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                <title>बच्चों का स्वास्थ्य - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>बच्चों का स्वास्थ्य RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>NDD कार्यक्रम में बच्चों को खिलाई गई एल्बेंडाजोल की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीदत्तगंज।</strong> बलरामपुर सरदार बल्लभ पटेल इंटर कॉलेज, गालिबपुर श्रीदत्तगंज में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (NDD) कार्यक्रम के तहत अधीक्षक के नेतृत्व मे स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अधीक्षक डॉक्टर आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने बच्चों को कृमि संक्रमण से होने वाली समस्याओं, बचाव के उपायों तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने, साफ-सफाई रखने तथा स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन करने की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185093/albendazole-medicine-given-to-children-in-ndd-program"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260810-wa0544.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीदत्तगंज।</strong> बलरामपुर सरदार बल्लभ पटेल इंटर कॉलेज, गालिबपुर श्रीदत्तगंज में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (NDD) कार्यक्रम के तहत अधीक्षक के नेतृत्व मे स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अधीक्षक डॉक्टर आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने बच्चों को कृमि संक्रमण से होने वाली समस्याओं, बचाव के उपायों तथा व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने, साफ-सफाई रखने तथा स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन करने की सलाह दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं विद्यालय की छात्राओं को HPV वैक्सीन के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए इसके महत्व के प्रति जागरूक किया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि HPV संक्रमण से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है। छात्राओं को वैक्सीनेशन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की देखरेख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉ. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से कृमिनाशक दवा का सेवन और स्वच्छता के प्रति जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे टीकाकरण एवं जागरूकता अभियानों में सहयोग करें। अभियान के दौरान विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ किशोरियों में HPV संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:08:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृमि मुक्ति दिवस पर 473 बच्चों ने खाई एल्बेंडाजोल की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मोहनलालगंज।</strong> राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को क्षेत्र के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत बच्चों को पेट के कृमि से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल की कृमिनाशक दवा खिलाई गई। शिक्षकों ने बच्चों को दवा के महत्व और नियमित स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूक किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राथमिक विद्यालय गुमानीखेड़ा में प्रधानाध्यापक अनिल कुमार वर्मा की देखरेख में 59 छात्र-छात्राओं को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। उन्होंने बच्चों को बताया कि पेट में होने वाले कृमि उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। कृमिनाशक दवा के सेवन से कृमि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185075/473-children-took-albendazole-medicine-on-deworming-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260810-wa0043.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मोहनलालगंज।</strong> राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को क्षेत्र के विभिन्न परिषदीय विद्यालयों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत बच्चों को पेट के कृमि से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल की कृमिनाशक दवा खिलाई गई। शिक्षकों ने बच्चों को दवा के महत्व और नियमित स्वास्थ्य देखभाल के प्रति जागरूक किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राथमिक विद्यालय गुमानीखेड़ा में प्रधानाध्यापक अनिल कुमार वर्मा की देखरेख में 59 छात्र-छात्राओं को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। उन्होंने बच्चों को बताया कि पेट में होने वाले कृमि उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। कृमिनाशक दवा के सेवन से कृमि संक्रमण से बचाव के साथ कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिलती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विद्यालय में बच्चों को कतारबद्ध कर व्यवस्थित तरीके से दवा खिलाई गई। कार्यक्रम में सहायक अध्यापिकाओं वंदना यादव, राम कुमारी और ज्योति पटेल ने सहयोग किया। शिक्षकों ने बच्चों को दवा सेवन से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी क्रम में बेसिक विद्यालय करोरा में 311, प्राथमिक विद्यालय करोरा-2 में 58 और प्राथमिक विद्यालय अचलीखेड़ा में 45 बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। इस प्रकार चारों विद्यालयों में कुल 473 बच्चों ने कृमिनाशक दवा का सेवन किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षकों ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जाने वाले अभियानों में सहयोग करें। ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी विद्यालयों में आयोजित स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम की सराहना की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:46:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर-घर पहुंच रहा पोषण अभियान, कुपोषित बच्चों के परिवारों को दिया जा रहा विशेष मार्गदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रस्तावित "सुपोषण बस्ती अभियान" के अंतर्गत गुरुवार को बाल विकास परियोजना विक्रमजोत एवं गौर की टीमों ने गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के घर-घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बच्चों के अभिभावकों से संवाद स्थापित कर उन्हें सरकार द्वारा संचालित पोषण योजनाओं की जानकारी दी। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) विक्रमजोत बलराम सिंह के नेतृत्व में परियोजना क्षेत्र के लगभग 22 अति कुपोषित बच्चों के घरों का भ्रमण किया गया। वहीं बाल विकास परियोजना गौर की टीम ने 16 कुपोषित बच्चों</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181010/nutrition-campaign-reaching-every-home-special-guidance-being-given-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0057.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में प्रस्तावित "सुपोषण बस्ती अभियान" के अंतर्गत गुरुवार को बाल विकास परियोजना विक्रमजोत एवं गौर की टीमों ने गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के घर-घर पहुंचकर उनके स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान परियोजना अधिकारियों, मुख्य सेविकाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बच्चों के अभिभावकों से संवाद स्थापित कर उन्हें सरकार द्वारा संचालित पोषण योजनाओं की जानकारी दी। बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) विक्रमजोत बलराम सिंह के नेतृत्व में परियोजना क्षेत्र के लगभग 22 अति कुपोषित बच्चों के घरों का भ्रमण किया गया। वहीं बाल विकास परियोजना गौर की टीम ने 16 कुपोषित बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया। सीडीपीओ बलराम सिंह ने बताया कि मंडलायुक्त बस्ती, जिलाधिकारी बस्ती, मुख्य विकास अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देशन में शीघ्र ही "सुपोषण बस्ती अभियान" प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विशेष वृद्धि निगरानी सप्ताह के दौरान जिले में लगभग 4500 से अधिक अति कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। अभियान का उद्देश्य इन बच्चों के परिवारों तक पहुंचकर उनमें विश्वास पैदा करना तथा उन्हें कुपोषण मुक्त बनाने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है। भ्रमण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र भदोही में मुख्य सेविका सरिता सिंह, कुमुद सिंह तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री कृष्णावती सिंह एवं सहायिका लक्ष्मी देवी के साथ टीम ने कुपोषित बालक समर के घर पहुंचकर उसके माता-पिता एवं परिजनों को संतुलित आहार, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी दी। परिवार को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा तैयार डाइट चार्ट भी उपलब्ध कराया गया। सीडीपीओ ने बताया कि मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से अतिरिक्त पोषाहार उपलब्ध कराया जाएगा, जिसे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाया जाएगा। इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित की जाएगी। भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने बच्चों को केला खिलाकर उनकी भोजन ग्रहण करने की क्षमता का आकलन किया तथा परिवारों को सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों, मौसमी फल एवं हरी सब्जियों के नियमित सेवन के लिए प्रेरित किया। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध छह प्रकार की आवश्यक दवाओं के नियमित सेवन पर भी बल दिया गया। टीम ने फूलडी, महरनिया, शंकरपुर सहित विभिन्न गांवों में कुपोषित बच्चों अनमोल, हर्षिता, रियांश, इकरा एवं अरबिक के परिवारों से मुलाकात कर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए। सीडीपीओ बलराम सिंह ने बताया कि अभियान के अंतर्गत घर-घर भ्रमण के बाद बच्चों की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी तथा आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उन्हें कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि अभियान को सफल बनाने में अभिभावकों एवं ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना गौर की मुख्य सेविका गीता सिंह सहित विभागीय कर्मियों ने भी क्षेत्र के कुपोषित बच्चों के घर पहुंचकर परिवारों को पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:02:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वयं को 'फ्री' रखने के लिए बच्चों को मोबाइल सौंपते माता-पिता</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो (डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">​बच्चे और माता-पिता का संबंध केवल जैविक नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और मार्गदर्शन का जीवंत सूत्र है। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को बच्चे का प्रथम गुरु माना गया है, जो उन्हें न केवल चलना-बोलना बल्कि जीवन-मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सिखाते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">​एक स्वस्थ परिवार वही है जहाँ बच्चों को स्नेह, संवाद और अपनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय मिले। किंतु आधुनिक जीवनशैली, करियर की अंधी दौड़ और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता ने इन संबंधों को बदल दिया है। आज अधिकांश माता-पिता के पास समय</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178856/parents-handing-over-mobile-phones-to-children-to-keep-themselves"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images7.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो (डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​बच्चे और माता-पिता का संबंध केवल जैविक नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और मार्गदर्शन का जीवंत सूत्र है। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को बच्चे का प्रथम गुरु माना गया है, जो उन्हें न केवल चलना-बोलना बल्कि जीवन-मूल्य और सामाजिक उत्तरदायित्व भी सिखाते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास में अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">​एक स्वस्थ परिवार वही है जहाँ बच्चों को स्नेह, संवाद और अपनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय मिले। किंतु आधुनिक जीवनशैली, करियर की अंधी दौड़ और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता ने इन संबंधों को बदल दिया है। आज अधिकांश माता-पिता के पास समय का अभाव है। इसकी भरपाई के लिए वे बच्चों को मोबाइल, टीवी या टैबलेट उपलब्ध करा देते हैं ताकि वे स्वयं को “फ्री” रख सकें। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि बच्चा रोए, जिद करे या खाना न खाए, समाधान के रूप में उसके हाथ में मोबाइल थमा दिया जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">​यह केवल तकनीक का उपयोग नहीं, बल्कि पालन-पोषण की बदलती मानसिकता का संकेत है। आज का समाज व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आर्थिक प्रतिस्पर्धा पर अधिक ध्यान दे रहा है। परिणामस्वरूप, संयुक्त परिवारों का स्थान डिजिटल स्क्रीन और झूलाघरों  ने ले लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। इससे उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति  घटती है, भाषा विकास धीमा होता है और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">​बचपन, जो कभी खेल, प्रकृति और किस्सों का समय होता था, अब स्क्रीन तक सिमट गया है। बच्चे मैदानों और पारिवारिक सानिध्य से दूर होकर आभासी दुनिया में अकेले होते जा रहे हैं। शारीरिक स्तर पर भी कम उम्र में आँखों की कमजोरी, मोटापा और नींद के विकार बढ़ रहे हैं। इंटरनेट पर अनियंत्रित सामग्री और हिंसक खेलों की लत बच्चों को अवसाद की ओर धकेल रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">​पालन-पोषण का अर्थ केवल अच्छी सुविधाएँ देना नहीं, बल्कि बच्चों के मन की दुनिया को समझना है। माता-पिता के साथ किया गया संवाद बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव पैदा करता है। आज दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। बच्चों को गैजेट्स के बजाय पुस्तकों, बागवानी, योग और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। परिवार के साथ भोजन करना और घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ समय बिताना उनके व्यक्तित्व को गढ़ने में सहायक होगा।</div>
<div style="text-align:justify;">​तकनीक शिक्षा के लिए उपयोगी हो सकती है, किंतु यह माता-पिता के स्नेह का विकल्प नहीं है। यदि आज हम बच्चों को समय और संस्कार देंगे, तभी वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन पाएंगे। वास्तव में बच्चों को महंगे गैजेट्स की नहीं, बल्कि माता-पिता के साथ और प्यार की आवश्यकता होती है।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:22:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>विश्व अस्थमा दिवस पर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>देवरिया। </strong>विश्व अस्थमा दिवस के पर आरोग्य भारती के तत्वावधान में देवरिया विकास खण्ड अंतर्गत रुद्रपुर रोड स्थित एक चिकित्सालय में स्वस्थ जीवनशैली विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोगों को अस्थमा के प्रति जागरूक करते हुए स्वस्थ रहने के उपाय बताए गए।\ गोष्ठी को संबोधित करते हुए आरोग्य भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अजीत नारायण मिश्र ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए संतुलित जीवनशैली, योग और आयुर्वेद को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि श्वास नली में संक्रमण होने से अस्थमा की समस्या उत्पन्न हो सकती है, इसलिए इससे बचाव के लिए धूल, गर्दा, पराग</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178371/emphasis-given-on-adopting-healthy-lifestyle-on-world-asthma-day"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/44.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>देवरिया। </strong>विश्व अस्थमा दिवस के पर आरोग्य भारती के तत्वावधान में देवरिया विकास खण्ड अंतर्गत रुद्रपुर रोड स्थित एक चिकित्सालय में स्वस्थ जीवनशैली विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोगों को अस्थमा के प्रति जागरूक करते हुए स्वस्थ रहने के उपाय बताए गए।\ गोष्ठी को संबोधित करते हुए आरोग्य भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अजीत नारायण मिश्र ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए संतुलित जीवनशैली, योग और आयुर्वेद को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि श्वास नली में संक्रमण होने से अस्थमा की समस्या उत्पन्न हो सकती है, इसलिए इससे बचाव के लिए धूल, गर्दा, पराग कण और अन्य एलर्जी कारकों से परहेज करना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने लोगों से अपील की कि ऋतु के अनुसार दिनचर्या और उचित आहार-विहार का पालन करें। बच्चों को जंक फूड जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, मोमोज से दूर रखने और कोल्ड ड्रिंक व सॉफ्ट ड्रिंक से परहेज करने की सलाह दी। इसके स्थान पर घरेलू व पारंपरिक खाद्य पदार्थों के सेवन पर जोर दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर डॉ. उपेन्द्र गिरी, डॉ. बी. एल. विश्वकर्मा, संतोष कुमार, अंजलि दुबे, महिला मोर्चा की सीमा जायसवाल, राजदीप तिवारी सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 19:35:34 +0530</pubDate>
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