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                <title>लोकतांत्रिक अधिकार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>लोकतांत्रिक अधिकार RSS Feed</description>
                
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                <title>भीम आर्मी के अतुल वाल्मीकि को पुलिस ने किया घर में नजर बंद </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> मेरठ की पीड़िता ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आज़ाद के कार्यक्रम से पूर्व बरेली में भीम आर्मी के नेता अतुल वाल्मीकि को बीती रात से उनके आवास पर पुलिस ने घर में ही नजर बंद कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अतुल वाल्मीकि ने बताया  किसी भी नागरिक या सामाजिक कार्यकर्ता को बिना किसी स्पष्ट कानूनी आदेश के उसके घर में रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। लोकतंत्र में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना और पीड़ित परिवार के साथ</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183117/bhim-armys-atul-valmiki-put-under-house-arrest-by-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0003-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली।</strong> मेरठ की पीड़िता ललिता गौतम के परिवार से मिलने जा रहे सांसद एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आज़ाद के कार्यक्रम से पूर्व बरेली में भीम आर्मी के नेता अतुल वाल्मीकि को बीती रात से उनके आवास पर पुलिस ने घर में ही नजर बंद कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अतुल वाल्मीकि ने बताया  किसी भी नागरिक या सामाजिक कार्यकर्ता को बिना किसी स्पष्ट कानूनी आदेश के उसके घर में रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। लोकतंत्र में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना और पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना कोई अपराध नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन के पास कोई वैधानिक आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बिना लिखित आदेश के किसी व्यक्ति की स्वतंत्र आवाजाही पर रोक लगाना उचित नहीं है ।</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंसा राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकार संकट के बीच घिरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180926/pakistan-occupied-kashmir-surrounded-by-violence-political-instability-and-human"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान को अतिरिक्त सुरक्षा बल और रेंजर्स तैनात करने पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यह हिंसा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक असंतोष की लंबी पृष्ठभूमि मौजूद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। चुनाव से पहले जिस प्रकार सीटों के आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद पैदा हुआ, उसने लोगों के भीतर पहले से मौजूद नाराजगी को और अधिक भड़का दिया। यही कारण है कि प्रदर्शन केवल किसी एक निर्णय के विरोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे व्यापक असंतोष के रूप में सामने आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">रावलकोट में हुई झड़पों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद हिंसा तेजी से फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई स्थानों पर गोलीबारी भी हुई। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ इलाकों में बिना पर्याप्त चेतावनी के बल प्रयोग किया गया, जिससे भगदड़ मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। इन घटनाओं ने स्थानीय जनता के भीतर सेना और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति असंतोष को और गहरा कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट का एक बड़ा कारण 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव भी हैं। चुनावों में 45 में से 12 सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित किए जाने के फैसले का व्यापक विरोध हो रहा है। विरोधी संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय निवासियों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होंगे और उनकी वास्तविक भागीदारी कम हो जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आंदोलन तेज किया है। बंद और प्रदर्शन की घोषणाओं ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब यह असंतोष केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठानी शुरू कर दी है। ब्रिटेन में पाकिस्तान के दूतावास के बाहर प्रदर्शन किए गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और बल प्रयोग के खिलाफ नारे लगाए। इससे स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">ब्रिटेन के लगभग 50 सांसदों द्वारा इस विषय पर चिंता व्यक्त किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से मामले पर ध्यान देने और राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए तथा राजनीतिक मतभेदों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठती ऐसी आवाजें पाकिस्तान के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार संबंधी प्रश्नों से ध्यान हटाने के लिए भ्रामक सूचनाओं और दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है। भारत का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओके में घट रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान हो। भारत लंबे समय से पीओके में लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और संचार व्यवस्था में व्यवधान की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। कई इलाकों में लोगों को सूचना और संवाद के साधनों से वंचित होना पड़ा है। आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में सूचना तक पहुंच को एक महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है। ऐसे में संचार माध्यमों पर नियंत्रण से लोगों के बीच असुरक्षा और अविश्वास की भावना और अधिक बढ़ सकती है। इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद की संभावनाएं भी कमजोर होती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट पाकिस्तान के सामने एक बड़े राजनीतिक प्रश्न को भी खड़ा करता है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन, जनाक्रोश और प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ रहा हो, तो केवल सुरक्षा बलों के सहारे स्थिति को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि जनता की शिकायतों को सुना जाए, राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दिया जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाया जाए। इतिहास गवाह है कि जब भी जनभावनाओं की उपेक्षा की जाती है, तब असंतोष और अधिक तीव्र रूप में सामने आता है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि वहां के लोग अपने राजनीतिक अधिकारों, बेहतर प्रशासन और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर पहले से अधिक मुखर हो चुके हैं। यदि इन मांगों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और जटिल हो सकती है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, प्रशासन की जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण बनेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भड़की हिंसा केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहरे असंतोष का परिणाम है जो लंबे समय से वहां मौजूद है। बढ़ती मौतें, सैकड़ों घायल, व्यापक प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय चिंता और राजनीतिक विवाद यह दर्शाते हैं कि पीओके एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार किस प्रकार इस संकट का समाधान करती है, यह न केवल क्षेत्र की स्थिरता बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को भी प्रभावित करेगा। पीओके के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक समाधान ही इस संकट से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी मार्ग साबित हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>           </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वकीलों पर नहीं, बल्कि संविधान और न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है-जगजीवन सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -</strong> रॉबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, सोनभद्र के सभागार में सोमवार को वकीलों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें लखनऊ में वकीलों पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक की गई लाठीचार्ज की घटना की निंदा की गई। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने के साथ ही दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। लखनऊ में अपनी जायज मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे वकीलों पर जिस प्रकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179472/it-is-not-an-attack-on-lawyers-but-on-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001620089.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश -</strong> रॉबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, सोनभद्र के सभागार में सोमवार को वकीलों की एक आपात बैठक हुई, जिसमें लखनऊ में वकीलों पर पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्वक की गई लाठीचार्ज की घटना की निंदा की गई। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने के साथ ही दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। लखनऊ में अपनी जायज मांगों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे वकीलों पर जिस प्रकार बर्बरता से लाठियां बरसाई गईं, वह अत्यंत शर्मनाक है। यह केवल वकीलों पर नहीं, बल्कि संविधान और न्यायपालिका की गरिमा पर हमला है। सोनभद्र का प्रत्येक अधिवक्ता इस घटना से स्तब्ध और आक्रोशित है। हम इसकी घोर निंदा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष पीके सिंह एडवोकेट ने कहा कि लखनऊ में वकीलों के ऊपर पुलिस द्वारा की गई बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज की घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, साथ ही दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपाध्यक्ष संतोष कुमार यादव एडवोकेट ने कहा कि पुलिस का यह कृत्य तानाशाहीपूर्ण और अलोकतांत्रिक है। सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषी पुलिसकर्मियों एवं आदेश देने वाले अधिकारियों को निलंबित कर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। साथ ही घायल अधिवक्ताओं का समुचित दवा इलाज की व्यवस्था की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष जगजीवन सिंह एडवोकेट व संचालन पूर्व महामंत्री प्रदीप कुमार मौर्य एडवोकेट ने किया।</div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर प्रमुख रूप से अधिवक्ता राजेश कुमार यादव, पवन कुमार सिंह, रियाज खान, विनीत श्रीवास्तव, रामगुल्ली यादव, टीटू कुमार गुप्ता, शाहनवाज आलम खान, कामता प्रसाद यादव, आदर्श देव पांडेय,सुरेश सिंह कुशवाहा, नवीन पांडेय, विनीता, चंद्रकला गिरी, सरस्वती देवी आदि मौजूद रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:51:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधायक अमिताभ बाजपेई के घर के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा, परमट पहुंच कर किया पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">शहर में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब समाजवादी पार्टी विधायक अमिताभ बाजपेई के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। घर के आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन नियंत्रित कर दिया गया, जिससे इलाके में हलचल का माहौल बना रहा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक अमिताभ बाजपेई ने अपने आवास पर हवन-पूजन करने के बाद समर्थकों के साथ परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान परमट क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी नजर आई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि परमट स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179464/why-is-cruelty-against-women-not-stopping-even-after-delhis"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/1001915431.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शहर में उस समय सियासी हलचल तेज हो गई जब समाजवादी पार्टी विधायक अमिताभ बाजपेई के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। घर के आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर आवागमन नियंत्रित कर दिया गया, जिससे इलाके में हलचल का माहौल बना रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक अमिताभ बाजपेई ने अपने आवास पर हवन-पूजन करने के बाद समर्थकों के साथ परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान परमट क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी नजर आई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि परमट स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिलान्यास कार्यक्रम को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था। हाल ही में स्कूल के भूमि पूजन को लेकर भाजपा और सपा समर्थकों के बीच विवाद और झड़प की स्थिति भी सामने आई थी, जिसके बाद क्षेत्र में पुलिस सतर्कता बढ़ा दी गई थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक अमिताभ बाजपेई ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। वहीं विपक्षी नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई को “नजरबंदी जैसी स्थिति” करार दिया है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:47:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>नोएडा मजदूर आंदोलन में गिरफ्तार मजदूरो की रिहाई को लेकर दिशा छात्र संगठन ने राष्ट्रपति को भेजा  ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> दिशा छात्र संगठन ने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूर कार्यकर्ताओं एवं अन्य श्रमिकों की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और मजदूर कार्यकर्ता लगातार संयम और अहिंसक तरीके से अपनी मांगों को रख रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत, आंदोलन को हिंसक रूप देने का काम स्वयं पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया। संगठन के अनुसार, इस संबंध में ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177901/disha-student-organization-sent-memorandum-to-the-president-regarding-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260502-wa0066.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> दिशा छात्र संगठन ने नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए मजदूर कार्यकर्ताओं एवं अन्य श्रमिकों की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण था और मजदूर कार्यकर्ता लगातार संयम और अहिंसक तरीके से अपनी मांगों को रख रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत, आंदोलन को हिंसक रूप देने का काम स्वयं पुलिस प्रशासन द्वारा किया गया। संगठन के अनुसार, इस संबंध में ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक तंत्र के लोग मजदूरों के व्हाट्सएप समूहों में शामिल होकर उकसावे की भूमिका निभा रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिशा छात्र संगठन ने विशेष रूप से इस बात पर भी आपत्ति दर्ज की है कि मजदूर आंदोलन का समर्थन कर रहे यूनिवर्ता के वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा को लखनऊ स्थित जनचेतना पुस्तक प्रतिष्ठान से गिरफ्तार किया गया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संगठन ने अपनी प्रमुख मांगों में कहा है कि:</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">1. सभी गिरफ्तार मजदूरों और कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">2. पूरी घटना की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">3. दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;">4. मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिशा छात्र संगठन ने कहा कि यदि जल्द ही न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संगठन व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होग।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:35:37 +0530</pubDate>
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