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                <title>तनाव प्रबंधन - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>तनाव प्रबंधन RSS Feed</description>
                
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                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-  </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आमड़ापाड़ा पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस परिसर में एक भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन देशभर में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आयोजित किया गया, जिसका राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम  प्रधानमंत्री द्वारा कोलकाता, पश्चिम बंगाल से संबोधित किया गया।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL), बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के 100 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजीआर  के वाईस प्रेजिडेंट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181893/international-yoga-day-celebrated-with-enthusiasm-at-pachchwara-north-coal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/news-4-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़, झारखंड:-  </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आमड़ापाड़ा पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस परिसर में एक भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन देशभर में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आयोजित किया गया, जिसका राष्ट्रीय स्तर का मुख्य कार्यक्रम  प्रधानमंत्री द्वारा कोलकाता, पश्चिम बंगाल से संबोधित किया गया।भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (WBPDCL), बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के 100 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजीआर  के वाईस प्रेजिडेंट  दिलीप तमान ने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। इसके पश्चात प्रतिभागियों ने आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योगा प्रोटोकॉल के अनुसार विभिन्न योगासन, प्राणायाम, ध्यान एवं विश्राम अभ्यास किए।</div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि योग आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में मानसिक शांति, कार्यक्षमता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है। विशेष रूप से खनन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए योग स्वास्थ्य संरक्षण और तनाव प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण साधन है।कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह एवं अनुशासन के साथ योगाभ्यास किया। योग सत्र के दौरान एकता, समर्पण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश  दिया। प्रतिभागियों ने नियमित रूप से योग करने और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">पच्छवारा नॉर्थ कोल माइंस में आयोजित यह कार्यक्रम कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कल्याण के प्रति WBPDCL, बीजीआर माइनिंग एंड इंफ्रा प्रा. लि. तथा शार प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. की प्रतिबद्धता को दर्शाया। इस  आयोजन ने कर्मचारियों के बीच योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण अभियान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:34:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 उत्साहपूर्वक मनाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र सिंह भुल्लर </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, 21 जून।</strong> वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" थीम के तहत बड़े उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। अस्पताल परिसर में आयोजित सामूहिक योग सत्र में 1,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, विद्यार्थी, प्रशासनिक कर्मचारी तथा अन्य स्टाफ सदस्य शामिल रहे। यह संस्थान द्वारा आयोजित सबसे बड़े स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रमों में से एक रहा।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा थीं। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बांबा, वरिष्ठ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181883/international-yoga-day-2026-celebrated-with-enthusiasm-in-vmmc-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260621-wa0032.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र सिंह भुल्लर </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, 21 जून।</strong> वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" थीम के तहत बड़े उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। अस्पताल परिसर में आयोजित सामूहिक योग सत्र में 1,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, विद्यार्थी, प्रशासनिक कर्मचारी तथा अन्य स्टाफ सदस्य शामिल रहे। यह संस्थान द्वारा आयोजित सबसे बड़े स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रमों में से एक रहा।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा थीं। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बांबा, वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आर.पी. अरोड़ा, केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद सीसीआरवाईएन की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुजाता सहित वरिष्ठ संकाय सदस्य, विभागाध्यक्ष, स्वास्थ्यकर्मी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।अपने संबोधन में डॉ. कविता शर्मा ने योग को शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए एक समग्र जीवनशैली बताया। उन्होंने कहा कि योग न केवल रोगों की रोकथाम में सहायक है, बल्कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, तनाव कम करता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;">योग सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने डॉ. सुजाता और उनकी टीम के मार्गदर्शन में कॉमन योगा प्रोटोकॉल (सीवाईपी) का अभ्यास किया। सत्र में विभिन्न योगासन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों का अभ्यास कराया गया। विशेषज्ञों ने योग के वैज्ञानिक लाभों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम में इसकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कोलकाता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण भी देखा और सुना। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्वास्थ्य, सामंजस्य, आत्मबल और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।योग सत्र के बाद अस्पताल परिसर में वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। निदेशक डॉ. कविता शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बांबा और वरिष्ठ सीएमओ डॉ. आर.पी. अरोड़ा ने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान परिसर में कई पौधे लगाए गए, जो पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आर.पी. अरोड़ा रहे, जिनके नेतृत्व और प्रयासों से आयोजन का सफल संचालन सुनिश्चित हुआ। आयोजन टीम ने विभिन्न विभागों की सहभागिता सुनिश्चित करने और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>
<div style="text-align:justify;">यह आयोजन वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, जनकल्याण, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, इसने आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्व को भी रेखांकित किया।कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने, परिवार और समाज में स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने तथा एक स्वस्थ, खुशहाल और टिकाऊ समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। 1,000 से अधिक प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के लिए योग की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 13:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोच का बोझ नहीं, दिशा का चिंतन: ओवरथिंकिंग के दौर में युवा मन की सच्चाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज की युवा पीढ़ी एक ऐसे दौर में जी रही है जहाँ अवसर भी अनगिनत हैं और दबाव भी उतने ही गहरे। पढ़ाई, करियर, रिश्ते और आर्थिक स्थिरता की चिंता एक साथ दिमाग पर दस्तक देती है। इसी के बीच एक नया मानसिक पैटर्न तेजी से उभरा है ,ओवरथिंकिंग। हर दिन औसतन 89 मिनट अतिरिक्त सोच में बिताना और हर रात लगभग 28 मिनट की नींद सिर्फ विचारों में खो देना, यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि एक मानसिक स्थिति का संकेत है। यह वह स्थिति है जहाँ सोच समाधान नहीं देती, बल्कि उलझनों का जाल बन जाती है। ऐसे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178007/dishas-contemplation-is-not-the-burden-of-thinking-the-truth"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01631.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज की युवा पीढ़ी एक ऐसे दौर में जी रही है जहाँ अवसर भी अनगिनत हैं और दबाव भी उतने ही गहरे। पढ़ाई, करियर, रिश्ते और आर्थिक स्थिरता की चिंता एक साथ दिमाग पर दस्तक देती है। इसी के बीच एक नया मानसिक पैटर्न तेजी से उभरा है ,ओवरथिंकिंग। हर दिन औसतन 89 मिनट अतिरिक्त सोच में बिताना और हर रात लगभग 28 मिनट की नींद सिर्फ विचारों में खो देना, यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि एक मानसिक स्थिति का संकेत है। यह वह स्थिति है जहाँ सोच समाधान नहीं देती, बल्कि उलझनों का जाल बन जाती है। ऐसे में जरूरत सोचने की नहीं, बल्कि सही दिशा में चिंतन की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ओवरथिंकिंग की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह हमें सक्रिय दिखाती है, जबकि वास्तव में यह हमें निष्क्रिय बना देती है। हम लगातार “क्यों हुआ”, “कैसे हुआ”, “अब क्या होगा” जैसे सवालों के चक्र में घूमते रहते हैं। यह चक्र धीरे-धीरे हमारे आत्मविश्वास को कमजोर करता है और निर्णय लेने की क्षमता को कुंद कर देता है। युवा वर्ग खासतौर पर इस जाल में फंसा हुआ है क्योंकि उनके सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता ज्यादा है। वे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों के दौर में हैं, जहाँ हर विकल्प एक संभावना भी है और एक डर भी।</div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल युग ने इस समस्या को और जटिल बना दिया है। सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियों को देखकर तुलना की प्रवृत्ति बढ़ती है। हर किसी की सफलता एक दबाव बन जाती है। यह तुलना धीरे-धीरे आत्म-संदेह में बदल जाती है और व्यक्ति अपने ही फैसलों पर भरोसा खोने लगता है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति सोचता तो बहुत है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए कदम नहीं उठा पाता। यह स्थिति एक मानसिक थकान पैदा करती है, जो बाहर से दिखाई नहीं देती लेकिन अंदर से व्यक्ति को खोखला कर देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ओवरथिंकिंग का असर सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक भी होता है। नींद की कमी इसका सबसे स्पष्ट संकेत है। जब दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, तो शरीर को आराम नहीं मिल पाता। यह स्थिति लंबे समय में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को जन्म देती है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि लगातार ओवरथिंकिंग करने वालों में डिप्रेशन का खतरा दो से तीन गुना तक बढ़ जाता है। यह एक चेतावनी है कि अगर समय रहते इसे नहीं समझा गया, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विभिन्न आयु वर्गों में ओवरथिंकिंग के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उसका मूल स्वरूप एक जैसा ही रहता है। 18 से 35 वर्ष के युवा करियर, रिश्तों और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर सबसे ज्यादा सोचते हैं। यह वह उम्र है जहाँ व्यक्ति अपनी पहचान बनाने की कोशिश करता है और हर निर्णय उसके भविष्य को प्रभावित करता है। वहीं 45 से 55 वर्ष के लोग आर्थिक स्थिरता और जिम्मेदारियों के दबाव में उलझे रहते हैं। 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में स्वास्थ्य और जीवन के फैसलों को लेकर चिंता अधिक होती है। यह स्पष्ट करता है कि ओवरथिंकिंग किसी एक वर्ग की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज में फैली एक मानसिक प्रवृत्ति है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन सवाल यह है कि क्या हर सोच गलत है? बिल्कुल नहीं। सोच और चिंतन में एक बारीक अंतर है। सोच वह है जो बिना दिशा के चलती रहती है, जबकि चिंतन वह है जो किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की कोशिश करता है। ओवरथिंकिंग में हम एक ही बात को बार-बार दोहराते हैं, जबकि चिंतन में हम समाधान की ओर बढ़ते हैं। यही अंतर समझना जरूरी है। जब हम अपने विचारों को नियंत्रित करना सीखते हैं, तब हम ओवरथिंकिंग से बाहर निकल सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके लिए सबसे पहले यह स्वीकार करना जरूरी है कि हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं होती। जीवन में अनिश्चितता एक स्वाभाविक तत्व है। इसे स्वीकार करने से मन का बोझ हल्का होता है। इसके साथ ही, अपने विचारों को लिखने की आदत भी मददगार हो सकती है। जब हम अपने विचारों को कागज पर उतारते हैं, तो वे स्पष्ट हो जाते हैं और हमें यह समझने में मदद मिलती है कि कौन से विचार जरूरी हैं और कौन से सिर्फ भ्रम पैदा कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योग और ध्यान इस दिशा में प्रभावी साधन हो सकते हैं। जब हम वर्तमान क्षण में जीना सीखते हैं, तो अतीत की गलतियों और भविष्य की चिंताओं का प्रभाव कम हो जाता है। ध्यान हमें अपने मन को देखने और समझने की क्षमता देता है। यह हमें सिखाता है कि हर विचार पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। कुछ विचारों को बस आने और जाने देना ही बेहतर होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा, छोटे-छोटे कदम उठाने की आदत भी ओवरथिंकिंग को कम कर सकती है। जब हम किसी बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटते हैं, तो वह कम डरावना लगता है। इससे निर्णय लेना आसान होता है और हम कार्रवाई की ओर बढ़ते हैं। याद रखना चाहिए कि पूर्णता से ज्यादा जरूरी प्रगति है। हर बार सही निर्णय लेना जरूरी नहीं है, लेकिन हर बार कुछ न कुछ सीखना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समाज और परिवार की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अगर युवा अपने विचारों और चिंताओं को खुलकर साझा कर सकें, तो उनका बोझ कम हो सकता है। संवाद एक ऐसा माध्यम है जो मन के भीतर जमा हुए विचारों को बाहर लाने में मदद करता है। इसके साथ ही, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना भी एक समझदारी भरा कदम है। मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह समझना जरूरी है कि जीवन एक प्रक्रिया है, कोई अंतिम परीक्षा नहीं। हर दिन हमें कुछ नया सिखाता है और हर अनुभव हमें मजबूत बनाता है। ओवरथिंकिंग हमें इस प्रक्रिया से दूर कर देती है, जबकि चिंतन हमें इसके करीब लाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने विचारों के साथ संतुलन बनाना सीखें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज की युवा पीढ़ी के सामने चुनौतियाँ जरूर हैं, लेकिन उनके पास संभावनाएँ भी उतनी ही हैं। अगर वे ओवरथिंकिंग के जाल से बाहर निकलकर चिंतन की दिशा में कदम बढ़ाएं, तो वे न सिर्फ अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बन सकते हैं। सोच का बोझ छोड़कर जब हम चिंतन की राह चुनते हैं, तब ही हम वास्तव में आगे बढ़ पाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         <strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 18:22:46 +0530</pubDate>
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