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                <title>आयुष्मान भारत - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आटो रिक्शा एवं टैक्सी चालकों को आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किये जाने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के पत्र  11.05.2026 द्वारा आटो रिक्शा एवं टैक्सी चालकों को आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 5.00 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किये जाने के निर्देश दिये गये हैं, उक्त निर्देशों के क्रम में आज सम्भागीय परिवहन कार्यालय, बस्ती के सभागार कक्ष में आयोजित आटोरिक्शा एवं टैक्सी चालकों का एक विशेष कैम्प आयोजित की गई, जिसमें लगभग 50 चालकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। उपस्थित जनों को अवगत कराया गया कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत परिवार के मुखिया के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी प्रतिवर्ष 5 लाख रू0 तक का स्वास्थ्य</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181016/instructions-to-provide-health-insurance-up-to-rs-5-lakh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0061-(58).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के पत्र  11.05.2026 द्वारा आटो रिक्शा एवं टैक्सी चालकों को आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 5.00 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान किये जाने के निर्देश दिये गये हैं, उक्त निर्देशों के क्रम में आज सम्भागीय परिवहन कार्यालय, बस्ती के सभागार कक्ष में आयोजित आटोरिक्शा एवं टैक्सी चालकों का एक विशेष कैम्प आयोजित की गई, जिसमें लगभग 50 चालकों द्वारा प्रतिभाग किया गया। उपस्थित जनों को अवगत कराया गया कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत परिवार के मुखिया के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी प्रतिवर्ष 5 लाख रू0 तक का स्वास्थ्य बीमा की सुविधा प्रदान की गयी है। चालक के स्वयं अथवा किसी परिवारीजन के साधारण बीमारी के साथ-साथ गम्भीर बीमारी से ग्रस्त होने पर रू0 5 लाख तक का कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त होगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस योजना का लाभ बताते हुवे,संभागीय परिवहन अधिकारी फरीऊद्दीन ने बताया कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए चालक अपना ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड एवं राशन कार्ड/परिवार रजिस्टर की प्रति सम्भागीय परिवहन कार्यालय, बस्ती के परमिट अनुभाग में महेश कुमार (वरिष्ठ सहायक) को उपलब्ध करा दें, ताकि सूचना मुख्यालय को प्रेषित कर दी जाये।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> उक्त बैठक मे फरीदउद्दीन, सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), सुरेश कुमार गौर्य, सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), श्रीमती माला बाजेयी, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन),  प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, यात्रीकर अधिकारी, बस्ती एवं कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण के साथ-साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181016/instructions-to-provide-health-insurance-up-to-rs-5-lakh</link>
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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:11:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ताला गांव में लगा स्वास्थ्य शिविर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले पूरे देश में केन्द्र सरकार टीबी मुक्त अभियान चला रही है जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश से टीबी रोग को खत्म करना है । केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रत्येक राज्यों में भी टीबी रोग से सम्बंधित सभी जानकारियां ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाया जा रहा है । </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बहुत से लोगों को टीबी रोग के बारे में जानकारी ही नहीं रहती है कि टीबी रोग कैसे होता है ? और टीबी रोग से कैसे बचाव किया जाएं । यदि टीबी रोग के बारे में लोगों को समुचित जानकारी हो तो टीबी रोग को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180879/health-camp-organized-in-tala-village-under-100-day-tb-free-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260608-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले पूरे देश में केन्द्र सरकार टीबी मुक्त अभियान चला रही है जिसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश से टीबी रोग को खत्म करना है । केन्द्र सरकार के निर्देश पर प्रत्येक राज्यों में भी टीबी रोग से सम्बंधित सभी जानकारियां ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाया जा रहा है । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि बहुत से लोगों को टीबी रोग के बारे में जानकारी ही नहीं रहती है कि टीबी रोग कैसे होता है ? और टीबी रोग से कैसे बचाव किया जाएं । यदि टीबी रोग के बारे में लोगों को समुचित जानकारी हो तो टीबी रोग को जड़ से खत्म किया जा सकता है । टीबी रोग कोई जानलेवा बीमारी नही होती है लेकिन टीबी रोग व इलाज के बारे में समुचित जानकारी न होने के कारण कभी - कभी टीबी रोग जानलेवा साबित हो जाता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शासन के निर्देश के क्रम में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत के ग्राम ताला में आयुष्मान आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें टीबी रोग से संबंधित जानकारी दी गई एवं निःशुल्क जांच की गई एवं दवाइयां भी वितरित किया गया । स्वास्थ्य शिविर में शुगर , वीपी , तौल समेत अन्य जांच निःशुल्क की गई । इस शिविर में डॉ. अजय शुक्ला, एक्स-रे टेक्नीशियन भूपेन्द्र सिंह, एसटीएलएस संदीप कुमार, एसटीएस संकट मोचन यादव, सीएचओ अर्चना पटेल, अमरेश, साक्षी, अंजली, एएनएम सरिता कुमारी, फार्मासिस्ट कोमल, एक्स-रे टेक्नीशियन के सहयोगी अब्बासी तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर फिरोज खान समेत आदि कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद रहे ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 20:50:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए भारत का स्वर्णिम अध्याय: नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में विकास, शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा की गाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178327/the-golden-chapter-of-new-india-the-story-of-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01634.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। 2026 तक भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है और 7.4 से 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए हुए है। यह उपलब्धि सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन में अमित शाह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत करते हुए भाजपा को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया। मोदी और शाह की जोड़ी ने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है। सड़कों का विस्तार, हाईवे का निर्माण, रेलवे का आधुनिकीकरण और हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि—इन सभी ने भारत को एक नए युग में प्रवेश कराया है। आधुनिक ट्रेनों, विद्युतीकरण और सुरक्षा तकनीकों ने यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है। गांवों तक सड़क और बिजली पहुंचाना विकास को समावेशी बनाने का प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है। यूपीआई जैसी व्यवस्था ने देश को डिजिटल भुगतान में अग्रणी बना दिया है। आज सरकारी सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कल्याण की योजनाओं ने भी करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलों ने गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। यह केवल योजनाएं नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ट्रैक का तेजी से विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, और सुरक्षा प्रणाली का विकास—इन सभी ने भारतीय रेलवे को नई पहचान दी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी रेलवे ने सौर ऊर्जा, एलईडी लाइटिंग और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कदम उठाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्विकास भी इस दौर की एक विशेष पहचान रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन दिया है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी और नीतिगत सुधारों ने भी देश की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों ने सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। इन निर्णयों को समर्थक जहां साहसिक कदम मानते हैं, वहीं आलोचक इनके प्रभावों पर चर्चा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने एक नई पहचान बनाई है। “भारत प्रथम” के सिद्धांत पर आधारित नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में पार्टी की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर पार्टी ने प्रभावी कार्य किया है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना इसकी सफलता का आधार रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस विकास यात्रा में चुनौतियां भी मौजूद हैं। रोजगार सृजन, आय असमानता और कृषि क्षेत्र की समस्याएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन यह भी सच है कि सरकार इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सुधार की दिशा में प्रयासरत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है—एक ऐसा दृष्टिकोण जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखता है। “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य इसी सोच का परिणाम है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमित शाह की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल ने इस दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करते हुए उसे हर स्तर पर सशक्त बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को लेकर भी आश्वस्त है। यह आत्मविश्वास पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने जिस गति से प्रगति की है, वह न केवल देशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक उदाहरण है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि यही दिशा और प्रयास जारी रहे, तो भारत जल्द ही एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह दौर केवल राजनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि एक युग निर्माण का दौर है, जिसमें भारत अपनी नई पहचान गढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:22:47 +0530</pubDate>
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