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                <title>शिक्षा सुधार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शिक्षा सुधार RSS Feed</description>
                
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                <title>शिक्षा को लौटानी होगी मानवीय संवेदना</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारत की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से ऐसी दोहरी चुनौती का सामना कर रही है जिसमें एक ओर वैश्विक स्तर पर प्रतिभाशाली युवाओं का निर्माण करने की आकांक्षा है, तो दूसरी ओर प्रवेश परीक्षाओं, कोचिंग उद्योग और अंकों की अंधी प्रतिस्पर्धा ने शिक्षा के मूल उद्देश्य को सीमित कर दिया है। हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा अनियमितताओं, मानसिक तनाव, छात्र आत्महत्याओं और महंगी कोचिंग व्यवस्था ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संपूर्ण शैक्षिक दर्शन पर पुनर्विचार आवश्यक है। यह तथ्य है कि भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, प्रशासन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184838/human-sensitivity-must-be-returned-to-education"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001020091.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से ऐसी दोहरी चुनौती का सामना कर रही है जिसमें एक ओर वैश्विक स्तर पर प्रतिभाशाली युवाओं का निर्माण करने की आकांक्षा है, तो दूसरी ओर प्रवेश परीक्षाओं, कोचिंग उद्योग और अंकों की अंधी प्रतिस्पर्धा ने शिक्षा के मूल उद्देश्य को सीमित कर दिया है। हाल के वर्षों में प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा अनियमितताओं, मानसिक तनाव, छात्र आत्महत्याओं और महंगी कोचिंग व्यवस्था ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संपूर्ण शैक्षिक दर्शन पर पुनर्विचार आवश्यक है। यह तथ्य है कि भारत ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, प्रशासन और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय प्रतिभाएँ दी हैं। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि इन सफलताओं के पीछे लाखों ऐसे विद्यार्थी भी हैं जो संसाधनों की कमी, असमान अवसरों और अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण अपनी वास्तविक क्षमता तक पहुँच ही नहीं पाते। इसलिए अब शिक्षा को केवल चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता के विकास की प्रक्रिया के रूप में देखने की आवश्यकता है।<br /><br />यह मान लेना कि तीन या चार घंटे की एक परीक्षा किसी विद्यार्थी की बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, नैतिकता, नेतृत्व क्षमता और जीवन कौशल का अंतिम प्रमाण बन सकती है, आधुनिक शिक्षा विज्ञान की दृष्टि से भी सीमित सोच है। परीक्षा आवश्यक है, किंतु उसे शिक्षा का पर्याय बना देना सबसे बड़ी भूल रही है। आज अनेक विद्यार्थी विश्लेषणात्मक सोच, नवाचार, कला, खेल, सामाजिक नेतृत्व, संवाद कौशल और व्यावहारिक दक्षताओं में उत्कृष्ट होते हुए भी केवल इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे एक विशेष प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा के अनुरूप स्वयं को ढाल नहीं पाते। दूसरी ओर रटने की संस्कृति और अनुमान आधारित तैयारी को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था कई बार वास्तविक प्रतिभा की अपेक्षा परीक्षा तकनीक में दक्ष विद्यार्थियों को आगे ले आती है। तथ्य और मत के बीच अंतर स्पष्ट रखना आवश्यक है। तथ्य यह है कि अधिकांश प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश अभी भी प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित है। मत यह है कि भविष्य में इन परीक्षाओं के साथ बहुआयामी मूल्यांकन को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए ताकि चयन अधिक न्यायपूर्ण बन सके।<br /><br />कोचिंग उद्योग का विस्तार भी इसी असंतुलित व्यवस्था का परिणाम है। जब विद्यालयों की शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं की आवश्यकताओं से अलग दिखाई देने लगती है, तब अभिभावक अतिरिक्त संसाधनों की ओर स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं। परिणामस्वरूप शिक्षा एक सामाजिक अधिकार से अधिक आर्थिक क्षमता का विषय बन जाती है। छोटे नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक परिवार अपने बच्चों की तैयारी के लिए ऋण लेते हैं, बचत समाप्त कर देते हैं अथवा अन्य आवश्यकताओं में कटौती करते हैं। महानगरों के अतिरिक्त कोटा, प्रयागराज, पटना, सीकर, हैदराबाद, दिल्ली और अन्य शिक्षा केंद्रों में विकसित कोचिंग संस्कृति ने अवसर तो दिए हैं, किंतु साथ ही मानसिक दबाव और सामाजिक असमानता को भी बढ़ाया है। यह कहना उचित नहीं होगा कि प्रत्येक कोचिंग संस्थान नकारात्मक भूमिका निभाता है, क्योंकि अनेक संस्थान गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराते हैं। किंतु जब किसी व्यवस्था की सफलता विद्यालयों से अधिक कोचिंग संस्थानों पर निर्भर होने लगे, तब यह शिक्षा तंत्र के लिए गंभीर संकेत माना जाना चाहिए।<br /><br />विद्यालयों की भूमिका को पुनर्स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि विद्यालयों में प्रयोगशाला आधारित शिक्षण, परियोजना कार्य, भाषा दक्षता, तार्किक चिंतन, अनुसंधान प्रवृत्ति, कला, खेल, सामुदायिक सेवा और डिजिटल साक्षरता को समान महत्व दिया जाए तो विद्यार्थियों का समग्र विकास संभव होगा। प्रवेश प्रक्रिया में विद्यालयी उपलब्धियों, सत्यापित परियोजनाओं, सामाजिक सहभागिता, इंटर्नशिप, शोध अभिरुचि तथा साक्षात्कार जैसे तत्वों का संतुलित समावेश किया जा सकता है। इससे केवल स्मरण शक्ति नहीं, बल्कि समस्या समाधान क्षमता, नेतृत्व, सहयोग, नैतिक उत्तरदायित्व और व्यावहारिक समझ का भी मूल्यांकन संभव होगा। हालांकि इसके साथ पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट मानदंड, प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ता और डिजिटल सत्यापन प्रणाली अनिवार्य होगी।<br /><br />परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने विद्यार्थियों के विश्वास को गहरा आघात पहुँचाया है। ऐसी घटनाएँ केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं। सुरक्षित डिजिटल प्रश्नपत्र प्रबंधन, बहुस्तरीय एन्क्रिप्शन, सीमित अभिगम, परीक्षा केंद्रों का नियमित ऑडिट, स्वतंत्र निगरानी तंत्र, तकनीकी सुरक्षा, उत्तर पुस्तिकाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण तथा दोषियों के विरुद्ध त्वरित दंडात्मक कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएँ अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी हैं। साथ ही परीक्षा कैलेंडर को पूरे वर्ष में संतुलित ढंग से वितरित किया जाए ताकि किसी एक परीक्षा पर अत्यधिक दबाव न बने और विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकें।<br /><br />राष्ट्रीय स्तर की एक समान परीक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर विमर्श आवश्यक है। विशाल भौगोलिक, भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता वाले देश में एक ही मॉडल सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह मान लेना व्यावहारिक नहीं है। विभिन्न विषयों की प्रकृति भी अलग होती है। चिकित्सा, अभियांत्रिकी, विधि, कला, सामाजिक विज्ञान और डिजाइन जैसे क्षेत्रों के लिए समान मूल्यांकन पद्धति अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकती। इसलिए राष्ट्रीय मानकों के साथ संस्थानों को सीमित शैक्षणिक स्वायत्तता देना अधिक संतुलित विकल्प हो सकता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और संबंधित व्यावसायिक निकायों के दिशा-निर्देशों के भीतर संस्थानों को अपने विषयानुकूल अतिरिक्त मूल्यांकन विकसित करने की अनुमति मिलने से चयन प्रक्रिया अधिक सार्थक बन सकती है।<br /><br />अभिभावकों की भूमिका भी इस परिवर्तन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनेक बार सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण कुछ चुनिंदा व्यवसायों को ही सफलता का पर्याय मान लिया जाता है। इससे विद्यार्थी अपनी वास्तविक रुचि और क्षमता की उपेक्षा करने लगते हैं। व्यवस्थित करियर परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहयोग, योग्यता परीक्षण और उद्योग जगत से संवाद की व्यवस्था विद्यालय स्तर से ही विकसित की जानी चाहिए। यदि कोई विद्यार्थी कृषि प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षण, डिजाइन, लोक प्रशासन, उद्यमिता, साहित्य, खेल या संगीत में उत्कृष्ट भविष्य देखता है, तो उसे उसी दिशा में आगे बढ़ने का सम्मानजनक अवसर मिलना चाहिए। विविध करियर विकल्पों की सामाजिक स्वीकृति बढ़े बिना परीक्षा का दबाव कम नहीं होगा।<br /><br />नई शिक्षा नीति ने बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास और लचीले शिक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए हैं। किंतु किसी भी नीति की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पर्याप्त वित्तीय निवेश, प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, स्थानीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, डिजिटल अवसंरचना और ग्रामीण क्षेत्रों तक समान संसाधनों की उपलब्धता के बिना अपेक्षित परिवर्तन संभव नहीं होगा। शिक्षा सुधार को केवल नीति दस्तावेजों तक सीमित रखने के बजाय उसे विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के दैनिक शैक्षणिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा।<br /><br />अंततः शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उत्तरदायी, संवेदनशील, वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले और लोकतांत्रिक मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करना है। जब व्यवस्था विद्यार्थियों को भय, ऋण, तनाव और निरंतर तुलना से मुक्त कर उनकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और मानवीय गरिमा को केंद्र में रखेगी, तभी वास्तविक परिवर्तन दिखाई देगा। तथ्य यह है कि प्रतियोगिता आधुनिक समाज का हिस्सा रहेगी। किंतु यह मत अधिक दूरदर्शी प्रतीत होता है कि प्रतियोगिता का आधार केवल अंक नहीं, बल्कि क्षमता, चरित्र, कौशल, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए। भारत यदि ज्ञान आधारित वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है, तो उसे ऐसी शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना होगा जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि संभावनाओं से परिपूर्ण नागरिक के रूप में देख सके। तभी शिक्षा सचमुच मानवीय बनेगी और राष्ट्र की प्रगति का सबसे विश्वसनीय आधार भी।<br /><br /><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 21:52:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को किया बर्बाद: अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से दूर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 22 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को विलय (मर्जर) और अन्य कारणों का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184399/bjp-government-ruined-the-education-system-akhilesh-yadav"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-22.00.02.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से दूर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 22 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को विलय (मर्जर) और अन्य कारणों का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के मंदिरों की बदहाली के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा अध्यक्ष ने कहा कि जहां से बच्चों की शिक्षा की शुरुआत होती है, भाजपा सरकार वहीं से व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कई विद्यालयों के भवन जर्जर स्थिति में हैं, कहीं बिजली और पंखों की समस्या है तो कहीं बारिश के दौरान छतों से पानी टपकने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार के एजेंडे में शिक्षा और रोजगार कभी प्राथमिकता नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और छात्र-नौजवान अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र भाजपा की शिक्षा नीतियों से नाराज हैं और आने वाले समय में युवा इसका जवाब देंगे। अखिलेश यादव ने भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने नए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाने के बजाय पुराने संस्थानों को कमजोर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा अध्यक्ष ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इसे तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि विश्वविद्यालयों को नुकसान पहुंचाने वाले कभी समाज के हितैषी नहीं रहे। उन्होंने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा और मजबूती की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:04:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एंटी पेपर लीक विधेयक को मंजूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184373/anti-paper-leak-bill-approved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/rajeev.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">विपक्ष के हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद में मंजूर मिल गयी। विपक्ष का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं होगा तब तक आप कितने भी कठिन कानून बना लें उसका कोई फायदा नहीं मिलेगा। इस विधेयक के मुताबिक अगर पेपर लीक मामले में कोई पकड़ा जाएगा तो उसके खिलाफ 50 लाख तक का जुर्माना और 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी के आंदोलन के बाद केन्द्र सरकार ने यह निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भर्ती परीक्षाएं और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक की वजह से रद्द करनी पड़ीं। इससे न केवल अभ्यर्थियों का समय और धन बर्बाद हुआ, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एंटी पेपर लीक विधेयक लाया, जिसे संसद की मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप दिया गया। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान करता है। पेपर लीक क्यों बना राष्ट्रीय चिंता का विषय?</p>
<p style="text-align:justify;"><br />भारत में हर वर्ष करोड़ों युवा सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए विभिन्न परीक्षाएं देते हैं। कई परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने से परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन ईमानदार अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की थी। पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास पर हमला है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित होते हैं। इस कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने, खरीदने, बेचने या प्रसारित करने को गंभीर अपराध माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />संगठित गिरोहों और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की कारावास और भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है।इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रश्नपत्र लीक करने वालों पर भी समान रूप से कार्रवाई होगी। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों की गहन जांच के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। युवाओं को क्या मिलेगा लाभ? यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।<br />परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिलेगा। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है। परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा। युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा। क्या केवल कानून बनाना पर्याप्त है? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके साथ-साथ कई अन्य सुधार भी आवश्यक हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने और सुरक्षित रखने की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए।</p>
<blockquote class="format2">
<p style="text-align:justify;"><br />डिजिटल सुरक्षा को मजबूत किया जाए। परीक्षा केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों से हो। परीक्षा कर्मचारियों का उचित सत्यापन किया जाए।<br />समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए। यदि कानून का क्रियान्वयन कमजोर रहा, तो कठोर दंड का भी अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;"><br />राज्यों की भूमिका अधिकांश भर्ती परीक्षाएं राज्य सरकारें आयोजित करती हैं। इसलिए राज्यों को भी अपनी परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाना होगा। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से ही इस कानून का पूरा लाभ मिल सकेगा। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि कानून का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए। इसके अलावा, साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा।<br />एंटी पेपर लीक विधेयक को संसद से मंजूरी मिलना देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह संदेश देता है कि सरकार परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। हालांकि, किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। यदि सरकार, परीक्षा एजेंसियां, जांच संस्थाएं और राज्य प्रशासन मिलकर इस कानून को ईमानदारी से लागू करें, तो लाखों युवाओं का विश्वास बहाल हो सकता है और प्रतियोगी परीक्षाएं वास्तव में निष्पक्ष एवं पारदर्शी बन सकती हैं। अंततः किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी निष्पक्ष चयन प्रणाली होती है, और उसे सुरक्षित रखना सरकार तथा समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 20:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बेसिक शिक्षा विभाग की जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक सम्पन्न।</title>
                                    <description><![CDATA[जिलाधिकारी ने विद्यालयों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनों के तार को हटाये  जाने के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182144/review-meeting-of-district-task-force-of-basic-education-department"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260627-wa0075.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में शनिवार को संगम सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित जिला टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक मे शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने  खण्ड शिक्षा अधिकारी करछना व कोरांव के द्वारा कार्य में लापरवाही बरतने व बैठक में अनुपस्थित रहने पर उनसे स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">       बैठक में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा बताया गया कि शिक्षा विभाग के द्वारा पैसा जमा करने बावजूद भी 26 विद्यालयों में भवनों के ऊपर से हाइटेंशन तार का अभी तक शिफ्ट करने का कार्य नहीं कराया गया है, इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी एवं चेतावनी देते हुए सम्बंधित अधिशासी अभियंताओं को हाईटेंशन तार के शिफ्ट करने की कार्यवाही को शीघ्रता से सुनिश्चित किए जाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि किसी भी प्रकार की घटना घटित होती है, तो सम्बंधित अधिशासी अभियंता की पूर्ण जिम्मेदारी होगी और उनके विरूद्ध मुकदमा पंजीकृत किया जायेगा। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी तरह से शिक्षा विभाग के द्वारा पैसा जमा करने के बावजूद भी 218 विद्यालयों में विद्युत संयोजन का कार्य अभी तक नहीं कराये जाने पर ने सम्बंधित अधिशासी अभियंताओं को चेतावनी देते हुए विद्यालयों में विद्युत संयोजन के कार्य को शीघ्रता से पूर्ण कराये जाने का निर्देश दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने 01 जुलाई से 15 जुलाई तक चलने वाले दूसरे स्कूल चलो अभियान के अंतर्गत शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कराये जाने  कोई भी बच्चा स्कूल जाने से छूटने न पाये। उन्होंने कहा कि कक्षा-5 एवं कक्षा-8 पास होने वाले विद्यार्थियों का क्रमशः कक्षा-6 एवं कक्षा-9 में अनिवार्य रूप से नामांकन सुनिश्चित कराया जाये। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि नामांकन की कार्यवाही पोर्टल एप पर अपडेट भी होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने तथा नामांकन एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता न होकर शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार लाना होना चाहिए। जिलाधिकारी ने नए शैक्षिक सत्र के प्रारंभ होने पर विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन एवं पठन-पाठन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालय, मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय-करछना तथा अन्य निर्माणाधीन विद्यालयों के कार्यों के प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यदायी संस्था यूपीसिडको को निर्माण कार्य में तेजी लाते हुए निर्धारित समय में निर्माण कार्य को पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिए है। कायाकल्प योजना के अंतर्गत जिन विद्यालयों में कार्य अभी अधूरे हैं, उन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। कहा कि जिन कार्यों का निर्माण कार्य शुरू होना है उनके जल्द से जल्द जनपद प्रतिनिधियों से शिलान्यास  करा कर निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने आपरेशन कायाकल्प की समीक्षा करते हुए आपरेशन कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटरों के संतृप्तीकरण किए जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने ब्लाकवार आपरेशन कायाकल्प के पैरामीटरों के संतृप्तीकरण की समीक्षा करते हुए सभी विद्यालयों में फर्नीचर, विद्युतीकरण, दिव्यांग शौचालय, बाउंड्रीवॉल सहित सभी कार्यों को पूर्ण कराये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के साथ-साथ विद्यालयों में छायादार पौधे लगाये जाने के भी निर्देश दिए है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिषदीय विद्यालयों में नवीन नामांकन की समीक्षा करते हुए सभी खण्ड शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों में ज्यादा से ज्यादा बच्चों का नवीन नामांकन कराये जाने, पीएम श्री विद्यालयों में नवीन नामांकन में प्रगति लाये जाने तथा कक्षा-8 पास होने वाले छात्रों का कक्षा-9 में प्रवेश अवश्य सुनिश्चित करने के लिए कहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> मध्यान्ह भोजन क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए सभी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण तथा दिवस वार मीनू व मानक के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने निपुण भारत मिशन के अन्तर्गत निपुण प्लस एप पर फीडिंग कम पाये जाने वाले सम्बंधित खण्ड शिक्षा अधिकारियों को कार्य में तेजी लाये जाने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को नवीन शिक्षण विधियों एवं शैक्षिक नवाचारों से जोड़ते हुए शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, जिला पंचायत राज्य अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी,  खंड शिक्षा अधिकारीगण, जिला समन्वयकसहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 19:33:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का बाजारीकरण और छात्रों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong>  <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180637/commercialization-of-education-and-the-future-of-students"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/download.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">भारत में शिक्षा अब केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं रह गई है। यह धीरे धीरे एक विशाल व्यापार में बदल चुकी है। इस व्यापार का सबसे चमकदार और सबसे खतरनाक चेहरा निजी प्रतियोगी शिक्षण उद्योग है। शहरों की दीवारों से लेकर चलभाष पटल तक हर जगह सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मुस्कान, चयनित विद्यार्थियों की तस्वीरें और सफलता के बड़े बड़े दावे दिखाई देते हैं। ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बिना इन संस्थानों के सफलता असंभव लगने लगती है। लाखों परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर बच्चों को इन केंद्रों में भेज रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यही उनके भविष्य का एकमात्र रास्ता है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार आज भारत में लगभग 27 से 33 प्रतिशत छात्र किसी न किसी प्रकार की निजी शिक्षा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह संख्या और अधिक है। दिल्ली जैसे शहरों में लगभग 39 प्रतिशत छात्र इन संस्थानों से जुड़े हुए पाए गए हैं। यह आंकड़ा केवल शिक्षा की स्थिति नहीं बताता बल्कि उस मानसिक दबाव को भी दिखाता है जिसमें समाज जी रहा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों पर भरोसा कम हुआ है और इन व्यापारिक केंद्रों को सफलता का संक्षिप्त मार्ग मान लिया गया है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस उद्योग का बड़ा हिस्सा शिक्षा से ज्यादा विपणन पर टिका हुआ है। आज आभासी माध्यमों से छात्रों को जोड़ने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है। एक प्रतिवेदन के अनुसार लगभग 62 प्रतिशत प्रवेश अब अंतर्जाल आधारित प्रचार के माध्यम से हो रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि शिक्षा अब विज्ञापन और पहचान निर्माण के उसी प्रतिरूप पर चल रही है जिस पर कोई बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलता है। फर्क केवल इतना है कि यहां उत्पाद कोई वस्तु नहीं बल्कि छात्रों का भविष्य है।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">इन संस्थानों की सबसे बड़ी चाल उनका चयन प्रदर्शन होता है। हजारों और लाखों छात्रों की भीड़ में यदि 5 या 10 छात्रों का चयन हो जाए तो वही चेहरे हर विज्ञापन पट्ट पर दिखाई देने लगते हैं। ऐसा माहौल तैयार किया जाता है कि हर छात्र को लगे कि अगला चेहरा उसी का होगा। लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि बाकी हजारों छात्रों का क्या हुआ। वे छात्र जो वर्षों तक शुल्क भरते रहे, जो किराये के कमरों में रहकर तैयारी करते रहे, जिनके परिवार कर्ज में डूब गए, उनका संघर्ष किसी विज्ञापन में जगह नहीं पाता।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">यहां सबसे बड़ा खेल संख्या का है। कुछ संस्थान कम शुल्क रखकर गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों की भारी भीड़ जुटाते हैं। 1000 या 2000 रुपये का शुल्क सुनकर छात्रों को लगता है कि उन्हें बहुत बड़ा अवसर मिल रहा है। लेकिन जब ऐसे लाखों छात्र जुड़ते हैं तो वही छोटी रकम करोड़ों का कारोबार बना देती है। कम शुल्क का मतलब सेवा भावना नहीं होता। कई बार यह भीड़ इकट्ठा करने की रणनीति होती है। जितनी बड़ी भीड़, उतना बड़ा मुनाफा और उतनी ही बड़ी सफलता की कहानी।</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">विडंबना यह है कि छात्र मेहनत अपनी करते हैं लेकिन श्रेय पूरा संस्थान ले जाता है। यदि कोई छात्र सफल हो जाए तो संस्था कहती है कि यह उसकी शिक्षा का परिणाम है। लेकिन यदि लाखों छात्र असफल हो जाएं तो उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। असफल छात्र को कहा जाता है कि उसने पर्याप्त मेहनत नहीं की। इस तरह सफलता संस्थान की और असफलता छात्र की बना दी जाती है। आज इस उद्योग ने छात्रों की मानसिकता भी बदल दी है। पहले शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करना होता था। अब शिक्षा केवल परीक्षा पास करने तक सीमित</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:41:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में चयनित अभ्यर्थियों को डीएम ने दिया नियुक्ति पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178941/dm-gave-appointment-letters-to-the-candidates-selected-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0020.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने नवचयनित शिक्षकों से पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि वे छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में उत्साह देखा गया। नवचयनित शिक्षकों ने भी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चयन प्रक्रिया एवं विद्यालयों की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कुंवर वीरेंद्र मौर्य, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) विजय नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
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<div class="adL"> </div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:57:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानदेय वृद्धि पर शिक्षा मित्रों का भव्य सम्मान समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178255/grand-felicitation-ceremony-of-shiksha-mitras-on-honorarium-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260505-wa0013-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान व सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर समारोह को आकर्षक बनाया। इस दौरान मुख्यमंत्री के गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा मित्रों का योगदान शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है और नामांकन व शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मित्रों के समर्पण से प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत हो रही है और सरकार शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
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<div style="text-align:justify;">भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है और शिक्षा मित्रों का सम्मान व हित सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रत्येक विकास खंड से चयनित शिक्षा मित्रों को सम्मानित किया गया। लगभग 400 शिक्षा मित्रों की उपस्थिति में आयोजित समारोह का समापन शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।</div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 21:20:00 +0530</pubDate>
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