<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/84792/education-system" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>शिक्षा व्यवस्था - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/84792/rss</link>
                <description>शिक्षा व्यवस्था RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नौ लाख रूपये की लागत से गांधी आदर्श इंटर कॉलेज के खेल मैदान में बनेगा शौचालय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>गांधी आदर्श इंटर कॉलेज के खेल मैदान में विद्यार्थियों एवं कार्यक्रमों में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वीकृत नौ लाख रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्य का शुक्रवार को नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी ने विधिवत भूमि पूजन कर शुभारंभ किया। विदित हो स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष ने खेल मैदान में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए शौचालय निर्माण कराने की घोषणा की थी। इसी क्रम में शुक्रवार को पूजा-अर्चना के साथ निर्माण कार्य शुरू कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186043/toilet-will-be-built-in-the-playground-of-gandhi-adarsh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1787322642049.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>गांधी आदर्श इंटर कॉलेज के खेल मैदान में विद्यार्थियों एवं कार्यक्रमों में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए शौचालय का निर्माण कराया जाएगा। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत स्वीकृत नौ लाख रुपये की लागत से होने वाले निर्माण कार्य का शुक्रवार को नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी ने विधिवत भूमि पूजन कर शुभारंभ किया। विदित हो स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष ने खेल मैदान में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए शौचालय निर्माण कराने की घोषणा की थी। इसी क्रम में शुक्रवार को पूजा-अर्चना के साथ निर्माण कार्य शुरू कराया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरी ने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर पंचायत की प्राथमिकता है। खेल मैदान में शौचालय का निर्माण होने से विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ ही यहां आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों को भी सुविधा मिलेगी। इस अवसर पर गांधी आदर्श इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजय कुमार वर्मा, सिद्धार्थ शंकर पाठक, रवि अग्रहरी, युवा नेता अनिल अग्रहरी, मनोनीत सभासद रामधनी मौर्य, ध्रुव चतुर्वेदी, राजेश्वर सिंह, रामराज कन्नौजिया, अभिषेक यादव, बृजेश अग्रहरी, बरकत अली समेत विद्यालय के शिक्षक, नगर पंचायत कर्मचारी एवं नगरवासी मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186043/toilet-will-be-built-in-the-playground-of-gandhi-adarsh</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186043/toilet-will-be-built-in-the-playground-of-gandhi-adarsh</guid>
                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 21:58:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1787322642049.jpg"                         length="149179"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा सरकार प्रदेश के लिए संकट, सत्ता परिवर्तन से ही होगा समाधान : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184537/crisis-for-bjp-government-in-the-state-will-be-solved"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/whatsapp-image-2026-08-02-at-19.00.11.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश के लिए संकट बन चुकी है और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदेश की समस्याओं का समाधान संभव होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों, युवाओं और बेटियों के साथ अन्याय किया है तथा आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस के माध्यम से बर्बर कार्रवाई कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार और उसके मंत्रियों ने आंदोलनकारी छात्रों के साथ समझौता कर यह आश्वासन दिया था कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा और न ही उनका उत्पीड़न होगा। लेकिन अब छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि सरकार अपने वादों पर कायम नहीं रहती तो जनता का विश्वास कमजोर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फतेहपुर की घटना का उल्लेख करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि वहां विद्यालय के बच्चों ने केवल पीने के पानी और कक्षाओं में पंखे लगाने जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की थी। जब उनकी मांग स्वीकार कर ली गई, तब बच्चों और उनके परिवारों को परेशान करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने घोषणा की कि समाजवादी पार्टी के विधायक प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से मिलकर हर संभव सहायता प्रदान करेंगे तथा किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने का दावा करने वाली सरकार को पहले सरकारी विद्यालयों में बिजली, पानी, पंखे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका कहना था कि विकास के बड़े दावों के बीच शिक्षा व्यवस्था की आधारभूत जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले के कई महत्वपूर्ण सरकारी तालाबों और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमाफियाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रदेश में बने विभिन्न एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इनके निर्माण में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। उनका कहना था कि कई परियोजनाओं में निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं और कुछ स्थानों पर सड़कें उद्घाटन के कुछ समय बाद ही क्षतिग्रस्त हो गईं। उन्होंने इसे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता की कमी का उदाहरण बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने अयोध्या से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों में भी पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने दिल्ली में छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी नसीहत देते हुए कहा कि वे निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उनके अनुसार सरकारें बदलती रहती हैं, इसलिए अधिकारियों को किसी राजनीतिक दबाव में आकर कार्य नहीं करना चाहिए और कानून के अनुसार निष्पक्ष निर्णय लेने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">पेपर लीक के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि युवाओं का भविष्य लगातार प्रभावित हो रहा है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">एक प्रश्न के उत्तर में अखिलेश यादव ने कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के कार्यकाल में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को 'यश भारती सम्मान' प्रदान किया जाता था और भविष्य में भी प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की परंपरा जारी रखी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की समस्याओं का समाधान, पारदर्शी शासन, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, युवाओं को रोजगार और कानून का निष्पक्ष पालन सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी प्रदेश के लोगों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और जनहित के प्रश्नों पर संघर्ष जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184537/crisis-for-bjp-government-in-the-state-will-be-solved</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184537/crisis-for-bjp-government-in-the-state-will-be-solved</guid>
                <pubDate>Sun, 02 Aug 2026 19:13:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/whatsapp-image-2026-08-02-at-19.00.11.jpeg"                         length="107310"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[अजय यादव]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को किया बर्बाद: अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से दूर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 22 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को विलय (मर्जर) और अन्य कारणों का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184399/bjp-government-ruined-the-education-system-akhilesh-yadav"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-22.00.02.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>अजय यादव -लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है, जिससे छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से दूर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में 22 हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को विलय (मर्जर) और अन्य कारणों का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के मंदिरों की बदहाली के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा अध्यक्ष ने कहा कि जहां से बच्चों की शिक्षा की शुरुआत होती है, भाजपा सरकार वहीं से व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कई विद्यालयों के भवन जर्जर स्थिति में हैं, कहीं बिजली और पंखों की समस्या है तो कहीं बारिश के दौरान छतों से पानी टपकने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार के एजेंडे में शिक्षा और रोजगार कभी प्राथमिकता नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है और छात्र-नौजवान अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देशभर के छात्र भाजपा की शिक्षा नीतियों से नाराज हैं और आने वाले समय में युवा इसका जवाब देंगे। अखिलेश यादव ने भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने नए स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाने के बजाय पुराने संस्थानों को कमजोर किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा अध्यक्ष ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इसे तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि विश्वविद्यालयों को नुकसान पहुंचाने वाले कभी समाज के हितैषी नहीं रहे। उन्होंने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा और मजबूती की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184399/bjp-government-ruined-the-education-system-akhilesh-yadav</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184399/bjp-government-ruined-the-education-system-akhilesh-yadav</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:04:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/whatsapp-image-2026-07-31-at-22.00.02.jpeg"                         length="84631"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिर्फ कठोर कानून बनाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परीक्षा पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान तकनीकी सुधार, सख्त कानूनी कार्रवाई, प्रशासनिक पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण के समन्वय से ही संभव है। भारत सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करके दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए हैं, लेकिन केवल कानून ही इसका अंतिम इलाज नहीं है।क्या सिर्फ सख्त कानून या सख्त सजा का प्रावधान करने से कोई अपराध रूक सका? बलात्कार हत्या के लिए मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान होने के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/images3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">परीक्षा पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान तकनीकी सुधार, सख्त कानूनी कार्रवाई, प्रशासनिक पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण के समन्वय से ही संभव है। भारत सरकार ने हाल ही में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करके दोषियों के लिए 10 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान किए हैं, लेकिन केवल कानून ही इसका अंतिम इलाज नहीं है।क्या सिर्फ सख्त कानून या सख्त सजा का प्रावधान करने से कोई अपराध रूक सका? बलात्कार हत्या के लिए मृत्यु दंड की सजा का प्रावधान होने के बावजूद इन वारदातों पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका! अंधी व्यवस्था ने उस आरोपी धनंजय को फांसी दी जिस के अपराध को अंजाम देने के खिलाफ पचास संदेह मौजूद हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">निर्भया जैसी वारदातों को सख्त कानून बनाने के बावजूद नहीं रोका जा सका। फिर परीक्षा लीक को कानून बना कर रोका जा सकेगा? विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से मोदी सरकार का महत्वपूर्ण विधेयक जो एंटी पेपरलीक को लेकर कानून को सख्त बनाये जाने से सम्बन्धित है ध्वनिमत से पास हो गया है। अब राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया जायेगा। वहां भी पास हो ही जायेगा। सरकार का कहना है कि एंटी पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने के उद्देश्य से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 लाया गया है। जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इस संशोधित कानून में दोषियों के खिलाफ पहले से अधिक कठोर दंड, आर्थिक जुर्माना और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाएगा और लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करेगा।आपको पता है कि नीट के पेपर लीक को लेकर जिस प्रकार से देश भर में युवाओं छात्रों में माहौल बना  सरकार ने पैदा आक्रोश को दबाने के लिए फौरी उपचार बतौर इस विधेयक को ऐसे समय ड्राफ्ट किया है। तब जबकि जंतर-मंतर पर  छात्र आंदोलित थे और वे केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">छात्रों, युवाओं के प्रदर्शन व मांगों के बीच धर्मेन्द्र प्रधान का शिक्षामंत्री के पद से इस्तीफा तो हो गया। लेकिन पेपरलीक, परीक्षाओं में अनियमितता शिक्षा व्यवस्था सिर्फ न तो इस्तीफे से रूकने वाली है और नही उसको लेकर बनाये गए सख्त कानूनों से ही रूकेगा। देश में कानून तो बहुत से हैं। वह चाहे चोरी, छेड़छाड़ का हो, भ्रष्टाचार, रिश्वत लेने-देने, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा का या हत्या का, खाद्य पदार्थों में मिलावट का हो या नकली दवाएं बेचे जाने का। कानून की कोई कमी इस देश में नहीं हैं। सवाल यह है कि इतने कानूनों के बावजूद व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं हो पा रहा है। क्योंकि यह कतई नहीं माना जा सकता है कि उसी व्यवस्था में शामिल लोगों के बिना पेपरलीक हो सकता है या परीक्षा में अनियमितता हो सकती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जहां तक शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली का प्रश्न है, पेपरलीक और परीक्षा में अनियमितता सिर्फ इन कारणों से नहीं होती है कि इन अपराधों के लिए दंडित करने के लिए कोई कानून नहीं है। यह तो व्यवस्था की विसंगतियों और कुछ लोगों के गठजोड़ से अत्यधिक मुनाफा कमाने और कुछ लोगों को अनुचित लाभ दिलाने से जुड़े प्रश्न हैं। यदि कुछ वर्षों में देश में कोचिंग संस्थानों का व्यापार तेजी से बढ़ा है। क्या इसके बारे में भी सरकार ने कभी सोचा है कि आखिर वे कौन से कारण हैं कि देश में शिक्षा की व्यवस्था दिनों दिन गिरती जा रही है। निजी संस्थानों की बाढ़ आ रही है। सरकारी संस्थान डूब रहे हैं। सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं, उनमें शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं है, संसाधन विहीन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> क्या कारण है कि कोचिंग संस्थान फल-फूल रहे हैं और स्कूल कालेजों में हो रही पढ़ाई उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुकूल नहीं बना पाती है और छात्र अपनी रेगुलर पढ़ाईछोड़कर कोचिंग संस्थाओं में भारी भरकम फीस जमा करके प्रवेश लेते हैं और तैयारी करते हैं। मां बाप और अभिभावक भी बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं। इसी प्रकार प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में भी जब पेपरलीक होता है तो उन छात्रों और युवाओं की पीड़ा देखी जा सकती है जो बड़ी उम्मीदों से तैयारी करते हुए परीक्षाएं देते हैं लेकिन उनका परिणाम नहीं आता है। पेपरलीक होने की वजह से परीक्षा कैसिल हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> दोबारा जब करायी जाती है तब तक बहुत समय गुजर चुका होता है। धन भी जाता है और बहुत बार आयु भी निकल चुकी होती है। यही कारण है कि जंतर-मंतर पर जो आक्रोश उभर कर सामने आया वह सिर्फ नीट परीक्षा तक सीमित नहीं था और न ही सिर्फ नीट दिए हुए या उससे प्रभावित लोग ही जुटे। यह पूरी व्यवस्था में घुले भ्रष्टाचार का परिणाम था जो वर्षों से धीरे-धीरे सुलग रहा था और जंतर-मंतर पर आकर फूट पड़ा था। सरकार को चाहिए कि शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और सर्वसुलभ ही न बनाये बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार पर नकेल डाले जो सिर्फ कानून से नहीं हो सकता है। सवाल तो यह भी है कि आखिर सरकार शिक्षा के लिए बजट में वृद्धि क्यों नहीं करती है कि इसके लिए सरकार के तौर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ करायी जा सके। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करना होगा। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पेपर लीक को रोकने के लिए  प्रमुख रणनीतियों को लागू किया जाना आवश्यक है इसके तहत सबसे पहला कदम आधुनिक तकनीक का उपयोग डिजिटल प्रश्न पत्र वितरण: पेपर को छापने और गाड़ियों में ले जाने के बजाय, परीक्षा से ठीक आधा घंटा पहले केंद्रों पर एन्क्रिप्टेड डिजिटल फाइल भेजी जाए।ब्लॉकचेन और एडवांस एन्क्रिप्शन: प्रश्न पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाए जिससे डिजिटल फाइल में किसी भी छेड़छाड़ का तुरंत पता चल सके। दूसरा कदम एआई  निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  आधारित कैमरों से रियल-टाइम निगरानी की जाए ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।डिजिटल ऑडिट ट्रेल: प्रश्न पत्र को कब, किसने और कहाँ से एक्सेस किया, इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड (लॉग) रखा जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तीसरा कदम प्रशासनिक एवं परीक्षा संचालन में सुधार चरणबद्ध ऑनलाइन परीक्षाएं : बड़ी परीक्षाओं (जैसे नीट या बड़ी भर्ती परीक्षाएं) को एक ही दिन कराने के बजाय जेईई मेन्स  की तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट के माध्यम से कई सत्रों  में आयोजित किया जाए।सुरक्षित प्रिंटिंग कमांड: परीक्षा केंद्रों पर ही हाई-स्पीड बायोमेट्रिक प्रिंटर लगे हों और परीक्षा से कुछ मिनट पहले 'ऑन-डिमांड' प्रिंट कमांड देकर पेपर निकाला जाए।विश्वसनीय पेपर सेटर्स (इंटरनल सिक्योरिटी): आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामाकोटी (पीएम टास्क फोर्स एक्सपर्ट) के अनुसार, लीक अक्सर 'सोर्स' (पेपर बनाने वालों) से ही हो जाता है। इसलिए, प्रश्न पत्र बनाने वाले और उसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की कड़ी पृष्ठभूमि जांच और गोपनीयता अनिवार्य होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">चौथा कदम सख्त कानूनी और संस्थागत उपाय त्वरित अदालतें और स्पेशल टास्क फोर्स: पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स  का गठन हो और फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए दोषियों को तुरंत सजा मिले।सर्विस प्रोवाइडर्स पर शिकंजा: परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी कंपनियों और परीक्षा केंद्रों को गड़बड़ी पाए जाने पर हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए और उनकी संपत्ति जब्त की जाए। योग्यता-आधारित रोजगार व्यवस्था डिग्री के बजाय स्किल टेस्ट: यदि सरकारी और निजी नौकरियों में भर्ती का आधार केवल एक लिखित परीक्षा या डिग्री न होकर व्यावहारिक योग्यता, कौशल परीक्षण  और प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो हो, तो एकल परीक्षा का दबाव और उसमें धोखाधड़ी करने की होड़ अपने आप कम हो जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184327/just-making-strict-laws-is-not-the-solution-to-any</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 22:19:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/images3.jpg"                         length="59697"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/akhilesh-yadav.jpg"                         length="82153"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक: 'भरोसा' कब लीक होना बंद होगा?</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi">  घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi">  लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi">  हजार अभ्यर्थियों का</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/education.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में पेपर लीक की समस्या एक बड़ा रुप ले चुकी है और इस पर राजनीति भी बहुत हो रही है। लेकिन लेकिन अभी तक लीक प्रूफ परीक्षा का हमें ऐहसास नहीं हो पा रहा है। नीट का पेपर जब लीक हुआ तो उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इसी के बाद महाराष्ट्र में टैट का पेपर लीक हो गया और राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा </span>MAHA TET <span lang="hi" xml:lang="hi">से ठीक </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे पहले पेपर लीक हो गया। नतीजा: </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार अभ्यर्थियों का भविष्य फिर से लटका दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये कोई पहली बार नहीं है। सवाल वही है: आखिर पेपर लीक से छुटकारा कब मिलेगा</span>? 27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की सुबह का </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भिवंडी में छापा- </span>27<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को सुबह </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे भिवंडी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">का पेपर बेचा जा रहा है। छापेमारी में संदिग्धों के पास से जो प्रश्नपत्र मिले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो असली </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर से हूबहू मैच कर रहे थे। परीक्षा रद्द-  महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">ने तुरंत </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा स्थगित कर दी। नई तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गिरफ्तारियां- भिवंडी पुलिस ने कम से कम </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को हिरासत में लिया है और केस दर्ज कर जांच शुरू की है। ये पहली बार नहीं: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बार-बार लीक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की कहानी-  महाराष्ट्र में </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक अब आदत बन चुका है। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> कोल्हापुर में  </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> नवंबर की परीक्षा से पहले </span>18<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोग गिरफ्तार। गिरोह </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये में पेपर बेच रहा था। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> ठाणे/भिवंडी में </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून की परीक्षा से </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन पहले पेपर लीक। </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में कोल्हापुर केस के बाद भी परिषद ने कहा था कि "पेपर छपाई बेहद गोपनीय होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोषागार में </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे निगरानी रहती है"। फिर भी लीक हो गया। कौन फंस रहा है बीच में</span>? 4<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख शिक्षक अभ्यर्थी। इस बार करीब </span>4.28<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख उम्मीदवार परीक्षा देने वाले थे। इसमें </span>2.26<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख वो शिक्षक भी शामिल थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>TET <span lang="hi" xml:lang="hi">क्वालिफिकेशन के लिए फिर से परीक्षा दे रहे थे। एक अभ्यर्थी का </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल बर्बाद। फीस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तैयारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोचिंग सब गया। और सबसे बड़ा नुकसान: स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती फिर लटकेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लीक होता कैसे है</span>? '<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया का मॉडल</span>'- <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच और पुराने केस देखें तो पैटर्न साफ है। व्हाट्सएप चेन- </span>HSC <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड पेपर लीक में भी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टेक वन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रुप से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एक्सीलेंट ट्यूशन क्लासेस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हुए स्टूडेंट्स तक पेपर पहुंचता था। प्राइवेट कोचिंग का रोल- नागपुर बोर्ड केस में एक प्राइवेट कोचिंग से जुड़े व्यक्ति ने पैसे लेकर पेपर साझा किया था। अंदरूनी सांठगांठ- बिना छपाई वाले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या कोषागार/ट्रांसपोर्ट लेवल पर पेपर निकलना। </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में भी पेपर परीक्षा से </span>20<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट पहले व्हाट्सएप पर भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">                  राजनीति शुरू: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पेपर लीक सरकार</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप- कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा: "पेपर लीक अब अपवाद नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीजेपी सरकार की पहचान बन गया है। ठाणे में ही टैट का पेपर लीक... किसका राजनीतिक संरक्षण है</span>?" <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिर लीक से छुटकारा कब</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">कड़ी सजा का कानून-  </span>NEET <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह महाराष्ट्र में भी </span>'Public Examination Act' <span lang="hi" xml:lang="hi">को दांत वाला बनाना। गिरफ्तार लोग </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">महीने में जमानत पर बाहर न आएं। टेक्नोलॉजी से निगरानी- पेपर को ब्लॉकचेन या एन्क्रिप्टेड </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड से ट्रैक करना। हर हैंडलिंग पर बायोमेट्रिक लॉग। कोचिंग माफिया पर कार्रवाई-  ट्यूशन क्लासेस में छापे और व्हाट्सएप ग्रुप मॉनिटरिंग। पैसे लेकर पेपर बेचने वालों का लाइसेंस रद्द। परिषद की जवाबदेही- हर लीक पर </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">के शीर्ष अधिकारी से स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी तय। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस का मामला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पल्ला झाड़ना बंद। अभ्यर्थियों को मुआवजा-परीक्षा रद्द होने पर फीस वापस + अगली परीक्षा फ्री + ट्रैवल खर्च। ताकि सिस्टम को दर्द हो। </span>NEET, HSC, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>TET... <span lang="hi" xml:lang="hi">हर बार सरकार कहती है "जांच होगी"। पर अभ्यर्थी हर बार नई तारीख का इंतजार करता है। जब तक पेपर लीक करने वाले को नौकरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जेल और </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल का बैन मिलना तय नहीं होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">लाख बच्चों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। क्या महाराष्ट्र को हर परीक्षा के लिए </span>CBI <span lang="hi" xml:lang="hi">जांच चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>MSCE <span lang="hi" xml:lang="hi">खुद को सुधारेगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हर परीक्षा से पहले लीक का डर परीक्षार्थियों को सताने लगा है। और जब वह किसी परीक्षा की तैयारियां करते हैं तो एक सवाल जरूर मन में उठता है कि कहीं परीक्षा लीक न हो जाए। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। कानून को और सख्त बनाना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182229/tet-paper-leak-in-maharashtra-trust-when-will-the-leaking</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:27:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/education.jpg"                         length="144830"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक तरफ चलती रही LDA की कार्यशाला, दूसरी तरफ सील होते रहे कोचिंग संस्थान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182225/on-one-side-lda-workshops-continued-to-operate-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000998054.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक ओर एलडीए द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर शहर में कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई भी लगातार चलती रही। इस कार्रवाई से छात्रों, अभिभावकों और कोचिंग संचालकों के बीच असमंजस, चिंता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। संचालकों का कहना है की ज्यादातर कोचिंग किराए की प्रॉपर्टी में चल रही हैं और जो एलडीए के मानक हैं उन्हें मकान मालिक पूरी करने की जगह कोचिंग वाली जगह खाली करने को बोलने लगे हैं ऐसे में जाएँ तो जाएँ कहाँ ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कम्पार्टमेंट परीक्षाओं में अब मात्र 15 दिन शेष हैं। ऐसे में अनेक विद्यार्थियों का कहना है कि विशेषकर कमजोर छात्र ऑनलाइन माध्यम से गणित, विज्ञान और अन्य जटिल विषयों को प्रभावी ढंग से समझ नहीं पाते। उनका मानना है कि इस समय ऑफलाइन कक्षाओं का बाधित होना उनकी तैयारी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोचिंग संघ का कहना है कि लगातार हो रही कार्रवाई के कारण कई शिक्षक और संस्थान ख़त्म होने की कगार पर हैं उनका दावा है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और कोचिंग संस्थान का करियर पूरी तरह चौपट हो जाएगा । </div>
<div style="text-align:justify;">प्रशासन का पक्ष है कि शहर में संचालित संस्थानों को निर्धारित नियमों और भवन सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक है, और कार्रवाई उन्हीं मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है परंतु उत्तर प्रदेश कोचिंग संघ के अध्यक्ष बादल चोपड़ा का कहना है ऐसे संस्थान जो अत्यंत छोटे हैं और उनके पास आवश्यक उपकरण हैं उन्हें बिना निरीक्षण , नोटिस दिए सील कर देना नियम विरुद्ध है इससे सम्पूर्ण समाज प्रभावित होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182225/on-one-side-lda-workshops-continued-to-operate-on-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/182225/on-one-side-lda-workshops-continued-to-operate-on-the</guid>
                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 21:21:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1000998054.jpg"                         length="110083"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/images-%282%29.jpeg"                         length="31389"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्राम चौपाल कार्यक्रम में ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी दी गई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विकास खण्ड शोहरतगढ़ अन्तर्गत ग्राम पंचायत रमवापुर खास में भी विकास विभाग के पूर्व सूचना के तहत  प्रशासक /प्रधान जफर आलम की अध्यक्षता में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कहा कि ग्राम पंचायत के सभी विद्यालयों में बेंच की व्यवस्था कराई जा चुकी है। स्वास्थ्य,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181631/information-about-the-schemes-was-given-to-the-villagers-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781879943694.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर। </strong>ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा गांव में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को विकास खण्ड शोहरतगढ़ अन्तर्गत ग्राम पंचायत रमवापुर खास में भी विकास विभाग के पूर्व सूचना के तहत  प्रशासक /प्रधान जफर आलम की अध्यक्षता में ग्राम चौपाल कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के साथ ही केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कहा कि ग्राम पंचायत के सभी विद्यालयों में बेंच की व्यवस्था कराई जा चुकी है। स्वास्थ्य, शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के विकास से ही ग्राम पंचायत को आदर्श एवं विकसित बनाया जा सकता है। सचिव निशा श्रीवास्तव ने जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 21 दिनों के भीतर आवेदन करने  सहित सरकार की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं को बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान मालती देवी,  सूर्य प्रकाश, कृष्ण मोहन गिरी, शांति देवी, मिथिलेश गिरी, चंद्रप्रभा चौधरी, नंदनी, सरिता, लक्ष्मी देवी, सफाईकर्मी कन्हैया लाल, प्रदीप कुमार, सुखबली, किरन यादव, विजयराम आदि लोग मौजूद रहे।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181631/information-about-the-schemes-was-given-to-the-villagers-in</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181631/information-about-the-schemes-was-given-to-the-villagers-in</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 20:34:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781879943694.jpg"                         length="123212"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोचिंग संस्कृति के शिकंजे में शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में शिक्षा को हमेशा सामाजिक परिवर्तन, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय निर्माण का सबसे प्रभावशाली साधन माना गया है। प्राचीन गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना रहा है जो विवेकशील, नैतिक, संवेदनशील और समाजोपयोगी हो। शिक्षा व्यक्ति को केवल जीविका कमाने की क्षमता नहीं देती, बल्कि जीवन को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दृष्टि भी प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से पिछले तीन दशकों में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के समानांतर विकसित हुई कोचिंग संस्कृति ने शिक्षा के इसी मूल उद्देश्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180134/education-in-the-clutches-of-coaching-culture"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/symbolic_image_1544311335.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय समाज में शिक्षा को हमेशा सामाजिक परिवर्तन, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय निर्माण का सबसे प्रभावशाली साधन माना गया है। प्राचीन गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विश्वविद्यालयों तक शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना रहा है जो विवेकशील, नैतिक, संवेदनशील और समाजोपयोगी हो। शिक्षा व्यक्ति को केवल जीविका कमाने की क्षमता नहीं देती, बल्कि जीवन को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दृष्टि भी प्रदान करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्भाग्य से पिछले तीन दशकों में भारतीय शिक्षा व्यवस्था के समानांतर विकसित हुई कोचिंग संस्कृति ने शिक्षा के इसी मूल उद्देश्य को गंभीर चुनौती दी है। आज स्थिति यह है कि ज्ञान, जिज्ञासा और बौद्धिक विकास की अपेक्षा परीक्षा, अंक, रैंक और चयन को अधिक महत्व दिया जाने लगा है। परिणामस्वरूप शिक्षा का व्यापक मानवीय स्वरूप सिकुड़कर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित होता दिखाई दे रहा है।<br /><br />कोचिंग संस्थानों का उदय अचानक नहीं हुआ। यह हमारी औपचारिक शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों और समाज की बढ़ती आकांक्षाओं का परिणाम था। उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में सीटों की सीमित संख्या, बढ़ती जनसंख्या, तीव्र प्रतिस्पर्धा तथा बेहतर जीवन की इच्छा ने विद्यार्थियों को अतिरिक्त मार्गदर्शन की ओर आकर्षित किया। प्रारंभिक दौर में कोचिंग संस्थान उन छात्रों के लिए सहायक मंच थे जिन्हें किसी विशेष विषय में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती थी। लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था इतनी विस्तृत और प्रभावशाली हो गई कि उसने विद्यालयों और महाविद्यालयों की भूमिका को ही चुनौती देना शुरू कर दिया।<br /><br />आज देश के अनेक शहरों में कोचिंग उद्योग एक विशाल आर्थिक तंत्र का रूप ले चुका है। राजस्थान का कोटा, उत्तर प्रदेश का प्रयागराज, दिल्ली का मुखर्जी नगर, हैदराबाद, पुणे, पटना और कई अन्य शहर शिक्षा से अधिक कोचिंग के लिए पहचाने जाने लगे हैं। हजारों छात्र अपने घरों से दूर जाकर वर्षों तक केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहते हैं। उनके दैनिक जीवन का केंद्र विद्यालय या विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि कोचिंग संस्थान बन जाते हैं। यह परिवर्तन केवल संस्थागत बदलाव नहीं है; यह शिक्षा के चरित्र में आए गहरे परिवर्तन का संकेत है।<br /><br />सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना है? यदि नहीं, तो वर्तमान व्यवस्था किस दिशा में जा रही है? आज अधिकांश विद्यार्थी किसी विषय को उसकी बौद्धिक सुंदरता या व्यावहारिक उपयोगिता के कारण नहीं पढ़ते, बल्कि इसलिए पढ़ते हैं क्योंकि वह परीक्षा के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विज्ञान, गणित, इतिहास, साहित्य और समाजशास्त्र जैसे विषयों का अध्ययन जिज्ञासा से अधिक अंकों के लिए किया जाने लगा है। विद्यार्थियों को यह बताया जाता है कि कौन-सा अध्याय महत्वपूर्ण है, कौन-सा प्रश्न बार-बार पूछा जाता है और किस प्रकार न्यूनतम समय में अधिकतम अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे शिक्षा का उद्देश्य समझ विकसित करने से हटकर परीक्षा प्रबंधन तक सीमित हो जाता है।<br /><br />यह प्रवृत्ति रचनात्मकता और मौलिक चिंतन के लिए भी चुनौती बन रही है। महान वैज्ञानिक, साहित्यकार, दार्शनिक और नवप्रवर्तक केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करके नहीं बने। उनकी सफलता के पीछे स्वतंत्र चिंतन, प्रयोग करने का साहस और असफलता से सीखने की क्षमता थी। लेकिन वर्तमान कोचिंग-केंद्रित वातावरण में विद्यार्थियों को निर्धारित उत्तरों और निश्चित पद्धतियों के भीतर सोचने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे उनके व्यक्तित्व का स्वाभाविक विकास बाधित हो सकता है। वे समस्या का समाधान खोजने के बजाय पहले से तैयार समाधान याद करने लगते हैं।<br /><br />कोचिंग संस्कृति का एक अन्य गंभीर प्रभाव सामाजिक असमानता के रूप में सामने आया है। गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्राप्त करना आज अत्यंत महंगा हो गया है। प्रतिष्ठित संस्थानों की फीस कई परिवारों की वार्षिक आय के बराबर होती है। इसके अतिरिक्त आवास, भोजन, अध्ययन सामग्री और अन्य खर्च अलग से होते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध करा सकते हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्र अनेक बाधाओं का सामना करते हैं। इस प्रकार शिक्षा, जो समान अवसर का माध्यम होनी चाहिए, धीरे-धीरे आर्थिक संसाधनों पर निर्भर होती जा रही है।<br /><br />इस स्थिति का एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है। जब किसी समाज में सफलता की परिभाषा कुछ चुनिंदा परीक्षाओं और संस्थानों तक सीमित हो जाती है, तब लाखों युवाओं पर असामान्य दबाव उत्पन्न होता है। विद्यार्थी कम उम्र में ही यह मानने लगते हैं कि यदि वे किसी विशेष परीक्षा में सफल नहीं हुए तो उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। यह सोच उन्हें निरंतर तनाव, चिंता और भय की स्थिति में रखती है। प्रतिस्पर्धा की यह तीव्रता कई बार मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है।<br /><br />हाल के वर्षों में विद्यार्थियों में तनाव, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी से जुड़ी समस्याओं में वृद्धि देखी गई है। अनेक छात्र अपने परिवार की अपेक्षाओं, सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बीच संतुलन नहीं बना पाते। जब सफलता ही सम्मान का एकमात्र आधार बन जाए और असफलता को सामाजिक कलंक की तरह देखा जाए, तब मानसिक दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। यह स्थिति केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चिंता का विषय है।<br /><br />कोचिंग उद्योग के विस्तार ने शिक्षा के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया है। आज शिक्षा एक बड़े बाजार का रूप लेती दिखाई देती है। आकर्षक विज्ञापन, सफलता की कहानियां, टॉपरों की तस्वीरें, चयन प्रतिशत और रैंकिंग के दावे छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित करते हैं। कई बार शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूट जाता है और विपणन रणनीतियां प्रमुख हो जाती हैं। शिक्षा सेवा से अधिक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत की जाने लगती है। इससे शिक्षा के नैतिक और सामाजिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।<br /><br />प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा अनियमितताओं और चयन प्रक्रियाओं पर उठते सवालों ने भी इस संकट को और गहरा किया है। जब कोई छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करता है और फिर परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है, तो उसका विश्वास टूटता है। शिक्षा व्यवस्था का आधार ही विश्वास और पारदर्शिता है। यदि यह आधार कमजोर पड़ जाए तो प्रतिभा, परिश्रम और ईमानदारी का महत्व कम होने लगता है। इससे पूरे समाज में निराशा और असंतोष का वातावरण बन सकता है।<br /><br />हालांकि कोचिंग संस्थानों की भूमिका को पूरी तरह नकारना भी उचित नहीं होगा। अनेक संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन, उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से छात्रों को लाभ पहुंचाया है। दूरदराज के क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थियों को इन्हीं संस्थानों के माध्यम से बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। कई छात्रों के लिए कोचिंग वास्तव में सफलता का माध्यम बनी है। इसलिए समस्या कोचिंग के अस्तित्व में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस निर्भरता में है जहां कोचिंग अनिवार्य प्रतीत होने लगी है।<br /><br />यदि विद्यालयों और महाविद्यालयों की शिक्षा पर्याप्त प्रभावी हो, तो अतिरिक्त कोचिंग की आवश्यकता सीमित रह सकती है। दुर्भाग्य से अनेक विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और शिक्षकों की संख्या जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। कई स्थानों पर छात्रों को मूलभूत अवधारणाएं भी पर्याप्त रूप से नहीं सिखाई जातीं। ऐसी स्थिति में कोचिंग संस्थान उस रिक्त स्थान को भरने का प्रयास करते हैं जिसे औपचारिक शिक्षा व्यवस्था भरने में असफल रही है।<br /><br />समाधान केवल कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण लगाने से नहीं निकलेगा। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं। सबसे पहले विद्यालयी शिक्षा को इतना मजबूत बनाना होगा कि छात्र को बुनियादी ज्ञान और अवधारणाओं के लिए बाहरी सहायता पर निर्भर न रहना पड़े। शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम पर विशेष ध्यान देना होगा।<br /><br />साथ ही परीक्षा प्रणाली में भी परिवर्तन आवश्यक है। वर्तमान व्यवस्था अक्सर रटने की क्षमता और सीमित प्रकार के प्रश्नों पर आधारित होती है। यदि परीक्षाएं विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान, सृजनात्मकता और व्यावहारिक समझ का मूल्यांकन करें, तो कोचिंग आधारित तैयारी का प्रभाव स्वतः कम हो सकता है। शिक्षा का मूल्यांकन केवल अंक देने की प्रक्रिया नहीं होना चाहिए; उसे छात्र की वास्तविक क्षमता को पहचानने का माध्यम बनना चाहिए।<br /><br />राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भी बहुआयामी शिक्षा, कौशल विकास और समग्र मूल्यांकन पर जोर दिया है। यदि इन सिद्धांतों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तो शिक्षा का स्वरूप अधिक संतुलित और व्यापक बन सकता है। विद्यार्थियों को केवल डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक अधिकारी बनने की दिशा में नहीं, बल्कि विविध प्रतिभाओं और रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए।<br /><br />अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर माता-पिता सामाजिक प्रतिष्ठा या भविष्य की चिंता के कारण बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाएं थोप देते हैं। उन्हें यह समझना होगा कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता, रुचि और व्यक्तित्व अलग होता है। सफलता का अर्थ केवल किसी प्रतिष्ठित परीक्षा में चयन नहीं है। एक अच्छा शिक्षक, वैज्ञानिक, कलाकार, लेखक, उद्यमी या सामाजिक कार्यकर्ता भी उतना ही महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है जितना किसी अन्य पेशे का व्यक्ति।<br /><br />समाज को भी सफलता की अपनी परिभाषा पर पुनर्विचार करना होगा। यदि हम केवल अंकों और रैंक के आधार पर व्यक्तियों का मूल्यांकन करेंगे, तो शिक्षा का मानवीय पक्ष कमजोर पड़ता जाएगा। हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहां सीखने, प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और असफलताओं से सीखने को प्रोत्साहन मिले।<br /><br />अंततः कोचिंग संस्कृति का प्रश्न केवल शिक्षा व्यवस्था का प्रश्न नहीं है; यह उस समाज की दिशा का प्रश्न है जिसे हम भविष्य में निर्मित करना चाहते हैं। यदि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता रह जाएगा, तो हम कुशल परीक्षार्थी तो तैयार कर सकते हैं, लेकिन विचारशील नागरिक नहीं। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके विश्वविद्यालयों, विद्यालयों और युवाओं की जिज्ञासा में निहित होती है, न कि केवल उसकी परीक्षा प्रणालियों में।<br /><br />आज आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा को फिर से ज्ञान, विवेक, सृजनशीलता और मानवीय मूल्यों से जोड़ा जाए। कोचिंग संस्कृति की उपयोगिता अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उसे शिक्षा का विकल्प नहीं बनने दिया जा सकता। जब विद्यालय सीखने का केंद्र बनेंगे, परीक्षाएं समझ का मूल्यांकन करेंगी और समाज सफलता को व्यापक दृष्टि से देखेगा, तभी शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सकेगी। यही वह मार्ग है जो भारत को केवल प्रतिभाशाली युवाओं का नहीं, बल्कि विचारशील, नवाचारी और संवेदनशील नागरिकों का राष्ट्र बना सकता है।<br /><br /><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180134/education-in-the-clutches-of-coaching-culture</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/180134/education-in-the-clutches-of-coaching-culture</guid>
                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:26:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/symbolic_image_1544311335.webp"                         length="69852"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'आपदाओं का विभाग बन गया है शिक्षा मंत्रालय'- राहुल गांधी ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179532/ministry-of-education-has-become-the-department-of-disasters"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download4.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा हमला किया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से छात्रों को होने वाली परेशानी को लेकर राहुल गांधी ने हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय अब आपदा विभाग बन गया है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, 'पहले NEET पेपर लीक, जिससे 22 लाख छात्र प्रभावित हुए. फिर CBSE के 12वीं के छात्रों को एक खराब OSM सिस्टम के कारण उम्मीद से कम नंबर मिले, जिससे कई छात्रों को कॉलेज में दाखिला नहीं मिलेगा. अब CBSE 9वीं के लाखों छात्रों से अचनाक 1 जुलाई से एक नई भाषा सीखने को कह रहा है, जबकि न तो कोई शिक्षक हैं और न ही किताबें.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि 14 साल के बच्चों को 'अस्थायी' समाधान के तौर पर 6वीं क्लास की किताबें थमा दी गईं. राहुल ने कहा, 'तीन एग्जाम. तीन आयु वर्ग. एक मंत्री. धर्मेंद्र प्रधान जी सिर्फ एक बार फेल नहीं हुए हैं. वे भारत के छात्रों के हर आयु वर्ग को एक साथ फेल कर चुके हैं. हर घोषणा छात्रों को अनिश्चितता के गहरे भंवर में धकेल देती है.'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राहुल ने कहा कि हर बार कोई सजा नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि 'शिक्षा मंत्रालय अब आपदाओं का विभाग बन गया है.'</div>
<div style="text-align:justify;">इससे पहले शनिवार को भी राहुल गांधी ने X पर एक पोस्ट कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करते हुए कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान जी को इस्तीफा देने को कहें और जो दोषी हैं, उन्हें पकड़कर जेल में डाला जाए.।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179532/ministry-of-education-has-become-the-department-of-disasters</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179532/ministry-of-education-has-become-the-department-of-disasters</guid>
                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:41:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/download4.jpg"                         length="16533"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीट पेपर लीक के नौ गुनहगार: सिस्टम के अंदर से हुआ खेला, स्पेशल क्लास से लेकर करोड़ों के सौदे ।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179528/nine-culprits-of-neet-paper-leak-played-from-inside-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download3.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी नीट यूजी 2026 परीक्षा में एक बार फिर वही हुआ जिसका डर था-पेपर लीक। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक नौ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ जैसे-जैसे इस नेटवर्क के सिंडिकेट तक पहुंच रहे हैं, एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आ रहा है। सच यह कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा में बाहर से किसी ने सेंध नहीं लगाई, बल्कि सिस्टम के रखवालों ने ही अंदर से दरवाजे खोल दिए थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की तफ्तीश के केंद्र में दो मुख्य चेहरे हैं, मनीषा गुरुनाथ मंधारे और पीवी कुलकर्णी। मनीषा पुणे की एक सीनियर बॉटनी लेक्चरर हैं और उन्हें इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने उन्हें एक एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। इसी आधिकारिक हैसियत की वजह से प्रश्नपत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। वहीं, पुणे से गिरफ्तार लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी भी लंबे समय से एनटीए की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। इन दोनों ने मिलकर सिस्टम के इसी भरोसे का फायदा उठाया और पेपर को लीक कर दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई के अनुसार, यह खेल अप्रैल के आखिरी हफ्ते में ही शुरू हो चुका था। कुलकर्णी ने अपनी सहयोगी मनीषा वाघमारे के साथ मिलकर ऐसे छात्रों को जोड़ना शुरू किया जो इसके लिए मोटी रकम दे सकें। अब आप सोच रहे होंगे यह दूसरी मनीषा कौन है? मनीषा वाघमारे  पुणे में एक ब्यूटी सैलून चलाती हैं। इसके बाद पुणे में कुलकर्णी के घर पर चुनिंदा छात्रों के लिए एक 'विशेष कोचिंग क्लास' शुरू हुई। यह कोई साधारण क्लास नहीं थी। यहां छात्रों को न तो कोई कॉन्सेप्ट समझाया जा रहा था और न ही कोई थ्योरी पढ़ाई जा रही थी। यहां सीधे नीट परीक्षा के सवाल, उनके विकल्प और सही जवाब बताए जा रहे थे। छात्र चुपचाप इन्हें अपनी कॉपियों में नोट कर रहे थे। जब सीबीआई ने इन छात्रों की नोटबुक्स जब्त कीं, तो जांच अधिकारी भी हैरान रह गए। तीन मई को आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से ये सवाल हूबहू मैच कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ महाराष्ट्र के लातूर में हुआ। वहां एक कोचिंग संस्थान के मॉक टेस्ट में अचानक 42 ऐसे सवाल पूछ लिए गए, जो ठीक दो दिन बाद होने वाली नीट परीक्षा के असली पेपर में आने वाले थे। जब परीक्षा के दिन असली पेपर सामने आया, तो कुछ जागरूक अभिभावकों के कान खड़े हो गए। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की। मामले की गंभीरता और इसके अंतर-राज्यीय कनेक्शन को देखते हुए केस तुरंत सीबीआई को सौंप दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई की जांच में सामने आया है कि यह एक बेहद संगठित सिंडिकेट था। यह नेटवर्क सेमिनार आयोजित करता था और ऐसे छात्रों को ढूंढता था जो पढ़ाई में कमजोर हों लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इस काम के लिए उन्होंने पुराने छात्रों, खासकर इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं को अपना एजेंट बना रखा था। पिछले 24 घंटों में सीबीआई ने देशव्यापी छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए हैं। अब तक जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर से</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> कुल नौ लोगों को दबोचा जा चुका है।</div>
<div style="text-align:justify;">मनीषा गुरुनाथ मंधारे: पुणे की सीनियर बॉटनी लेक्चरर और एनटीए एक्सपर्ट, जिन्हें साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।प्रो. पीवी कुलकर्णी: लातूर के रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर और मुख्य सूत्रधार, जिनकी प्रश्न पत्र पैनल तक पहुंच थी।मनीषा वाघमारे: पुणे की ब्यूटी सैलून मालकिन, जो उम्मीदवारों को जुटाने और सीक्रेट क्लास मैनेज करने में सहयोगी थीं।मांगीलाल बीवाल: जयपुर का निवासी, जिस पर लीक पेपर हासिल करने और उसे आगे बांटने का आरोप है।विकास बीवाल: मांगीलाल का बेटा और मेडिकल छात्र, जिसने इस अवैध काम को अंजाम देने में मदद की।दिनेश बीवाल: मांगीलाल का भाई, जो इस पूरे खेल के वित्तीय लेन-देन को संभाल रहा था।यश यादव: गुरुग्राम का रहने वाला मुख्य बिचौलिया, जिसने लीक प्रश्न पत्र बीवाल परिवार तक पहुंचाया।शुभम खैरनार: नासिक का निवासी, जिस पर सबसे पहले लीक या गेस प्रश्न पत्र को बाजार में फैलाने का शक है।धनंजय लोखंडे: अहिल्यानगर का आयुर्वेद डॉक्टर, जिसे इस मामले में संलिप्तता के बाद हिरासत में लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">सीबीआई अब प्रो कुलकर्णी के पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस सिंडिकेट का हाथ नीट 2024 के पेपर लीक और अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से भी जुड़ा हो सकता है।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179528/nine-culprits-of-neet-paper-leak-played-from-inside-the</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179528/nine-culprits-of-neet-paper-leak-played-from-inside-the</guid>
                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:35:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/download3.jpg"                         length="11498"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        