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                <title>democratic values - Swatantra Prabhat</title>
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                            <item>
                <title>राहुल गांधी के जन्मदिवस पर महराजगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाया उत्सव, जनहित की राजनीति को बताया प्रेरणा स्रोत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज/रायबरेली: </strong> रायबरेली के सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के जन्मदिवस के अवसर पर महराजगंज कस्बे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम आयोजित कर केक काटकर जन्मदिन मनाया।  कार्यक्रम का नेतृत्व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव Sushil Pasi ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, क्षेत्रीय नागरिक एवं समर्थक उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव सुशील पासी ने कहा कि, राहुल गांधी देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, युवाओं के अधिकारों तथा आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाने वाले जननेता हैं। उन्होंने कहा कि,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181645/congress-workers-celebrated-rahul-gandhis-birthday-in-maharajganj-called-politics"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0382.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महराजगंज/रायबरेली: </strong> रायबरेली के सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के जन्मदिवस के अवसर पर महराजगंज कस्बे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने उत्साहपूर्वक कार्यक्रम आयोजित कर केक काटकर जन्मदिन मनाया।  कार्यक्रम का नेतृत्व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव Sushil Pasi ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, क्षेत्रीय नागरिक एवं समर्थक उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें कि, कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव सुशील पासी ने कहा कि, राहुल गांधी देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, युवाओं के अधिकारों तथा आम जनता की आवाज़ को मजबूती से उठाने वाले जननेता हैं। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी लगातार किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं तथा उनकी राजनीति जनसेवा और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति समर्पित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुशील पासी ने कहा, "राहुल गांधी का जीवन देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने हमेशा जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। हम सभी उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं सफल जीवन की कामना करते हैं ताकि वे देशहित और जनहित के मुद्दों को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाते रहें।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आगे कहा कि, कांग्रेस पार्टी समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने और संविधान की मूल भावना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी देश में भाईचारे, समानता और लोकतांत्रिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का कार्य कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जन्मदिवस समारोह के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने एक-दूसरे को केक खिलाकर खुशी का इजहार किया तथा राहुल गांधी के दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। कार्यक्रम का माहौल उत्साह और उल्लास से भरपूर रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर मुख्य रूप से मो. उमर, ताहिर कुरैशी, बृजेश पासी, राधेश्याम एडवोकेट, मुनीर भाई, अज़मल खान, सुनील कुमार, शीतांशु मौर्य, चाँद भाई, रमेश पासी, बिंधा पासी, बाला प्रसाद मौर्य, संदीप मौर्य सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, क्षेत्रीय नागरिक एवं समर्थक मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:49:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पार्टियों की टूट व टूटता भरोसा: लोकतंत्र में सबसे बड़ा नुकसान यही है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181509/the-biggest-loss-in-democracy-is-the-breakdown-of-parties"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चुनाव बाद पार्टियों का टूटना या ये कहिए कि दलबदल होना अब आम बात हो चली है। यह दलबदल क्षेत्रीय पार्टियों में सबसे अधिक होती है। लेकिन यहां नेताओं से लोगों का भरोसा टूट चुका होता है। क्योंकि लोगों ने अपने नेता को दूसरी पार्टी में रहते वोट दिया था जबकि नेताजी चुनाव बाद अन्य पार्टी में शामिल हो जाते हैं। पिछले 10 साल में भारत में 25 से ज्यादा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां टूटीं। महाराष्ट्र में शिवसेना दो हिस्सों में बंटी, NCP दो फाड़ हुई, बिहार में JDU ने कई बार पाला बदला। हर बार कारण एक ही बताया जाता है - "सिद्धांतों से समझौता", "जनता के हित में फैसला"। लेकिन नतीजा एक ही निकलता है - वोटर का भरोसा टूटना।</p><p style="text-align:justify;"><br />टूट क्यों रही हैं पार्टियां? इस पर हमारी सोच वही है जो लगभग सभी की होती है। सत्ता और पद का गणित- पार्टी टूटने का 80% कारण विधायकों और सांसदों की टिकट और मंत्री पद की भूख है। जब हाईकमान टिकट काटता है या किसी और को आगे बढ़ाता है, तो नाराज नेता दूसरी पार्टी या नई पार्टी बना लेते हैं। परिवारवाद और हाईकमान कल्चर-<br />कई क्षेत्रीय पार्टियां एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जब दूसरी पीढ़ी तैयार होती है, तो पुराने नेता खुद को साइडलाइन महसूस करते हैं और बगावत करते हैं।</p><p style="text-align:justify;"><br />विचारधारा का कमजोर होना- पहले पार्टियों की पहचान किसी विचारधारा से होती थी। अब ज्यादातर पार्टियां "पावर ब्लॉक" बन गई हैं। विचारधारा बदलते देर नहीं लगती, क्योंकि एजेंडा सत्ता है। वोटर का भरोसा कैसे टूटता है?- जब तुमने 2019 में किसी पार्टी को वोट दिया था, तुमने उसके घोषणापत्र, नेता और विचारधारा पर भरोसा किया था। 2023 में वही विधायक दूसरी पार्टी में चला जाए और 2024 में तीसरी पार्टी में, तो सवाल उठता है। मैंने वोट किसको दिया था? व्यक्ति को, सिंबल को, या पार्टी को?</p><p style="text-align:justify;"><br />क्या मेरा वोट मायने रखता है? अगर चुनाव के बाद गठबंधन बदल जाए तो जनादेश का मतलब क्या रहा? सब एक जैसे हैं- ये सनक नहीं, टूटे भरोसे की उपज है। 2023 के कर्नाटक और महाराष्ट्र चुनाव के बाद CSDS के सर्वे में 47% लोगों ने कहा कि "दलबदल से लोकतंत्र कमजोर होता है"। इसका असर कहां दिखता है? चुनावी राजनीति पर- लोग अब स्थानीय उम्मीदवार देखने लगे हैं, पार्टी नहीं। "पार्टी कोई भी हो, मेरा काम करे" वाला ट्रेंड बढ़ रहा है। नीति निर्माण पर- सरकारें अस्थिर हो जाती हैं। 5 साल का प्लान 2 साल में बदल जाता है क्योंकि गठबंधन बदल गया। युवा राजनीति से दूर हो रहे हैं- कॉलेज चुनावों में भी भागीदारी घट रही है। युवाओं को लगता है कि राजनीति सिर्फ सौदेबाजी है। नोटा का बढ़ना- 2019 के बाद से कई सीटों पर नोटा को मिले वोट 2-3% तक पहुंच गए हैं। ये विरोध का साइलेंट तरीका है।</p><p style="text-align:justify;"><br />               दलबदल कानून कहां फेल हुआ?- 1985 में 52वां संविधान संशोधन लाकर दलबदल विरोधी कानून बनाया गया। मकसद था कि विधायक पार्टी न बदलें। लेकिन कानून में एक खामी छोड़ दी गई - अगर 2/3 विधायक साथ छोड़ दें तो वो "विलय" कहलाता है और अयोग्यता नहीं लगती। इसी खामी का फायदा लेकर महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश में सरकारें गिरीं। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि स्पीकर का फैसला समय पर नहीं आता, जिससे कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है। क्या हो सकता है समाधान?- 2/3 वाली छूट हटाओ- अगर पार्टी टूटती है तो सबको अयोग्य ठहराओ। फिर जनता के पास जाओ और दोबारा चुनाव लड़ो।</p><p style="text-align:justify;"><br />फंडिंग में पारदर्शिता-  चुनाव आयोग को हर लेन-देन का हिसाब मिले ताकि नेताओं को खरीद-फरोख्त न हो सके। आंतरिक लोकतंत्र-  पार्टियों में चुनाव हों, युवा और कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो। जब अंदर लोकतंत्र होगा तो बाहर टूट कम होगी। वोटर एजुकेशन-  लोगों को समझाना होगा कि वोट सिंबल को जाता है, व्यक्ति को नहीं। ये बात स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई जाए। स्थानीय मुद्दों पर वोट-  लोग अब पानी, सड़क, स्कूल को देखकर वोट कर रहे हैं, न कि बड़े नेता के नाम पर। सोशल मीडिया पर जवाबदेही- विधायक अगर पाला बदलता है तो अगले 6 महीने तक ट्रोल होता है। ये डर कुछ हद तक काम कर रहा है। नए विकल्प की तलाश AAP जैसे दल इसी भरोसे के संकट से पैदा हुए। पार्टियों का टूटना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन जब हर 2 साल में गठबंधन और दल बदल जाएं, तो जनता को लगता है कि उसका वोट सिर्फ सत्ता का सीढ़ी है।</p><p style="text-align:justify;"><br />लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं है, ये भरोसे का कॉन्ट्रैक्ट है। जब पार्टियां उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ती हैं, तो नुकसान वोटर को होता है। और एक बार भरोसा टूट जाए, तो उसे दोबारा जोड़ने में 10 साल लग जाते हैं।<br />अगली बार जब कोई नेता पाला बदले, तो सवाल पूछो: "तुम पार्टी बदले, मेरी समस्या बदली क्या?"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 20:39:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रजातंत्र, वैचारिक स्वतंत्रता ही उसकी आत्मा और वास्तविक स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">प्रजातंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों और समाज की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का जीवंत मंच है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से पहले उसके विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना में निहित होती है। जब नागरिक बिना भय के सोच सकते हैं, बोल सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं, तभी एक सशक्त, प्रगतिशील और जीवंत लोकतंत्र का निर्माण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर देश में ऐसे चिंतनशील व्यक्तियों और समूहों का होना आवश्यक है, जो राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के सिद्धांतों को नई ऊर्जा प्रदान करें। संस्कृति, संस्कार और वैचारिक परिपक्वता के बिना</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178223/democracys-ideological-freedom-is-its-soul-and-true-form"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01633.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रजातंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि नागरिकों और समाज की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का जीवंत मंच है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना या अर्थव्यवस्था से पहले उसके विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना में निहित होती है। जब नागरिक बिना भय के सोच सकते हैं, बोल सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं, तभी एक सशक्त, प्रगतिशील और जीवंत लोकतंत्र का निर्माण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर देश में ऐसे चिंतनशील व्यक्तियों और समूहों का होना आवश्यक है, जो राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के सिद्धांतों को नई ऊर्जा प्रदान करें। संस्कृति, संस्कार और वैचारिक परिपक्वता के बिना कोई भी राष्ट्र वैश्विक मंच पर स्थायी प्रगति नहीं कर सकता। विचार केवल शब्द नहीं होते, वे समाज की दिशा और दशा तय करने वाली शक्तियाँ होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यक्तिगत वैचारिक अभिव्यक्ति भारत जैसे गणतांत्रिक देश की मूल आत्मा है। विचार और सिद्धांत मनुष्य की अंतःप्रज्ञा का प्रतिबिंब होते हैं। यदि इन विचारों के प्रवाह को रोका जाए, तो यह केवल अभिव्यक्ति का दमन नहीं, बल्कि व्यक्ति की अंतरात्मा को आहत करना होता है। इतिहास साक्षी है कि जब भी विचारों को दबाने का प्रयास हुआ, उन्होंने और अधिक तीव्र होकर समाज में परिवर्तन की लहर पैदा की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राचीन यूनान के महान दार्शनिक सुकरात इसका सजीव उदाहरण हैं। साधारण रूप-रंग के बावजूद उनके विचारों में अद्भुत मौलिकता और जनजागरण की शक्ति थी। राजसत्ता ने उनके विचारों को खतरा मानकर उन्हें मृत्युदंड दे दिया, परंतु विष का प्याला पीने के बाद भी उनके विचार अमर हो गए। आज भी उनकी शिक्षाएं मानवता को दिशा प्रदान करती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी प्रकार अब्राहम लिंकन ने दास प्रथा के विरुद्ध जो विचार प्रस्तुत किए, वे उस समय अत्यंत क्रांतिकारी थे। उन्होंने कहा कि दास भी मनुष्य हैं और उन्हें समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके इन विचारों ने समाज की अंतरात्मा को झकझोर दिया। यद्यपि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी, पर उनके विचारों ने दास प्रथा के अंत की नींव रखी और मानवाधिकारों की नई परिभाषा गढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद के शब्द हम जो सोचते हैं, वही बन जाते हैं आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके अनुसार विचार ही मनुष्य का निर्माण करते हैं, वही उसे महान या दुष्ट बनाते हैं। व्यक्ति का अस्तित्व उसके विचारों से ही परिभाषित होता है। भौतिक शरीर भले ही नष्ट हो जाए, पर विचारों की शक्ति और प्रभाव कालातीत होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के डिजिटल युग में यह विषय और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी और वैश्विक संवाद के माध्यमों ने विचारों के प्रसार को तीव्र और व्यापक बना दिया है। एक व्यक्ति का विचार अब कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुँच सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यही कारण है कि विचार अब केवल व्यक्तिगत नहीं रहते, वे जनांदोलन का रूप धारण कर सकते हैं।.इतिहास में फ्रांसीसी क्रांति इसका सशक्त उदाहरण है, जहाँ जनमानस में जागृत विचारों ने राजसत्ता की जड़ों को हिला दिया। इसी प्रकार भारत का स्वतंत्रता संग्राम भी विचारों और सिद्धांतों की शक्ति का परिणाम था, जहाँ लाखों लोगों ने एक साझा विचारधारा के तहत संघर्ष किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालाँकि, विश्व के कुछ देशों में आज भी विचारों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। अभिव्यक्ति के माध्यमों को नियंत्रित कर वैचारिक प्रवाह को सीमित करने का प्रयास किया जाता है। यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। विचारों को कैद नहीं किया जा सकता वे स्वभावतः स्वतंत्र, गतिशील और अजेय होते हैं।यह शाश्वत सत्य है कि व्यक्ति को दबाया जा सकता है, पर विचारों को नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">विचार एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचते हुए और अधिक सशक्त होते जाते हैं। जब एक विचार जनमानस में उतर जाता है, तो वह अकेले व्यक्ति का नहीं रह जाता, बल्कि सामूहिक चेतना का हिस्सा बन जाता है। यही वह क्षण होता है, जब परिवर्तन की शुरुआत होती है और युग निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अतः किसी भी स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के लिए आवश्यक है कि वह अपने नागरिकों को विचारों की स्वतंत्रता प्रदान करे, उन्हें नवीनता और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करे। क्योंकि विचार ही वह शक्ति हैं, जो समाज को दिशा देते हैं, राष्ट्र को ऊँचाइयों तक ले जाते हैं और मानवता को आगे बढ़ाते हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:51:43 +0530</pubDate>
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