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                <title>global defense issues - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>तबाही का इंतजाम- बारूद के ढेर पर खड़ी है दुनिया </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">क्या दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी हो गई है? क्या तमाम विज्ञान की तरक्की तबाही का सामान जुटाने के लिए है? अब तो दुनिया के ताकतवर देशों ने कथित सामरिक संतुलन की आड़ में परमाणु   हथियारों समेत इतना जखीरा जुटा लिया है कि दुनिया का तीन बार खात्मा करने के लिए पर्याप्त है। यह समूची मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आखिर इंसान तरक्की के नाम पर हथियार और विनाश की दौड़ क्यों लगा रहा है? क्या दुनिया का भविष्य परमाणु हथियारों के साए में गिरवीं रखा जा रहा है? फिर सभ्यता संस्कृति मानवीयता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177889/arrangement-of-destruction-the-world-is-standing-on-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01631.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी हो गई है? क्या तमाम विज्ञान की तरक्की तबाही का सामान जुटाने के लिए है? अब तो दुनिया के ताकतवर देशों ने कथित सामरिक संतुलन की आड़ में परमाणु   हथियारों समेत इतना जखीरा जुटा लिया है कि दुनिया का तीन बार खात्मा करने के लिए पर्याप्त है। यह समूची मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आखिर इंसान तरक्की के नाम पर हथियार और विनाश की दौड़ क्यों लगा रहा है? क्या दुनिया का भविष्य परमाणु हथियारों के साए में गिरवीं रखा जा रहा है? फिर सभ्यता संस्कृति मानवीयता इंसानियत शांति और सहयोग की बात महज बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर महज बेमानी से अधिक कुछ नही है? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण परमाणु युद्ध का खतरा शीत युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में  इजरायल-ईरान तनाव , और चीन-अमेरिका के बीच सामंती होड़ ने दुनिया को एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा कर दिया है।रूस द्वारा अपनी रणनीतिक परमाणु ताकतों को उच्च सतर्कता पर रखना और पश्चिमी देशों को परमाणु धमकी देना इस खतरे का मुख्य कारण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उधर इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष जैसे 2026 में डिमोना परमाणु केंद्र के पास मिसाइल हमला ने सीधे परमाणु टकराव की आशंकाओं को जन्म दिया है।  स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, एक खतरनाक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो गई है, क्योंकि पारंपरिक शस्त्र नियंत्रण संधियां कमजोर हो रही हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष और उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम भी परमाणु तनाव को बढ़ाते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया में न्यूक्लियर हथियारों के फैलाव और आधुनिकीकरण में खतरनाक हद तक बढ़ौतरी हो रही है तथा इसके लिए विभिन्न देशों द्वारा नई रणनीति बनाई जा रही है। अमरीका और रूस के बीच 50 वर्ष पूर्व न्यूक्लियर हथियारों के परिसीमन और उन्हें समाप्त करने सम्बन्धी की गई संधि, जिसे 'न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी' (न्यू स्टार्ट) कहा जाता है, 2021 में 5 वर्ष के लिए बढ़ाने के बाद अब 5 फरवरी को समाप्त हो चुकी है तथा इसे आगे बढ़ाने की दिशा में कोई बात नहीं की जा रही।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, यह संधि किए जाने के बाद काफी न्यूक्लियर हथियार समाप्त कर दिए गए थे,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परंतु अब नए हालात में अमरीका और रूस भी और न्यूक्लियर बम बनाना चाहते हैं, सऊदी अरब और तुर्की भी इसके लिए इच्छुक हैं तथा यूरोप में भी अब यह अहसास बढ़ रहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए और न्यूक्लियर हथियार बनाने चाहिएं। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अमरीका अपनी लम्बी दूरी की मिसाइल परीक्षण प्रणाली पर अरबों डॉलर रकम खर्च कर चुका है परंतु इसके बावजूद उसे टिकाऊ सुरक्षा प्राप्त नहीं हो सकी और अभी तक अमरीका हथियारों के निर्माण और फिर उन्हें समाप्त करने पर करदाताओं के 10 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। यह इतनी रकम है कि इससे गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट का ज्यादातर हिस्सा खरीदा जा सकता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें इस समय स्थिति यह है कि डोनाल्ड ट्रम्प के अंतर्गत अमरीका कोई संधि नहीं करना चाहता और यह बात तो रूस के अनुकूल ही है कि वह न्यूक्लियर हथियार बनाए। परंतु इसमें हानि किसकी है? इसमें हानि सारी दुनिया की है कि इतना धन खर्च करके न्यूक्लियर हथियार बनाने के बाद जिस स्थान पर उनका परीक्षण किया जाएगा, उस स्थान और उसके आसपास के लोगों का भारी नुकसान होगा।दरअसल पिछली बार रूस ने जहां न्यूक्लियर हथियारों का परीक्षण किया था, उसके आसपास रहने वाले लोगों को वैसी ही समस्याओं से जूझना पड़ा था, जैसी समस्याओं और बीमारियों का सामना चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में लीकेज के समय लोगों को करना पड़ा था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कोई देश ऐसा करने के लिए भड़क उठे तो यही समस्याएं पैदा होंगी। कोल्ड वॉर के बाद अब पहली बार देश अपने हथियारों का जखीरा और इस्तेमाल के लिए तैयार वॉरहेड  बढ़ा रहे हैं। 2026 की शुरुआत तक 9 न्यूक्लियर हथियार वाले देशों के पास लगभग 12,187 वॉरहेड थे और इनकी बढ़ती संख्या को हाई अलर्ट पर रखा गया है।एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कुल परमाणु हथियारों  का जखीरा लगभग 12,100 से 12,300 के बीच है।इन हथियारों का वितरण और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है दुनिया के लगभग 90% परमाणु हथियार केवल दो देशों - रूस लगभग 5,500 और अमेरिका लगभग 5,000 के पास हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अन्य देश: चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान, भारत, इज़राइल और उत्तर कोरिया के पास शेष 10% हथियार हैं। चीन तेजी से अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है, जिसके 2030 तक 1,000 से अधिक होने का अनुमान है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास लगभग 180 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की कुल संख्या में कमी आ रही है क्योंकि रूस-अमेरिका पुराने हथियार नष्ट कर रहे हैं, लेकिन परिचालन में तैनात हथियारों की संख्या बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यूक्लियर हथियारों से सम्पन्न लगभग सभी 9 देश अपने वर्तमान मौजूदा हथियारों को अपग्रेड करने के साथ-साथ इनमें नए एवं अधिक उन्नत संस्करण वाले हथियारों की वृद्धि कर रहे हैं। हालांकि इसराईल के पास भी काफी न्यूक्लियर हथियार हैं परंतु इनकी घोषणा न करने के कारण इसराईल को इनमें नहीं गिना जाता।इस समय अमरीका व रूस के पास ही दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत न्यूक्लियर हथियार हैं। चीन भी अपने हथियारों का भंडार काफी बढ़ाने के अलावा अपने एडवांस्ड डिलीवरी सिस्टम की टैस्टिंग भी कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन हालात में ग्लोबल न्यूक्लियर रूलबुक कमजोर हो रही है और उक्त संधि चुनौतियों का सामना कर रही है। सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडल ईस्ट तनाव सहित बढ़ते झगड़ों के कारण न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल का खतरा पिछले एक दशक के दौरान इस समय अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है और इस होड़ के फैलने का खतरा चिंताजनक मोड़ पर है। इसका कारण यह है कि दुनिया के वर्तमान हालात में अधिक देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज ए.आई. (कृत्रिम बुद्धिमता) के परिणामस्वरूप भी तकनीकी खतरे बढ़ गए हैं और नए हथियारों के हाइपरसोनिक डिलीवरी सिस्टम के इंटीग्रेशन से सैन्य मामलों पर फैसले लेने के लिए उपलब्ध समय कम हो रहा है, जिससे अचानक या तेजी से न्यूक्लियर हमले का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में इस संधि का नवीकरण न किए जाने की स्थिति में दुनिया को न्यूक्लियर हथियारों से होने वाली एक और तबाही के लिए तैयार रहना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:15:40 +0530</pubDate>
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