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                <title>राज्यसभा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>राज्यसभा RSS Feed</description>
                
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                <title>राज्यसभा के रास्ते नीतीश कुमार का वानप्रस्थ गमन!</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा का पर्चा भर कर वानप्रस्थ गमन का रास्ता चुन लिया है। पिछले करीब 20 सालों से बिहार की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार का दबदबा रहा है । सरकारें बदलीं, गठबंधन बदले, चुनाव आए-गए, लेकिन एक छोटी सी अवधि को छोड़ दिया जाए तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही बने रहे। 2005 से बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले इस नेता ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी कर ली है, और इसके साथ ही सूबे की सियासत में एक बड़ा बदलाव शुरू होने वाला लगता है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172602/nitish-kumars-last-journey-through-rajya-sabha"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/nitish-kumar-5-march-2026-.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार ने अब राज्यसभा का पर्चा भर कर वानप्रस्थ गमन का रास्ता चुन लिया है। पिछले करीब 20 सालों से बिहार की राजनीति के केंद्र में नीतीश कुमार का दबदबा रहा है । सरकारें बदलीं, गठबंधन बदले, चुनाव आए-गए, लेकिन एक छोटी सी अवधि को छोड़ दिया जाए तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही बने रहे। 2005 से बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले इस नेता ने अब राज्यसभा जाने की तैयारी कर ली है, और इसके साथ ही सूबे की सियासत में एक बड़ा बदलाव शुरू होने वाला लगता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा राज्यसभा का नामांकन भरने से  यह बात स्पष्ट हो गयी है कि बिहार की राजनीति से एक युग का अब अवसान होने जा रहा है। बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से यदि किसी एक नेता का सबसे अधिक प्रभाव रहा है, तो वह नाम है नीतीश कुमार। वर्ष 2005 से लेकर अब तक बिहार की सत्ता का केंद्र लगभग लगातार उनके इर्द-गिर्द ही घूमता रहा है। अलग-अलग गठबंधनों, बदलते राजनीतिक समीकरणों और कई चुनावी उतार-चढ़ावों के बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर अपनी पकड़ बनाए रखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ऐसे में नीतीश के द्वारा मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का ऐलान बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव के रुप में देखा जा रहा है। अगर देखा जाए लगभग साढ़े तीन दशकों तक बिहार की राजनीति दो नामों के इर्द-गिर्द भूमती रही, ये दो नाम हैं लालू प्रसाद यादव और नीतीश। इन दोनों नेताओं ने न केवल बिहार की सत्ता को आकार दिया, बल्कि राज्य की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा भी तय की। अब जब दोनों ही नेता सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं, तब बिहार एक नए दौर के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1990 के दशक में जब लालू प्रसाद यादव सत्ता में आए, तब बिहार की राजनीति में एक नई सामाजिक चेतना का उदय हुआ। लालू ने 'सामाजिक न्याय' को केवल एक राजनीतिक नारा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक आंदोलन का रूप दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित समुदायों की राजनीतिक भागीदारी को उन्होंने केंद्र में रखा। लंबे समय से सत्ता के गलियारों से दूर रहे वर्गों को उन्होंने राजनीतिक पहचान और आवाज दी। सत्ता की भाषा बदली, राजनीतिक चेहरे बदले और शासन के केंद्र में सामाजिक प्रतिनिधित्व की नई धारा दिखाई देने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसमें कोई दोमत नहीं है कि जेपी आंदोलन से निकले नेताओं की एक पूरी पीढ़ी ने पिछले तीन दशकों तक बिहार की राजनीति को दिशा दी। इस पीढ़ी में पुरानी पीड़ी के पीछे हटने का अर्थ है कि बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी के नेताओं को अवसर मिलेगा। इन सबके बीच अगर बात नीतीश की की जाए तो, बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका केवल एक मुख्यमंत्री की नहीं रही है, बल्कि वे लंबे समय तक राज्य की राजनीति के सर्वमान्य नेता रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग भी उन्हें स्वीकार करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गठबंधन की राजनीति में कई बार वैचारिक मतभेद होने के बावजूद उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया और राजनीतिक संतुलन बनाए रखा। उनकी खास पहचान उनकी सामाजिक योजनाओं और प्रशासनिक छवि से बनी। खास तौर पर महिलाओं के बीच उनकी पकड़ काफी मजबूत रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं का समर्थन एनडीए की जीत का एक बड़ा कारण माना गया था। इसी कारण जब तक वह बिहार की राजनीति में सक्रिय थे, तब तक विपक्षी दलों के लिए उन्हें सीधे चुनौती देना आसान नहीं था। हालांकि, इसी दौर में बिहार की छवि पर कई सवाल भी उठे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई और 'जंगलराज' जैसे शब्द राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गए। विकास की रफ्तार धीमी पड़ने और उद्योगों के बंद होने से बिहार की अर्थव्यवस्था कमजोर होती गई। राज्य से बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हुआ और बिहार प्रवासी मजदूरों के प्रदेश के रूप में पहचाना जाने लगा। चीनी मिलों, जूट फैक्ट्रियों और कई छोटे उद्योगों के बंद होने से रोजगार के अवसर घटते गए। इस दौर में बिहार की पहचान सामाजिक न्याय की राजनीति के साथ-साथ पिछड़ेपन और आर्थिक संकट से भी जुड़ने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2005 में बिहार की राजनीति ने एक बड़ा मोड़ लिया जब नीतीश कुमार सत्ता में आए। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव की शुरुआत भी थी। नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय की राजनीति को विकास और प्रशासनिक सुधारों के साथ जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी और बिहार में सड़कों तथा पुलों का व्यापक जाल बिछाया। राज्य के दूरदराज इलाकों को राजधानी पटना से बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया। एक समय ऐसा था जब बिहार के कई जिलों से पटना पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन सड़क नेटवर्क के विस्तार के बाद यात्रा का समय काफी कम हो गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह बदलाव केवल भौतिक संरचना का नहीं था, बल्कि राज्य की मानसिकत्ता और विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम था। नीतीश कुमार ने शासन को अधिक प्रशासनिक रूप देने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाया। उनकी सरकार द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं ने समाज पर गहरा प्रभाव डाला। छात्राओं के लिए साइकिल योजना ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया बदलाव लाया। पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने से स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा दिया। इन कदमों ने बिहार की सामाजिक संरचना को धीरे-धीरे बदलने में भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश कुमार की छवि 'सुशासन बाबू' के रूप में स्थापित हुई। उन्होंने प्रशासनिक सुधार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी विकास को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनके शासनकाल में बिहार की छवि धीरे-धीरे बदलने लगी। रष्ट्रीय स्तर पर भी बिहार को विकास के नए प्रयासों के संदर्भ में चर्चा मिलने लगी। विहार के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा। बिहार में सड़कों, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में जो बदलाव हुए, उससे राज्य में परिवर्तन आया। मगर भूलना नहीं चाहिए कि राजनीति में बदलाव हमेशा अनिश्चितता लेकर आता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नीतीश के संभावित फैसले से भी बिहार की राजनीति में कई नए सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जदयू अपनी पुरानी ताकत बनाए रख पाएगी? क्या भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री चनाएगी ? क्या नई पीढ़ी के नेताओं को मौका मिलेगा ? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभाएंगे ? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिलेंगे। लेकिन इतना तय है कि कुमार का यह फैसला केवल एक व्यक्ति के पद परिवर्तन की कहानी नहीं है। यह बिहार की राजनीति के एक लंबे अध्याय के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें नीतीश का राज्यसभा जाना सिर्फ पद का बदलाव नहीं है; यह करीब 5 दशक लंबी राजनीतिक यात्रा का एक नया अध्याय भी हो सकता है। हाल ही में नीतीश कुमार ने खुद कहा है कि अपनी लंबी राजनीतिक जिंदगी में वे बिहार विधानसभा के सदस्य, विधान परिषद के सदस्य और लोकसभा के सांसद रह चुके हैं। अब वे राज्यसभा में भी सेवा देना चाहते हैं। और उसके बाद अगर उन्हें केंद्र सरकार में कोई भूमिका मिली, तो बिहार की राजनीति का यह बड़ा चेहरा फिर से राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिख सकता है। राजनीति में समय के साथ भूमिकाएं बदलती रहती हैं, लेकिन कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी छाया लंबे समय तक बनी रहती है। नीतीश भी ऐसे ही नेताआ में गिने जाते हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका चाहे समाप्त हो जाए, लेकिन बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी मौजूदगी आगे भी चर्चा और प्रभाव का विषय बनी रहेगी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें 2020 के बाद एनडीए में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। सीटों की संख्या साफ दिखा रही थी कि भाजपा के पास ज्यादा विधायक हैं, फिर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे। आखिर ऐसा क्यों? इसके 2 मुख्य कारण अक्सर बताए जाते हैं। पहला कारण उनकी सामाजिक आधार है। बिहार में नीतीश कुमार ने अति पिछड़े वर्गों और महिला मतदाताओं से बहुत मजबूत जुड़ाव बनाया है। शराबबंदी जैसी नीतियां और महिलाओं के लिए कल्याण योजनाओं ने उन्हें एक भरोसेमंद और विश्वसनीय नेता की छवि दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 साल की उम्र में स्वास्थ्य कारणों से नीतीश कुमार अब कम मेहनत वाला रोल चुनना चाहते हैं। ऐसे में राज्यसभा उनके लिए एक सम्मानजनक और महत्वपूर्ण मंच हो सकता है। लेकिन बात यहां सिर्फ पद बदलने की नहीं है। यह पार्टी के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश भी हो सकती है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आ सकते हैं और उन्हें राज्य सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 18:53:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-मैक्सिको संसदीय मैत्री समूह का नेतृत्व करेंगे प्रमोद तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज प्रतापगढ़। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी को देश के वैश्विक सम्बन्धों को मजबूत बनाने में अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर एक और नई अहम संसदीय जिम्मेदारी मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वारा गठित किए गए चौसठ राष्ट्रों के भारत के साथ वैश्विक सम्बन्धों को धार देने के लिए वरिष्ठ सांसद प्रमोद तिवारी का भी चयन किया गया है। नई जिम्मेदारी के तहत प्रमोद तिवारी इस संसदीय मैत्री समूह के जरिए देश की संसद के विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं सांसद प्रमोद तिवारी इन देशों के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/171549/pramod-tiwari-will-lead-the-india-mexico-parliamentary-friendship-group"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260226-wa0047.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज प्रतापगढ़। </strong>राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी को देश के वैश्विक सम्बन्धों को मजबूत बनाने में अर्न्तराष्ट्रीय स्तर पर एक और नई अहम संसदीय जिम्मेदारी मिली है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वारा गठित किए गए चौसठ राष्ट्रों के भारत के साथ वैश्विक सम्बन्धों को धार देने के लिए वरिष्ठ सांसद प्रमोद तिवारी का भी चयन किया गया है। नई जिम्मेदारी के तहत प्रमोद तिवारी इस संसदीय मैत्री समूह के जरिए देश की संसद के विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका में दिखेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं सांसद प्रमोद तिवारी इन देशों के साथ पारंपरिक राजनय व संसदीय स्तर पर भी मजबूत सम्बन्ध स्थापित करने में देश की ओर से सार्थक भूमिका निभायेंगे। सांसद प्रमोद तिवारी इस गठित संसदीय मैत्री समूह में छः अन्य सांसदो के साथ भारत-मैक्सिको ग्रुप का लीडर बनाया गया है। इससे प्रतापगढ़ जिले का अब देश व दुनिया में प्रमोद तिवारी के नेतृत्व क्षमता के चलते और मान बढ़ा है। उपलब्धि की जानकारी मिलने पर प्रमोद तिवारी के समर्थकों व कार्यकर्ताओं में गुरूवार को प्रसन्नता भी झलक उठी दिखी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का सांसद होते हुए भी प्रमोद तिवारी के संसदीय अनुभव, वरिष्ठता, संसदीय मर्मज्ञता, तार्किक क्षमता को देखते हुए मैक्सिको के साथ भारत के मधुर रिश्ते और प्रगाढ़ बनाने की जिम्मेदारी सौपी है। सांसद प्रमोद तिवारी संसदीय समूह के नेता के तौर पर मैक्सिको समेत दुनिया के चौसठ राष्ट्रों में भी अपने समकक्षीय से सीधे संवाद के लिए अधिकृत हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वरिष्ठ सांसद प्रमोद तिवारी यूपी विधानसभा में कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता के तौर पर विधानसभा की ओर से कॉमन वेल्थ राष्ट्रों का दौरा करने की भी उपलब्धि रखते हैं। प्रमोद तिवारी के राजनीति तथा राजनय के क्षेत्र में बेहतर संवाद शैली भी उनके संसदीय नेतृत्व क्षमता को बयां किया करती है। गौरतलब है कि राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता के तौर पर जिले के सांसद प्रमोद तिवारी कई राष्ट्रो के संसदीय दल के भारत दौरे मे देश का प्रतिनिधित्व भी प्रायः किया करते हैं। सांसद प्रमोद तिवारी के ग्रुप लीडर के चयन की जानकारी यहां मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने जारी विज्ञप्ति में दी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 19:42:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एसआईआर प्रक्रिया में आयोग की जल्दबाजी से कट रहे हैं वैध मतदाताओं के नाम- प्रमोद तिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने एसआईआर प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की गलतियों पर शनिवार को यहां तगड़ी घेराबंदी की है। उन्होने कहा कि एसआईआर को जल्दबाजी में पूरा कराने की आयोग की जिद के चलते वह लगातार गलतियां पर गलतियां कर रहा है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा यह सुझाव दिया था कि एसआईआर की प्रक्रिया इतने कम समय में पूरी कराना सम्भव नहीं हो है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि तमाम मतदाताओं का नाम सूची से न कट सके इसके लिए इस प्रक्रिया को कम से कम चार से पांच साल तक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/168629/due-to-commissions-haste-in-sir-process-names-of-legitimate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/img-20260207-wa0088.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने एसआईआर प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की गलतियों पर शनिवार को यहां तगड़ी घेराबंदी की है। उन्होने कहा कि एसआईआर को जल्दबाजी में पूरा कराने की आयोग की जिद के चलते वह लगातार गलतियां पर गलतियां कर रहा है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा यह सुझाव दिया था कि एसआईआर की प्रक्रिया इतने कम समय में पूरी कराना सम्भव नहीं हो है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि तमाम मतदाताओं का नाम सूची से न कट सके इसके लिए इस प्रक्रिया को कम से कम चार से पांच साल तक जारी रखना चाहिए। उन्होने आरोप लगाया कि अहंकार में डूबी भाजपा के इशारे पर आयोग इतने कम समय में निर्वाचन आयोग ने यह प्रक्रिया पूरी कराने पर आमादा रहा। शनिवार को  पत्रकार वार्ता में उन्होने कहा कि अब स्वयं आयोग को कई चरणों में यह प्रक्रिया आगे बढ़ानी पड़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि निर्वाचन आयोग ने विपक्ष की मांग और सच्चाई पर ध्यान दिया होता तो बार बार जल्दबाजी में उसे यह निर्णय नहीं लेना पड़ता। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि पहले निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी करने की जिद के कारण उत्तर प्रदेश में दो करोड़ नब्बे लाख चिन्हित मतदाताओं की संख्या में कमी आयी। उन्होने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की संख्या कम होना दुनिया के कई देशों की जनसंख्या के बराबर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार को जब अपनी यह भूल समझ में आयी तब प्रिटिंग फार्म के माध्यम से पोलिंग बूथ पर बहुत से अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, पिछड़े तबके, प्रवासी मजदूर और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले गरीब मजदूरों के नाम काटने के लिए फार्म बांटे गये। उन्होने कहा कि होली या ईद में जो मजदूर साल में एक बार घर आते हैं उनके नाम काटने के लिए फार्म बंटे। सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रदेश के लोगों खासकर गृह जनपद प्रतापगढ़ के नागरिकों से लोकतंत्र को बचाने में अपना योगदान जारी रखने पर भी जोर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि सभी मतदाताओं को अपने अधिकारों की रक्षा करते हुए हर हाल में मतदाता सूची में वैध मतदाता के नाम शामिल कराने चाहिए। उन्होने कहा कि वैध मतदाताओं का नाम कटने पर ऐसे लोगों को मुफ्त राशन व चिकित्सा तथा शिक्षा जैसे अधिकारों से वंचित किया जा सकता है। सांसद प्रमोद तिवारी ने नोएडा में साफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की खुले गड्ढे में गिरकर दर्दनाक मौत को व्यवस्था की बदहाली करार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होने कहा कि दिल्ली में भी प्रशासन की लापरवाही के कारण 25 वर्षीय बाइक सवार युवक कमल की खुले गड्ढे में गिरने से मौत हो गयी। इसके पहले राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने बाबा घुइसरनाथ धाम में मत्था टेका। यहां उन्होने महाशिवरात्रि पर होने वाले परम्परागत तीन दिवसीय राष्ट्रीय एकता महोत्सव की तैयारियों का भी अवलोकन किया। सांसद प्रमोद तिवारी ने पूरब देउम में कर्नल राधेश्याम मिश्र के निधन पर परिजनों से मिलकर संवेदना जतायी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देउम में अधिवक्ता विनय शुक्ल की पत्नी तथा मिश्राइनपुर में पूर्व प्रधानाचार्य सुधाकर पाण्डेय की मां के भी निधन पर संवेदना प्रकट की। इस मौके पर प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, प्रमुख अशोक सिंह बबलू, चेयपर्सन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी, मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल, आशीष उपाध्याय, रामबोध शुक्ला, छोटे लाल सरोज, शेरू खां, इं0 सुनील पाण्डेय, त्रिभु तिवारी, रामू मिश्र, पवन सिंह, मुरलीधर तिवारी, टिल्लू सिंह, आदि रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 20:48:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिर राज्य सभा मे उठा भोजपुरी को आठवीं अनुसूची मे शामिल करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>जी कुमार, बगहा (प.च)। </strong>वाल्मिकीनगर सांसद सुनील कुमार ने आज सदन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मांग किया प्रश्न कल के दौरान अपने संबोधन में माननीय सांसद ने भोजपुरी भाषी 9 मिलियन लोगों के भावनाओं का सम्मान करने के लिए भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कर सम्मान दिलाने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री से सदन के माध्यम से किया है, उन्होंने बताया कि भोजपुरी भाषा काफी समृद्ध भाषा है जो की बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड, सहित नेपाल में बोली जाती है, साथी नेपाल में इस भाषा को मान्यता भी प्राप्त है। ऐसे में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150069/demand-to-include-bhojpuri-in-rajya-sabha-again-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-03/screenshot_2025-03-20-05-27-17-909_com.gallery.player-edit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जी कुमार, बगहा (प.च)। </strong>वाल्मिकीनगर सांसद सुनील कुमार ने आज सदन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मांग किया प्रश्न कल के दौरान अपने संबोधन में माननीय सांसद ने भोजपुरी भाषी 9 मिलियन लोगों के भावनाओं का सम्मान करने के लिए भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कर सम्मान दिलाने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री से सदन के माध्यम से किया है, उन्होंने बताया कि भोजपुरी भाषा काफी समृद्ध भाषा है जो की बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड, सहित नेपाल में बोली जाती है, साथी नेपाल में इस भाषा को मान्यता भी प्राप्त है। ऐसे में सदन से अपील करते हुए माननीय सांसद ने भोजपुरीभाषीयों को तथा भोजपुरी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए अपनी मांग को पुरजोर तरीके से रखते हुए इसे आठवीं अनुसूची में शामिल करने का सदन से एकबार फिर अपील किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-03/vid-20250320-wa0000.mp4" controls=""></video>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि यह मांग कोई नई नहीं है यह काफी दिनों से लंबित है जो की भोजपुरी भाषा को मिलना चाहिए ठीक है जिससे कि सरकारी सेवाओं मे भी भोजपुरि भाषियो को उनका हक मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 05:31:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बगहा : इंडो नेपाल सीमा पर राज्यसभा सांसद ने फहराया तिरंगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>ब्यूरो नसीम खान 'क्या'</strong></p>
<p><strong>बगहा, स्वतंत्र प्रभात । </strong>इंडो नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर में 77 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जश्न आज़ादी का रंग अलग ही देखने को मिला। जहां राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे ने इंडो नेपाल सीमा स्थित गंडक बराज एसएसबी कैम्प बी कंपनी पहुंचकर झंडातोलन किया।जिससे लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और जवानों समेत युवा जोशो ए जज्बा से ओतप्रोत होते रहे । </p>
<p>स्थानीय वाल्मीकिनगर थाना परिसर में झंडातोलन के समय अप्रत्याशित भीड़ जमा हो गई।थानाध्यक्ष विजय कुमार राय ने झंडेतोलन के बाद लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर जनता का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133612/rajya-sabha-mp-hoisted-tricolor-at-bagaha-indo-nepal-border"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/img-20230816-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ब्यूरो नसीम खान 'क्या'</strong></p>
<p><strong>बगहा, स्वतंत्र प्रभात । </strong>इंडो नेपाल सीमा स्थित वाल्मीकिनगर में 77 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जश्न आज़ादी का रंग अलग ही देखने को मिला। जहां राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे ने इंडो नेपाल सीमा स्थित गंडक बराज एसएसबी कैम्प बी कंपनी पहुंचकर झंडातोलन किया।जिससे लोगों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और जवानों समेत युवा जोशो ए जज्बा से ओतप्रोत होते रहे । </p>
<p>स्थानीय वाल्मीकिनगर थाना परिसर में झंडातोलन के समय अप्रत्याशित भीड़ जमा हो गई।थानाध्यक्ष विजय कुमार राय ने झंडेतोलन के बाद लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर जनता का परस्पर सहयोग मिलता रहे तो अपराध को खत्म किया जा सकता है। पुलिस प्रशासन आपकी सेवा के लिए है।</p>
<p>वहीं इस मौके पर एसएसबी 21 वीं बटालियन के गंडक बराज बी कंपनी ने रंगारंग कार्यक्रम किए।बतादें की एसएसबी के डॉग स्कॉयड ने कटीली तारों के नीचे से चलकर,आग के शोलों के बीच गुजरकर अपने करतब के रूप में हुनर दिखाए और राज्यसभा सांसद का फूलों का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया जो आकर्षण का केंद्र रहा । बतातें चलें कि एसएसबी के जवानों ने बच्चों संग सांस्कृतिक कार्यक्रम गंडक बराज के समीप पार्क में किया । जिसमें बच्चों ने देशभक्ति गीत गाए और एकांकी नाटक प्रस्तुत किए जिसे देख दर्शकबीन मंत्रमुग्ध हो चले ।</p>
<p>इंडो नेपाल सीमा नोमेन्स लैंड गंडक बराज के 18 नम्बर फाटक पर नेपाल एपीएफ और एसएसबी के जवानों ने सलामी कार्यक्रम आयोजित कर मिठाईयां एक दूसरे को खिलाकर 77 वां स्वतंत्रता दिवस को सेलिब्रेट किया । वाल्मीकिनगर में हो रहे कार्यक्रम के दौरान एसएसबी 21 वीं वाहिनी के कमांडेंट श्रीप्रकाश, डिप्टी कमांडेंट उमा शंकर नशाना, सहायक कमांडेंट मांझी,इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार मंडल,समाजसेवी सुमन सिंह,मुखिया पन्नालाल साह समेत कई गण्यमान्य लोग उपस्थित रहे ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2023 13:01:49 +0530</pubDate>
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