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                <title>modern warfare trends - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>modern warfare trends RSS Feed</description>
                
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                <title>आज के प्रौद्योगिकी-चालित युग में भविष्य हेतु तैयार रहने के लिए अनुसंधान और अप्रत्‍याशित घटक आवश्यक है- राज नाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीव्र तकनीकी क्रांति के वर्तमान युग में भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और अप्रत्याशित नवाचार की रणनीति अपनाने के महत्व पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने 4 मई, 2026 को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह विचार व्‍यक्‍त किए।</div>
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<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध में हो रहे तकनीकी बदलावों की त्‍वरित गति</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178171/in-todays-technology-driven-era-research-and-the-unexpected-are-essential"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001764661-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीव्र तकनीकी क्रांति के वर्तमान युग में भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और अप्रत्याशित नवाचार की रणनीति अपनाने के महत्व पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने 4 मई, 2026 को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह विचार व्‍यक्‍त किए।</div>
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<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध में हो रहे तकनीकी बदलावों की त्‍वरित गति और अप्रत्याशित रूप से उभरते हुए अनायास हमलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में, युद्ध का स्वरूप महज तीन-चार वर्षों में टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन और सेंसर जैसे क्रांतिकारी उपकरणों में परिवर्तित हो गया। इसके अलावा, दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी वस्‍तुएं भी घातक हथियार बनती जा रही हैं। लेबनान और सीरिया में हुए पेजर हमलों ने आधुनिक युद्ध पद्धतियों के पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित किया है। ऐसी स्थिति में हमें तैयार रहना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1001764663-(1).jpg" alt="आज के प्रौद्योगिकी-चालित युग में भविष्य हेतु तैयार रहने के लिए अनुसंधान और अप्रत्‍याशित घटक आवश्यक है- राज नाथ सिंह" width="480" height="320"></img></div>
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<div style="text-align:justify;">राजनाथ सिंह ने सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और ऐसी क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो आवश्यकता पड़ने पर देश को अपने शत्रु पर अप्रत्याशित हमला करने में सक्षम बनाएं। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि युद्ध में निर्णायक बढ़त सदैव उसी को मिलती है जिसके पास अचानक हमला करने की शक्ति होती है। हालांकि हमारे रक्षा बल पहले से ही इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, हमें और अधिक सक्रियता के साथ आगे बढ़ना होगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">वर्तमान जटिल और तेजी से बदलते परिवेश में अनुकूलनशीलता सुनिश्चित करने के महत्व पर बल देते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि जो राष्ट्र तकनीकी क्रांति को सबसे तेजी से अपनाएगा, उसे भविष्य के युद्ध परिदृश्य में निर्णायक बढ़त प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्ध किस प्रकार लड़े जाएंगे, यह आज प्रयोगशालाओं में निर्धारित हो रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है और डीआरडीओ के माध्यम से इसे अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ अब इस यात्रा पर अकेला नहीं है। 'दूर तक जाने के लिए साथ चलें' के मंत्र से प्रेरित होकर, यह बड़ी संख्या में उद्योगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/1001764662-(1).jpg" alt="आज के प्रौद्योगिकी-चालित युग में भविष्य हेतु तैयार रहने के लिए अनुसंधान और अप्रत्‍याशित घटक आवश्यक है- राज नाथ सिंह" width="512" height="341"></img></div>
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<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को आवंटित किया गया है और अब तक इन संस्थाओं ने बजट का 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की एक नई नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत विकास-सह-उत्पादन साझेदारों, विकास साझेदारों और उत्पादन एजेंसियों के लिए पहले लगने वाला 20 प्रतिशत शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, डीआरडीओ ने अब तक विभिन्न उद्योगों को 2,200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों को अपने पेटेंट तक नि:शुल्‍क पहुंच प्रदान करने की नीति शुरू की है, जिससे उनकी तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ की परीक्षण सुविधाएं भी भुगतान के आधार पर उद्योगों के लिए खोल दी गई हैं। हर वर्ष सैकड़ों उद्योग अनुसंधान एवं विकास सहायता के लिए इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्योगों को निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक हथियार, जलमग्न क्षेत्र जागरूकता, अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़कर उत्कृष्टता हासिल करनी चाहिए। उन्होंने इस प्रयास में सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनाथ सिंह ने बदलती परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करने और भारत की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए रक्षा बलों और उद्योग जगत की सराहना की और ऑपरेशन सिंदूर को तकनीकी युद्ध और राष्ट्र की तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने विश्व के सामने हमारे रक्षा बलों की वीरता और क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस ऑपरेशन के दौरान आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों सहित अत्याधुनिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया। यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि हम न केवल युद्ध की बदलती प्रकृति को समझते हैं, बल्कि अटूट आत्मविश्वास के साथ तकनीकी प्रगति को भी लागू कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा देश के रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स), एसीटिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडेक्स (एडीआईटीआई) और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ) जैसी पहलें नवाचार को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसंरचना विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में शुरू की गई रक्षा क्षेत्र से सीधे जुड़ी कई अवसंरचना परियोजनाओं, विशेष रूप से रक्षा औद्योगिक गलियारे की स्थापना की जानकारी देते हुए कहा कि यह भारत की रक्षा क्षमताओं को सक्रिय रूप से बढ़ा रही हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार के आत्मनिर्भरता प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्च स्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि और भी तेज होने की संभावना है और इस उपलब्धि में निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारा सामूहिक प्रयास है कि हम आने वाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में, केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने कहा कि यह संगोष्ठी रक्षा बलों, उद्योग, स्टार्टअप, नवप्रवर्तकों और शिक्षाविदों को महत्वपूर्ण परिचालन चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार (जेएआई) के सिद्धांत द्वारा निर्देशित है, जो देश की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।</div>
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<div style="text-align:justify;">उत्तरी कमान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि संगोष्ठी का उद्देश्य विचारों, नवाचारों और अनुभवों को तैनाती योग्य क्षमताओं में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि हाल के संघर्षों को देखते हुए, मानवरहित हवाई प्रणाली (यूएएस), काउंटर-यूएएस सिस्टम, एआई-सक्षम निर्णय लेने वाले उपकरण, सटीक मारक क्षमताएं और उन्नत तोपखाना प्रणालियां जैसी विशिष्ट क्षमताएं युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अपरिहार्य हो गई हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी; सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी; केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमान-इन-चीफ एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन; सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन; एसआईडीएम के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी; और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर रामकृष्णन एस उपस्थित थे।</div>
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<div style="text-align:justify;">एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निजी रक्षा प्रौद्योगिकी फर्मों, स्टार्टअप्स और वर्दीधारी नवोन्मेषकों सहित विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत स्वदेशी समाधानों को प्रदर्शित किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 21:53:34 +0530</pubDate>
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