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                <title>सरकारी व्यवस्था - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>सरकारी व्यवस्था RSS Feed</description>
                
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                <title>सुविधाएँ बढ़ीं, बजट बढ़ा, फिर भी व्यवस्था वहीं क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184435/facilities-increased-budget-increased-still-why-is-the-system-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1.-prof.-rkjain.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शिकायतों की सूची लंबी है—अस्पताल में दवा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में शिक्षक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क पर रोशनी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय में कर्मचारी नहीं। लेकिन सवाल हो कि जो है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह काम कर रहा है या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आवाज़ धीमी पड़ जाती है। डॉक्टर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज के सामने नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा में नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीट पर नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दायित्व पर नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अस्पताल में मशीन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाँच नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल में प्रयोगशाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयोग नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">मैदान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेल नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">टंकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नल में पानी नहीं। समस्या सिर्फ सुविधाओं की कमी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौजूद साधनों और पदों का अपने उद्देश्य से गायब होना है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुर्सियाँ भरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम नहीं। सवाल है—इस दिखाई देती अनुपस्थिति को कब तक अनदेखा करेंगे</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमने सुविधाओं को सेवा का माध्यम नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निजी लाभ का साधन बना लिया है। सरकारी अस्पताल का डॉक्टर सरकारी समय में निजी मरीजों में व्यस्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ओ.पी.डी. में गरीब अपनी बारी का इंतजार करता है। शिक्षक कक्षा के लिए नियुक्त है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर उसकी ऊर्जा निजी कोचिंग में खपती है। सरकारी वाहन जनता के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी आवागमन में चलता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी कंप्यूटर काम के लिए है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर निजी कारोबार में इस्तेमाल होता है। सरकारी फोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमरा और संसाधन—नाम सरकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस्तेमाल निजी। यहीं से सुविधा का चरित्र बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो साधन जनता की सेवा के लिए था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही किसी की निजी सुविधा और कमाई का जरिया बन जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विडंबना यह है कि हर समस्या का हल हम नई सुविधा में खोजते हैं—अस्पताल में भीड़ हो तो नया भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिणाम कमजोर हों तो नई इमारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन खराब हो तो नई मशीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी कम हों तो नई नियुक्ति। मगर पुरानी सुविधा का हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">लाखों की मशीन खरीदी जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीशियन न मिले तो धूल खाती है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">दवाइयाँ गोदाम भरती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वितरण की लापरवाही से जरूरतमंद तक नहीं पहुँचतीं और एक्सपायरी उन्हें निगल जाती है। स्कूल में स्मार्ट क्लास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोजेक्टर और स्क्रीन आ जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पढ़ाने का ढर्रा वही रहता है। प्रशिक्षण होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रमाणपत्र बंटते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तस्वीरें खिंचती हैं—कक्षा में फिर भी रट्टा चलता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधन बढ़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बजट बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खर्च बढ़ता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस उपयोगिता वहीं की वहीं रहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधाएँ शायद इसी लिए चुपचाप सवाल करती हैं। अस्पताल का बिस्तर पूछता है—“मैं मरीज के लिए था या सिर्फ औपचारिकता के लिए</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">किताब पूछती है—“बच्चे तक पहुँची क्यों नहीं</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रीट लाइट पूछती है—“मेरी रोशनी किस काम की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब महीनों खराब पड़ी रहूँ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">सार्वजनिक शौचालय बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सफाई के अभाव में बेकार हो जाता है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बस स्टैंड खड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर यात्री सुविधा से वंचित हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्क बनता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देखरेख न हो तो कूड़े और टूटे सामान में बदल जाता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इमारतें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीनें खड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योजनाएँ कागज पर चल रही हैं—बस सेवा गायब है। सुविधा का शरीर बचा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्देश्य मर चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सबसे बड़ी विडंबना तब सामने आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम दूसरों से ईमानदारी चाहते हैं और अपनी बारी पर “सिस्टम ऐसा ही है” कहकर बच निकलते हैं। डॉक्टर व्यवस्था को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक विभाग को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी अधिकारी को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी बजट को और नागरिक पूरे सिस्टम को दोष देता है। मगर सिस्टम है किससे</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">हमसे ही।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय पर न पहुँचने वाला कर्मचारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना पढ़े फाइल बढ़ाने वाला अधिकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कक्षा को औपचारिकता मानने वाला शिक्षक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मरीज से ज्यादा निजी काम को तरजीह देने वाला डॉक्टर—ये सभी सिस्टम हैं। हम व्यवस्था बदलना चाहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर शुरुआत खुद से नहीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम को कोसना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भीतर के स्वार्थ को देखना कठिन। यही हमारी असली सामूहिक विडंबना है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">असली सवाल सुविधा के होने का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके सही इस्तेमाल का है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सही उपयोग हो तो मरीज को इलाज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छात्र को समझ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान को समय पर जानकारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागरिक को समय पर प्रमाणपत्र और सड़क को रात में रोशनी मिलती है। दुरुपयोग हो तो डॉक्टर की कुर्सी भरी रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा खाली</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक का वेतन आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेहनत नहीं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय खुला रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान बंद। कहीं नौकरी जिम्मेदारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी सुविधा बन जाती है—हाजिरी पूरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समय पूरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम अपनी मर्जी का। कहीं सरकारी संसाधन निजी काम में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं सार्वजनिक समय निजी लाभ में।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ व्यवस्था की कमजोरी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सामूहिक बेईमानी है—जिसे हम सुविधाजनक ढंग से “सिस्टम की समस्या” कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब विकास का सवाल भी बदलना होगा। हर बार “नई सुविधा कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले पूछा जाए—</span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका परिणाम क्या आया</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">नया अस्पताल बनाने से पहले पुराने की दवा व्यवस्था देखी जाए</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई मशीन लाने से पहले पूछा जाए कि पुरानी बंद क्यों है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नया स्कूल खोलने से पहले देखा जाए कि मौजूदा स्कूल बच्चों को क्या दे रहा है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">नई सड़क से पहले पुरानी सड़क की मरम्मत का हिसाब हो। हर योजना के साथ</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देखभाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और परिणाम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भी तय हों। सुविधा खरीदना आसान है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे उपयोगी बनाए रखना कठिन। बजट से भवन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मशीन और फर्नीचर खरीदे जा सकते हैं</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदार उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी और संवेदना किसी निविदा में नहीं मिलती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">व्यवस्था केवल नई सुविधाओं से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सही नीयत से बदलती है। डॉक्टर के लिए मरीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षक के लिए कक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारी के लिए सरकारी समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अधिकारी के लिए फाइल के पीछे खड़ा व्यक्ति और नागरिक के लिए सार्वजनिक संसाधन—जब सुविधा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिम्मेदारी बन जाएँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आधी समस्याएँ बिना नए खर्च के खत्म हो सकती हैं। नई सुविधाएँ जरूरी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर पुरानी नीयत के साथ नहीं। असली सुविधा बजट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका ईमानदार उपयोग है। जिस दिन “मुझे क्या मिला</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">से पहले “जो मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे किसका भला हुआ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">पूछा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन व्यवस्था का हर साधन अपना असली अर्थ पाएगा। तब सुविधाएँ सिर्फ उपलब्ध नहीं होंगी—सार्थक होंगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 22:34:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोतीपुर कला गौ संरक्षण केंद्र का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, लापरवाही पर लगाई फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>जनपद के विकास खंड हरैया सतघरवा अंतर्गत ग्राम पंचायत मोतीपुर कला स्थित गौ संरक्षण केंद्र का सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौवंशों के संरक्षण, देखभाल एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>
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<div style="text-align:justify;">डीएम ने गौवंशों के लिए उपलब्ध हरे चारे, भूसा भंडारण, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, शेड की स्थिति एवं चिकित्सीय सुविधाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने चारे की गुणवत्ता एवं मात्रा की जानकारी लेते हुए भूसा भंडारण की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।</div>
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<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के</div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178985/dm-conducted-surprise-inspection-of-motipur-kala-cow-protection-center"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0384.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता </strong></div>
<div> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बलरामपुर। </strong>जनपद के विकास खंड हरैया सतघरवा अंतर्गत ग्राम पंचायत मोतीपुर कला स्थित गौ संरक्षण केंद्र का सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौवंशों के संरक्षण, देखभाल एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div>
<div style="text-align:justify;">डीएम ने गौवंशों के लिए उपलब्ध हरे चारे, भूसा भंडारण, पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, शेड की स्थिति एवं चिकित्सीय सुविधाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने चारे की गुणवत्ता एवं मात्रा की जानकारी लेते हुए भूसा भंडारण की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान गौ संरक्षण केंद्र में साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक न मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देशित किया कि नियमित साफ-सफाई एवं गोबर निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे गौवंशों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए डीएम ने गौवंशों को राहत पहुंचाने के लिए विशेष प्रबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने शेड के ऊपर पुवाल रखने, आसपास छायादार पौधों का पौधारोपण कराने तथा पर्याप्त पेयजल की सतत व्यवस्था बनाए रखने को कहा। साथ ही गर्मी के मौसम में गौवंशों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने पशु चिकित्सीय सुविधाओं की समीक्षा करते हुए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण एवं आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि पशु चिकित्सकों की नियमित निगरानी बनी रहे ताकि किसी भी बीमारी की स्थिति में तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान डीएम ने सहभागिता योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि योजना के तहत दुधारू गौवंशों को चिन्हित कुपोषित बच्चों के परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए, जिससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो सके तथा परिवारों को आर्थिक सहयोग मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को गौ संरक्षण केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा शासन की मंशा के अनुरूप सभी व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी हरैया सतघरवा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178985/dm-conducted-surprise-inspection-of-motipur-kala-cow-protection-center</link>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 20:05:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>बस्ती जिले मेंआईजीआरएस मुख्यमंत्री पोर्टल पर लग रहे हैं फर्जी रिपोर्ट शिकायतों के बाद अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वच्छता मिशन को मजाक बना रहे हैं अधिकारी और कर्मचारी द्वारा खुली छूट दी जा रही है रास्ते पर गंदगी का भरमार है ग्राम पंचायत महादेवरी की महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10 सालों से शौचालय नहीं बना हुआ है और रास्ते पर उनके पति सहित पूरे परिवार के लोग गंदगी फैला रहे हैं इस शिकायत खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी जिला अधिकारी और जिला पंचायत अधिकारी के दिया गया लेकिन अधिकारियों द्वारा रुपया लेकर के कार्रवाई न करना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता मिशन शौचालय की धज्जियां उड़ा रहे हैं ऐसी महिला</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178013/fake-reports-are-being-posted-on-igrs-chief-minister-portal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260503-wa0082.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में स्वच्छता मिशन को मजाक बना रहे हैं अधिकारी और कर्मचारी द्वारा खुली छूट दी जा रही है रास्ते पर गंदगी का भरमार है ग्राम पंचायत महादेवरी की महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10 सालों से शौचालय नहीं बना हुआ है और रास्ते पर उनके पति सहित पूरे परिवार के लोग गंदगी फैला रहे हैं इस शिकायत खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य विकास अधिकारी जिला अधिकारी और जिला पंचायत अधिकारी के दिया गया लेकिन अधिकारियों द्वारा रुपया लेकर के कार्रवाई न करना प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छता मिशन शौचालय की धज्जियां उड़ा रहे हैं ऐसी महिला मेट पर कार्रवाई न करना अधिकारियों के लिए टेढ़ी खीर बनी हुई है महिला मेट अंतिम देवी पिछले 10वर्षों अधिकारियों को गुमराह करके और झूठी बयान बाजी करके अपना पल्ला झाड़ रही है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जबकि जांच रिपोर्ट में उनके घर शौचालय न होना साबित करता है कि यह जिम्मेदार पद पर रहते हुए स्वच्छता मिशन की अवहेलना कर रही है और इनका सपोर्ट विकासखंड अधिकारी सहायक विकास अधिकारी तथा उच्च अधिकारी भी दे रहे हैं क्योंकि ग्राम पंचायत में फर्जी फोटो लगा करके हाजिरी लगाने की आवाज में मोटी रक्कम्मा चलती है इस रकम से अधिकारियों को गुमराह करके फर्जी रिपोर्ट लगवाते हैं आईजीआरएस जिला अधिकारी को किया गया आईजीआरएस विकास विभाग के मुख्य विकास अधिकारी को दिया गया लेकिन फर्जी रिपोर्ट लगाकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया कि इनका बस से हटाने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है जिले की कमान संभाले जिला अधिकारी को इस मामले पर भी कुछ बोलने का तैयार नहीं प्रधानमंत्री का स्वच्छता मिशन फ्लॉप नजर आ रहा है </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चारों तरफ आईजीआरएस के फर्जी रिपोर्ट की भरमार है जनता की शिकायतों पर न्या न मिलाना अधिकारियों द्वारा फर्जी रिपोर्ट को संज्ञान में ना लेना जिले की विडंबना है शिकायतों को अनदेखा करना जिलाधिकारी एवं विकास विभाग के अधिकारी पंचायत विभाग के अधिकारी फर्जी की फोटो को लगवा कर मामलेेक निस्तारण कर दिया जाता है जांच के नाम पर कर्मचारी सुनते हैं रुपया जिससे शिकायत करता को न्याय नहीं मिल पाता है ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों की जांच से स्तरीय होनी चाहिए</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:00:56 +0530</pubDate>
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