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                <title>भ्रष्टाचार जांच - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भ्रष्टाचार जांच RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भ्रष्टाचार छिपाने हेतु जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल नही प्रेषित कर रहे जांच रिपोट </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181627/to-hide-corruption-investigating-officer-arun-kumar-patel-is-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa00982.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले केकप्तानगंज ब्लॉक के नरहरपुर गांव में तालाब खुदाई कार्य में मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आई थी। इस मामले को समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद,जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बस्ती ने कड़ा रुख अपनाया था और खंड विकास अधिकारी कप्तानगंज से स्पष्टीकरण तलब किया था।बीडीओ कप्तानगंज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल को मौके पर भेजकर जांच तो करवा ली, लेकिन एक सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जांच अधिकारीअरुण कुमार पटेल ने अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को नहीं सौंपी है।प्राप्त समाचार के अनुसार बीडीओ कप्तानगंज के मातहत क्रमचारी ग्राम पंचायत नरहरपुर के पानी भरे तालाब में लगी फर्जी हाजिरी की जांच तो कर लिया है । किन्तु एक सप्ताह बाद भी आख्या प्रेषित नही किया गया है।उनका यह रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच आख्या को दबाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए जानबूझकर हीला-हवाली की जा रही है वही जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल के बोल भी बदले-बदले नजर आ रहे हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी अरुण कुमारपटेल ने बताया कि "आख्या नहीं दी जाएगी और कार्य शून्य होगा", जिससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि सुविधा शुल्क के भारी बोझ तले दबे होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी सचिव और रोजगार सेवक पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं ।यह रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि कैसे धरातल पर भ्रष्टाचार की जांच को दबाने के लिए 'सुविधा शुल्क' और प्रशासनिक सांठगांठ का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों को शह मिल रही है । वहीं बीडीओ का सचिव व रोजगार सेवक पर कानूनी कार्रवाई करने को हाथ कांप रहे हैं। सचिव रोजगार सेवक सुनील कुमार तथा प्रधान के द्वारा फर्जी हाजिरी लगाने का आरोप सत्य पाया गया लेकिन आज तक वीडियो द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं किया गया गम्भीर सवाल खड़ा हो रहा है</div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 18:55:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कप्तानगंज में अभी भी बचे रह गए भ्रष्टाचार के गुरुघंटाल , चेले को ले गयी एंटीकरप्सन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> एक ओर सरकार जहाँ जीरो टालरेंस का ढिंढोरा पीट रही है तो वहीं कप्तानगंज ब्लाक भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना हुआ है जिसकी पुष्टि एंटीकरप्सन टीम ने 25000 रुपया घूस लेते हुए रंगेहाथ  गिरप्तारी करके किया। </div>
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<div style="text-align:justify;">कप्तानगंज विकास खंड मुख्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल की खबरें अक्सर मीडिया में सुर्खियाँ बन रही हैं परन्तु जिम्मेदार मनमानी से बाज नहीं आ रहे और भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी है । मामला चाहे बीडीओ के परसेंटेज वाली वसूली से जुड़ा हो या फिर चाहे एडीओ पंचायत के सफाई कर्मचारियों के समायोजन / तैनाती में धनउगाही से हो जुड़ा हर</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179835/anticorruption-takes-away-gurughantal-disciple-of-corruption-still-left-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260521-wa0070-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> एक ओर सरकार जहाँ जीरो टालरेंस का ढिंढोरा पीट रही है तो वहीं कप्तानगंज ब्लाक भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों का अड्डा बना हुआ है जिसकी पुष्टि एंटीकरप्सन टीम ने 25000 रुपया घूस लेते हुए रंगेहाथ  गिरप्तारी करके किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कप्तानगंज विकास खंड मुख्यालय में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल की खबरें अक्सर मीडिया में सुर्खियाँ बन रही हैं परन्तु जिम्मेदार मनमानी से बाज नहीं आ रहे और भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी है । मामला चाहे बीडीओ के परसेंटेज वाली वसूली से जुड़ा हो या फिर चाहे एडीओ पंचायत के सफाई कर्मचारियों के समायोजन / तैनाती में धनउगाही से हो जुड़ा हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकास खण्ड परिसर में स्थापित सभी कार्यालय यथा वनक्षेत्राधिकारी व बाल विकास परियोजना कार्यालय सभी में धनउगाही की गति समान ही है । इसी प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी जिसके मुखिया प्रभात कुमार श्रीवास्तव हैं वहाँ तो और ही भ्रष्टाचार है क्योंकि वहाँ के मुखिया प्रभात के पास कप्तानगंज व बहादुरपुर दो ब्लाकों का चार्ज है और नगर बाजार में बैठकर दोनों ब्लाकों की वसूली एक ही जगह से की जाती है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों की माने तो कार्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कप्तानगंज का जल्द ही एंटीकरप्सन टीम बृहद आपरेशन करने वाली है क्योंकि तमाम संदिग्ध गतिविधियाँ खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रभात द्वारा संचालित हैं जो कार्यवाही का आधार बनेंगी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आइए एक नजर सफाई कर्मचारी की गिरफ्तारी पर डालें जो कि आंगनबाडी में नियुक्ति से संबंधित है मतलब साफ है कि आंगनवाड़ी की भर्ती भी भ्रष्टाचार का शिकार है जिम्मेदार भले ही अपने आप को दूध का धुला बताएं क्योंकि साक्ष्य सबके सामने है । देखना यह है कि इस कार्यवाही सें बीडीओ अपने कार्यप्रणाली में सुधार लायेंगे या अगला विकेट गिरने का  इंतजार करेंगे ।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 19:49:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>13 वर्षों से साऊँघाट सीएचसी पर जमे स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार ने मचाया लूट</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार इस तरह बढ़ रहा है की सालों सालों तक लोग ड्यूटी नहीं करते हैं जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी मौके पर अस्पताल में हाजिर नहीं रहते हैं सरकार भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के भले ही एक हजार उपाय करे परन्तु भ्रष्टाचारी ' भ्रष्टाचार करने के दस हजार बनाने ढूँढ़ लेते हैं जिसका ताजा उदाहरण साऊँघाट में तैनात स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार हैं जो विगत तेरह साल से एक ही स्थान पर अंगद की तरह पाँव जमाए हुए लूट व तांडव मचाए हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार 17</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178979/health-education-officer-brijendra-kumar-who-had-been-working-at"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0029.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार इस तरह बढ़ रहा है की सालों सालों तक लोग ड्यूटी नहीं करते हैं जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी मौके पर अस्पताल में हाजिर नहीं रहते हैं सरकार भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के भले ही एक हजार उपाय करे परन्तु भ्रष्टाचारी ' भ्रष्टाचार करने के दस हजार बनाने ढूँढ़ लेते हैं जिसका ताजा उदाहरण साऊँघाट में तैनात स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी बृजेन्द्र कुमार हैं जो विगत तेरह साल से एक ही स्थान पर अंगद की तरह पाँव जमाए हुए लूट व तांडव मचाए हुए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिली जानकारी के अनुसार 17 जुलाई 2013 को बृजेन्द्र कुमार की तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र साऊँघाट में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के रूप में हुई थी । तैनाती से अद्यतन तिथि तक बृजेन्द्र सीएचसी साऊँघाट में ही जमें हैं जिसको लेकर क्षेत्र में तरह - तरह की चचाएं चल रही हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नियमों की यदि बात करें तो कोई कर्मचारी जनपद में तीन वर्ष तथा मंडल में अधिकतम 7 वर्ष तक सेवा दे सकता हैं परन्तु बृजेन्द्र कुमार के मामले में जिम्मेदारों ने इतनी क्यों दरियादिली दिखाई और अधिकतम 3 वर्ष के बजाए 13 साल क्यों जमें हैं को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है । प्रकरण में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जाँच कर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी ।</div>
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</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्ती जिले मेंआईजीआरएस मुख्यमंत्री पोर्टल पर लग रहे हैं फर्जी रिपोर्ट शिकायतों के बाद अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वच्छता मिशन को मजाक बना रहे हैं अधिकारी और कर्मचारी द्वारा खुली छूट दी जा रही है रास्ते पर गंदगी का भरमार है ग्राम पंचायत महादेवरी की महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10 सालों से शौचालय नहीं बना हुआ है और रास्ते पर उनके पति सहित पूरे परिवार के लोग गंदगी फैला रहे हैं इस शिकायत खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी जिला अधिकारी और जिला पंचायत अधिकारी के दिया गया लेकिन अधिकारियों द्वारा रुपया लेकर के कार्रवाई न करना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता मिशन शौचालय की धज्जियां उड़ा रहे हैं ऐसी महिला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178013/fake-reports-are-being-posted-on-igrs-chief-minister-portal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260503-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वच्छता मिशन को मजाक बना रहे हैं अधिकारी और कर्मचारी द्वारा खुली छूट दी जा रही है रास्ते पर गंदगी का भरमार है ग्राम पंचायत महादेवरी की महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10 सालों से शौचालय नहीं बना हुआ है और रास्ते पर उनके पति सहित पूरे परिवार के लोग गंदगी फैला रहे हैं इस शिकायत खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी जिला अधिकारी और जिला पंचायत अधिकारी के दिया गया लेकिन अधिकारियों द्वारा रुपया लेकर के कार्रवाई न करना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता मिशन शौचालय की धज्जियां उड़ा रहे हैं ऐसी महिला मेट पर कार्रवाई न करना अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर बनी हुई है महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10वर्षों अधिकारियों को गुमराह करके और झूठी बयान बाजी करके अपना पल्ला झाड़ रही है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जबकि जांच रिपोर्ट में उनके घर शौचालय न होना साबित करता है कि यह जिम्मेदार पद पर रहते हुए स्वच्छता मिशन की अवहेलना कर रही है और इनका सपोर्ट विकासखंड अधिकारी सहायक विकास अधिकारी तथा उच्च अधिकारी भी दे रहे हैं क्योंकि ग्राम पंचायत में फर्जी फोटो लगा करके हाजिरी लगाने की आवाज में मोटी रक्कम्मा चलती है इस रकम से अधिकारियों को गुमराह करके फर्जी रिपोर्ट लगवाते हैं आईजीआरएस जिला अधिकारी को किया गया आईजीआरएस विकास विभाग के मुख्य विकास अधिकारी को दिया गया लेकिन फर्जी रिपोर्ट लगाकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया कि इनका बस से हटाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है जिले की कमान संभाले जिला अधिकारी को इस मामले पर भी कुछ बोलने का तैयार नहीं प्रधानमंत्री का स्वच्छता मिशन फ्लॉप नजर आ रहा है </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चारों तरफ आईजीआरएस के फर्जी रिपोर्ट की भरमार है जनता की शिकायतों पर न्या न मिलाना अधिकारियों द्वारा फर्जी रिपोर्ट को संज्ञान में ना लेना जिले की विडंबना है शिकायतों को अनदेखा करना जिलाधिकारी एवं विकास विभाग के अधिकारी पंचायत विभाग के अधिकारी फर्जी की फोटो को लगवा कर मामलेेक निस्तारण कर दिया जाता है जांच के नाम पर कर्मचारी सुनते हैं रुपया जिससे शिकायत करता को न्याय नहीं मिल पाता है ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों की जांच से स्तरीय होनी चाहिए</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:00:56 +0530</pubDate>
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