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                <title>Crop Insurance Scheme - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177724/indian-agriculture-is-at-a-critical-juncture-now-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे फसल की पैदावार भी कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm.jpeg" alt="भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय" width="527" height="351"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बहुत बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन यही क्षेत्र मौसम के बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या अचानक गर्मी बढ़ जाए, तो इसका असर सिर्फ खेत तक नहीं रहता—किसानों की आय, बाजार के दाम और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अब “जलवायु के हिसाब से खेती” अपनाना जरूरी हो गया है। इसका मतलब है पानी का सही इस्तेमाल, मौसम के अनुसार फसल चुनना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और पराली जलाने से बचना। ये छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात ये है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। कई संस्थाएं किसानों को नई तकनीकें सिखा रही हैं। सरकार भी कई योजनाओं के जरिए मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को पता चलता है कि खेत में किस तरह की खाद कितनी मात्रा में डालनी है। परंपरागत कृषि विकास योजना से जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन मौसम के असर को कम करने पर काम करता है, और फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसानों को आर्थिक सहारा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिशा सही है, लेकिन काम को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है, तो हमें भी उतनी ही जल्दी कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधी बात है—आज जो फैसले हम लेंगे, वही कल की खेती तय करेंगे। अगर अभी सही कदम उठाए गए, तो हम किसानों को मजबूत बना सकते हैं, खाने की सुरक्षा बनाए रख सकते हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं। अब समय है—किसानों का साथ देने का, पर्यावरण को बचाने का और सही दिशा में आगे बढ़ने का।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नवाज़ अहमद खान<br />प्रोफेसर<br />आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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