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                <title>Environmental conservation India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Environmental conservation India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेठी में भाजपा कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सुना पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> भारतीय जनता पार्टी द्वारा रविवार को जनपद अमेठी के विभिन्न मंडलों एवं बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड का सामूहिक श्रवण उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति ने सहभागिता कर प्रधानमंत्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भाजपा अमेठी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने जगदीशपुर विधानसभा के हलियापुर मंडल के मत्तेपुर स्थित बूथ संख्या-208 पर बूथ समिति एवं कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष दयाशंकर यादव एवं दुर्गेश त्रिपाठी</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184158/bjp-workers-enthusiastically-listened-to-pm-modis-mann-ki-baat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/2-3.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>अमेठी।</strong> भारतीय जनता पार्टी द्वारा रविवार को जनपद अमेठी के विभिन्न मंडलों एवं बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड का सामूहिक श्रवण उत्साह एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं मातृशक्ति ने सहभागिता कर प्रधानमंत्री के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। भाजपा अमेठी के जिला अध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने जगदीशपुर विधानसभा के हलियापुर मंडल के मत्तेपुर स्थित बूथ संख्या-208 पर बूथ समिति एवं कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। वहीं पूर्व जिला अध्यक्ष दयाशंकर यादव एवं दुर्गेश त्रिपाठी ने भी विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला मंत्री आशा वाजपेयी ने मातृशक्ति के साथ कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि वरिष्ठ भाजपा नेता गिरीश चंद्र शुक्ला ने शक्ति केंद्र इन्दरिया के बूथ संख्या-61 पर कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया। जिला उपाध्यक्ष हिंदेश सिंह, प्रभात शुक्ला तथा जिला प्रवक्ता चंद्रमौली सिंह सहित अनेक पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को स्मरण किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का पराक्रम आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं, स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि भारत का युवा आज वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाने के अभियान का विशेष उल्लेख किया और इसे जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने आगामी 'हर घर तिरंगा' अभियान को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इस अभियान ने पूरे देश को राष्ट्रभक्ति की अद्भुत भावना से जोड़ा है। इस वर्ष भी प्रत्येक नागरिक अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराकर राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करे।कार्यक्रम के उपरांत भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'मन की बात' कार्यक्रम से समाज को सकारात्मक दिशा, प्रेरणा और राष्ट्रहित में कार्य करने की ऊर्जा मिलती है। अमेठी में सभी बूथों पर कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने तथा पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सहभागिता के अभियानों को और अधिक गति देने का संकल्प लिया।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 22:41:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>उद्योगपतियों का बोल बाला हरियाली पर चल रही आरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संपादक/लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में हरियाली संरक्षण की बातें सरकारी योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधारोपण अभियानों और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में खूब होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। देश के कई हिस्सों में उद्योगपतियों और लकड़ी माफिया के बोल बाले में आरा मशीनें (बैंड सॉ मिल या सॉइंग मशीनें) बेखौफ हरियाली पर आरी चला रही हैं। हरे-भरे पेड़—नीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीशम या अन्य प्रजातियां—रातोंरात कटकर लकड़ी के ढेर में बदल जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि प्रशासन या तो आंखें मूंदे बैठा है या जांच की औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडा कर देता है। यह न केवल पर्यावरणीय</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177911/industrialists-say-the-saw-is-running-on-greenery"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/istockphoto-1306526998-612x612-1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">संपादक/लेखक: राजीव शुक्ला</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में हरियाली संरक्षण की बातें सरकारी योजनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधारोपण अभियानों और जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों में खूब होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी भिन्न है। देश के कई हिस्सों में उद्योगपतियों और लकड़ी माफिया के बोल बाले में आरा मशीनें (बैंड सॉ मिल या सॉइंग मशीनें) बेखौफ हरियाली पर आरी चला रही हैं। हरे-भरे पेड़—नीम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शीशम या अन्य प्रजातियां—रातोंरात कटकर लकड़ी के ढेर में बदल जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि प्रशासन या तो आंखें मूंदे बैठा है या जांच की औपचारिकता पूरी कर मामला ठंडा कर देता है। यह न केवल पर्यावरणीय आपदा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास के नाम पर हो रही व्यवस्थित लूट का प्रतीक भी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विभिन्न राज्यों से लगातार खबरें आ रही हैं कि औद्योगिक कॉलोनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांवों के किनारे या जंगलों के आसपास अवैध आरा मशीनें  संचालित हो रही हैं। मध्य प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे क्षेत्रों में इन मशीनों पर सैकड़ों क्विंटल हरी लकड़ी रोजाना चीरी जा रही है। कई मामलों में बिना लाइसेंस या एनओसी के आरा मशीनें चल रही हैं और हरे पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ी जा रही हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सबूत मिट जाएं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">वन विभाग  की भूमिका अक्सर संदिग्ध नजर आती है। लकड़ी का स्रोत जांचे बिना आरा संचालकों को छूट मिल रही है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कभी-कभी बुलडोजर कार्रवाई होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये प्रयास छिटपुट और अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। लकड़ी उद्योग की मांग ईंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फर्नीचर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैकेजिंग और निर्माण के लिए लगातार बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका फायदा अक्सर शक्तिशाली उद्योगपतियों और उनके नेटवर्क को पहुंचता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संदर्भ में ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना एक चिंताजनक उदाहरण है। अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में प्रस्तावित इस </span>₹81,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की मेगा परियोजना में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्यूल-यूज एयरपोर्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पावर प्लांट और टाउनशिप का निर्माण शामिल है। परियोजना के तहत लगभग </span>130-166<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रभावित होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्राथमिक वर्षावन (</span>rainforest) <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी मात्रा शामिल है। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुमान है कि इससे करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से अधिक पेड़ कट सकते हैं। परियोजना को रणनीतिक महत्व (भारतीय महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत करने) का हवाला देकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (</span>NGT) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हाल ही में पर्यावरणीय मंजूरी बरकरार रखी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पर्यावरणविद् चेतावनी दे रहे हैं कि इससे जैव विविधता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेदरबैक कछुए के घोंसलों और शोम्पेन जनजाति के निवास पर अपूरणीय क्षति होगी। एक ओर हरियाली बचाने के दावे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी ओर ऐसे बड़े पैमाने पर वन क्षेत्रों का डायवर्शन विकास मॉडल की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आईएसआरओ के उपग्रह डेटा पर आधारित वन सर्वे ऑफ इंडिया (</span>FSI) <span lang="hi" xml:lang="hi">की भारत राज्य वन रिपोर्ट </span>2023 (ISFR 2023) <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश की हरियाली की तस्वीर मिश्रित है। रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण </span>8,27,357<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का </span>25.17%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। इसमें वन आवरण </span>7,15,343<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर (</span>21.76%) <span lang="hi" xml:lang="hi">और वृक्ष आवरण </span>1,12,014<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर (</span>3.41%) <span lang="hi" xml:lang="hi">शामिल है। </span>2021<span lang="hi" xml:lang="hi"> की तुलना में कुल वन और वृक्ष आवरण में </span>1,445<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है (वन आवरण में +</span>156<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर और वृक्ष आवरण में +</span>1,289<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर)। रिपोर्ट </span>ISRO <span lang="hi" xml:lang="hi">के </span>Resourcesat-2<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैटेलाइट के </span>LISS-III <span lang="hi" xml:lang="hi">सेंसर (</span>23.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> मीटर रिजोल्यूशन) से प्राप्त मध्यम रिजोल्यूशन वाले उपग्रह डेटा पर आधारित है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से प्लांटेशनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एग्रोफॉरेस्ट्री और रिकॉर्डेड फॉरेस्ट क्षेत्रों के बाहर वृक्षों के विस्तार से आई है। घने प्राकृतिक वनों में गिरावट जारी है। पिछले दो दशकों में घने वनों की कुल हानि </span>24,651<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुकी है। उत्तर-पूर्व</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य भारत के आदिवासी क्षेत्र और पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील इलाकों में खनन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अवैध कटाई से वन क्षरण हो रहा है। अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में मैंग्रोव आवरण हालांकि बढ़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बड़े विकास प्रोजेक्ट्स इससे खतरा पैदा कर रहे हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रेट निकोबार जैसी परियोजनाओं में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को और मजबूत तथा पारदर्शी बनाना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि रणनीतिक विकास और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे। आईएसआरओ के उपग्रह डेटा जैसी वैज्ञानिक निगरानी को और प्रभावी बनाकर वास्तविक वन क्षरण पर अंकुश लगाया जा सकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली हमारी साझा विरासत है। यदि उद्योगपतियों का बोल बाला बिना रोक-टोक जारी रहा और बड़े प्रोजेक्ट्स में वन क्षेत्रों की बलि चढ़ती रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य की पीढ़ियां केवल आरा मशीनों की गूंज और सूखे खेतों की कहानियां सुनेंगी। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और नागरिक समाज को मिलकर इस लूट को रोकना होगा। विकास और पर्यावरण के बीच सच्चा संतुलन बनाना संभव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सख्ती अनिवार्य है। अन्यथा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाली’ शब्द सिर्फ सरकारी फाइलों और भाषणों तक सीमित रह जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:47:27 +0530</pubDate>
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