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                <title>नवीकरणीय ऊर्जा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>नवीकरणीय ऊर्जा RSS Feed</description>
                
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                <title>जिलाधिकारी ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रगति की समीक्षा की</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">          जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181029/district-magistrate-reviewed-the-progress-of-pm-suryghar-free-electricity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0121.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी  मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में गुरूवार को संगम सभागार में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के सम्बंध में बैठक आयोजित की गयी तथा सभी सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन, डिस्कॉम, बैंक एवं वेण्डर्स द्वारा आवेदन निस्तारण एवं लम्बित आवेदनों की स्थिति, विद्युत विभाग के अन्तर्गत निरीक्षण हेतु लम्बित प्रकरण एवं पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजनान्तर्गत बैंक स्तर पर लोन निर्गत/पार्शियल पेमेण्ट सम्बंधित लम्बित प्रकरणों के बारे में विस्तार से समीक्षा की गयी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     जिलाधिकारी ने पीओनेडा से पीएम सूर्यघर योजना के प्रगति के बारे में जानकारी लेते हुए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित किये जाने के निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिए है। उन्होंने पीओ नेडा से टॉप टेन पेण्डेंसी वाले वेण्डरों के विरूद्ध कार्रवाई हेतु शासन को पत्र प्रेषित करने के लिए कहा है। उन्होंने पीओ नेडा से सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए प्राप्त आवेदन, स्वीकृत आवेदन एवं लम्बित आवेदन की स्थिति की जानकारी ली, जिसपर बताया गया कि कुल 33995 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें 33978 आवेदन स्वीकृत हुए है तथा 32823 आवेदन के लिए वेण्डर का सेलेक्शन हो चुका है, जिसमें से 19955 में इंस्टालेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने पीओ नेडा को विद्युत विभाग व बैंक के अधिकारियों एवं पीएम सूर्यघर योजना व क्लीन एनर्जी का वेण्डरों एवं लक्षित विभाग के साथ बैठक कर पेंडेसी को समाप्त करने और उपभोक्ताओं का चिन्हांकन करने के लिए कहा है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उन्होंने  कहा कि प्रत्येक वेण्डर को पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का जो लक्ष्य तय किया गया है, उस लक्ष्य के अनुसार हर घर में सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्राथमिकता पर कार्यवाही करें।  विद्युत विभाग के सभी अधिकारियों को उनके स्तर पर पीएम सूर्यघर योजना से सम्बंधित लम्बित सभी पेण्डेंसी को अभियान चलाकर प्राथमिकता पर निस्तारित करते हुए ज्यादा से ज्यादा सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> बैठक में उपस्थित एलडीएम से बैंक स्तर पर लम्बित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करते हुए जल्द से जल्द पेण्डेंसी को समाप्त कराने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि पीएम सूर्यघर योजना के वेण्डरों के द्वारा सोलर सिस्टम लगाये जाने में अच्छा काम करने वाले वेंडरों को प्रमोट करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने बैठक में उपस्थित एडीओ पंचायतों से प्रत्येक विकास खण्ड में एक ग्राम का सोलर ग्राम के रूप में चयन करते हुए गांव के शत-प्रतिशत घरों में सोलर कनेक्शन कराये जाने के लिए कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने सभी आवासों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर सिस्टम लगाये जाने के लिए निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना फ्लैगशिप स्कीम है, जिसमें घरों में सोलर कनेक्शन लगाये जाने पर सरकार के द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है और सोलर कनेक्शन होने से विद्युत खपत में कमी आयेंगी तथा विद्युत बिल में बचत भी होगी, इसलिए सभी लोग इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाये।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">     इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, जिला पंचायतराज अधिकारी रवि शंकर द्विवेदी, पीओ नेडा  कोमिल द्विवेदी, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 20:44:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>जलवायु परिवर्तन का गहराता संकट: युद्ध, समुद्री तापमान और ‘वेस्टर्न वेव्स’ का भारत पर प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177842/deepening-crisis-of-climate-change-war-sea-temperature-and-impact"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/4416221.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ | </strong>अप्रैल..., 2026 अप्रैल का महीना, जो कभी वसंत की सुखद अनुभूति का प्रतीक माना जाता था, आज 40–43°C की झुलसा देने वाली गर्मी का संकेतक बन गया है। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ, दिल्ली, राजस्थान और मध्य गंगा के मैदानों में यह तापमान अब असामान्य नहीं रहा, बल्कि एक नई सामान्य स्थिति (New Normal) के रूप में उभर रहा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> यह परिवर्तन केवल मौसमी नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रही जटिल प्रक्रियाएँ—जैसे जलवायु परिवर्तन, समुद्री तापमान में वृद्धि, और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में अप्रैल माह के अधिकतम तापमान में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है - यह आकड़ा वर्ष के सापेक्ष अधिकतम तापमान (°C) का 2015-40.7, 2016-43.1, 2017-41.8, 2018-40.7, 2019-44.6, 2020-38.8, 2021-41.9, 2022~43.0, 2023-39.0, 2024-41.0, 2025-42.0, और 2026-43.0 से ऊपर (27 अप्रैल तक)।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">[Chitra-Gragh] इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि तापमान में गिरावट केवल अस्थायी रही है (जैसे 2020 में), जबकि दीर्घकालिक प्रवृत्ति लगातार वृद्धि की [Chitra-Gragh] महामारी और तापमान: एक अस्थायी राहत 2020 में COVID-19 लॉकडाउन के दौरान तापमान 38.8°C तक गिर गया था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> इसका मुख्य कारण था—वाहनों की आवाजाही में कमी, औद्योगिक गतिविधियों का ठहराव और वायु प्रदूषण में गिरावट हालाँकि, यह गिरावट स्थायी नहीं रही। जैसे ही गतिविधियाँ पुनः शुरू हुईं, तापमान फिर से तेजी से बढ़ने लगा। युद्ध और जलवायु परिवर्तन का संबंध वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और युद्ध के बीच एक खतरनाक संबंध उभरकर सामने आया है, जिनका मुख्य प्रभाव: सैन्य उपकरणों में भारी ईंधन खपत, बमबारी और आग से कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा बुनियादी ढांचे का विनाश ही कहा जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2026 में मध्य-पूर्व के संघर्षों के दौरान तापमान का 43°C के आसपास पहुँचना इस संबंध को मजबूत करता है। युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। ‘वेस्टर्न वेव्स’ (पश्चिमी विक्षोभ) का बदलता स्वरूप भारत में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब अनियमित और अधिक तीव्र होते जा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जिससे प्रमुख परिवर्तन जो महसूस किये गए, वह है -अचानक वर्षा और ओलावृष्टि, उसके तुरंत बाद भीषण हीटवेव और तापमान में तीव्र उतार-चढ़ाव (25°C से 43°C तक) होता रहा । इससे दुष्प्रभाव न ही रबी फसलों (विशेषकर गेहूं) पर संकट छाया बल्कि किसानों की आय पर असर हुआ और तरह–तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में अप्रत्यासित वृद्धि हुई।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> शहरी भारत और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव लखनऊ, दिल्ली और पटियाला जैसे शहरों में कंक्रीट संरचनाओं और हरियाली की कमी के कारण “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। जिसके परिणाम स्वरुप शहरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्म, रात का भी तापमान 30°C से ऊपर रहता है जिससे शरीर को भी आराम नहीं मिल पा रहा है और आम जनता बेहाल है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भविष्य का संकट (2026–2030) यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछले 15 दिनों से अधिक लंबी हीटवेव, सभी शहरों/देहातों में भी भरी जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट पायी जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा  मांग में भी तीव्र वृद्धि हो रही है। उक्त कारणों से GDP में 4–6% तक संभावित कमी से भी नकारा नहीं जा सकता है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि 2030 के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है, जब तापमान 48–50°C तक पहुँचने की संभावना बनी हुई है। समाधान: क्या किया जा सकता है? इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास आवश्यक हैं:</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">1. पर्यावरणीय उपाय-अब हमें वृक्षारोपण और वन संरक्षण में अभियान स्वरुप सरकार के साथ कन्धा से कंधा मिलाकर काम करना होगा तथा जैव विविधता का संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">2. ऊर्जा परिवर्तन- यद्यपि भारतवर्ष में वर्तमान सरकार ने आम जनता से लेकर व्यवसायिक संस्थाओं तक तेजी से सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है , परन्तु इसे वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के साथ ही ऊर्जा हेतु आत्म निर्भर होना होगा | इसी के साथ – साथ जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना पड़ेगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">3.जल प्रबंधन- अभी तक भारतवर्ष में सरकार प्रयासों के बावजूद भी आम जनता में वर्षा जल संचयन के बारें में नगण्य जानकारी हो पाई है और नहीं जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग का उपयोग किया जा रहा है, केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है । इस क्षेत्र में अभियान चलाकार जागरूक करने और प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">4. शहरी योजना- भारत सरकार ने स्मार्टसिटी व ग्रीन सिटी मॉडल की योजनायें चलाई, इसका कोई प्रभावी असर अभी तक दिखाई न पड़ रहा है और नहीं कम कंक्रीट और अधिक हरियाली ही किसी शहरी अथवा कस्बो पर्याप्त असर छोड़ रहा है। इस पर अधिक प्रभावी कार्य करने की आवश्यकता है ।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">5. सामाजिक भागीदारी- उपरोक्त से स्पष्ट है कि जो योजनाये प्रभावीरूप से संचालित  नहीं हो पा रही हैं, उनमें जन-जागरूकता अभियान चलाना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए  जन आंदोलन चलाना अत्यंत आवश्यक है ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 19:44:36 +0530</pubDate>
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