<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/8391/tiranga" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>tiranga - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/8391/rss</link>
                <description>tiranga RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्वतन्त्रता का दिवस सुहाना, विकृतियों से मुक्त बने भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">पन्द्रह अगस्त केवल ध्वजारोहण करने, राष्ट्रगान गाने और स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करने का दिन नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि जिस स्वतंत्रता के लिए असंख्य देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उस स्वतंत्रता को हमने कितना सार्थक बनाया है और विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें अभी कितना आगे जाना है। वर्ष 1947 में देश राजनीतिक पराधीनता से मुक्त हुआ था, लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब भारत सामाजिक विकृतियों, आर्थिक विषमता, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, जातिवाद, संकीर्णता, बेरोजगारी, हिंसा और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से भी मुक्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गुलामी की पीड़ा को वही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185285/happy-independence-day-india-should-be-free-from-distortions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/10021511681.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">पन्द्रह अगस्त केवल ध्वजारोहण करने, राष्ट्रगान गाने और स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करने का दिन नहीं है। यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि जिस स्वतंत्रता के लिए असंख्य देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उस स्वतंत्रता को हमने कितना सार्थक बनाया है और विकसित भारत के निर्माण के लिए हमें अभी कितना आगे जाना है। वर्ष 1947 में देश राजनीतिक पराधीनता से मुक्त हुआ था, लेकिन स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब भारत सामाजिक विकृतियों, आर्थिक विषमता, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, जातिवाद, संकीर्णता, बेरोजगारी, हिंसा और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से भी मुक्त हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुलामी की पीड़ा को वही समझ सकता है जिसने पराधीनता का जीवन देखा हो। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने केवल सत्ता परिवर्तन के लिए संघर्ष नहीं किया था। उनके सामने एक ऐसे भारत का सपना था, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति सम्मान के साथ जीवन जी सके, न्याय सबको मिले, अवसर सबके लिए उपलब्ध हों और राष्ट्र अपनी पहचान तथा आत्मसम्मान के साथ विश्व में खड़ा हो। इसलिए स्वतंत्रता दिवस पर हमें केवल अतीत का गौरवगान नहीं करना चाहिए, बल्कि वर्तमान की उपलब्धियों और कमियों का निष्पक्ष मूल्यांकन भी करना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक क्षेत्रों में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर प्रत्येक भारतीय को गर्व होना चाहिए। जिस देश को आजादी के समय गरीबी, अशिक्षा, खाद्यान्न संकट, कमजोर औद्योगिक आधार और सीमित संसाधनों जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, वही भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न के लिए बाहरी निर्भरता से बाहर निकाला। सिंचाई, उर्वरक, कृषि अनुसंधान और आधुनिक तकनीक ने भारतीय कृषि को नई शक्ति दी। आज भारत कृषि उत्पादन के साथ-साथ डेयरी, मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">औद्योगिक विकास ने भी स्वतंत्र भारत की तस्वीर बदली है। आज देश में इस्पात, ऑटोमोबाइल, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, ऊर्जा, रक्षा उत्पादन और अनेक आधुनिक उद्योगों का व्यापक विस्तार हुआ है। बड़े-बड़े बांध, बिजली परियोजनाएं, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे नेटवर्क, बंदरगाह, हवाई अड्डे और महानगरों की आधुनिक परिवहन व्यवस्था देश की विकास यात्रा के प्रमाण हैं। कभी जिन वस्तुओं और तकनीकों के लिए भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, उनमें से अनेक का निर्माण आज देश में हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अंतरिक्ष यात्रा तो स्वतंत्रता के बाद की सबसे प्रेरणादायक उपलब्धियों में से एक है। सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुआ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम आज उपग्रह प्रक्षेपण, दूरसंचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी और वैज्ञानिक अनुसंधान से लेकर चंद्रमा तथा मंगल तक पहुंच चुका है। चंद्रयान अभियानों ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को विश्व के सामने स्थापित किया। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा का नया परिचय दिया। आदित्य-एल1 जैसे मिशन भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता का प्रमाण हैं। अब भारत केवल अंतरिक्ष में पहुंचने वाला देश नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाला राष्ट्र है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विज्ञान और तकनीक के साथ डिजिटल क्षेत्र में भी भारत ने असाधारण परिवर्तन देखा है। मोबाइल संचार, इंटरनेट, डिजिटल भुगतान और डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं ने सामान्य नागरिक के जीवन को प्रभावित किया है। गांवों तक इंटरनेट और बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ी है। डिजिटल भुगतान ने आर्थिक लेन-देन की संस्कृति बदल दी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और आधुनिक विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में भारत अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन बताता है कि भारत केवल परंपरा का देश नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक को अपनाने वाला राष्ट्र भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश की सुरक्षा के क्षेत्र में भी स्वतंत्र भारत ने लंबी यात्रा तय की है। 1962, 1965 और 1971 के युद्धों से लेकर कारगिल तक भारतीय सेनाओं ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। आज भारत की थल सेना, वायु सेना और नौसेना अत्याधुनिक तकनीक तथा स्वदेशी सैन्य उपकरणों से अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। स्वदेशी लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल प्रणालियां, युद्धपोत, पनडुब्बियां और विभिन्न रक्षा उपकरण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहे हैं। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विश्व मंच पर भारत की बढ़ती साख भी स्वतंत्रता के बाद की उपलब्धियों का महत्वपूर्ण अध्याय है। भारत आज अनेक वैश्विक मंचों पर अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखता है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, वैश्विक स्वास्थ्य, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। विश्व के अनेक देश भारत को एक बड़े बाजार के साथ-साथ जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में देखते हैं। भारतीय मूल के लोग भी दुनिया के विभिन्न देशों में अपनी प्रतिभा से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इन उपलब्धियों के बीच यह प्रश्न भी खड़ा होता है कि क्या विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचा है? क्या हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है? क्या प्रत्येक युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप रोजगार और अवसर मिल रहे हैं? क्या गांव और शहर के बीच सुविधाओं का अंतर कम हुआ है? क्या महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित हुआ है? क्या भ्रष्टाचार, अपराध और सामाजिक भेदभाव से हम पूरी तरह मुक्त हो पाए हैं? इन प्रश्नों से आंखें मूंदना स्वतंत्रता दिवस की भावना के साथ न्याय नहीं होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकसित राष्ट्र केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आधुनिक तकनीक से नहीं बनता। विकसित राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसके नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से होती है। शिक्षा उसकी पहली आधारशिला है। ऐसा शिक्षा तंत्र चाहिए जो केवल परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थी न बनाए, बल्कि वैज्ञानिक सोच, चरित्र, संवेदनशीलता, अनुशासन और राष्ट्रबोध से संपन्न नागरिक तैयार करे। स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें आर्थिक स्थिति किसी व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। गांवों में भी गुणवत्तापूर्ण अस्पताल, विद्यालय, इंटरनेट, परिवहन और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक विकास के साथ रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना होगा। भारत की युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, लेकिन यही शक्ति तभी राष्ट्रनिर्माण में बदल सकती है जब युवाओं को कौशल, शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त अवसर मिलें। केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय उद्यमिता, स्टार्टअप, विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योग, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करने होंगे। युवाओं को नौकरी खोजने वाला ही नहीं, रोजगार देने वाला बनने की दिशा में भी प्रेरित करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकसित भारत का एक महत्वपूर्ण आधार सामाजिक समरसता है। जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति देश की शक्ति को कमजोर करती है। विविधता भारत की पहचान है, लेकिन विविधता का अर्थ विभाजन नहीं होना चाहिए। हमें ऐसी राष्ट्रीय चेतना विकसित करनी होगी जिसमें व्यक्ति अपनी भाषा, परंपरा और क्षेत्रीय पहचान पर गर्व करे, लेकिन सबसे पहले स्वयं को भारतीय माने। सामाजिक न्याय का उद्देश्य समाज को स्थायी खांचों में बांटना नहीं, बल्कि वंचित व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर देना होना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साम्प्रदायिक सद्भाव भी राष्ट्र की प्रगति की अनिवार्य शर्त है। धर्म व्यक्ति की आस्था का विषय है, उसे राजनीतिक संघर्ष और सामाजिक वैमनस्य का हथियार नहीं बनने देना चाहिए। भारत की शक्ति उसकी बहुलता में है। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च और अन्य आस्था-स्थल तभी सुरक्षित रहेंगे, जब समाज में परस्पर सम्मान और विश्वास कायम रहेगा। किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा और अफवाह विकास की राह को रोकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार और राजनीतिक स्वार्थ से मुक्ति भी विकसित भारत के लिए आवश्यक है। सत्ता चाहे किसी भी दल की हो, उसका मूल उद्देश्य जनसेवा होना चाहिए। लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की व्यवस्था है। राजनीतिक दलों और नेताओं को अपने आचरण से ऐसी मिसाल प्रस्तुत करनी होगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां सार्वजनिक जीवन को सम्मान और सेवा का क्षेत्र समझें। राजनीति में विचार, सिद्धांत, त्याग और राष्ट्रहित की पुनर्स्थापना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं की भूमिका इस परिवर्तन में सबसे महत्वपूर्ण है। युवा केवल विरोध, आंदोलन या सोशल मीडिया की बहस तक सीमित न रहें। वे विज्ञान, शिक्षा, खेल, कृषि, उद्यमिता, प्रशासन, सेना, तकनीक और सामाजिक सेवा हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उपयोग करें। नशे, हिंसा, अंधानुकरण और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से स्वयं को बचाते हुए वे राष्ट्र के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं। जिस देश के युवाओं में अनुशासन, परिश्रम, ईमानदारी और नवाचार की भावना जाग जाती है, उस देश को आगे बढ़ने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता केवल विकसित भारत का सपना देखने की नहीं, बल्कि उसके लिए राष्ट्रीय संकल्प लेने की है। हमें ऐसा भारत बनाना है जिसमें किसान समृद्ध हो, श्रमिक सम्मानित हो, युवा सक्षम हो, महिला सुरक्षित और आत्मनिर्भर हो, बच्चे शिक्षित हों, बुजुर्ग सम्मान के साथ जीवन जीएं और गरीब व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से बाहर न रहे। हमें ऐसा भारत बनाना है जो आर्थिक रूप से शक्तिशाली होने के साथ नैतिक रूप से भी मजबूत हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं है। जब तक व्यक्ति अज्ञान, भय, नशे, गरीबी, भेदभाव और अन्याय से मुक्त नहीं होता, तब तक स्वतंत्रता की यात्रा अधूरी है। इसलिए इस पन्द्रह अगस्त को तिरंगे के सामने हमें केवल देशभक्ति के नारे नहीं लगाने हैं, बल्कि अपने भीतर कर्तव्यबोध जगाना है। हमें यह संकल्प लेना है कि हम अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझेंगे, कानून का सम्मान करेंगे, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेंगे, प्रकृति को बचाएंगे, सामाजिक सद्भाव बनाए रखेंगे और अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से योगदान देंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें आजाद भारत सौंपा था। अब विकसित, समृद्ध, सुरक्षित, शिक्षित, स्वस्थ, आत्मनिर्भर और संस्कारवान भारत अगली पीढ़ी को सौंपना हमारी जिम्मेदारी है। पन्द्रह अगस्त तभी वास्तव में सुहाना बनेगा, जब तिरंगे की ऊंचाई के साथ हमारे चरित्र की ऊंचाई भी बढ़ेगी। राष्ट्र केवल सरकारों से नहीं बनता, राष्ट्र नागरिकों के चरित्र, श्रम और संकल्प से बनता है। इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस पर हमारा संकल्प स्पष्ट होना चाहिए कि हम भारत को केवल विकसित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विकसित चेतना वाला राष्ट्र बनाएंगे। यही स्वतंत्रता के अमृत पर्व की सच्ची सार्थकता होगी और यही उन अनगिनत बलिदानियों के प्रति हमारी वास्तविक श्रद्धांजलि भी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/185285/happy-independence-day-india-should-be-free-from-distortions</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/185285/happy-independence-day-india-should-be-free-from-distortions</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 19:19:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/10021511681.jpg"                         length="52027"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वतंत्रता से विकसित भारत की ओर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का भी दिन है। स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई; इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान निहित है। इसलिए प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आज़ादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक सतत जिम्मेदारी भी है। वर्ष 2026 का स्वतंत्रता दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185283/from-independence-to-developed-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001025681.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का भी दिन है। स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई; इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों का त्याग, संघर्ष और बलिदान निहित है। इसलिए प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि आज़ादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि एक सतत जिम्मेदारी भी है। वर्ष 2026 का स्वतंत्रता दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 की तैयारी कर रहा है।<br /><br />पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हुई है। डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और आधारभूत संरचना के विकास ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान प्रदान की है। आज भारतीय नवाचार विश्व के अनेक देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी नवाचारों ने शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।<br /><br />भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है। करोड़ों युवा देश के वर्तमान और भविष्य दोनों हैं। यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, अनुसंधान के अवसर और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध होंगे तो भारत विश्व का सबसे सक्षम ज्ञान-आधारित राष्ट्र बन सकता है। नई शिक्षा नीति ने बहुआयामी शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार पर बल दिया है, लेकिन विद्यालयों की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा में अनुसंधान, डिजिटल संसाधनों की समान उपलब्धता तथा उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण अभी भी व्यापक सुधार की अपेक्षा रखते हैं। शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की प्रक्रिया भी है।<br /><br />रोजगार और उद्यमिता आज भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, स्टार्टअप, कृषि आधारित उद्योग तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। युवाओं को नौकरी खोजने के साथ-साथ रोजगार देने वाला उद्यमी बनने के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।<br /><br />कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार बनी हुई है। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट, बढ़ती लागत और बाजार की चुनौतियाँ किसानों के सामने नई कठिनाइयाँ उत्पन्न कर रही हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, वैज्ञानिक भंडारण, कृषि प्रसंस्करण और डिजिटल कृषि सेवाएँ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं। खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण विकसित भारत की अनिवार्य शर्त है।<br /><br />स्वास्थ्य क्षेत्र में भी निरंतर सुधार की आवश्यकता है। आधुनिक अस्पतालों का विस्तार, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा की पहुँच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विकास तथा चिकित्सा अनुसंधान में निवेश भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं। स्वस्थ नागरिक ही उत्पादक समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।<br /><br />पर्यावरण संरक्षण आज राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग बन चुका है। बढ़ता तापमान, प्रदूषण, जल संकट, जैव विविधता का क्षरण और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएँ स्पष्ट संकेत देती हैं कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। अक्षय ऊर्जा, हरित परिवहन, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और कचरा प्रबंधन जैसे प्रयासों को जनभागीदारी से जोड़ना होगा। प्रकृति की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।<br /><br />भारत ने रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। आधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा और समुद्री क्षमता का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में तकनीकी क्षमता और रणनीतिक दूरदृष्टि किसी भी राष्ट्र की शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।<br /><br />भारतीय विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान ने विश्व में नई प्रतिष्ठा अर्जित की है। वैज्ञानिकों की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और प्रतिभा से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत करेंगे। अनुसंधान आधारित अर्थव्यवस्था ही भविष्य के भारत की वास्तविक पहचान बनेगी।<br /><br />लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। संविधान ने प्रत्येक नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराया है। मतदान करना, कानून का सम्मान करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, करों का ईमानदारी से भुगतान करना, सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्वस्थ लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब नागरिक जागरूक, उत्तरदायी और तथ्य आधारित निर्णय लेने वाले हों।<br /><br />महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के विकास की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करती है। शिक्षा, विज्ञान, सेना, न्यायपालिका, प्रशासन, खेल, राजनीति और उद्यमिता जैसे प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी क्षमता सिद्ध की है। समान अवसर, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन महिलाओं के सशक्तिकरण की आधारशिला हैं। जब समाज की आधी आबादी समान रूप से विकास में सहभागी बनेगी, तभी राष्ट्र की प्रगति संतुलित और स्थायी होगी।<br /><br />भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी पहचान है। विभिन्न भाषाएँ, परंपराएँ, कला, साहित्य, संगीत और लोक संस्कृति भारतीय सभ्यता को विशिष्ट बनाते हैं। आधुनिकता और वैश्वीकरण के इस युग में अपनी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए वैज्ञानिक सोच और नवाचार को अपनाना ही संतुलित विकास का मार्ग है। विविधता में एकता भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है।<br /><br />डिजिटल युग ने नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत की हैं। फर्जी समाचार, साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी और भ्रामक सूचनाओं से बचना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। डिजिटल साक्षरता, तथ्य आधारित सोच और जिम्मेदार अभिव्यक्ति लोकतांत्रिक समाज की नई आवश्यकता बन चुकी है। तकनीक का उपयोग समाज को जोड़ने और सशक्त बनाने के लिए होना चाहिए, न कि भ्रम और विभाजन फैलाने के लिए।<br /><br />स्वतंत्रता दिवस केवल अतीत के गौरव का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण का संकल्प भी है। विकसित भारत का सपना केवल सरकारों की योजनाओं से पूरा नहीं होगा। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करेगा, तब भारत न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध होगा, बल्कि सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरणीय संतुलन और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर विश्व के लिए प्रेरणास्रोत राष्ट्र बनेगा।<br /><br />15 अगस्त 2026 हमें यही संदेश देता है कि स्वतंत्रता केवल इतिहास की उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारी भी है। आइए, हम ऐसा भारत बनाने का संकल्प लें जहाँ विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ हों, विज्ञान और नवाचार राष्ट्र की प्रगति का आधार बनें, पर्यावरण सुरक्षित रहे, लोकतंत्र मजबूत हो और प्रत्येक नागरिक गर्व से कह सके कि वह एक ऐसे भारत का हिस्सा है जो समृद्ध, आत्मनिर्भर, समावेशी और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण है। यही स्वतंत्रता दिवस का वास्तविक संदेश है और यही उन अमर बलिदानियों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने हमें स्वतंत्र भारत का अमूल्य उपहार दिया।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>अवनीश कुमार गुप्ता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/185283/from-independence-to-developed-india</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/185283/from-independence-to-developed-india</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 19:10:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/1001025681.jpg"                         length="54918"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गणतंत्र दिवस है न्यारा...! </title>
                                    <description><![CDATA[<div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>छहत्तरवॉ ‘गणतंत्र‘ खुशी मनाये,</div>
<div>उन शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायें।</div>
<div>1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ,</div>
<div>पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद!</div>
<div>झंडा फहराया और दे दी सौगात।</div>
<div>  </div>
<div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>ये वहींे ऐतिहासिक था पल हमारा, </div>
<div>जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।</div>
<div>ये विश्व का हैं सबसे बड़ा संविधान,</div>
<div>आज भारत में हैं लोकतंत्र ही महान!</div>
<div>देश में होते रहते है कई अनुसंधान।</div>
<div>  </div>
<div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>समरसता, विश्वशांति की ये धरा,</div>
<div>प्रगतिपथ व मानवता</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147817/republic-day-is-unique%C2%A0"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/images.jpg" alt=""></a><br /><div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>छहत्तरवॉ ‘गणतंत्र‘ खुशी मनाये,</div>
<div>उन शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायें।</div>
<div>1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ,</div>
<div>पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद!</div>
<div>झंडा फहराया और दे दी सौगात।</div>
<div> </div>
<div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>ये वहींे ऐतिहासिक था पल हमारा, </div>
<div>जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।</div>
<div>ये विश्व का हैं सबसे बड़ा संविधान,</div>
<div>आज भारत में हैं लोकतंत्र ही महान!</div>
<div>देश में होते रहते है कई अनुसंधान।</div>
<div> </div>
<div>आओ फिर लहरायें तिरंगा प्यारा,</div>
<div>अपना ये गणतंत्र दिवस है न्यारा।</div>
<div>समरसता, विश्वशांति की ये धरा,</div>
<div>प्रगतिपथ व मानवता पर है खरा।</div>
<div>तन, मन, धन हुआ है सब पावन,</div>
<div>आओं करें सभी शहीदों को नमन।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>साहित्य/ज्योतिष</category>
                                            <category>कविता/कहानी</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/147817/republic-day-is-unique%C2%A0</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/147817/republic-day-is-unique%C2%A0</guid>
                <pubDate>Fri, 24 Jan 2025 17:57:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/images.jpg"                         length="10922"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटिश हुकूमत में गोला थाने पर 1942 में लहरा उठा तिरंगा झंडा : बृजनाथतिवारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>गोलाबाज़ार  गोरखपुर । </strong>1942 में ब्रितानी हुकूमत में अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान गोला थाना पर तिरंगा फहराने वाले पण्डित राम लखन शुक्ल,  लोगों की स्मृतियों में तो जीवन्त हैं। लेकिन आजाद भारत में थाने पर शासन- प्रशासन ने उन्हें शुरू से ही बिसार दिया। यही कारण है कि सीने पर पिस्तौल सटी होने के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत में जिस गोला थाने पर उन्होंने तिरंगा फहराया, वहां उस ऐतिहासिक घटना का एक स्मृति पट्ट तक नहीं है।</div>
<div>  </div>
<div>    गोला- कौड़ीराम मार्ग पर गोला से चार किमी उत्तर स्थित ग्राम ककरही में एक जमींदार परिवार में जन्मे पण्डित राम</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>आजाद</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/147465/tricolor-flag-hoisted-at-gola-police-station-during-british-rule"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-01/p----4.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोलाबाज़ार  गोरखपुर । </strong>1942 में ब्रितानी हुकूमत में अंग्रेजों भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान गोला थाना पर तिरंगा फहराने वाले पण्डित राम लखन शुक्ल,  लोगों की स्मृतियों में तो जीवन्त हैं। लेकिन आजाद भारत में थाने पर शासन- प्रशासन ने उन्हें शुरू से ही बिसार दिया। यही कारण है कि सीने पर पिस्तौल सटी होने के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत में जिस गोला थाने पर उन्होंने तिरंगा फहराया, वहां उस ऐतिहासिक घटना का एक स्मृति पट्ट तक नहीं है।</div>
<div> </div>
<div>  गोला- कौड़ीराम मार्ग पर गोला से चार किमी उत्तर स्थित ग्राम ककरही में एक जमींदार परिवार में जन्मे पण्डित राम लखन शुक्ल जब इण्टर द्वितीय वर्ष के छात्र थे, तभी स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। उन दिनों राष्ट्रीय चेतना का केन्द्र बिन्दु गोला थाना क्षेत्र का खोपापार गांव हुआ करता था। पण्डित राम लखन शुक्ल खोपापार राष्ट्रीय विद्यालय में अध्यापक नियुक्त हो गए। 1939 में इसी विद्यालय के प्रधानाचार्य बना दिए गए। 1940 में मित्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय केशभान राय द्वारा ककरही में स्थापित आनन्द विद्या पीठ इण्टर कॉलेज में अध्यापन करने लगे।</div>
<div> </div>
<div> 6 अप्रैल- 1941 में कांग्रेस की डिस्ट्रिक्ट कमेटी से आज्ञा लेकर राम लखन शुक्ल, रामबचन त्रिपाठी और सीताराम नायक ने विद्यालय के पीछे बागीचे में सत्याग्रह शुरू कर दिया। तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तीनों वीर सपूतों को एक-एक वर्ष का सश्रम कारावास और 100 रुपए का जुर्माना सुनाया गया।</div>
<div> सीने पर पिस्तौल की नाल सटी होने पर भी नहीं डरे और थाने पर फहरा दिया तिरंगा गोला के थानेदार नुरुल होदा ने श्री शुक्ल, उनके साथियों रामबचन त्रिपाठी और सीताराम नायक के  सीने पर पिस्तौल तान दिया। उन्होंने सीने पर पिस्तौल की नाल सटी होने के बाद भी जान की  परवाह किए बिना थाने पर तिरंगा पहरा दिया। वह गिरफ्तार कर लिए गए। सभी के पैतृक निवास अंग्रेजों ने जला दिया।  माता-पिता को यातनाएं दी गई। तीनों 1944-45 में रिहा कर दिए गए। </div>
<div> </div>
<div><strong>आजाद भारत में शुरू हुआ राजनैतिक सफर,1960 में बने गोला के प्रमुख</strong></div>
<div> आजाद भारत में पण्डित रामलखन शुक्ल का राजनैतिक सफर शुरू हुआ लेकिन ओहदे से राजनीति की शुरुआत  1960 में गोला के प्रमुख चुने जाने से हुई। 1962-67 तक भौवापार विधान सभा के विधायक रहे। विधान सभा का नाम बदला तो कौड़ीराम विधान सभा से 1969- 74 तक कौड़ीराम के विधायक रहे। इस बीच तत्कालीन प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी ने उन्हें नैनीताल में 18 एकड़ भूमि दीं। इसे उन्होंने सरकार को दान कर दिया। 19 नवम्बर-1974 को इस वीर सपूत का देहावसान हो गया।</div>
<div> </div>
<div>  दर्द होता है उपेक्षा से, थाने पर नहीं है ऐतिहासिक क्षण की कोई स्मृति  देश को आजाद कराने के लिए कई बार जेल यात्रा करने वाले इस वीर सपूत की याद लोगों के दिलों में तो है लेकिन गोला थाना पर उनके द्वारा फहराए गए तिरंगे के ऐतिहासिक क्षण का गवाह कुछ नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की यह अनदेखी उनके परिवारीजनों को तो पीड़ा पहुंचाती ही है, क्षेत्र के लोग भी हुक्मरानों और राजनीतिकों की इस उपेक्षा से मर्माहत हैं। पण्डित रामलखन शुक्ल के तीन पुत्र हुए।</div>
<div> </div>
<div>इनमें से एक चन्द्रशेखर शुक्ल धुरियापार के विधायक चुने गए। अब वह नहीं हैं। स्व चन्द्रशेखर शुक्ल के बड़े पुत्र सरोज रंजन शुक्ल आनन्द विद्यापीठ इण्टर कॉलेज- ककरही में प्रवक्ता हैं। कॉलेज के गेट के दाहिने तरफ  प्रदेश के तत्कालीन काबीना मंत्री स्व मार्कण्डेय चन्द ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामलखन शुक्ल व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी केशभान राय की आदम कद प्रतिमा स्थापित कराई है।</div>
<div> </div>
<div>प्रतिमा स्थापित करने की मांग वर्षो बाद भी अधूरा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामलखन शुक्ल के पौत्र सरोज रंजन शुक्ल बताते हैं कि नौसढ़ चौराहे पर पण्डित रामलखन शुक्ल की प्रतिमा स्थापित कराने के लिए 6 अगस्त- 2010 को शासन को पत्र भेजा था लेकिन अनदेखी कर दी गई। शहीदों के मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले बतन पर मरने वालों का यही वाकी निशा होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/147465/tricolor-flag-hoisted-at-gola-police-station-during-british-rule</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/147465/tricolor-flag-hoisted-at-gola-police-station-during-british-rule</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 17:52:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-01/p----4.jpg"                         length="145858"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>गोण्डा।</strong></p>
<p>    खरगूपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भगवान दीन पुरवा के व्यक्ति के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था जिसकी सूचना  पुलिस को मिली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके गिरफ्तार कर किया।</p>
<p>  प्राप्त जानकारी के अनुसार खरगूपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत भगवान पुरवा के निवासी उमानाथ शुक्ला तथा शिव शंकर पाण्डेय के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान करने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। </p>
<p>सोशल मीडिया पर फोटो को खरगूपुर पुलिस ने संज्ञान</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133935/photo-of-insulting-the-national-flag-went-viral-on-social"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/राष्ट्रीय-ध्वज-का-अपमान-करने-का-फोटो-सोशल-मीडिया-पर-वायरल-आरोपी-को-पुलिस-ने-किया-गिरफ्तार .jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>गोण्डा।</strong></p>
<p>  खरगूपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत भगवान दीन पुरवा के व्यक्ति के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था जिसकी सूचना  पुलिस को मिली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके गिरफ्तार कर किया।</p>
<p> प्राप्त जानकारी के अनुसार खरगूपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत भगवान पुरवा के निवासी उमानाथ शुक्ला तथा शिव शंकर पाण्डेय के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान करने की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। </p>
<p>सोशल मीडिया पर फोटो को खरगूपुर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। खरगूपुर थानाध्यक्ष दिनेश सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल फोटो को संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया गया तथा विधिक कार्रवाई की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>सोशल मीडिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/133935/photo-of-insulting-the-national-flag-went-viral-on-social</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/133935/photo-of-insulting-the-national-flag-went-viral-on-social</guid>
                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 22:20:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-08/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B0%C2%A0.jpg"                         length="193378"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हरिहर तीर्थ से हजारों बाइकों पर आज निकलेगी तिरंगा यात्रा।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>  </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</strong></div>
<div><strong>कटनी। </strong>  स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोमवार को विजयराघवगढ़ स्थित हरिहर तीर्थ स्थल से हजारों बाइकों पर सवार युवक तिरंगा यात्रा निकालेंगे। हर घर तिरंगा अभियान के तहत यह तिरंगा यात्रा निकलेगी। युवा समाजसेवी यश पाठक की अगुवाई में बाइक यात्रा में 6 हजार लोग  शामिल होंगे। यह यात्रा देश प्रेम और आजादी के अमृत महोत्सव के तहत छह मंडलों में देश प्रेम की भावना को जागृत करेगी। तिरंगा बाइक यात्रा विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्रवासियों के लिए जनजागरण करेगी। यात्रा की शुरुवात हरिहर तीर्थ स्थल से प्रारंभ होकर विजयराघवगढ़ किले पर समाप्त होगी।</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133559/tiranga-yatra-will-start-on-thousands-of-bikes-from-harihar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/img-20230813-wa0165.jpg" alt=""></a><br /><div> </div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो</strong></div>
<div><strong>कटनी। </strong> स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोमवार को विजयराघवगढ़ स्थित हरिहर तीर्थ स्थल से हजारों बाइकों पर सवार युवक तिरंगा यात्रा निकालेंगे। हर घर तिरंगा अभियान के तहत यह तिरंगा यात्रा निकलेगी। युवा समाजसेवी यश पाठक की अगुवाई में बाइक यात्रा में 6 हजार लोग  शामिल होंगे। यह यात्रा देश प्रेम और आजादी के अमृत महोत्सव के तहत छह मंडलों में देश प्रेम की भावना को जागृत करेगी। तिरंगा बाइक यात्रा विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्रवासियों के लिए जनजागरण करेगी। यात्रा की शुरुवात हरिहर तीर्थ स्थल से प्रारंभ होकर विजयराघवगढ़ किले पर समाप्त होगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/133559/tiranga-yatra-will-start-on-thousands-of-bikes-from-harihar</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/133559/tiranga-yatra-will-start-on-thousands-of-bikes-from-harihar</guid>
                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 17:53:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-08/img-20230813-wa0165.jpg"                         length="106424"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        