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                <title>आदिवासी अधिकार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>आदिवासी अधिकार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दलितों और आदिवासियों के साथ सरकारें कर रहीं दोहरा व्यवहार : जरिता लैतफलांग।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
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<div style="text-align:justify;">बारा तहसील के जसरा ब्लॉक के कूढ़ी/जारी स्थित दिव्यांशी गेस्ट हाउस में कांग्रेस पार्टी के संगठन सृजन अभियान के तहत दलित सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की मुख्य अतिथि एवं एआईसीसी पर्यवेक्षक सुश्री जरिता लैतफलांग ने कहा कि देश और प्रदेश की डबल इंजन सरकारों में दलितों एवं आदिवासियों के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। उनके अधिकारों की अनदेखी के कारण इन वर्गों का उत्पीड़न बढ़ रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में महिलाओं, दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार बढ़े हैं और उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185978/jaritha-laitphlang-governments-are-treating-dalits-and-tribals-in-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260819-wa00571.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बारा तहसील के जसरा ब्लॉक के कूढ़ी/जारी स्थित दिव्यांशी गेस्ट हाउस में कांग्रेस पार्टी के संगठन सृजन अभियान के तहत दलित सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की मुख्य अतिथि एवं एआईसीसी पर्यवेक्षक सुश्री जरिता लैतफलांग ने कहा कि देश और प्रदेश की डबल इंजन सरकारों में दलितों एवं आदिवासियों के साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। उनके अधिकारों की अनदेखी के कारण इन वर्गों का उत्पीड़न बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में महिलाओं, दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार बढ़े हैं और उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इन वर्गों को गुमराह कर वोट हासिल किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि अब दलित समाज जागरूक हो चुका है और आने वाले चुनाव में इसका जवाब देगा। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखने वाले कार्यकर्ताओं से संगठन में भागीदारी के लिए जिला अध्यक्ष पद हेतु अपना नाम देने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विशिष्ट अतिथि पीसीसी पर्यवेक्षक उज्जवल शुक्ला ने दलित समाज से वर्तमान सरकार के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करने की अपील की।</div>
<div style="text-align:justify;">सम्मेलन की अध्यक्षता कौशाम्बी जनपद की पीसीसी पर्यवेक्षक एवं 264 बारा विधानसभा की पूर्व प्रत्याशी मंजू सिंह ने की। उन्होंने हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कथित घटना का उल्लेख करते हुए इसे दलितों के अपमान का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारें भगवान श्रीराम की बात करती हैं, लेकिन शबरी के जूठे बेर प्रेमपूर्वक खाने के राम के आदर्श को भूल गई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान मनोरमा देवी, नन्ही देवी, संगीता, अनिता, शिवकुमारी, कविता, आशा, रंजू देवी सहित श्यामाचरण, कमलेश कुमार उर्फ भोले, धर्मराज रत्नाकर, रामबहादुर, मनोज गौतम, श्यामबहादुर, श्रीराम, रोशन जी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 21:24:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फर्जी जाति प्रमाण पत्र के खिलाफ थारू समाज का हल्ला बोल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178782/tharu-community-protests-against-fake-caste-certificate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260509-wa0443.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ </strong>अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर कथित अतिक्रमण और फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने के विरोध में थारू समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहा है। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्थागोरखपुर ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधन ज्ञापन   सौपा</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने आरोप लगाया है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग कथित रूप से “गोंड” शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं व नौकरियों का लाभ गलत तरीके से लिया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">कई जिलों में  सामने आ रहे मामले</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज्ञापन में कहा गया है कि गोरखपुर, कुशीनगर, वाराणसी, मऊ, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ सहित कई जिलों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं सोनभद्र, मिर्जापुर, हमीरपुर, बांदा, ललितपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जनपदों में निवासरत वास्तविक जनजातीय समुदायों के अधिकारों पर संकट गहराने की बात कही गई है। उपरोक्त जनपदों से  हज़ारों की संख्या में महिलाएं एवं पुरुष अपने पारंपरिक भेष भूषा  में शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;">मूल आदिवासी जनजाति संस्था   गोरखपुर के द्वारा परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल शान्ति मार्च निकालकर प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। समिति के अनुसार इस आंदोलन में विभिन्न जिलों से करीब हजारों लोगों के शामिल हुए </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">“वास्तविक जनजातियों का भविष्य हो रहा अंधकारमय”</div>
<div style="text-align:justify;">समिति ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर रोक नहीं लगी तो वास्तविक अनुसूचित जनजातियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। संगठन ने प्रशासन से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 20:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'क्रूर, जाति-भेद': सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा कोर्ट की ज़मानत की शर्तों को गलत ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने दलित-आदिवासी आरोपियों से पुलिस स्टेशन साफ़ करने को कहा गया था   सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओडिशा की अदालतों को ज़मानत की शर्तें लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसके तहत दलित और आदिवासी समुदायों के आरोपियों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ़ करने थे। इन निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, कोर्ट ने शर्त को "बुरा" बताया और कहा कि यह जातिगत भेदभाव दिखाता है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "हम गहराई से निराश और हताश हैं, और जिस तरह से ओडिशा राज्य की न्यायपालिका वास्तव में ऐसी कठोर, अपमानजनक और अपमानजनक शर्तें लागू करके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178181/cruel-caste-discrimination-supreme-court-finds-odisha-courts-bail-conditions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(3).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> सुप्रीम कोर्ट ने दलित-आदिवासी आरोपियों से पुलिस स्टेशन साफ़ करने को कहा गया था   सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओडिशा की अदालतों को ज़मानत की शर्तें लगाने के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसके तहत दलित और आदिवासी समुदायों के आरोपियों को दो महीने तक पुलिस स्टेशन साफ़ करने थे। इन निर्देशों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, कोर्ट ने शर्त को "बुरा" बताया और कहा कि यह जातिगत भेदभाव दिखाता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने कहा, "हम गहराई से निराश और हताश हैं, और जिस तरह से ओडिशा राज्य की न्यायपालिका वास्तव में ऐसी कठोर, अपमानजनक और अपमानजनक शर्तें लागू करके औपनिवेशिक मानसिकता की ओर लौट गई है, जो मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन हैं, उस पर अपनी कड़ी अस्वीकृति व्यक्त करते हैं। ऐसी शर्तें न्याय के कारण को आगे बढ़ाने के बजाय, अभियुक्त की गरिमा पर प्रहार करती हैं, और अपराध के आधार पर आगे बढ़ती हैं, जो कानून में पूरी तरह से अनुचित है।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यायालय ने जमानत की शर्तों को "शून्य और अमान्य" घोषित कर दिया। न्यायालय ने सभी न्यायालयों को भविष्य के किसी भी आदेश में ऐसी जमानत शर्त नहीं लगाने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, "हमारा मानना है कि किसी भी दूसरे राज्य की ज्यूडिशियरी को भी ऐसी जाति-भेद वाली और दबाने वाली शर्तें नहीं लगानी चाहिए, जिनसे गंभीर सामाजिक टकराव पैदा होने की संभावना हो।" साथ ही, कोर्ट ने आदेश की एक कॉपी देश भर के सभी हाई कोर्ट में भेजने का निर्देश दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा कि ऐसी बुरी स्थितियों से ऐसा लगता है कि राज्य की ज्यूडिशियरी जाति-भेद करती है, क्योंकि आरोपी पिछड़े समुदाय से थे। न्यायालय ने कहा, "रिपोर्ट में कुछ दम प्रतीत होता है कि राज्य न्यायपालिका द्वारा ऐसे मामलों में कोई भी शर्तें नहीं लगाई जा रही हैं जहां आरोपी समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों से हैं।  यह मानते हुए कि ऐसी शर्तें अनजाने में या किसी पूर्व नियोजित पूर्वाग्रह के बिना लगाई गई थीं, शर्तों की प्रकृति इतनी घृणित, क्रूर, अपमानजनक और कानून के लिए अज्ञात है, कि यह सुझाव देते हुए एक गंभीर आक्षेप लगाने की क्षमता है कि ओडिशा न्यायपालिका जाति-आधारित पूर्वाग्रह से ग्रस्त है।" </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 22:04:52 +0530</pubDate>
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