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                <title>Self Reliance - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Self Reliance RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मण्डलीय जिला सूचना कार्यालय लखनऊ सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण की दिशा में लखनऊ में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की 09 वर्षों में हुई उल्लेखनीय प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong><strong>लखनऊः   </strong></strong></blockquote>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ सामाजिक न्याय, शैक्षिक उन्नयन, आर्थिक सशक्तीकरण तथा समावेशी विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की गई हैं। विभाग की योजनाओं ने पिछड़े वर्ग के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। विभाग द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184363/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-in-09-years"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas17.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong><strong>लखनऊः   </strong></strong></blockquote>
<blockquote class="format1">
<p style="text-align:justify;"><strong>(आदर अदीब पावेल बन्धु) </strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जिला सूचना अधिकारी</strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align:justify;">पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ सामाजिक न्याय, शैक्षिक उन्नयन, आर्थिक सशक्तीकरण तथा समावेशी विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। विगत 09 वर्षों में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और आर्थिक सहायता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की गई हैं। विभाग की योजनाओं ने पिछड़े वर्ग के लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। विभाग द्वारा संचालित पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,01,414 छात्रों को रु0 421.20 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इस योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में सहायता प्रदान की और विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहन मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />इसी प्रकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,91,263 छात्रों को रु0 12,026.36 लाख की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को आर्थिक संबल मिला तथा पिछड़े वर्ग के छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढी । दशमोत्तर शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 2,69,954 छात्रों को रु0 55,343.84 लाख की शुल्क प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई गई। इस योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के द्वार खोले और प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया। यदि इन तीनों प्रमुख शैक्षिक योजनाओं को सम्मिलित रूप से देखा जाए तो कुल 7,62,631 छात्रों को लाभान्वित करते हुए लगभग रु0 67,791.40 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास के क्षेत्र में भी विभाग ने उल्लेखनीय कार्य किया है। O-Level एवं CCC लेवल प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 4,255 छात्रों को रु0 529.22 लाख की लागत से प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। डिजिटल युग में कंप्यूटर शिक्षा और तकनीकी दक्षता युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शादी अनुदान योजना भी विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इस योजना के अंतर्गत पिछले 09 वर्षों में कुल 4,964 जोड़ों को रु. 992.80 लाख का लाभ प्रदान किया गया है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर पिछड़े वर्ग परिवारोंकी बेटियों के विवाह में सहयोग देकर सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सहायता प्रदान कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यदि छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति, शादी अनुदान और कौशल विकास योजनाओं को एक साथ देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि विभाग केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, सामाजिक संरक्षण और रोजगारपरक सशक्तीकरण का व्यापक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और अन्य योजनाओं की प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाया गया है। आवेदन, सत्यापन और डीबीटी के माध्यम से लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />विभाग द्वारा स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी कार्य किया गया है। पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से विभिन्न ऋण योजनाओं, मार्जिन मनी सहायता और उद्यमिता प्रोत्साहन कार्यक्रमों से युवाओं और कारीगरों को जोड़ा गया है। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिला और आत्मनिर्भरता को बल मिला। पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदायों के उत्थान हेतु भी विभाग ने प्रशिक्षण, उपकरण सहायता और वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। इससे कारीगरों और लघु उद्यमियों की आजीविका सुदृढ़ हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में विभाग की योजनाओं का विशेष प्रभाव देखा गया है। महिला लाभार्थियों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़कर उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाई गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचाया गया है। विभाग की उपलब्धियों में नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा कर पात्र लाभार्थियों तक लाभ सुनिश्चित किया गया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की यह व्यवस्था विभागीय कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पिछले 09 वर्षों की प्रगति दर्शाती है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ ने शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। लाखों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, हजारों युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण और हजारों जरूरतमंद परिवारों को शादी अनुदान प्रदान कर विभाग ने सामाजिक न्याय को मजबूत किया है। आज विभाग की योजनाएं केवल सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और अवसर की समानता का माध्यम बन चुकी हैं। शिक्षा से लेकर रोजगार और सामाजिक सुरक्षा तक विभाग की बहुआयामी पहलें पिछड़े वर्ग के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग लखनऊ ने विगत 09 वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। 2,01,414 छात्रों को पूर्वदशम छात्रवृत्ति, 2,91,263 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति, 2,69,954 छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति, 4,964 जोड़ों को शादी अनुदान तथा 4,255 युवाओं को O-Leve एवं CCC प्रशिक्षण प्रदान कर विभाग ने सामाजिक और शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में प्रभावशाली कार्य किया है। यह उपलब्धियां लखनऊ के समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/184363/divisional-district-information-office-lucknow-remarkable-progress-in-09-years</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 23:35:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वदेशी अपनाने और स्वावलंबन का दिया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)। </strong> नगर स्थित स्वावलंबन केंद्र में सोमवार को स्वदेशी जागरण मंच की ओर से बैठक आयोजित की गई।इसमें युवाओं और महिलाओं को स्वदेशी अपनाने तथा स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रांत संयोजक अमित सिंह वत्स ने की। बैठक में अमित सिंह वत्स ने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्हें ऐसा उद्यम शुरू करना चाहिए जिससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम है। इसके लिए स्वावलंबन केंद्र से जुड़कर प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी प्राप्त की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182320/message-given-for-indigenous-adoption-and-self-reliance"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260629-wa0327.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)। </strong> नगर स्थित स्वावलंबन केंद्र में सोमवार को स्वदेशी जागरण मंच की ओर से बैठक आयोजित की गई।इसमें युवाओं और महिलाओं को स्वदेशी अपनाने तथा स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रांत संयोजक अमित सिंह वत्स ने की। बैठक में अमित सिंह वत्स ने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्हें ऐसा उद्यम शुरू करना चाहिए जिससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार आर्थिक आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत माध्यम है। इसके लिए स्वावलंबन केंद्र से जुड़कर प्रशिक्षण और आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक मजबूती में स्वदेशी की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि लोग स्वदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करें तो स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने सभी से दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में मौजूद लोगों ने स्वदेशी के महत्व पर चर्चा की और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष मनोज अवस्थी, राजू सिंह एडवोकेट, पंकज पांडेय, विवेक सिंह, बाबू तिवारी, सत्यम सिंह, विष्णु प्रताप सिंह, प्रभात, त्रिलोक चंदी, सुलोचना देवी, सुशीला, रंगोली सहित अनेक लोग मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:00:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
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                <title>आत्मनिर्भरता स्वाभिमानी राष्ट्र का प्रतीक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181459/self-reliance-is-a-symbol-of-a-self-respecting-nation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता ही मनुष्य को स्वाधीन बनाने की प्रेरणा देती है। आत्मनिर्भरता की स्थिति में व्यक्ति अपनी इच्छाओं अपनी सुविधा अनुसार पूरा कर सकता है, इसके लिए दूसरों की तरफ मुंह ताकने की जरूरत नहीं पड़ती है। आत्मनिर्भरता केवल मनुष्य के लिए व्यक्तिगत रूप से ही जरूरी नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए भी अति आवश्यक है ।एक स्वतंत्र राष्ट्र अपनी जनता को अपनी क्षमता के अनुसार सारी सुविधाएं तथा अन्य जीवन उपयोगी साधन उपलब्ध करा सकता है। भारत स्वतंत्रता के बाद हरित क्रांति सातवें दशक के प्रारंभ के बाद ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका, इसके साथ ही भारत में खुशहाली की स्वाभाविक तौर पर वृद्धि हुई, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी कहा था कि "एक राष्ट्र की शक्ति उसकी आत्मनिर्भरता में है दूसरों से उधार लेकर काम चलाने में नहीं",पाकिस्तान की स्थिति बिल्कुल ऐसी ही है वह अभी तक स्वतंत्रता के बाद से 75 वर्ष के बाद भी संपूर्ण रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है, वह कर्जे से डूब गया है और अपने देश में खर्चा चलाने के लिए पूरी दुनिया से उधार मांगते हुए घूम रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पाकिस्तान आत्मनिर्भर नहीं होने का एवं उधार की जिंदगी जीने का एक बहुत बड़ा उदाहरण है। जबकि भारत देश विज्ञान, टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस,इंजीनियरिंग और कृषि सेवा, खनिज,स्पेस रिसर्च में पूर्णता आत्मनिर्भर होकर विकसित देशों के बराबर खड़ा हुआ है। यह देशवासियों और देश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। आत्मनिर्भरता या स्वावलंबन किसी भी देश की प्रगति विकास तथा और उसके नागरिकों की जिंदगी की जिजीविषा है जिससे वह संघर्ष कर आगे बढ़ता है। इतिहास गवाह है कि किसी भी महान लेखक को महान बनने तक निरंतर मेहनत कर किताबें लिखने का का श्रम करना पड़ा एवं आत्मनिर्भरता की स्थिति में विचार कर अपने विचारों को लिपिबद्ध करना पड़ा तब जाकर वह महानता की श्रेणी को प्राप्त कर सका। इसी तरह कोई छात्र अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे स्वयं परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा एवं परीक्षा में मनोवांछित सफलता प्राप्त कर उसे स्वयं अध्ययन करना होगा। इसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में भी मनुष्य को आत्मनिर्भर होकर मेहनत कर दीक्षित सफलता प्राप्त करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा देश भारत भी आजादी के बाद से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रेषित हुआ आज स्थिति यह है कि वह विश्व में विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है। तमाम महापुरुषों के जीवन से भी हमें आत्मनिर्भरता तथा स्वावलंबन की शिक्षा मिलती रहती है।महात्मा गांधी अपना कार्य स्वयं किया करते थे। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी "दैव दैव आलसी" पुकारा है, तब जाकर उनकी जिंदगी पटरी पर आई और हमें परिश्रम कर आत्म निर्भर होने की शिक्षा प्रदान की थी। दूसरों पर निर्भरता हमें दूसरों का अनुसरण करने के लिए मजबूर करती है। दूसरों पर निर्भर होने से हमें के अनुरूप ही जीवन जीने के लिए बाध्य होना पड़ता है। पराधीनता हमारा आत्मविश्वास सृजनशीलता सोचने की शक्ति को नष्ट कर देती है। गुलामी एक अभिशाप होती है, आत्मनिर्भरता की कमी हमें किंकर्तव्यविमूढ़ बना देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरों की कृपा पर जीने वाला व्यक्ति जीवन के अक्षय आनंद से वंचित रहता है। खुद के परिश्रम श्रम से आगे बढ़ने वाला देश या व्यक्ति या समाज सदैव प्रफुल्लित आत्म विश्वासी तथा विकास की ओर सदैव अग्रसर रहता है। हमें सदैव अपने अंदर के आत्मविश्वास, छिपी हुई क्षमताओं मनोबल का सहारा लेकर आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य को मनुष्य होने का अधिकार प्राप्त होता है। पराधीन देश सामान्य व्यक्ति सदैव पशु तुल्य होते हैं। जिनका अपना कोई विचार या व्यक्तित्व नहीं हो सकता है। कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता - राम सहायक उनके होते, जो होते हैं, आप सहायक, हम सबको स्वयं पर भरोसा रखना आत्मबल बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर होने की प्रेरणा देती रहती हैं।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:45:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>स्वावलंबन एवं स्व-रोजगार बेहतर विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमता, शक्ति एवं ऊर्जा को पहचानना आज के नव युवकों के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं के विकास से तात्पर्य खुद के लिए अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोजगार की तलाश राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान भी हो सकता है।भारत की विशाल आबादी के हिसाब से भारत नौजवानों का देश है और भारत सरकार के लिए इतने युवा लोगों के लिए नौकरी उपलब्ध कराना संभव भी नहीं है कि सभी युवकों के लिए समुचित नौकरी का प्रबंध या इंतजाम कर सके। ऐसे में पढ़े-लिखे नौजवानों का यह महती दायित्व बन जाता है कि वह स्वयं की क्षमता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177998/self-reliance-and-self-employment-are-better-options"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa0163.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमता, शक्ति एवं ऊर्जा को पहचानना आज के नव युवकों के लिए अत्यंत आवश्यक है। स्वयं के विकास से तात्पर्य खुद के लिए अपनी क्षमता एवं योग्यता के अनुसार रोजगार की तलाश राष्ट्रीय हित में महत्वपूर्ण योगदान भी हो सकता है।भारत की विशाल आबादी के हिसाब से भारत नौजवानों का देश है और भारत सरकार के लिए इतने युवा लोगों के लिए नौकरी उपलब्ध कराना संभव भी नहीं है कि सभी युवकों के लिए समुचित नौकरी का प्रबंध या इंतजाम कर सके। ऐसे में पढ़े-लिखे नौजवानों का यह महती दायित्व बन जाता है कि वह स्वयं की क्षमता को पहचान कर मेक इन इंडिया या स्वावलंबी होने का भरसक प्रयास करें। स्वयं की क्षमता को पहचानने वाला व्यक्ति समाज में एक आदर्श बनकर उभरता है और उसकी  प्रसिद्धि समाज में स्वयं हो जाती है। युवक स्वयं का रोजगार बनाकर न सिर्फ खुद की बेरोजगारी दूर करता है, बल्कि वह दूसरों के लिए भी रोजगार का साधन बन जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह राष्ट्रीय हित में अत्यंत आवश्यक समीचीन तथा राष्ट्रीय विकास के लिए एक अच्छे सूचक के रूप में सामने आता है। स्वयं अपनी क्षमताओं को पहचानना एवं अपने अंदर के उद्यमी को रोजगार के लिए उपयोग में लाना मनुष्य का एक तरह का अलंकार या आभूषण ही है जो मनुष्य के लिए सुखी होने का बड़ा स्रोत है। वैसे भी नौकरी करके युवा एक तरह से परतंत्र, पराधीन हो जाता है और अपनी क्षमताओं का खुलकर प्रयोग नहीं कर पाता यही कारण है कि राष्ट्र के समग्र विकास में उसकी क्षमताओं का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।राष्ट्रीय योजना मेक इन इंडिया के अंतर्गत आव्हान किया गया है कि नौजवानों को अपनी शिक्षा,तकनीकी शिक्षा एवं स्किल का उपयोग कर भारत देश के लिए हर तरह के आवश्यक वस्तुओं का स्वयं निर्माण करें एवं दूसरे नौजवानों के लिए आदर्श स्थापित करें जिससे संपूर्ण देश स्वावलंबी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">स्वयं की क्षमताओं को पहचानने वाला व्यक्ति स्वतंत्र ,स्वाभिमानी होकर स्वयं पर पूर्ण विश्वास करने वाला आत्मविश्वासी व्यक्ति होता है। ऐसे में भविष्य में राहों में जितनी भी मुश्किल है या कठिनाई आती है उसका वह अपने ज्ञान और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करने से नहीं चूकता है। अपनी क्षमताओं को पहचानने के कारण व्यक्ति अत्यंत सरल, सहज एवं आत्मविश्वासी होकर दूसरों की मदद करने से भी पीछे नहीं हटता। स्वयं का रोजगार तलाशने या अपने लिए कोई उद्यम बनाने में युवाओं में जो ज्ञान प्राप्त होता है फल स्वरूप वह युवा अत्यंत त्यागी तथा समाज के लिए सेवा भाव भी रखने वाला होता है। स्वावलंबन से दूसरों पर निर्भर होने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती एवं अपने ही ज्ञान तथा क्षमता से वह उन्नति के सोपान चढ़ते जाता है, एवं राष्ट्र के लिए एक धरोहर की तरह होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">खुद की क्षमता पहचान कर अपना उद्यम डालने से न सिर्फ समाज में विकास होता बल्कि देश में भी विकास के योगदान में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होता है। ऐतिहासिक तौर पर भी खुद की क्षमता पहचानने एवं अपनी उर्जा को सही दिशा में लगाने के कारण बड़े-बड़े महापुरुषों का जन्म हुआ है। जितने भी बड़े महापुरुष हुए हैं, वे पैदाइशी महापुरुष नहीं थे उन्होंने अपनी क्षमता, शक्ति एवं ज्ञान को पहचान कर उसमें समुचित एवं निरंतर परिश्रम कर एक नए मुकाम को हासिल किया था और तब ही वे महापुरुषों की श्रेणी में शामिल हुए हैं। पौराणिक तौर पर प्रभु श्री राम ने वन गमन कर रावण का वध किया और एक धार्मिक इतिहास बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी क्षमताओं को पहचान कर उसे सही दिशा देने का सबसे बड़ा उदाहरण एकलव्य है जिसने जंगल में धनुर्विद्या लगातार अभ्यास करके अर्जुन की तरह बहुत बड़े धनुर्विद्या के शूरवीर बने। कोलंबस ने भी अपनी शक्ति क्षमता को पहचानते अमेरिका की खोज की और गरीब मां बाप की संतान अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने अमेरिका का सर्वोच्च पद प्राप्त किया। राइट ब्रदर्स ने अपने ज्ञान का समुचित विकास एवं उपयोग कर हवाई जहाज की खोज की। खुद की शक्ति एवं ऊर्जा के विकास और स्वावलंबन का सबसे बड़े उदाहरण महात्मा गांधी रहे जिन्होंने ना सिर्फ अपनी क्षमता को पहचाना बल्कि पूरे हिंदुस्तानियों को दिशा दिखा कर स्वतंत्रता का आह्वान कर स्वाधीनता प्राप्त की और महात्मा गांधी के रूप में भारत में स्थापित हुए। खुद की क्षमता एवं शक्ति को पहचानने से व्यक्ति भी महानता की श्रेणी में खड़ा होकर देश के विकास में एक बड़ा सोपान अर्जित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे सिर्फ व्यक्ति ही महान नहीं बनता बल्कि देश को भी महान बनाने में उसका योगदान बहुत ज्यादा तथा महत्वपूर्ण होता है। मनुष्य अपनी क्षमताओं को वैसे तो आसानी से पहचान नहीं पाता है लेकिन यदि वह अपनी अंतर शक्ति, विशेषताओं को किसी भी उम्र में भी पहचान कर उसका देश के लिए समुचित उपयोग कर सकता है इसीलिए मेक इन इंडिया के लिए युवकों को अपनी क्षमताओं शक्ति तथा ऊर्जा को पहचान कर नए नए उद्यम लगाकर देश के विकास में सहयोग करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह एक सकारात्मक चरित्र विकास की प्रथम पंक्ति होती है। इससे मनुष्य में और खासकर युवा वर्ग में निर्भीकता,कठोर श्रम करने की शक्ति एवं संयम जैसी विशेषताओं का प्रादुर्भाव होता है। व्यक्ति समाज एवं राष्ट्र की उन्नति में चार चांद लग जाते हैं। उन्नत शिक्षित परिश्रमी एवं सदाचारी युवाओं से ही कोई राष्ट्र महानता की श्रेणी में पहुंच जाता है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर,</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:41:26 +0530</pubDate>
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