<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/85501/tribal-rights" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>आदिवासी अधिकार - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/85501/rss</link>
                <description>आदिवासी अधिकार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>फर्जी जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ थारू समाज का हल्ला बोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178782/tharu-community-protests-against-fake-caste-certificate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260509-wa0443.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से लिया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">कई जिलों में  सामने आ रहे मामले</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया है कि गोरखपुर, कुशीनगर, वाराणसी, मऊ, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ सहित कई जिलों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं सोनभद्र, मिर्जापुर, हमीरपुर, बांदा, ललितपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जनपदों में निवासरत वास्तविक जनजातीय समुदायों के अधिकारों पर संकट गहराने की बात कही गई है। उपरोक्त जनपदों से  हज़ारों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष अपने पारंपरिक भेष भूषा  में शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;">मूल आदिवासी जनजाति संस्था   गोरखपुर के द्वारा परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल शान्ति मार्च निकालकर प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। समिति के अनुसार इस आंदोलन में विभिन्न जिलों से करीब हजारों लोगों के शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">“वास्तविक जनजातियों का भविष्य हो रहा अंधकारमय”</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर रोक नहीं लगी तो वास्तविक अनुसूचित जनजातियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। संगठन ने प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178782/tharu-community-protests-against-fake-caste-certificate</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178782/tharu-community-protests-against-fake-caste-certificate</guid>
                <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:00:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260509-wa0443.jpg"                         length="154962"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'क्रूर, जाति-भेद': सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा कोर्ट की ज़मानत की शर्तों को गलत ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने दलित-आदिवासी आरोपियों से पुलिस स्टेशन साफ़ करने को कहा गया था   सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओडिशा की अदालतों को ज़मानत की शर्तें लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसके तहत दलित और आदिवासी समुदायों के आरोपियों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ़ करने थे। इन निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, कोर्ट ने शर्त को "बुरा" बताया और कहा कि यह जातिगत भेदभाव दिखाता है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "हम गहराई से निराश और हताश हैं, और जिस तरह से ओडिशा राज्य की न्यायपालिका वास्तव में ऐसी कठोर, अपमानजनक और अपमानजनक शर्तें लागू करके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178181/cruel-caste-discrimination-supreme-court-finds-odisha-courts-bail-conditions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने दलित-आदिवासी आरोपियों से पुलिस स्टेशन साफ़ करने को कहा गया था   सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओडिशा की अदालतों को ज़मानत की शर्तें लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसके तहत दलित और आदिवासी समुदायों के आरोपियों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ़ करने थे। इन निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, कोर्ट ने शर्त को "बुरा" बताया और कहा कि यह जातिगत भेदभाव दिखाता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "हम गहराई से निराश और हताश हैं, और जिस तरह से ओडिशा राज्य की न्यायपालिका वास्तव में ऐसी कठोर, अपमानजनक और अपमानजनक शर्तें लागू करके औपनिवेशिक मानसिकता की ओर लौट गई है, जो मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हैं, उस पर अपनी कड़ी अस्वीकृति व्यक्त करते हैं। ऐसी शर्तें न्याय के कारण को आगे बढ़ाने के बजाय, अभियुक्त की गरिमा पर प्रहार करती हैं, और अपराध के आधार पर आगे बढ़ती हैं, जो कानून में पूरी तरह से अनुचित है।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायालय ने जमानत की शर्तों को "शून्य और अमान्य" घोषित कर दिया। न्यायालय ने सभी न्यायालयों को भविष्य के किसी भी आदेश में ऐसी जमानत शर्त नहीं लगाने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि किसी भी दूसरे राज्य की ज्यूडिशियरी को भी ऐसी जाति-भेद वाली और दबाने वाली शर्तें नहीं लगानी चाहिए, जिनसे गंभीर सामाजिक टकराव पैदा होने की संभावना हो।" साथ ही, कोर्ट ने आदेश की एक कॉपी देश भर के सभी हाई कोर्ट में भेजने का निर्देश दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि ऐसी बुरी स्थितियों से ऐसा लगता है कि राज्य की ज्यूडिशियरी जाति-भेद करती है, क्योंकि आरोपी पिछड़े समुदाय से थे। न्यायालय ने कहा, "रिपोर्ट में कुछ दम प्रतीत होता है कि राज्य न्यायपालिका द्वारा ऐसे मामलों में कोई भी शर्तें नहीं लगाई जा रही हैं जहां आरोपी समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों से हैं।  यह मानते हुए कि ऐसी शर्तें अनजाने में या किसी पूर्व नियोजित पूर्वाग्रह के बिना लगाई गई थीं, शर्तों की प्रकृति इतनी घृणित, क्रूर, अपमानजनक और कानून के लिए अज्ञात है, कि यह सुझाव देते हुए एक गंभीर आक्षेप लगाने की क्षमता है कि ओडिशा न्यायपालिका जाति-आधारित पूर्वाग्रह से ग्रस्त है।" </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178181/cruel-caste-discrimination-supreme-court-finds-odisha-courts-bail-conditions</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178181/cruel-caste-discrimination-supreme-court-finds-odisha-courts-bail-conditions</guid>
                <pubDate>Mon, 04 May 2026 22:04:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/images-%283%29.jpg"                         length="103523"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        