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                <title>कृपानंद झा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>कृपानंद झा RSS Feed</description>
                
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                <title>ज्ञान भारतम् मिशन को बड़ी सफलता: दीपिका के पास मिली 350 साल पुरानी पांडुलिपियां, सामने आया समृद्ध इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल | संवाददाता | </strong>जिले की खोई हुई बौद्धिक विरासत को संजोने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सावन कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे <em>ज्ञान भारतम् मिशन</em>  के तहत पांडुलिपि खोज अभियान अब असर दिखाने लगा है। इस अभियान के दौरान त्रिवेणीगंज की युवा दीपिका चंद्रा ने सदियों पुराने इतिहास को सामने लाकर एक नई मिसाल पेश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपिका के पास से कुल 20 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं, जिनकी उम्र 153 से लेकर लगभग 350 वर्ष तक बताई जा रही है। ये पांडुलिपियां न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उस दौर की बौद्धिक समृद्धि और लेखन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178454/gyan-bharatam-mission-got-great-success-deepika-had-350-years"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/bihar51.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल | संवाददाता | </strong>जिले की खोई हुई बौद्धिक विरासत को संजोने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सावन कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे <em>ज्ञान भारतम् मिशन</em> के तहत पांडुलिपि खोज अभियान अब असर दिखाने लगा है। इस अभियान के दौरान त्रिवेणीगंज की युवा दीपिका चंद्रा ने सदियों पुराने इतिहास को सामने लाकर एक नई मिसाल पेश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दीपिका के पास से कुल 20 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं, जिनकी उम्र 153 से लेकर लगभग 350 वर्ष तक बताई जा रही है। ये पांडुलिपियां न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उस दौर की बौद्धिक समृद्धि और लेखन परंपरा का भी जीवंत प्रमाण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>परिवार से मिली अमूल्य धरोहर</strong></p>
<p style="text-align:justify;">गुड़िया पंचायत के बेलापट्टी निवासी दीपिका चंद्रा को ये पांडुलिपियां उनके पूर्वज कृपानंद झा एवं बिमलानंद झा से विरासत में प्राप्त हुई हैं। वर्षों से सुरक्षित रखी गई यह धरोहर अब जिले के इतिहास को नई पहचान दे रही है। वहीं, <em>माय भारत</em> के पूर्व वॉलंटियर इन्दल कुमार इस मिशन के तहत गांव-गांव जाकर ऐसी ऐतिहासिक सामग्री की खोज में जुटे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>संस्कृत और मिथिलाक्षर में दर्ज इतिहास</strong></p>
<p style="text-align:justify;">प्राप्त पांडुलिपियां मुख्य रूप से संस्कृत भाषा और मिथिलाक्षर लिपि में लिखी गई हैं। इनमें उस समय की ज्ञान परंपरा, लेखन शैली और तकनीकी समझ की झलक मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये दस्तावेज सुपौल क्षेत्र के समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक इतिहास को उजागर करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>प्रशासन ने सराहा युवा पहल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने कहा कि अपनी जड़ों को तलाशने का यह प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक है। इससे अन्य युवाओं को भी अपनी विरासत के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिलाधिकारी की अपील</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी सावन कुमार ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास घर, मठ, मंदिर या पुरानी लाइब्रेरी में कोई भी हस्तलिखित पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हो, तो उसे प्रशासन के साथ साझा करें। ऐसे योगदानकर्ताओं को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।<br />उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल पुरानी धरोहरों को सहेजने का कार्य कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से भी जोड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:08:08 +0530</pubDate>
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