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                <title>किसान कल्याण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>किसान कल्याण RSS Feed</description>
                
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                <title>किसान दिवस में गूंजीं किसानों की समस्याएं, डीएम ने दिए त्वरित समाधान के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव खुलकर रखे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि किसानों एवं आमजन की शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में भारतीय किसान यूनियन (महिला प्रकोष्ठ) की जिलाध्यक्ष पम्मी सिंह ने किसान दिवस की सूचना समय पर किसानों तक न पहुंचने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त जानकारी के अभाव में किसानों की भागीदारी कम रहती है, जिससे कार्यक्रम का उद्देश्य प्रभावित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181396/farmers-problems-echoed-in-farmers-day-dm-gave-instructions-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260617-wa0063.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव खुलकर रखे। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि किसानों एवं आमजन की शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में भारतीय किसान यूनियन (महिला प्रकोष्ठ) की जिलाध्यक्ष पम्मी सिंह ने किसान दिवस की सूचना समय पर किसानों तक न पहुंचने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पर्याप्त जानकारी के अभाव में किसानों की भागीदारी कम रहती है, जिससे कार्यक्रम का उद्देश्य प्रभावित होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उप कृषि निदेशक को आगामी किसान दिवस का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने तथा सभी विकास खंडों के किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राममोहन मीना को निर्देशित किया कि 30 जून को पुनः किसान दिवस आयोजित किया जाए। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों में डुग्गी और मुनादी के माध्यम से किसानों को सूचना दी जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान अपनी समस्याएं और सुझाव प्रशासन तक पहुंचा सकें।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि किसान दिवस में अपनी समस्याये एवं सुझाव लिखित रूप से उपलब्ध कराये, जिससे उनका निस्तारण सम्बन्धित विभाग से समय से कराया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">किसान दिवस में जेठवारा के अनंत सिंह तोमर ने भूलेख नक्शा उपलब्ध कराने और चकमार्ग पर हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग उठाई। वहीं पम्मी सिंह ने उसरी गांव में स्वीकृत पशु चिकित्सालय का निर्माण शुरू न होने और गोबरी-जगेसरगंज में दो वर्षों से बंद धान एवं गेहूं क्रय केंद्र को पुनः संचालित कराने की मांग रखी। जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। दिलीपपुर की शीला पाल ने भैंस पालन के लिए टीन शेड निर्माण की मांग की, जिस पर डीएम ने मनरेगा के तहत कार्य कराने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहेरूआ गांव के रजनीकांत ने चकबंदी के बाद भूमि कब्जा एवं अंश निर्धारण की लंबित कार्रवाई का मामला उठाया, जिस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिलाधिकारी ने किसानों को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए 20 जून को प्रभारी मंत्री की उपस्थिति में जनपद में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।किसान दिवस में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राममोहन मीना, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 19:02:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिलाधिकारी ने सहकारी समिति बसंतपुर का किया निरीक्षण, दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि0, बसन्तपुर विकास खण्ड बांसी का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा खाद वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि केन्द्र पर 500 बोरी उर्वरक का आवंटन प्राप्त हुआ है। फार्मर रजिस्ट्री के अनुसार खाद का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि खाद के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग नही होना चाहिए। टैगिंग शत-प्रतिशत बन्द है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ नियमानुसार खाद</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181049/district-magistrate-inspected-the-cooperative-society-basantpur-and-gave-instructions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781187652076.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन द्वारा बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लि0, बसन्तपुर विकास खण्ड बांसी का निरीक्षण किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी  शिवशरणप्पा जीएन द्वारा खाद वितरण के बारे में जानकारी प्राप्त किया गया। जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि केन्द्र पर 500 बोरी उर्वरक का आवंटन प्राप्त हुआ है। फार्मर रजिस्ट्री के अनुसार खाद का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि खाद के साथ किसी भी प्रकार की टैगिंग नही होना चाहिए। टैगिंग शत-प्रतिशत बन्द है। इस प्रकार की शिकायत मिलने पर संबधित के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ नियमानुसार खाद वितरण कराने का निर्देश दिया।</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 21:19:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177724/indian-agriculture-is-at-a-critical-juncture-now-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे फसल की पैदावार भी कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm.jpeg" alt="भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय" width="527" height="351"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बहुत बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन यही क्षेत्र मौसम के बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या अचानक गर्मी बढ़ जाए, तो इसका असर सिर्फ खेत तक नहीं रहता—किसानों की आय, बाजार के दाम और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अब “जलवायु के हिसाब से खेती” अपनाना जरूरी हो गया है। इसका मतलब है पानी का सही इस्तेमाल, मौसम के अनुसार फसल चुनना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और पराली जलाने से बचना। ये छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात ये है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। कई संस्थाएं किसानों को नई तकनीकें सिखा रही हैं। सरकार भी कई योजनाओं के जरिए मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को पता चलता है कि खेत में किस तरह की खाद कितनी मात्रा में डालनी है। परंपरागत कृषि विकास योजना से जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन मौसम के असर को कम करने पर काम करता है, और फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसानों को आर्थिक सहारा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिशा सही है, लेकिन काम को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है, तो हमें भी उतनी ही जल्दी कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधी बात है—आज जो फैसले हम लेंगे, वही कल की खेती तय करेंगे। अगर अभी सही कदम उठाए गए, तो हम किसानों को मजबूत बना सकते हैं, खाने की सुरक्षा बनाए रख सकते हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं। अब समय है—किसानों का साथ देने का, पर्यावरण को बचाने का और सही दिशा में आगे बढ़ने का।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नवाज़ अहमद खान<br />प्रोफेसर<br />आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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