी के विचारों को जमीन पर उतारने वाले, समाज से जातिवाद खत्म कर पिछड़ों का कल्याण करने वाले थे। आज इन कार्यों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।</p>
<p>गरीबों के घर में बिजली, शौचालय, गैस सिलेंडर, पीने का पानी, मुफ्त खाद्यान्न आदि की सुविधा देकर करीब कल्याण के लक्ष्य को पूरा करने का कार्य मोदी जी कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कभी जातिवाद की बात नहीं की थी, पर पिछड़ी जाति को बढ़ावा देने का कार्य किया। आज इसी कार्य को प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। राष्ट्रीय पिछड़ी जाति आयोग, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया। जो पिछड़ा वर्ग के लिए स्वर्गीय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने शुरुआत की थी, उसको आज नरेंद्र मोदी ने साकार किया है।</p>
<p><br />कांग्रेस पार्टी ने आजादी के बाद से राम जन्म भूमि के मसले को अटका रखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोर्ट का आदेश आते ही प्रभु राम के मंदिर का शिलान्यास करने का कार्य किया। उत्तर प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलाने की बात आई, तो पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह ने कारसेवकों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था और अपनी कुर्सी को त्याग दिया था।</p>
<p><br />2024 की शुरूआत में साढें 500 साल बाद रामलला अपने घर में स्थापित हो जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने 9 साल के अंदर पिछड़ों का सम्मान, गरीब कल्याण, राम मंदिर निर्माण का कार्य कर दिखाया है। अगस्त 2013 से बाबूजी ने दोनों समय फोन करके उत्तर प्रदेश चुनाव का हाल जाना और अपना मार्गदर्शन दिया। उनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में 2014 में 80 में से 73 सीट जीतकर भाजपा ने केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारी बहुमत की सरकार बनाई थी।</p>
<p>उत्तर प्रदेश की 80 पैसे 80 सीट जीतकर प्रधानमंत्री मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाओ और पूरे देश में यह संदेश दो कि उत्तर प्रदेश भाजपा का गढ़ है, इसे कोई ढा नहीं सकता है।</p>
<h4><br /><strong>कल्याण सिंह ने श्रीराम के चरणों में अपनी राजगद्दी का किया त्यागः योगी आदित्यनाथ</strong></h4>
<p><br />पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर हिंदू गौरव दिवस में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और शासन कैसे बनना चाहिए, यह 1991 में जब भारतीय जनता पार्टी की कल्याण सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी, तब इस बात का एहसास हुआ। बाबूजी कल्याण सिंह ने 1991 में अलीगढ़ उधमियों को बढ़ावा देने के लिए ताला नगरी की स्थापना की थी। उन्होंने श्रीराम के चरणों में अपनी राजगद्दी त्याग दी थी।</p>
<p><br />आज कल्याण सिंह का सपना साकार हो रहा है, अयोध्या में भगवान  श्री राम का मंदिर तैयार हो रहा है। इससे स्वर्गीय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की आत्मा को शांति मिल रही होगी। जहां अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर का भी विकास हो रहा है। बाबूजी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर कैंसर हॉस्पिटल का नाम बाबू कल्याण सिंह के नाम पर रखा गया। बुलंदशहर में बनने वाले हॉस्पिटल का नाम भी बाबू कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज रखने का काम उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Aug 2023 15:42:06 +0530</pubDate>
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