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                <title>डिजिटल फ्रॉड - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>डिजिटल फ्रॉड RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>18 अगस्त 2026 को साइबर अपराध विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मे माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शमसुल हक के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में 18 अगस्त 2026 को साइबर अपराध विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन जनपद न्यायालय के सभागार में किया गया। जागरूकता कार्यक्रम में साइबर अपराध थाना प्रभारी एवं उसकी टीम की ओर से साइबर अपराध के विभिन्न रूपों एवं उससे बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त जागरूकता कार्यक्रम में अपर जिला जज प्रथम कमलेश कुमार, विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट) राम करन यादव, द्वितीय अपर जिला जज जितेन्द्र गुप्ता, विशेष न्यायिक अधिकारी (पाक्सो एक्ट), अनिल कुमार-XIV, विशेष न्यायाधीश</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185645/organization-of-awareness-program-on-cyber-crime-on-18-august"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20260819-wa00751.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले मे माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शमसुल हक के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में 18 अगस्त 2026 को साइबर अपराध विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन जनपद न्यायालय के सभागार में किया गया। जागरूकता कार्यक्रम में साइबर अपराध थाना प्रभारी एवं उसकी टीम की ओर से साइबर अपराध के विभिन्न रूपों एवं उससे बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त जागरूकता कार्यक्रम में अपर जिला जज प्रथम कमलेश कुमार, विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट) राम करन यादव, द्वितीय अपर जिला जज जितेन्द्र गुप्ता, विशेष न्यायिक अधिकारी (पाक्सो एक्ट), अनिल कुमार-XIV, विशेष न्यायाधीश (ई.सी. एक्ट) प्रमोद कुमार गिरि, अपर जिला जज/एफ.टी.सी. प्रथम विराट शिरोमणी, अपर जिला जज/एफ.टी.सी. द्वितीय मीनाक्षी सोनकर, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश कुमार शुक्ला सहित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवेन्द्र कुमार प्रथम एवं अन्य न्यायिक अधिकारी व कर्मचारीगण एवं सिविल बार के अध्यक्ष रमाकान्त पाण्डेय, महामंत्री राजेश सिंह, पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह एवं महामंत्री मारूत शुक्ला एवं अन्य बार के अध्यक्ष, मंत्री एवं अधिवक्तागण तथा लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल के अधिवक्तागण उपस्थित रहें।</div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 17:48:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>डिजिटल भारत और साइबर अपराध</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184876/digital-india-and-cyber-crime"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/rajeev.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ला </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग से लेकर शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और व्यक्तिगत संवाद तक लगभग हर क्षेत्र इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है। डिजिटल इंडिया अभियान ने करोड़ों लोगों को तकनीक से जोड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का दायरा और जटिलता भी तेजी से बढ़ी है। हर दिन ऑनलाइन ठगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक खाते खाली होने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी निवेश योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल अरेस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहचान की चोरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया हैकिंग और डेटा लीक जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या हमारे कानून और जांच एजेंसियां साइबर अपराधियों की गति के साथ कदम मिला पा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अपराधी कानून से आगे निकल चुके हैं</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल क्रांति ने सुविधाएं बढ़ाई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं। पहले अपराध किसी एक शहर या क्षेत्र तक सीमित होते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब एक व्यक्ति हजारों किलोमीटर दूर बैठकर किसी भी राज्य के नागरिक को कुछ ही मिनटों में अपना शिकार बना सकता है। अपराधी नकली वेबसाइट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी मोबाइल ऐप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एआई आधारित आवाज की नकल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक वीडियो और सोशल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग रहे हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक पता नहीं चलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब तक उसके खाते से लाखों रुपये गायब नहीं हो जाते। भारत में साइबर अपराधों के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम</span>, 2000<span lang="hi" xml:lang="hi"> और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधान डिजिटल अपराधों पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल के वर्षों में सरकार ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हेल्पलाइन </span>1930, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और डिजिटल भुगतान सुरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों से हजारों मामलों में धनराशि फ्रीज कर पीड़ितों को राहत भी मिली है। फिर भी वास्तविक चुनौती यह है कि अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कानून से कहीं अधिक तेज़ी से कर रहे हैं। कानून बनने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में समय लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि साइबर अपराधी कुछ ही दिनों में नए तरीके विकसित कर लेते हैं। एआई ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। आज किसी की आवाज की हूबहू नकल कर फोन किया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी का नकली वीडियो तैयार किया जा सकता है और फर्जी पहचान बनाकर आर्थिक अपराध किए जा सकते हैं। इन परिस्थितियों में पारंपरिक जांच प्रणाली कई बार अपर्याप्त साबित होती है। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध की एक बड़ी समस्या इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति भी है। अनेक गिरोह भारत के बाहर से संचालित होते हैं। उनके सर्वर दूसरे देशों में होते हैं और धन कई देशों के बैंक खातों या क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल साक्ष्य और कानूनी प्रक्रियाएं जांच को लंबा और जटिल बना देती हैं। अपराधी इसी देरी का लाभ उठाते हैं। दूसरी ओर नागरिकों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अपराधियों की सफलता का बड़ा कारण है। आज भी अनेक लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओटीपी साझा कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नकली निवेश योजनाओं के झांसे में आ जाते हैं या सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही आवश्यक डिजिटल साक्षरता भी है। यदि नागरिक सतर्क हों तो बड़ी संख्या में साइबर अपराधों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है। भारत को अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी। सबसे पहले कानूनों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप लगातार अद्यतन करना होगा। एआई आधारित अपराध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीपफेक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा चोरी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों के लिए स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। दूसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और जांच एजेंसियों को आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों से सशक्त बनाना होगा। तीसरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के बीच और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को और तेज़ करना होगा। बैंकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरसंचार कंपनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान कंपनियों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत सत्यापन प्रणाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्जी खातों पर त्वरित कार्रवाई और उपयोगकर्ताओं को समय-समय पर सुरक्षा संबंधी चेतावनी देना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र और सरकार के बीच समन्वय जितना मजबूत होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर अपराध पर नियंत्रण उतना ही प्रभावी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा व्यवस्था में भी डिजिटल सुरक्षा को शामिल करने का समय आ गया है। स्कूलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलेजों और कार्यस्थलों पर साइबर सुरक्षा का बुनियादी प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। जिस प्रकार सड़क सुरक्षा के नियम सिखाए जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा के नियम भी नागरिक जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। डिजिटल भारत की सफलता केवल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने से नहीं मापी जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इस बात से तय होगी कि नागरिक डिजिटल दुनिया में कितने सुरक्षित हैं। यदि कानून</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और समाज मिलकर साइबर अपराध के विरुद्ध मजबूत व्यवस्था विकसित नहीं करते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल प्रगति का लाभ अपराधियों को अधिक मिलेगा और आम नागरिक असुरक्षित महसूस करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि कानून पूरी तरह अपराधियों से पीछे छूट गए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह भी सच है कि साइबर अपराधियों की गति और नवाचार कहीं अधिक तेज़ है। आवश्यकता केवल नए कानून बनाने की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें समय के अनुरूप अद्यतन करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्वरित क्रियान्वयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी क्षमता बढ़ाने और नागरिकों में डिजिटल जागरूकता विकसित करने की है। डिजिटल भारत तभी सशक्त होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उसकी डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही मजबूत होगी। हालांकि भारतीय पुलिस व्यवस्था में अब साईबर फ्राड को लेकर काफी चर्चाएं की जा रही हैं और उनपर क्रियान्वयन भी हो रहा है लेकिन अभी भी हम साईबर अपराधियों की पहुंच से पीछे छूटे जा रहे हैं। हमें इसकी रोकथाम के लिए संसाधन बढ़ाने होंगे ताकि आम आदमी साईबर अपराधियों से निजात पा सके।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Aug 2026 22:31:41 +0530</pubDate>
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                <title>साइबर ठगी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181429/organized-gang-of-cyber-fraud-busted-five-accused-arrested"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0005.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>नई दिल्ली।</strong> दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस के थाना सरिता विहार की टीम ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान "साइ-हॉक 5.0" के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कमीशन के आधार पर साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लगभग 9 लाख रुपये की संदिग्ध साइबर ठगी की रकम की निकासी को रोकने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालने का काम कर रहे थे। इस संबंध में थाना सरिता विहार में एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है जांच में इस गिरोह के तार मुंबई में दर्ज एक बड़े साइबर ठगी मामले से जुड़े पाए गए हैं। मुंबई के एक निजी कंपनी के साथ कथित सीईओ/व्हाट्सएप प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) धोखाधड़ी के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी। यह रकम 3 जून से 15 जून 2026 के बीच 63 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से निकाली गई थी। इस मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच के दक्षिण साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रकरण के तहत की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूरे वित्तीय नेटवर्क में संदिग्ध लेनदेन की राशि 10 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास 22 वंश 2 फैयाज आलम 22 अमित 28 और बलवीर कुमार 23 के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस कार्रवाई को थाना सरिता विहार के प्रभारी निरीक्षक युधवीर सिंह, उपनिरीक्षक वैभव सिंह, उपनिरीक्षक सतीश भाटी, बीसी नितेश, कांस्टेबल ओम प्रकाश और मनीष की टीम ने अंजाम दिया। अभियान का पर्यवेक्षण एसीपी अनिल शर्मा ने किया, जबकि पूरी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-द्वितीय जसबीर सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।</div>
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                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 21:06:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181198/interstate-cyber-gang-committing-fraud-in-the-name-of-digital"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002002752.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> थाना शिवराजपुर पुलिस एवं साइबर क्राइम सेल, कमिश्नरेट कानपुर नगर की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को भयभीत कर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सफल अनावरण करते हुए 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरोह के सदस्य स्वयं को पुलिस, सीबीआई एवं अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी मामलों में गिरफ्तारी का भय दिखाते थे तथा पीड़ितों से धनराशि ठगते थे। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को पी2पी ट्रेडिंग के माध्यम से यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में परिवर्तित किया जाता था। एनसीआरपी एवं प्रतिबिंब पोर्टल के अनुसार गिरोह पिछले लगभग 03 वर्षों से सक्रिय था तथा देशभर में लगभग 2,500 लोगों से 15 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी कर चुका है। ठगी की धनराशि के लेनदेन हेतु 450 से अधिक फर्जी एवं किराए के बैंक खातों का उपयोग किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियुक्तों के कब्जे से 05 मोबाइल फोन, 01 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 02 चेकबुक एवं 12 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। गिरोह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सहित दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश में भी शिकायतें दर्ज हैं। गिरफ्तार अभियुक्त: अशरफ खान, सूरज कुमार, राजन कटियार, राजदीप, भीमरतन कुमार एवं कमल हैं। अभियुक्तों के विरुद्ध बीएनएस की धारा 308(2), 318(4) एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। उल्लेखनीय कार्रवाई के लिए पुलिस टीम को ₹25,000 के नकद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क कोइरौना ने लौटाए 13 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179824/cyber-help-desk-koirauna-returned-rs-13-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260521-wa0021.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही। </strong>पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना कोइरौना ने साइबर फ्रॉड के शिकार युवक के खाते से कटे 13 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ग्राम जुड़उपुर निवासी विशाल कुमार सरोज ने साइबर ठगी की शिकायत थाना कोइरौना में की थी। शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर हेल्प डेस्क ने संबंधित माध्यमों से समन्वय स्थापित कर पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खाते में रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहने और किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:30:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइबर हेल्प डेस्क ने पीड़ित के खाते में वापस कराए 10 हजार रुपये</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना ज्ञानपुर ने साइबर ठगी के शिकार युवक के खाते में 10 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">महरभा निवासी सचिन सिंह से खुद को बैंक अधिकारी बताकर बाइक की बकाया ईएमआई जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी की गई थी। पीड़ित की ऑनलाइन शिकायत पर साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित माध्यमों से समन्वय कर धनराशि वापस कराई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस एवं साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179554/cyber-help-desk-returned-rs-10000-to-the-victims-account"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260519-wa0019.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी के निर्देशन में साइबर हेल्प डेस्क थाना ज्ञानपुर ने साइबर ठगी के शिकार युवक के खाते में 10 हजार रुपये वापस कराए।</div>
<div style="text-align:justify;">महरभा निवासी सचिन सिंह से खुद को बैंक अधिकारी बताकर बाइक की बकाया ईएमआई जमा कराने के नाम पर साइबर ठगी की गई थी। पीड़ित की ऑनलाइन शिकायत पर साइबर हेल्प डेस्क ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित माध्यमों से समन्वय कर धनराशि वापस कराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राशि वापस मिलने पर पीड़ित ने भदोही पुलिस एवं साइबर हेल्प डेस्क का आभार जताया। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने तथा किसी भी फ्रॉड की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 18:53:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक साल बाद पीड़ित को वापस मिले 7500 रुपये, पुलिस की सक्रियता से मिली राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178038/after-one-year-the-victim-got-back-rs-7500-relief"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001516489.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हलिया, मीरजापुर।</strong> थाना क्षेत्र के ग्राम परसिया खुर्द निवासी राजपति के साथ हुए ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में पुलिस ने कार्यवाही करते हुए पीड़ित को उसकी पूरी धनराशि वापस कराया है। एक वर्ष बाद धनराशि मिलते ही पीड़ित के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 03 अप्रैल 2025 को राजपति के साथ 7500 रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई थी। किसी अज्ञात साइबर ठग द्वारा उनके खाते से यह धनराशि निकाल ली गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थाना अध्यक्ष राजीव कुमार श्रीवास्तव के नितृत्व में साईबर सेल में तैनात कास्टेबल विश्वनाथ प्रताप ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संबंधित खातों और लेन देन की पड़ताल की तथा लगातार प्रयास जारी रखा। पुलिस की सक्रियता और सतत प्रयासों के चलते अंत : सफलता हाथ लगी।इस संबंध में थानाध्यक्ष ने बताया कि साइबर अपराधों के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178038/after-one-year-the-victim-got-back-rs-7500-relief</link>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:47:27 +0530</pubDate>
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