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                <title>शिक्षा सुधार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शिक्षा सुधार RSS Feed</description>
                
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                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शिक्षा का बाजारीकरण और छात्रों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180637/commercialization-of-education-and-the-future-of-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में भेज रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यही उनके भविष्य का एकमात्र रास्ता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार आज भारत में लगभग 27 से 33 प्रतिशत छात्र किसी न किसी प्रकार की निजी शिक्षा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह संख्या और अधिक है। दिल्ली जैसे शहरों में लगभग 39 प्रतिशत छात्र इन संस्थानों से जुड़े हुए पाए गए हैं। यह आंकड़ा केवल शिक्षा की स्थिति नहीं बताता बल्कि उस मानसिक दबाव को भी दिखाता है जिसमें समाज जी रहा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों पर भरोसा कम हुआ है और इन व्यापारिक केंद्रों को सफलता का संक्षिप्त मार्ग मान लिया गया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस उद्योग का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा विपणन पर टिका हुआ है। आज आभासी माध्यमों से छात्रों को जोड़ने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। एक प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 62 प्रतिशत प्रवेश अब अंतर्जाल आधारित प्रचार के माध्यम से हो रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि शिक्षा अब विज्ञापन और पहचान निर्माण के उसी प्रतिरूप पर चल रही है जिस पर कोई बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलता है। फर्क केवल इतना है कि यहां उत्पाद कोई वस्तु नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इन संस्थानों की सबसे बड़ी चाल उनका चयन प्रदर्शन होता है। हजारों और लाखों छात्रों की भीड़ में यदि 5 या 10 छात्रों का चयन हो जाए तो वही चेहरे हर विज्ञापन पट्ट पर दिखाई देने लगते हैं। ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि हर छात्र को लगे कि अगला चेहरा उसी का होगा। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि बाकी हजारों छात्रों का क्या हुआ। वे छात्र जो वर्षों तक शुल्क भरते रहे, जो किराये के कमरों में रहकर तैयारी करते रहे, जिनके परिवार कर्ज में डूब गए, उनका संघर्ष किसी विज्ञापन में जगह नहीं पाता।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यहां सबसे बड़ा खेल संख्या का है। कुछ संस्थान कम शुल्क रखकर गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की भारी भीड़ जुटाते हैं। 1000 या 2000 रुपये का शुल्क सुनकर छात्रों को लगता है कि उन्हें बहुत बड़ा अवसर मिल रहा है। लेकिन जब ऐसे लाखों छात्र जुड़ते हैं तो वही छोटी रकम करोड़ों का कारोबार बना देती है। कम शुल्क का मतलब सेवा भावना नहीं होता। कई बार यह भीड़ इकट्ठा करने की रणनीति होती है। जितनी बड़ी भीड़, उतना बड़ा मुनाफा और उतनी ही बड़ी सफलता की कहानी।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि छात्र मेहनत अपनी करते हैं लेकिन श्रेय पूरा संस्थान ले जाता है। यदि कोई छात्र सफल हो जाए तो संस्था कहती है कि यह उसकी शिक्षा का परिणाम है। लेकिन यदि लाखों छात्र असफल हो जाएं तो उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। असफल छात्र को कहा जाता है कि उसने पर्याप्त मेहनत नहीं की। इस तरह सफलता संस्थान की और असफलता छात्र की बना दी जाती है। आज इस उद्योग ने छात्रों की मानसिकता भी बदल दी है। पहले शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करना होता था। अब शिक्षा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में चयनित अभ्यर्थियों को डीएम ने दिया नियुक्ति पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178941/dm-gave-appointment-letters-to-the-candidates-selected-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0020.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने नवचयनित शिक्षकों से पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि वे छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में उत्साह देखा गया। नवचयनित शिक्षकों ने भी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चयन प्रक्रिया एवं विद्यालयों की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कुंवर वीरेंद्र मौर्य, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) विजय नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
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<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:57:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानदेय वृद्धि पर शिक्षा मित्रों का भव्य सम्मान समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178255/grand-felicitation-ceremony-of-shiksha-mitras-on-honorarium-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260505-wa0013-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान व सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर समारोह को आकर्षक बनाया। इस दौरान मुख्यमंत्री के गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा मित्रों का योगदान शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है और नामांकन व शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मित्रों के समर्पण से प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत हो रही है और सरकार शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
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<div style="text-align:justify;">भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है और शिक्षा मित्रों का सम्मान व हित सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रत्येक विकास खंड से चयनित शिक्षा मित्रों को सम्मानित किया गया। लगभग 400 शिक्षा मित्रों की उपस्थिति में आयोजित समारोह का समापन शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।</div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 21:20:00 +0530</pubDate>
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