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                <title>SIPRI Report - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>परमाणु हथियारों के जखीरे से दुनिया का तीन बार विनाश संभव! </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया के ताकतवर देशों ने कथित सामरिक संतुलन की आड़ में परमाणु हथियारों समेत इतना जखीरा जोड़ रखा है कि दुनिया का तीन बार खात्मा करने की क्षमता जुटा ली गयी है। यह समूची मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आखिर इंसान तरक्की के नाम पर हथियार और विनाश की दौड़ क्यों लगा रहा है? क्या दुनिया का भविष्य परमाणु हथियारों के साए में गिरवीं रखा जा रहा है? </div>
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<div style="text-align:justify;">वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण परमाणु युद्ध का खतरा शीत युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है। रूस-यूक्रेन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177780/it-is-possible-to-destroy-the-world-three-times-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/nuclear-weapons-illo.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया के ताकतवर देशों ने कथित सामरिक संतुलन की आड़ में परमाणु हथियारों समेत इतना जखीरा जोड़ रखा है कि दुनिया का तीन बार खात्मा करने की क्षमता जुटा ली गयी है। यह समूची मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। आखिर इंसान तरक्की के नाम पर हथियार और विनाश की दौड़ क्यों लगा रहा है? क्या दुनिया का भविष्य परमाणु हथियारों के साए में गिरवीं रखा जा रहा है? </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण परमाणु युद्ध का खतरा शीत युद्ध के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव (इजरायल-ईरान), और चीन-अमेरिका के बीच प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा कर दिया है।परमाणु युद्ध के बढ़ते खतरों और कारणों की मुख्य बातें ये हैं रूस द्वारा अपनी रणनीतिक परमाणु ताकतों को उच्च सतर्कता पर रखना और पश्चिमी देशों को परमाणु धमकी देना इस खतरे का मुख्य कारण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष जैसे 2026 में डिमोना परमाणु केंद्र के पास मिसाइल हमला ने सीधे परमाणु टकराव की आशंकाओं को जन्म दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, एक खतरनाक नई परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो गई है, क्योंकि पारंपरिक शस्त्र नियंत्रण संधियां कमजोर हो रही हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष और उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम भी परमाणु तनाव को बढ़ाते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दुनिया में न्यूक्लियर हथियारों के फैलाव और आधुनिकीकरण में खतरनाक हद तक बढ़ौतरी हो रही है तथा इसके लिए विभिन्न देशों द्वारा नई रणनीति बनाई जा रही है। अमरीका और रूस के बीच 50 वर्ष पूर्व न्यूक्लियर हथियारों के परिसीमन और उन्हें समाप्त करने सम्बन्धी की गई संधि, जिसे 'न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी' (न्यू स्टार्ट) कहा जाता है, 2021 में 5 वर्ष के लिए बढ़ाने के बाद अब 5 फरवरी को समाप्त हो चुकी है तथा इसे आगे बढ़ाने की दिशा में कोई बात नहीं की जा रही।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, यह संधि किए जाने के बाद काफी न्यूक्लियर हथियार समाप्त कर दिए गए थे, परंतु अब नए हालात में अमरीका और रूस भी और न्यूक्लियर बम बनाना चाहते हैं,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सऊदी अरब और तुर्की भी इसके लिए इच्छुक हैं तथा यूरोप में भी अब यह अहसास बढ़ रहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए और न्यूक्लियर हथियार बनाने चाहिएं। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अमरीका अपनी लम्बी दूरी की मिसाइल परीक्षण प्रणाली पर अरबों डॉलर रकम खर्च कर चुका है परंतु इसके बावजूद उसे टिकाऊ सुरक्षा प्राप्त नहीं हो सकी और अभी तक अमरीका हथियारों के निर्माण और फिर उन्हें समाप्त करने पर करदाताओं के 10 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। यह इतनी रकम है कि इससे गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट का ज्यादातर हिस्सा खरीदा जा सकता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आपको बता दें इस समय स्थिति यह है कि डोनाल्ड ट्रम्प के अंतर्गत अमरीका कोई संधि नहीं करना चाहता और यह बात तो रूस के अनुकूल ही है कि वह न्यूक्लियर हथियार बनाए। परंतु इसमें हानि किसकी है? इसमें हानि सारी दुनिया की है कि इतना धन खर्च करके न्यूक्लियर हथियार बनाने के बाद जिस स्थान पर उनका परीक्षण किया जाएगा, उस स्थान और उसके आसपास के लोगों का भारी नुकसान होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल पिछली बार रूस ने जहां न्यूक्लियर हथियारों का परीक्षण किया था, उसके आसपास रहने वाले लोगों को वैसी ही समस्याओं से जूझना पड़ा था, जैसी समस्याओं और बीमारियों का सामना चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में लीकेज के समय लोगों को करना पड़ा था।यदि कोई देश ऐसा करने के लिए भड़क उठे तो यही समस्याएं पैदा होंगी। कोल्ड वॉर के बाद अब पहली बार देश अपने हथियारों का जखीरा और इस्तेमाल के लिए तैयार वॉरहेड (बम) बढ़ा रहे हैं। 2026 की शुरुआत तक 9 न्यूक्लियर हथियार वाले देशों के पास लगभग 12,187 वॉरहेड थे और इनकी बढ़ती संख्या को हाई अलर्ट पर रखा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न्यूक्लियर हथियारों से सम्पन्न लगभग सभी 9 देश अपने वर्तमान मौजूदा हथियारों को अपग्रेड करने के साथ-साथ इनमें नए एवं अधिक उन्नत संस्करण वाले हथियारों की वृद्धि कर रहे हैं। हालांकि इसराईल के पास भी काफी न्यूक्लियर हथियार हैं परंतु इनकी घोषणा न करने के कारण इसराईल को इनमें नहीं गिना जाता।बता दें ये देश इस्तेमाल के लिए तैयार हथियारों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात या बॉम्बर बेस पर स्टोर किए गए इस्तेमाल के लिए तैयार न्यूक्लियर हथियारों की संख्या बढ़ा रहे हैं जो इस समय बढ़कर लगभग 9,745 हो गई है जो वर्ष 2024 से 141 अधिक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस समय अमरीका व रूस के पास ही दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत न्यूक्लियर हथियार हैं। चीन भी अपने हथियारों का भंडार काफी बढ़ाने के अलावा अपने एडवांस्ड डिलीवरी सिस्टम की टैस्टिंग भी कर रहा है। इन हालात में ग्लोबल न्यूक्लियर रूलबुक कमजोर हो रही है और उक्त संधि चुनौतियों का सामना कर रही है। सैन्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडल ईस्ट तनाव सहित बढ़ते झगड़ों के कारण न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल का खतरा पिछले एक दशक के दौरान इस समय अपने सबसे ऊंचे स्तर पर है और इस होड़ के फैलने का खतरा चिंताजनक मोड़ पर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसका कारण यह है कि दुनिया के वर्तमान हालात में अधिक देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न्यूक्लियर हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं।इन दिनों कृत्रिम बुद्धिमता के परिणामस्वरूप भी तकनीकी खतरे बढ़ गए हैं और नए हथियारों के हाइपरसोनिक डिलीवरी सिस्टम के इंटीग्रेशन से सैन्य मामलों पर फैसले लेने के लिए उपलब्ध समय कम हो रहा है, जिससे अचानक या तेजी से न्यूक्लियर हमले का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में इस संधि का नवीकरण न किए जाने की स्थिति में दुनिया को न्यूक्लियर हथियारों से होने वाली एक और तबाही के लिए तैयार रहना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:57:50 +0530</pubDate>
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