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                <title>शिक्षा व्यवस्था - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>शिक्षा व्यवस्था RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ग्राम चौपाल कार्यक्रम में ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी गई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विकास खण्ड शोहरतगढ़ अन्तर्गत ग्राम पंचायत रमवापुर खास में भी विकास विभाग के पूर्व सूचना के तहत  प्रशासक /प्रधान जफर आलम की अध्यक्षता में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कहा कि ग्राम पंचायत के सभी विद्यालयों में बेंच की व्यवस्था कराई जा चुकी है। स्वास्थ्य,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181631/information-about-the-schemes-was-given-to-the-villagers-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781879943694.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विकास खण्ड शोहरतगढ़ अन्तर्गत ग्राम पंचायत रमवापुर खास में भी विकास विभाग के पूर्व सूचना के तहत  प्रशासक /प्रधान जफर आलम की अध्यक्षता में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कहा कि ग्राम पंचायत के सभी विद्यालयों में बेंच की व्यवस्था कराई जा चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के विकास से ही ग्राम पंचायत को आदर्श एवं विकसित बनाया जा सकता है। सचिव निशा श्रीवास्तव ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 21 दिनों के भीतर आवेदन करने  सहित सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान मालती देवी,  सूर्य प्रकाश, कृष्ण मोहन गिरी, शांति देवी, मिथिलेश गिरी, चंद्रप्रभा चौधरी, नंदनी, सरिता, लक्ष्मी देवी, सफाईकर्मी कन्हैया लाल, प्रदीप कुमार, सुखबली, किरन यादव, विजयराम आदि लोग मौजूद रहे।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोचिंग संस्कृति के शिकंजे में शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में शिक्षा को हमेशा सामाजिक परिवर्तन, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय निर्माण का सबसे प्रभावशाली साधन माना गया है। प्राचीन गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना रहा है जो विवेकशील, नैतिक, संवेदनशील और समाजोपयोगी हो। शिक्षा व्यक्ति को केवल जीविका कमाने की क्षमता नहीं देती, बल्कि जीवन को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दृष्टि भी प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से पिछले तीन दशकों में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के समानांतर विकसित हुई कोचिंग संस्कृति ने शिक्षा के इसी मूल उद्देश्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180134/education-in-the-clutches-of-coaching-culture"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/symbolic_image_1544311335.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में शिक्षा को हमेशा सामाजिक परिवर्तन, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय निर्माण का सबसे प्रभावशाली साधन माना गया है। प्राचीन गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना रहा है जो विवेकशील, नैतिक, संवेदनशील और समाजोपयोगी हो। शिक्षा व्यक्ति को केवल जीविका कमाने की क्षमता नहीं देती, बल्कि जीवन को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दृष्टि भी प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से पिछले तीन दशकों में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के समानांतर विकसित हुई कोचिंग संस्कृति ने शिक्षा के इसी मूल उद्देश्य को गंभीर चुनौती दी है। आज स्थिति यह है कि ज्ञान, जिज्ञासा और बौद्धिक विकास की अपेक्षा परीक्षा, अंक, रैंक और चयन को अधिक महत्व दिया जाने लगा है। परिणामस्वरूप शिक्षा का व्यापक मानवीय स्वरूप सिकुड़कर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित होता दिखाई दे रहा है।<br /><br />कोचिंग संस्थानों का उदय अचानक नहीं हुआ। यह हमारी औपचारिक शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों और समाज की बढ़ती आकांक्षाओं का परिणाम था। उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में सीटों की सीमित संख्या, बढ़ती जनसंख्या, तीव्र प्रतिस्पर्धा तथा बेहतर जीवन की इच्छा ने विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्गदर्शन की ओर आकर्षित किया। प्रारंभिक दौर में कोचिंग संस्थान उन छात्रों के लिए सहायक मंच थे जिन्हें किसी विशेष विषय में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती थी। लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था इतनी विस्तृत और प्रभावशाली हो गई कि उसने विद्यालयों और महाविद्यालयों की भूमिका को ही चुनौती देना शुरू कर दिया।<br /><br />आज देश के अनेक शहरों में कोचिंग उद्योग एक विशाल आर्थिक तंत्र का रूप ले चुका है। राजस्थान का कोटा, उत्तर प्रदेश का प्रयागराज, दिल्ली का मुखर्जी नगर, हैदराबाद, पुणे, पटना और कई अन्य शहर शिक्षा से अधिक कोचिंग के लिए पहचाने जाने लगे हैं। हजारों छात्र अपने घरों से दूर जाकर वर्षों तक केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहते हैं। उनके दैनिक जीवन का केंद्र विद्यालय या विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि कोचिंग संस्थान बन जाते हैं। यह परिवर्तन केवल संस्थागत बदलाव नहीं है; यह शिक्षा के चरित्र में आए गहरे परिवर्तन का संकेत है।<br /><br />सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना है? यदि नहीं, तो वर्तमान व्यवस्था किस दिशा में जा रही है? आज अधिकांश विद्यार्थी किसी विषय को उसकी बौद्धिक सुंदरता या व्यावहारिक उपयोगिता के कारण नहीं पढ़ते, बल्कि इसलिए पढ़ते हैं क्योंकि वह परीक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विज्ञान, गणित, इतिहास, साहित्य और समाजशास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन जिज्ञासा से अधिक अंकों के लिए किया जाने लगा है। विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि कौन-सा अध्याय महत्वपूर्ण है, कौन-सा प्रश्न बार-बार पूछा जाता है और किस प्रकार न्यूनतम समय में अधिकतम अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करने से हटकर परीक्षा प्रबंधन तक सीमित हो जाता है।<br /><br />यह प्रवृत्ति रचनात्मकता और मौलिक चिंतन के लिए भी चुनौती बन रही है। महान वैज्ञानिक, साहित्यकार, दार्शनिक और नवप्रवर्तक केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करके नहीं बने। उनकी सफलता के पीछे स्वतंत्र चिंतन, प्रयोग करने का साहस और असफलता से सीखने की क्षमता थी। लेकिन वर्तमान कोचिंग-केंद्रित वातावरण में विद्यार्थियों को निर्धारित उत्तरों और निश्चित पद्धतियों के भीतर सोचने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे उनके व्यक्तित्व का स्वाभाविक विकास बाधित हो सकता है। वे समस्या का समाधान खोजने के बजाय पहले से तैयार समाधान याद करने लगते हैं।<br /><br />कोचिंग संस्कृति का एक अन्य गंभीर प्रभाव सामाजिक असमानता के रूप में सामने आया है। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्राप्त करना आज अत्यंत महंगा हो गया है। प्रतिष्ठित संस्थानों की फीस कई परिवारों की वार्षिक आय के बराबर होती है। इसके अतिरिक्त आवास, भोजन, अध्ययन सामग्री और अन्य खर्च अलग से होते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्र अनेक बाधाओं का सामना करते हैं। इस प्रकार शिक्षा, जो समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए, धीरे-धीरे आर्थिक संसाधनों पर निर्भर होती जा रही है।<br /><br />इस स्थिति का एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है। जब किसी समाज में सफलता की परिभाषा कुछ चुनिंदा परीक्षाओं और संस्थानों तक सीमित हो जाती है, तब लाखों युवाओं पर असामान्य दबाव उत्पन्न होता है। विद्यार्थी कम उम्र में ही यह मानने लगते हैं कि यदि वे किसी विशेष परीक्षा में सफल नहीं हुए तो उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। यह सोच उन्हें निरंतर तनाव, चिंता और भय की स्थिति में रखती है। प्रतिस्पर्धा की यह तीव्रता कई बार मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है।<br /><br />हाल के वर्षों में विद्यार्थियों में तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि देखी गई है। अनेक छात्र अपने परिवार की अपेक्षाओं, सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन नहीं बना पाते। जब सफलता ही सम्मान का एकमात्र आधार बन जाए और असफलता को सामाजिक कलंक की तरह देखा जाए, तब मानसिक दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। यह स्थिति केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चिंता का विषय है।<br /><br />कोचिंग उद्योग के विस्तार ने शिक्षा के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया है। आज शिक्षा एक बड़े बाजार का रूप लेती दिखाई देती है। आकर्षक विज्ञापन, सफलता की कहानियां, टॉपरों की तस्वीरें, चयन प्रतिशत और रैंकिंग के दावे छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित करते हैं। कई बार शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूट जाता है और विपणन रणनीतियां प्रमुख हो जाती हैं। शिक्षा सेवा से अधिक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत की जाने लगती है। इससे शिक्षा के नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।<br /><br />प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा अनियमितताओं और चयन प्रक्रियाओं पर उठते सवालों ने भी इस संकट को और गहरा किया है। जब कोई छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करता है और फिर परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है, तो उसका विश्वास टूटता है। शिक्षा व्यवस्था का आधार ही विश्वास और पारदर्शिता है। यदि यह आधार कमजोर पड़ जाए तो प्रतिभा, परिश्रम और ईमानदारी का महत्व कम होने लगता है। इससे पूरे समाज में निराशा और असंतोष का वातावरण बन सकता है।<br /><br />हालांकि कोचिंग संस्थानों की भूमिका को पूरी तरह नकारना भी उचित नहीं होगा। अनेक संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन, उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से छात्रों को लाभ पहुंचाया है। दूरदराज के क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थियों को इन्हीं संस्थानों के माध्यम से बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। कई छात्रों के लिए कोचिंग वास्तव में सफलता का माध्यम बनी है। इसलिए समस्या कोचिंग के अस्तित्व में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस निर्भरता में है जहां कोचिंग अनिवार्य प्रतीत होने लगी है।<br /><br />यदि विद्यालयों और महाविद्यालयों की शिक्षा पर्याप्त प्रभावी हो, तो अतिरिक्त कोचिंग की आवश्यकता सीमित रह सकती है। दुर्भाग्य से अनेक विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और शिक्षकों की संख्या जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। कई स्थानों पर छात्रों को मूलभूत अवधारणाएं भी पर्याप्त रूप से नहीं सिखाई जातीं। ऐसी स्थिति में कोचिंग संस्थान उस रिक्त स्थान को भरने का प्रयास करते हैं जिसे औपचारिक शिक्षा व्यवस्था भरने में असफल रही है।<br /><br />समाधान केवल कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण लगाने से नहीं निकलेगा। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं। सबसे पहले विद्यालयी शिक्षा को इतना मजबूत बनाना होगा कि छात्र को बुनियादी ज्ञान और अवधारणाओं के लिए बाहरी सहायता पर निर्भर न रहना पड़े। शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम पर विशेष ध्यान देना होगा।<br /><br />साथ ही परीक्षा प्रणाली में भी परिवर्तन आवश्यक है। वर्तमान व्यवस्था अक्सर रटने की क्षमता और सीमित प्रकार के प्रश्नों पर आधारित होती है। यदि परीक्षाएं विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान, सृजनात्मकता और व्यावहारिक समझ का मूल्यांकन करें, तो कोचिंग आधारित तैयारी का प्रभाव स्वतः कम हो सकता है। शिक्षा का मूल्यांकन केवल अंक देने की प्रक्रिया नहीं होना चाहिए; उसे छात्र की वास्तविक क्षमता को पहचानने का माध्यम बनना चाहिए।<br /><br />राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भी बहुआयामी शिक्षा, कौशल विकास और समग्र मूल्यांकन पर जोर दिया है। यदि इन सिद्धांतों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तो शिक्षा का स्वरूप अधिक संतुलित और व्यापक बन सकता है। विद्यार्थियों को केवल डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनने की दिशा में नहीं, बल्कि विविध प्रतिभाओं और रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।<br /><br />अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर माता-पिता सामाजिक प्रतिष्ठा या भविष्य की चिंता के कारण बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाएं थोप देते हैं। उन्हें यह समझना होगा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता, रुचि और व्यक्तित्व अलग होता है। सफलता का अर्थ केवल किसी प्रतिष्ठित परीक्षा में चयन नहीं है। एक अच्छा शिक्षक, वैज्ञानिक, कलाकार, लेखक, उद्यमी या सामाजिक कार्यकर्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है जितना किसी अन्य पेशे का व्यक्ति।<br /><br />समाज को भी सफलता की अपनी परिभाषा पर पुनर्विचार करना होगा। यदि हम केवल अंकों और रैंक के आधार पर व्यक्तियों का मूल्यांकन करेंगे, तो शिक्षा का मानवीय पक्ष कमजोर पड़ता जाएगा। हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहां सीखने, प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और असफलताओं से सीखने को प्रोत्साहन मिले।<br /><br />अंततः कोचिंग संस्कृति का प्रश्न केवल शिक्षा व्यवस्था का प्रश्न नहीं है; यह उस समाज की दिशा का प्रश्न है जिसे हम भविष्य में निर्मित करना चाहते हैं। यदि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता रह जाएगा, तो हम कुशल परीक्षार्थी तो तैयार कर सकते हैं, लेकिन विचारशील नागरिक नहीं। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके विश्वविद्यालयों, विद्यालयों और युवाओं की जिज्ञासा में निहित होती है, न कि केवल उसकी परीक्षा प्रणालियों में।<br /><br />आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा को फिर से ज्ञान, विवेक, सृजनशीलता और मानवीय मूल्यों से जोड़ा जाए। कोचिंग संस्कृति की उपयोगिता अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उसे शिक्षा का विकल्प नहीं बनने दिया जा सकता। जब विद्यालय सीखने का केंद्र बनेंगे, परीक्षाएं समझ का मूल्यांकन करेंगी और समाज सफलता को व्यापक दृष्टि से देखेगा, तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगी। यही वह मार्ग है जो भारत को केवल प्रतिभाशाली युवाओं का नहीं, बल्कि विचारशील, नवाचारी और संवेदनशील नागरिकों का राष्ट्र बना सकता है।<br /><br /><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:26:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'आपदाओं का विभाग बन गया है शिक्षा मंत्रालय'- राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179532/ministry-of-education-has-become-the-department-of-disasters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले, जिससे कई छात्रों को कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा. अब CBSE 9वीं के लाखों छात्रों से अचनाक 1 जुलाई से एक नई भाषा सीखने को कह रहा है, जबकि न तो कोई शिक्षक हैं और न ही किताबें.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि 14 साल के बच्चों को 'अस्थायी' समाधान के तौर पर 6वीं क्लास की किताबें थमा दी गईं. राहुल ने कहा, 'तीन एग्जाम. तीन आयु वर्ग. एक मंत्री. धर्मेंद्र प्रधान जी सिर्फ एक बार फेल नहीं हुए हैं. वे भारत के छात्रों के हर आयु वर्ग को एक साथ फेल कर चुके हैं. हर घोषणा छात्रों को अनिश्चितता के गहरे भंवर में धकेल देती है.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने कहा कि हर बार कोई सजा नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि 'शिक्षा मंत्रालय अब आपदाओं का विभाग बन गया है.'</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले शनिवार को भी राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करते हुए कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान जी को इस्तीफा देने को कहें और जो दोषी हैं, उन्हें पकड़कर जेल में डाला जाए.।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:41:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट पेपर लीक के नौ गुनहगार: सिस्टम के अंदर से हुआ खेला, स्पेशल क्लास से लेकर करोड़ों के सौदे ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179528/nine-culprits-of-neet-paper-leak-played-from-inside-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी। मनीषा पुणे की एक सीनियर बॉटनी लेक्चरर हैं और उन्हें इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उन्हें एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक हैसियत की वजह से प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। वहीं, पुणे से गिरफ्तार लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी भी लंबे समय से एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इन दोनों ने मिलकर सिस्टम के इसी भरोसे का फायदा उठाया और पेपर को लीक कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई के अनुसार, यह खेल अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही शुरू हो चुका था। कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर ऐसे छात्रों को जोड़ना शुरू किया जो इसके लिए मोटी रकम दे सकें। अब आप सोच रहे होंगे यह दूसरी मनीषा कौन है? मनीषा वाघमारे  पुणे में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं। इसके बाद पुणे में कुलकर्णी के घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक 'विशेष कोचिंग क्लास' शुरू हुई। यह कोई साधारण क्लास नहीं थी। यहां छात्रों को न तो कोई कॉन्सेप्ट समझाया जा रहा था और न ही कोई थ्योरी पढ़ाई जा रही थी। यहां सीधे नीट परीक्षा के सवाल, उनके विकल्प और सही जवाब बताए जा रहे थे। छात्र चुपचाप इन्हें अपनी कॉपियों में नोट कर रहे थे। जब सीबीआई ने इन छात्रों की नोटबुक्स जब्त कीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से ये सवाल हूबहू मैच कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ महाराष्ट्र के लातूर में हुआ। वहां एक कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट में अचानक 42 ऐसे सवाल पूछ लिए गए, जो ठीक दो दिन बाद होने वाली नीट परीक्षा के असली पेपर में आने वाले थे। जब परीक्षा के दिन असली पेपर सामने आया, तो कुछ जागरूक अभिभावकों के कान खड़े हो गए। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की। मामले की गंभीरता और इसके अंतर-राज्यीय कनेक्शन को देखते हुए केस तुरंत सीबीआई को सौंप दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह एक बेहद संगठित सिंडिकेट था। यह नेटवर्क सेमिनार आयोजित करता था और ऐसे छात्रों को ढूंढता था जो पढ़ाई में कमजोर हों लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इस काम के लिए उन्होंने पुराने छात्रों, खासकर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं को अपना एजेंट बना रखा था। पिछले 24 घंटों में सीबीआई ने देशव्यापी छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं। अब तक जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कुल नौ लोगों को दबोचा जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;">मनीषा गुरुनाथ मंधारे: पुणे की सीनियर बॉटनी लेक्चरर और एनटीए एक्सपर्ट, जिन्हें साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।प्रो. पीवी कुलकर्णी: लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर और मुख्य सूत्रधार, जिनकी प्रश्न पत्र पैनल तक पहुंच थी।मनीषा वाघमारे: पुणे की ब्यूटी सैलून मालकिन, जो उम्मीदवारों को जुटाने और सीक्रेट क्लास मैनेज करने में सहयोगी थीं।मांगीलाल बीवाल: जयपुर का निवासी, जिस पर लीक पेपर हासिल करने और उसे आगे बांटने का आरोप है।विकास बीवाल: मांगीलाल का बेटा और मेडिकल छात्र, जिसने इस अवैध काम को अंजाम देने में मदद की।दिनेश बीवाल: मांगीलाल का भाई, जो इस पूरे खेल के वित्तीय लेन-देन को संभाल रहा था।यश यादव: गुरुग्राम का रहने वाला मुख्य बिचौलिया, जिसने लीक प्रश्न पत्र बीवाल परिवार तक पहुंचाया।शुभम खैरनार: नासिक का निवासी, जिस पर सबसे पहले लीक या गेस प्रश्न पत्र को बाजार में फैलाने का शक है।धनंजय लोखंडे: अहिल्यानगर का आयुर्वेद डॉक्टर, जिसे इस मामले में संलिप्तता के बाद हिरासत में लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई अब प्रो कुलकर्णी के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट का हाथ नीट 2024 के पेपर लीक और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से भी जुड़ा हो सकता है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा  मित्र के भरोसे चल रहा है प्राथमिक विद्यालय गिजिनियादामर्, अध्यापक गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कोन / सोनभद्र -</strong> शिक्षा क्षेत्र कोन के ग्राम पंचायत पीपरखाड़ अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गिजिनियादामर् के एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। बतातें चलें कि गुरुवार तड़के लगभग 8.16 बजे बच्चे खेलते नजर आये। जिसके क्रम में बच्चों से पूछने पर पता चला कि प्रभारी प्र. अध्यापक गायब होना बताया और महीने में कभी कभार ही विद्यालय आने की जानकारी दी। सूत्रों की मानें तो उक्त अध्यापक के उपर ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। जहाँ एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री बच्चों के शिक्षा के लिए कटिबद्ध हैं और स्पष्ट निर्देश है कि कोई बच्चा अशिक्षित व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179355/primary-school-is-running-on-the-basis-of-education-friend"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001608563.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कोन / सोनभद्र -</strong> शिक्षा क्षेत्र कोन के ग्राम पंचायत पीपरखाड़ अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय गिजिनियादामर् के एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। बतातें चलें कि गुरुवार तड़के लगभग 8.16 बजे बच्चे खेलते नजर आये। जिसके क्रम में बच्चों से पूछने पर पता चला कि प्रभारी प्र. अध्यापक गायब होना बताया और महीने में कभी कभार ही विद्यालय आने की जानकारी दी। सूत्रों की मानें तो उक्त अध्यापक के उपर ब्लॉक के संबंधित अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। जहाँ एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री बच्चों के शिक्षा के लिए कटिबद्ध हैं और स्पष्ट निर्देश है कि कोई बच्चा अशिक्षित व भूखे न रहे किन्तु जमीनी हकीकत कोन में कुछ और बयाँ कर रही है। जानकारों का कहना है कि शिक्षक विद्यालय समय में इधर उधर अन्य ऑफिस में देखे जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> क्षेत्र में कुछ ऐसे भी अध्यापक हैं जो नियत समय पर विद्यालय उपस्थित नहीं होते हैं जिससे बच्चों का भविष्य चौपट होता जा रहा है और वहीं ब्लॉक से संबंधित अधिकारी जाँच या कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हैं और शिकायत को निराधार बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जिसके क्रम में मौके पर उपस्थित पीपरखाङ ग्राम प्रधान संजय पासवान ने भी प्रभारी अध्यापक के गैरहाजिर रहने की बातें स्वीकार करते हुए संबंधित विभाग से अपील किया है कि सभी अध्यापक समय से विद्यालय उपस्थित हों ताकि गरीब आदिवासी बच्चों को शिक्षा मिल सके और शिक्षित होकर आगे चलकर देश या प्रदेश का नाम रोशन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के शिक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जायेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> विभाग ऐसे लापरवाह अध्यापक के उपर विभाग नकेल कसें जिससे नियमित पठन पाठन सुनिश्चित हो सके,अन्यथा की स्थिति में ऐसे लापरवाह अध्यापक को यहाँ से हटाकर अन्य अध्यापक की नियुक्ति की जाए।  वहीं प्रभारी प्र. अध्यापक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया किन्तु कॉल रीसीव नहीं हुआ। इस बावत् खण्ड शिक्षा अधिकारी कोन विश्वजीत कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया किन्तु कॉल रीसीव नहीं हुआ। वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सोनभद्र ने सेल फोन पर कहा कि प्रकरण की जाँचकर कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी । अब देखना दिलचस्प होगा कि बच्चों को बुनियादी शिक्षा मिल पायेगा या सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह जायेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:27:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरटीई कानून के तहत गरीब एवं पीडीए समाज के बच्चों को निजी विद्यालयों में नहीं मिल रहा प्रवेश   </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर अध्यक्ष हाजी फ़ज़ल महमूद के नेतृत्व में नगर कमेटी द्वारा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में “बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९” के अंतर्गत गरीब एवं पीडीए समाज (पिछड़े, दलित एवं अल्पसंख्यक) के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश न दिए जाने, निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क वसूली किए जाने तथा सरकारी विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी की ओर से एसीएम 6 आलोक गुप्ता ने ज्ञापन स्वीकार किया। इस दौरान उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179192/under-rte-act-poor-and-pda-community-children-are-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001906965.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर अध्यक्ष हाजी फ़ज़ल महमूद के नेतृत्व में नगर कमेटी द्वारा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में “बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९” के अंतर्गत गरीब एवं पीडीए समाज (पिछड़े, दलित एवं अल्पसंख्यक) के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश न दिए जाने, निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क वसूली किए जाने तथा सरकारी विद्यालयों की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी की ओर से एसीएम 6 आलोक गुप्ता ने ज्ञापन स्वीकार किया। इस दौरान उन्होंने आश्वासन दिया कि ज्ञापन में उठाई गई समस्याओं को गंभीरता से संज्ञान में लेकर संबंधित विभागों को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अध्यक्ष हाजी फ़ज़ल महमूद ने कहा कि आरटीई कानून के तहत गरीब एवं पीडीए समाज के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों पर निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश देने से इंकार किया जा रहा है, जिससे हजारों जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय गरीब अभिभावकों को कभी दस्तावेजों के नाम पर तो कभी सीटें भर जाने का बहाना बनाकर वापस कर देते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है तथा महंगी पुस्तकें, कॉपियां एवं विद्यालयी पोशाक निर्धारित दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> वहीं सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। अधिकांश सरकारी विद्यालय आज भी स्मार्ट कक्षाओं, संगणक प्रयोगशालाओं एवं डिजिटल शिक्षा जैसी आधुनिक सुविधाओं से वंचित हैं। समाजवादी पार्टी कानपुर महानगर ने मांग की कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, २००९ के अंतर्गत गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों का निजी विद्यालयों में अनिवार्य प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए, मनमानी शुल्क वृद्धि पर रोक लगाई जाए तथा सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179192/under-rte-act-poor-and-pda-community-children-are-not</link>
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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 20:42:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट 2026 पेपर लीक के खिलाफ़ दिशा छात्र संगठन द्वारा NTA चेयरमैन का पुतला दहन किया गया।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज दिशा छात्र संगठन, इलाहाबाद इकाई द्वारा प्रयागराज के बक्शी बांध सब्जी मंडी में NTA द्वारा कराए गए पेपर लीक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन रखा गया। </div><div style="text-align:justify;">बात रखते हुए प्रशान्त ने कहा कि 03 मई 2026 को आयोजित नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों ने एक बार फिर देश की शिक्षा व्यवस्था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वर्ष आयोजित हुई परीक्षा में लगभग 22,05,035 छात्रों ने भाग लिया था, जिनका भविष्य अब असमंजस और मानसिक तनाव के बीच लटक गया है। परीक्षा से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179152/the-effigy-of-nta-chairman-was-burnt-by-disha-student"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260512-wa0138.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">आज दिशा छात्र संगठन, इलाहाबाद इकाई द्वारा प्रयागराज के बक्शी बांध सब्जी मंडी में NTA द्वारा कराए गए पेपर लीक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन रखा गया। </div><div style="text-align:justify;">बात रखते हुए प्रशान्त ने कहा कि 03 मई 2026 को आयोजित नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने की खबरों ने एक बार फिर देश की शिक्षा व्यवस्था और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वर्ष आयोजित हुई परीक्षा में लगभग 22,05,035 छात्रों ने भाग लिया था, जिनका भविष्य अब असमंजस और मानसिक तनाव के बीच लटक गया है। परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में 720 में से लगभग 600 अंकों तक के "गेस पेपर" घूम रहे थे, जिसके बाद 07 मई को पेपर लीक की खबर सामने आई।</div><div style="text-align:justify;">दिशा के चन्द्रप्रकाश ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले वर्षों में भी एनटीए द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। लगातार हो रहे पेपर लीक लाखों छात्रों और युवाओं के मेहनत, सपनों और भविष्य के साथ क्रूर मज़ाक हैं। इन घटनाओं ने छात्रों के भीतर गहरा मानसिक दबाव पैदा किया है, जिसके चलते देश के कई शैक्षणिक शहरों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी बढ़ी हैं।  </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह समस्या केवल कुछ कर्मचारियों या अधिकारियों की लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते निजीकरण, ठेकेदारी और मुनाफाखोरी का नतीजा है। पहले प्रश्नपत्र सरकारी प्रेसों में छपते थे, जहाँ सुरक्षा अपेक्षाकृत मजबूत होती थी, लेकिन अब प्रश्नपत्रों की छपाई निजी कंपनियों और ठेकेदारों को सौंप दी गई है। मुनाफे पर टिकी यह व्यवस्था शिक्षा को भी बाज़ार में बदल चुकी है, जहाँ छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ आम बात हो गई है।</div><div style="text-align:justify;">हर बार की तरह इस बार भी सरकार और प्रशासन कुछ कर्मचारियों को निलंबित कर या जांच कमेटी बैठाकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश करेगा, लेकिन इससे समस्या का समाधान नहीं होगा। ज़रूरत इस पूरी भ्रष्ट और मुनाफाखोर व्यवस्था पर सवाल उठाने की है, जिसने शिक्षा को भी व्यापार बना दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> नीट 2026 परीक्षा को तत्काल रद्द कर निष्पक्ष पुनः परीक्षा करायी जाए।</div><div style="text-align:justify;">•पेपर लीक और धांधली में शामिल सभी लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;">• पेपर लीक रोकने के लिए कठोर और प्रभावी कानून बनाया जाए।</div><div style="text-align:justify;">• धांधली से प्रभावित छात्रों को मुआवज़ा दिया जाए तथा परीक्षा फॉर्म की पूरी फीस वापस की जाए।</div><div style="text-align:justify;">•प्रश्नपत्रों की छपाई निजी प्रेसों की बजाय सरकारी प्रेसों में करायी जाए कि मांग की गई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस प्रदर्शन में चन्द्रप्रकाश, प्रशांत, निधि, सौम्या, चंचल, अमन आदि उपस्थित रहे। </div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 19:48:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक माह बीतने के बाद भी बीईओ ने सन राइज स्कूल के खिलाफ नहीं की कोई कार्यवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।बस्ती सदर / </strong>नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने एक माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी सन राइज स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है बल्कि कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्यवाही न करने का आश्वासन देकर सन राइज स्कूल से मोटी रकम की वसूली की है और जांच पड़ताल के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती कर दिया है ।</div>
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<div style="text-align:justify;">खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी द्वारा लगातार मीडिया टीम को आश्वासन दिया जा रहा था कि सन राइज स्कूल के लापरवाही की निष्पक्ष जांच होगी और कार्यवाही भी निश्चित रूप से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178976/even-after-a-month-beo-did-not-take-any-action"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0025-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।बस्ती सदर / </strong>नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने एक माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी सन राइज स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है बल्कि कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्यवाही न करने का आश्वासन देकर सन राइज स्कूल से मोटी रकम की वसूली की है और जांच पड़ताल के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती कर दिया है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी द्वारा लगातार मीडिया टीम को आश्वासन दिया जा रहा था कि सन राइज स्कूल के लापरवाही की निष्पक्ष जांच होगी और कार्यवाही भी निश्चित रूप से होगी लेकिन ऐसा क्या एक महीने के अन्दर बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी और सन राइज स्कूल के बीच सेटिंग हो गई कि सन राइज स्कूल के खिलाफ शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्यवाही के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती की गई । अब आप सोच सकते हैं कि सन राइज स्कूल की लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि सन राइज स्कूल के द्वारा *मौत के साये में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम* कराया गया था फिर भी बीईओ ने जांच के नाम पर खेला कर दिया यदि ऐसे ही शिक्षा विभाग द्वारा लापरवाह खण्ड शिक्षा अधिकारियों को जांच सौंपी जायेगी तो शिक्षा विभाग की साख पूरी तरह कमजोर हो जायेगी और आमजन मानस का शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विश्वास खत्म हो जायेगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आपको बता दें कि नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी के द्वारा सन राइज स्कूल को वार्षिकोत्सव के एक सप्ताह पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और नोटिस का जबाव निर्धारित समय सीमा में सन राइज स्कूल द्वारा खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी को नही दिया गया था । निर्धारित समय के अन्दर जारी नोटिस का जबाव न देने पर खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने नाराज़गी जताई थी और पुनः सन राइज स्कूल को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">           सन राइज स्कूल रेलवे स्टेशन रोड पर सुशील हीरो एजेन्सी के निकट स्थित है सन राइज स्कूल पर बीते 02 अप्रैल 2026 को वार्षिकोत्सव कार्यक्रम आयोजित हुआ था सन राइज स्कूल पर अव्यवस्थाओं के बीच वार्षिकोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बच्चों और अभिभावकों ने जान जोखिम में डालकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे थे । निर्माणाधीन मकान के बीच में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम हुआ था प्रधानाचार्य डा० फैजल अख्तर ने लोहे की पाइप व बांस की बल्ली के बीच वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में जाने के लिए रास्ता बनाया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सन राइज स्कूल में फैली हुई गन्दगी और अव्यवस्थाओं को लेकर अभिभावकों ने नाराज़गी जताई थी । सन राइज स्कूल का निर्माण कार्य चल रहा है वार्षिकोत्सव समारोह के दौरान तीन मंजिला मकान कार्य में नीचे से लेकर ऊपर तक लोहे की पाइप और बांस की बल्ली बंधी हुई थी और नीचे चारों तरफ भी ईंट , गिट्टी , मोरंग , बालू बिखरा हुआ था। नीचे से लेकर ऊपर 03 मंजिला मकान तक लोहे के पाइप व बांस की बल्ली बंधी हुई थी । अभिभावकों ने सन राइज स्कूल में फैले अव्यवस्था को लेकर प्रशासन से जांच कर कार्यवाही की मांग की थी । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     नाम न छापने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने कहा था कि छोटे - छोटे बच्चें लोहे की पाइप व बांस की बल्ली के बीच से दौड़ते हुए आ जा रहे थे यदि कहीं किसी लोहे की पाइप व बांस से टकरा गये तो 03 मंजिला मकान में लगा लोहे की पाइप व बांस की बल्ली कभी भी गिर सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था लेकिन भगवान की दया से कोई वार्षिकोत्सव समारोह में कोई अप्रिय घटना घटित नही हुई थी । बच्चों और अभिभावकों के जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले सन राइज स्कूल पर कार्रवाई की मांग की गई थी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     सन राइज स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने भीड़ बढ़ाने के लिए व बस्ती वासियों को गुमराह करने के लिए अनुराग मिश्रा लखनऊ जादूगर को वार्षिकोत्सव समारोह में बुलाया था । सन राइज स्कूल में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम कम हुआ था लेकिन जादूगरी ज्यादा हुआ था जिसको लेकर जिले में चर्चा में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही थी कि सन राइज स्कूल में वार्षिकोत्सव समारोह में बच्चों का कार्यक्रम कम क्यों हुआ अर्थात् या तो स्कूल बच्चें स्कूल में कम है या सन राइज स्कूल में पढ़ने वाले छात्र - छात्राएं योग्य नहीं थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया पड़ताल में सन राइज स्कूल के कारनामों की पोल खुल गई थी और अपने कारनामों को छुपाने के लिए सन राइज स्कूल ने उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया था लेकिन नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने सन राइज स्कूल के लापरवाही मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए तत्काल नोटिस जारी कर दिया था । निर्धारित समय सीमा में नोटिस का जबाव सन्तोष जनक न मिलने पर सन राइज स्कूल के कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त प्रकरण में खण्ड शिक्षा अधिकारी ने फोन के माध्यम से बताया कि सन राइज स्कूल द्वारा अभी तक पूर्व में जारी नोटिस का जबाव नहीं दिया गया है पुनः नोटिस जारी की जा रही है । सन राइज स्कूल के द्वारा जारी नोटिस का जबाव देने के बाद ही अग्रिम कार्यवाही की जायेगी लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद सन राइज स्कूल के खिलाफ कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में चयनित अभ्यर्थियों को डीएम ने दिया नियुक्ति पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178941/dm-gave-appointment-letters-to-the-candidates-selected-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0020.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>जनपद के उच्चीकृत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में प्रधानाचार्या एवं पीजीटी विभिन्न विषयों के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को सोमवार को जिलाधिकारी कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने चयनित 21 अभ्यर्थियों में से उपस्थित 09 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षक समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की स्थापना दूरस्थ एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने नवचयनित शिक्षकों से पूर्ण समर्पण, अनुशासन एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि वे छात्राओं के सर्वांगीण विकास, नैतिक शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार करना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में उत्साह देखा गया। नवचयनित शिक्षकों ने भी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चयन प्रक्रिया एवं विद्यालयों की कार्यप्रणाली से संबंधित जानकारी दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) कुंवर वीरेंद्र मौर्य, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) विजय नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
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</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt">
<div class="hp"> </div>
<div class="eqJbab cZD3Qb"></div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:57:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ड्रमंडगंज कंपोजिट विद्यालय में बच्चे रहते हैं कम हाजिरी भरा जाता है ज्यादा मात्रा में। </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हलिया मीरजापुर।</strong> ड्रमंडगंज कंपोजिट विद्यालय में बच्चे आते हैं कम हाजीरी भरा जाता है ज्यादा एमडीएम में चल रहा है गोल मटोल का खेल प्रतिदिन  ज्यादा मात्रा में भरा जाता है हाजिरी अधिकारियों के जांच में भी कई बार पकड़े गए हैं प्रधानाध्यापक आए दिन एमडीएम में होता रहता है गोल मटोल साथी साथ ग्रामीणों ने बताया कि यह काम काफी दिन से विद्यालय में चल रहा है यहां तक की बच्चों को सही तरीके से नहीं मिल पाता है भोजन बच्चे कम आते हैं हाजी ज्यादा भर के सिर्फ अपना पेट भरते हैं</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाध्यापक जांच के बाद भी प्रधानाध्यापक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178465/in-drummondganj-composite-school-children-remain-in-low-attendance-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/education.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हलिया मीरजापुर।</strong> ड्रमंडगंज कंपोजिट विद्यालय में बच्चे आते हैं कम हाजीरी भरा जाता है ज्यादा एमडीएम में चल रहा है गोल मटोल का खेल प्रतिदिन  ज्यादा मात्रा में भरा जाता है हाजिरी अधिकारियों के जांच में भी कई बार पकड़े गए हैं प्रधानाध्यापक आए दिन एमडीएम में होता रहता है गोल मटोल साथी साथ ग्रामीणों ने बताया कि यह काम काफी दिन से विद्यालय में चल रहा है यहां तक की बच्चों को सही तरीके से नहीं मिल पाता है भोजन बच्चे कम आते हैं हाजी ज्यादा भर के सिर्फ अपना पेट भरते हैं</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानाध्यापक जांच के बाद भी प्रधानाध्यापक के ऊपर नहीं होता करवाई ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए बताया कि आए दिन अधिकारी विद्यालय का करते रहते हैं जांच जांच करके चले जाते हैं नहीं करते हैं अध्यापक के ऊपर कोई कार्रवाई कई एक बार ग्रामीणों ने शिकायत भी किया लेकिन नहीं हुआ प्रधानाध्यापक के ऊपर कारवाई ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी के द्वारा मौके का किया गया स्थलीय निरीक्षण स्थल निरीक्षण में भी विद्यालय में बच्चे मिले कम हाजिरी भरा गया था ज्यादा चल रहा है विद्यालय में रामराज कौन है इसका जिम्मेदार ग्रामीणों ने कहा कि यह देखना है कि कब तक चलता रहेगा रामराज कभी ना कभी रामराज का होगा पर्दाफाश</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 18:57:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मानदेय वृद्धि पर शिक्षा मित्रों का भव्य सम्मान समारोह</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178255/grand-felicitation-ceremony-of-shiksha-mitras-on-honorarium-increase"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260505-wa0013-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> शिक्षा मित्रों का मानदेय रुपये 10,000 से बढ़ाकर रुपये 18,000 किए जाने के उपलक्ष्य में मंगलवार को विकास भवन स्थित पंचायत सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने शिक्षा मित्रों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, विधायक औराई दीनानाथ भास्कर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। वहीं जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गान व सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर समारोह को आकर्षक बनाया। इस दौरान मुख्यमंत्री के गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा मित्रों का योगदान शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है और नामांकन व शैक्षिक गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा मित्रों के समर्पण से प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत हो रही है और सरकार शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार कर रही है और शिक्षा मित्रों का सम्मान व हित सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रत्येक विकास खंड से चयनित शिक्षा मित्रों को सम्मानित किया गया। लगभग 400 शिक्षा मित्रों की उपस्थिति में आयोजित समारोह का समापन शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 21:20:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आइसा सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन संपन्न, 17 सदस्यीय कमेटी का गठन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178043/second-district-conference-of-aisa-supaul-concludes-formation-of-17"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/b1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सुपौल/त्रिवेणीगंज -: </strong>ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) सुपौल का दूसरा जिला सम्मेलन रविवार को त्रिवेणीगंज स्थित अनुपलाल यादव महाविद्यालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में जिले भर से बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि वर्तमान दौर में देश के छात्र-युवा शिक्षा, रोजगार, लैंगिक एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार की राज्य सरकार शिक्षा को अधिकार के बजाय मुनाफे का साधन बना रही हैं, जिससे गरीब और मेहनतकश तबके के छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने से शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। साथ ही सरकारी स्कूलों के बंद होने, पेपर लीक की घटनाओं और शैक्षणिक संस्थानों में अव्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में बढ़ती समस्याओं और छात्रों के बीच बढ़ते तनाव को भी गंभीर मुद्दा बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि रोहित वेमुला प्रकरण के बाद यूजीसी द्वारा लाए गए समता संबंधी प्रावधानों को लागू कराने की जरूरत है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की। उन्होंने इन प्रावधानों को लागू करने के लिए छात्र आंदोलन को तेज करने का आह्वान किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में 17 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया। इसमें संतोष कुमार सियोटा को जिला सचिव तथा रामाशीष को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वहीं सुनील कुमार सरदार, अंकू आनंद और अभिनव आनंद को जिला उपाध्यक्ष, शशिकांत कुमार एवं अभिनंदन कुमार को संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।<br />सम्मेलन में माले जिला सचिव जयनारायण यादव, पूर्व आइसा सचिव डॉ. अमित कुमार चौधरी, पिपरा विधानसभा से महागठबंधन प्रत्याशी अनिल कुमार, खेगरामस जिला सचिव जन्मजेय राय, मुलेश कुमार शर्मा, मो. अब्दुल सहित सैकड़ों छात्र-युवा उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सम्मेलन के अंत में संगठन को और मजबूत बनाने तथा छात्र-हितों के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178043/second-district-conference-of-aisa-supaul-concludes-formation-of-17</link>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:59:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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