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                <title>छात्र राजनीति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>छात्र राजनीति RSS Feed</description>
                
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                <title>राजनीतिक हस्तक्षेप से परे हो - छात्रसंघ चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों का इतिहास स्वतंत्रता पूर्व काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर में छात्र संगठनों ने न केवल विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। स्वतंत्रता के बाद देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होने लगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों ने देश को अनेक कुशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी और जनप्रिय नेता दिए हैं। ऐसे अनेक जनप्रतिनिधि छात्र राजनीति से निकलकर लोकसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा तथा केंद्र एवं राज्य</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183622/be-beyond-political-interference-student-union-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/orig_49_1659309656.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों का इतिहास स्वतंत्रता पूर्व काल से जुड़ा हुआ है। उस दौर में छात्र संगठनों ने न केवल विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। स्वतंत्रता के बाद देश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव नियमित रूप से आयोजित होने लगे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों ने देश को अनेक कुशल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरदर्शी और जनप्रिय नेता दिए हैं। ऐसे अनेक जनप्रतिनिधि छात्र राजनीति से निकलकर लोकसभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यसभा तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण पदों तक पहुँचे और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक विश्वविद्यालयों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों और छात्र हितों के प्रतीक बने रहे। उनकी सकारात्मक गूँज गाँवों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बों और महानगरों तक सुनाई देती थी। किंतु समय के साथ राजनीति के बढ़ते दखल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धनबल और बाहुबल के प्रभाव ने छात्रसंघ चुनावों की गरिमा को प्रभावित किया। परिणामस्वरूप अनेक राज्यों में ये चुनाव हिंसक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विवादास्पद और अत्यधिक खर्चीले होते चले गए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान सहित कई राज्यों में छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे मुख्य कारण छात्र गुटों के बीच बढ़ती हिंसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाहरी तत्वों का हस्तक्षेप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय परिसरों में भय का वातावरण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रों एवं प्राध्यापकों को धमकाना तथा गंभीर आपराधिक घटनाएँ रहीं। यही कारण है कि कई राज्यों में आज भी प्रत्यक्ष छात्रसंघ चुनावों पर प्रतिबंध लागू है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके विपरीत दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में राज्य सरकारों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निर्धारित कड़े नियमों के अंतर्गत आज भी प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए जाते हैं। वहीं कुछ राज्यों में चुनाव केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय राजनीति का इतिहास इस बात का साक्षी है कि लगभग प्रत्येक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल में ऐसे अनेक नेता हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की और आगे चलकर देश एवं राज्यों के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता इस बात की है कि सभी राज्यों में विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शांतिपूर्ण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निष्पक्ष और लोकतांत्रिक वातावरण में संपन्न कराए जाएँ। इसके लिए राज्य सरकारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय प्रशासन तथा सभी राजनीतिक दलों को दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक पहल करनी होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक हस्तक्षेप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धनबल और बाहुबल से मुक्त होकर केवल छात्रों के जनसमर्थन और लोकप्रियता के आधार पर संपन्न होने चाहिए। यही व्यवस्था लोकतंत्र की वास्तविक भावना को मजबूत करेगी और विद्यार्थियों में नेतृत्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करेगी। यदि युवा पीढ़ी को छात्र जीवन से ही लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में देश को अधिक संवेदनशील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और उत्तरदायी नेतृत्व प्राप्त होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>आइसा सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन संपन्न, 17 सदस्यीय कमेटी का गठन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178043/second-district-conference-of-aisa-supaul-concludes-formation-of-17"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/b1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का साधन बना रही हैं, जिससे गरीब और मेहनतकश तबके के छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। साथ ही सरकारी स्कूलों के बंद होने, पेपर लीक की घटनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में अव्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में बढ़ती समस्याओं और छात्रों के बीच बढ़ते तनाव को भी गंभीर मुद्दा बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि रोहित वेमुला प्रकरण के बाद यूजीसी द्वारा लाए गए समता संबंधी प्रावधानों को लागू कराने की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की। उन्होंने इन प्रावधानों को लागू करने के लिए छात्र आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में 17 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया। इसमें संतोष कुमार सियोटा को जिला सचिव तथा रामाशीष को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वहीं सुनील कुमार सरदार, अंकू आनंद और अभिनव आनंद को जिला उपाध्यक्ष, शशिकांत कुमार एवं अभिनंदन कुमार को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।<br />सम्मेलन में माले जिला सचिव जयनारायण यादव, पूर्व आइसा सचिव डॉ. अमित कुमार चौधरी, पिपरा विधानसभा से महागठबंधन प्रत्याशी अनिल कुमार, खेगरामस जिला सचिव जन्मजेय राय, मुलेश कुमार शर्मा, मो. अब्दुल सहित सैकड़ों छात्र-युवा उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के अंत में संगठन को और मजबूत बनाने तथा छात्र-हितों के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:59:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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