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                <title>India global power - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>क्या पुतिन ने एक वाक्य में बदलती दुनिया का सच कह दिया?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180810/did-putin-tell-the-truth-of-the-changing-world-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/_113223674_gettyimages-1223723529.jpg.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास के कठिन दौर ही रिश्तों की असली परीक्षा लेते हैं। ऐसे समय में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत को </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया के सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक” बताना महज़ कूटनीतिक वाक्य नहीं है। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">को सेंट पीटर्सबर्ग में दिया गया उनका बयान ऐसे समय आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया नए राजनीतिक खाँचों में बँटती दिख रही है। प्रतिबंधों से घिरा रूस अपने विश्वसनीय मित्रों को पहचान रहा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति से अलग सम्मान पा रहा है। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए भारत पर पश्चिमी दबाव को “निष्फल और प्रतिकूल” बताया। यह केवल मित्रता की प्रशंसा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था में भारत के बढ़ते महत्व की स्वीकारोक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शब्द अक्सर परिस्थितियों का आईना होते हैं। पुतिन की भारत-प्रशंसा को भी इसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पश्चिमी प्रतिबंधों और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में भारत उन विरले देशों में रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार रूस से संबंध बनाए रखे। न उसने किसी दबाव के आगे झुकना स्वीकार किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न अपनी विदेश नीति का मार्ग बदला। पुतिन भलीभांति समझते हैं कि भारत जैसा मित्र केवल आर्थिक सहयोगी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीतिक संबल भी है। इसलिए उनका यह बयान प्रशंसा से अधिक उस विश्वास की अभिव्यक्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर रूस भविष्य की अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार देखता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पुतिन के बयान का एक संभावित</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">संकेत चीन की ओर भी है। रूस और चीन भले ही अटूट साझेदारी का दावा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनके संबंधों में रणनीतिक सतर्कता बनी रहती है। चीन की बढ़ती आर्थिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी और सैन्य शक्ति ने एशिया का शक्ति-संतुलन बदल दिया है। मॉस्को समझता है कि बीजिंग पर अत्यधिक निर्भरता उसकी स्वतंत्र भूमिका को सीमित कर सकती है। ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंध उसे संतुलन देते हैं। यही कारण है कि पुतिन ने ब्रह्मोस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा सहयोग और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी साझेदारी का विशेष उल्लेख किया। इसे मुख्य रूप से</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चीन के विरुद्ध संदेश न मानकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एशिया में शक्ति-संतुलन साधने की रूस की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान उसकी स्वतंत्रता है। यही कारण है कि रूस के राष्ट्रपति</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">व्लादिमीर पुतिन</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने भारत पर पड़ रहे अमेरिकी दबाव के बीच उसकी नीति की सराहना की। अमेरिका लंबे समय से रूस से जुड़े ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर भारत को अपने अधिक निकट लाने का प्रयास करता रहा है। इसके बावजूद नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि उसके निर्णय राष्ट्रीय हितों से संचालित होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी बाहरी दबाव से नहीं। पुतिन ने इसी आत्मविश्वास की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत जैसे उभरते राष्ट्र पर दबाव डालना उलटा पड़ सकता है। उनका संदेश केवल वाशिंगटन के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी दुनिया के लिए था कि भारत अब अपनी राह स्वयं तय करने वाली शक्ति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक शक्ति उसका संतुलित और स्वतंत्र दृष्टिकोण है। भारत एक ओर रूस से ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उपकरण और सामरिक सहयोग प्राप्त कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर अमेरिका के साथ तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश और सुरक्षा साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। चीन से प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यापारिक संबंध भी बने हुए हैं। यही संतुलन भारत को वैश्विक राजनीति में अलग पहचान देता है। पुतिन ने मोदी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों और तेज विकास दर की सराहना करते हुए संकेत दिया कि भारत अब किसी शक्ति-गुट का अनुसरण करने वाला देश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्व राजनीति का एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति केंद्र बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत-रूस संबंध अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी नई मजबूती हासिल कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष </span>2024-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">में दोनों देशों का व्यापार लगभग </span>68.7 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें रूसी तेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गैस और कोयले की प्रमुख भूमिका रही। पुतिन द्वारा </span>100 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य का उल्लेख इस बात का संकेत है कि रूस भारत को केवल मित्र नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक साझेदार मानता है। ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंतरिक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु सहयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा उत्पादन और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं को अपने विकास का महत्वपूर्ण आधार मान रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मित्रता जितनी गहरी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी चुनौतियां भी उतनी ही वास्तविक होती हैं। भारत-रूस संबंधों के सामने भी व्यापार असंतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भुगतान व्यवस्था की बाधाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रक्षा खरीद में भारत की नई प्राथमिकताएं और रूस-चीन की बढ़ती निकटता जैसे प्रश्न मौजूद हैं। इसलिए पुतिन ने भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने के प्रयासों का स्वागत किया। यह केवल एक टिप्पणी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रूस का यह संदेश था कि वह एशिया में स्थिरता और संतुलन का पक्षधर है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह यह भरोसा भी दिलाना चाहता है कि चीन से उसके संबंध भारत के हितों की कीमत पर नहीं हैं। भारत के लिए यह आश्वासन महत्वपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उसकी विदेश नीति का आधार केवल राष्ट्रीय हित हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विश्व राजनीति में कुछ वक्तव्य तत्कालीन घटनाओं से आगे जाकर भविष्य की दिशा भी बताते हैं। पुतिन का भारत को “भरोसेमंद साझेदार” कहना ऐसा ही संकेत है। यह केवल भारत-रूस संबंधों की निकटता नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आकार ले रही नई वैश्विक व्यवस्था की झलक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एकध्रुवीय प्रभुत्व का दौर पीछे छूट रहा है और नई शक्तियां उभर रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रिक्स का विस्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैश्विक दक्षिण का बढ़ता प्रभाव और भारत की भूमिका इसी परिवर्तन के संकेत हैं। रूस का यह सार्वजनिक विश्वास एक स्पष्ट संदेश देता है—भारत अब किसी समीकरण का हिस्सा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्वयं एक निर्णायक समीकरण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए पुतिन का यह बयान केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 18:20:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और हाइपरसोनिक युग की ओर निर्णायक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियों का स्थान अब अत्याधुनिक तकनीक ले रही है। इसी दिशा में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर तेज गति से काम शुरू कर दिया है। यह तकनीक भविष्य के युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकती है। डीआरडीओ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत को विश्व की अग्रणी सैन्य शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177895/indias-growing-military-power-and-decisive-step-towards-hypersonic-era"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/indian-army-2025-12-30-23-46-54.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियों का स्थान अब अत्याधुनिक तकनीक ले रही है। इसी दिशा में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर तेज गति से काम शुरू कर दिया है। यह तकनीक भविष्य के युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकती है। डीआरडीओ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत को विश्व की अग्रणी सैन्य शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना या उससे अधिक गति से उड़ान भरती हैं। यदि तुलना करें तो ब्रह्मास्त्र मिसाइल जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती हैं जबकि हाइपरसोनिक मिसाइलें सात हजार से बारह हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति प्राप्त कर सकती हैं। यह अंतर केवल गति का नहीं बल्कि रणनीतिक बढ़त का प्रतीक है। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय लगभग समाप्त हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक तकनीक दो प्रमुख रूपों में विकसित हो रही है। पहला है हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और दूसरा है हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल। ग्लाइड मिसाइल को रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंचाया जाता है और फिर यह बिना इंजन के लक्ष्य की ओर ग्लाइड करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है जिससे इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। दूसरी ओर हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती है जो हवा की ऑक्सीजन का उपयोग करके ईंधन जलाती है। इससे मिसाइल हल्की रहती है और लगातार उच्च गति बनाए रखती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीआरडीओ के अनुसार भारत ने स्क्रैमजेट तकनीक में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। लंबे समय तक परीक्षण सफल रहने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत इस जटिल तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है तो अगले पांच वर्षों में यह तकनीक भारतीय सेना का हिस्सा बन सकती है। इसके अलावा भारत लंबी दूरी की एंटी शिप मिसाइल पर भी काम कर रहा है जो मौजूदा प्रणालियों से अधिक तेज और प्रभावी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो रशिया और चाइना इस क्षेत्र में काफी आगे हैं। रूस के पास किंजल और जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जबकि चीन ने डीएफ जेडएफ प्रणाली को तैनात भी कर दिया है। युनाइटेड स्टेट इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत पीछे रहा है हालांकि वह भी तेजी से विकास कर रहा है। इस प्रतिस्पर्धा में भारत का प्रवेश न केवल सामरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह उसकी वैश्विक भूमिका को भी मजबूत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के मिसाइल कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण नाम अग्नि श्रृंखला है। प्रस्तावित अग्नि छह मिसाइल को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में देखा जा रहा है जिसकी मारक क्षमता दस हजार से बारह हजार किलोमीटर तक हो सकती है। यह एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी और अलग अलग लक्ष्यों को भेद सकती है। यह क्षमता भारत की प्रतिरोधक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि हम अतीत और वर्तमान की तुलना करें तो स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। पहले भारत मुख्य रूप से आयात पर निर्भर था। हथियार प्रणालियों के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता अधिक थी। अनुसंधान और विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी थी। लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति तेजी से बदली है।नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने रक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा भर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब भारत केवल अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा बल्कि रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात इसका प्रमुख उदाहरण है। इससे न केवल भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी रणनीतिक साझेदारी भी बढ़ रही है। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से नवाचार को भी प्रोत्साहन मिला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सैन्य आधुनिकीकरण के साथ साथ भारत ने अपनी रणनीतिक सोच में भी बदलाव किया है। अब केवल रक्षा नहीं बल्कि आक्रामक क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलें इसी सोच का हिस्सा हैं। इनकी मदद से भारत संभावित खतरों का पहले ही जवाब देने में सक्षम होगा। यह तकनीक न केवल युद्ध के समय बल्कि शांति बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत सैन्य क्षमता ही किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा निवारक होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस प्रगति के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। हाइपरसोनिक तकनीक अत्यंत जटिल और महंगी है। इसके विकास में उच्च स्तर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की होड़ भी बढ़ सकती है जिससे वैश्विक स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भारत को संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए विकास और कूटनीति दोनों पर ध्यान देना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह अब तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डीआरडीओ और अन्य संस्थानों की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि भारत जटिल से जटिल तकनीक को भी विकसित कर सकता है। युवाओं और वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है।आने वाले वर्षों में हाइपरसोनिक मिसाइलें वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश यह दर्शाता है कि वह केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि एक वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। मजबूत नेतृत्व स्पष्ट नीति और तकनीकी नवाचार के मेल से भारत ने रक्षा क्षेत्र में जो प्रगति की है वह आने वाले समय में और भी तेज होगी।अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत की सैन्य ताकत अब केवल संख्या पर नहीं बल्कि गुणवत्ता और तकनीक पर आधारित हो रही है। हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम इस बदलाव का प्रतीक है। यदि यही गति बनी रही तो भारत न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि वैश्विक मंच पर एक निर्णायक भूमिका भी निभाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:28:46 +0530</pubDate>
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