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                <title>sanjay singh - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>sanjay singh RSS Feed</description>
                
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                <title>राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी? आप का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177431/aaps-big-claim-is-that-membership-of-7-mps-including"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)13.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> क्या राघव चड्ढा समेत उन सभी 7 सांसदों की सदस्यता रद्द होगी जिन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर खुद को बीजेपी में विलय कर लिया है? कम से कम आम आदमी पार्टी ने तो यही दावा करते हुए राज्यसभा चेयरमैन से लिखित में अनुरोध किया है कि इन सभी सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। इसने कहा है कि संविधान के विशेषज्ञों का यही कहना है और संविधान की 10वीं अनुसूची में भी ऐसा ही लिखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इस मामले में रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा, 'संविधान के कई जानकारों, देश के वरिष्ठ अधिवक्ता व संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल और पीडीटी आचार्य ने साफ़ कर दिया है कि आप को तोड़कर बीजेपी में विलय करने का फ़ैसला लेने वाले सात लोगों की सदस्यता ख़त्म होगी। ये बहुत साफ़ तौर पर है।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संजय सिंह ने कहा कि कपिल सिब्बल जैसे संविधान के जानकारों की राय लेकर राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति को एक याचिका भेजी है जिसमें संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक इन सातों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए, इसके बारे में अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय से मांग की है कि इसकी जल्द से जल्द सुनवाई करके अपनी ओर से न्यायपूर्ण फैसला दें। संविधान की 10वीं अनुसूची में भी साफ़ तौर पर लिखा गया है कि इस तरह की किसी भी तोड़फोड़ की इजाजत भारत का संविधान नहीं देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आप के पूर्व राज्‍यसभा उपनेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ऐलान किया कि पार्टी के 10 में से 7 राज्‍यसभा सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए वे एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून से बच सकते हैं।बागी सांसदों में राघव चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल हैं। इनमें से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक शुक्रवार को ही बीजेपी में शामिल हो गए। स्वाति मालीवाल ने शनिवार को बीजेपी जॉइन करने की पुष्टि की।आप के इन सात सांसदों की बगावत के बाद अब आप के पास राज्‍यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं- संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलवीर सिंह सीचेवाल।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सात सांसदों की बगावत पर आप के वरिष्ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने पहले ही कहा था, 'यह गैरकानूनी, गलत, असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ है। हम इनकी पूरी सदस्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।'संजय सिंह ने कहा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग रहे हैं और वे पंजाब से चुने गए 6 बागी सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे। हालांकि, संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।वरिष्ठ वकील और संविधान के विशेषज्ञ कपिल सिब्बल ने एचटी से कहा कि पार्टी खुद पहले मर्जर का फैसला नहीं ले ले तब तक कोई भी खुद से मर्जर नहीं कर सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पार्टी स्तर पर रेजॉल्यूशन पास करना ज़रूरी है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एचटी से कहा कि ये 7 सांसद अयोग्यता से बच नहीं सकते। हालाँकि, सांसदों को वापस बुलाने यानी हटाने के अधिकार पर पूर्व पंजाब एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल ने साफ़ किया कि 'राइट टू रिकॉल' यानी वोटर द्वारा सांसद को बीच में हटाने का अधिकार संविधान में कहीं नहीं है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:32:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>आप में सियासी भूचाल दलबदल कानून के घेरे में 7 राज्यसभा सांसदों का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177385/political-turmoil-in-aap-future-of-7-rajya-sabha-mps"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/indian-politics-defection-crisis-jaychand-mirjafar-analysis.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जिसने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी में आई इस बड़ी टूट ने न केवल पार्टी के आंतरिक हालात को उजागर किया है बल्कि दलबदल विरोधी कानून की प्रासंगिकता और उसकी सीमाओं पर भी नई बहस छेड़ दी है। राज्यसभा के कई सांसदों द्वारा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा के बाद अब यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या ये सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख पाएंगे या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के केंद्र में हैं राघव चड्ढा जिनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ने का दावा किया है। इनके साथ संदीप पाठक अशोक मित्तल विक्रम साहनी हरभजन सिंह स्वाति मालीवाल और नरेंद्र गुप्ता जैसे नामों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन सभी के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा का रुख किया है। इस दावे ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन को याचिका सौंपकर इन सात सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सांसदों ने संविधान की दसवीं अनुसूची का स्पष्ट उल्लंघन किया है जो दलबदल को रोकने के लिए बनाई गई थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में दलबदल विरोधी कानून जिसे दसवीं अनुसूची के नाम से जाना जाता है वर्ष 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक दलों में स्थिरता बनाए रखना और निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को रोकना था। इस कानून के तहत यदि कोई सांसद या विधायक स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस कानून में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है जो पार्टी व्हिप से जुड़ा हुआ है। यदि कोई सांसद सदन में अपनी पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है तो भी उसे अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी अनुशासन बना रहे और सरकार या विपक्ष की रणनीति प्रभावित न हो।</div>
<div style="text-align:justify;">निर्दलीय सदस्यों के लिए भी इस कानून में स्पष्ट नियम हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल हो जाता है तो उसे तुरंत अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदाता जिस स्वतंत्र उम्मीदवार को चुनते हैं वह बाद में किसी दल का हिस्सा बनकर उनकी अपेक्षाओं के साथ समझौता न करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस कानून में एक महत्वपूर्ण अपवाद भी है जिसे विलय का प्रावधान कहा जाता है। इसके अनुसार यदि किसी दल के दो तिहाई या उससे अधिक सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में शामिल हो जाते हैं तो इसे दलबदल नहीं बल्कि वैध विलय माना जाता है और ऐसे सदस्यों को अयोग्यता से छूट मिल जाती है। यही वह बिंदु है जिस पर इस पूरे मामले का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी के इन सांसदों की संख्या दो तिहाई के आंकड़े तक पहुंचती है या नहीं। यदि यह संख्या पूरी होती है तो ये सांसद अपनी सदस्यता बचा सकते हैं अन्यथा इन्हें अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि दोनों पक्ष अपने अपने दावे कर रहे हैं और राजनीतिक गणित तेजी से बदल रहा है।इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति के पास है जो इस मामले की सुनवाई करेंगे और तथ्यों के आधार पर फैसला देंगे। उनका निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि वही तय करेगा कि संबंधित सांसद संसद में बने रहेंगे या नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि सभापति का निर्णय अंतिम होने के बावजूद न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि दलबदल से जुड़े मामलों में सभापति के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसका मतलब है कि यदि किसी पक्ष को निर्णय से असंतोष होता है तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा। यदि बड़ी संख्या में सांसद दलबदल कर बिना अयोग्यता के बच जाते हैं तो यह अन्य दलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। वहीं यदि कड़ी कार्रवाई होती है तो यह संदेश जाएगा कि दलबदल कानून अभी भी प्रभावी है और उसका उल्लंघन करने पर सख्त परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दलबदल विरोधी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा कर पा रहा है या इसमें सुधार की आवश्यकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उपयोग कई बार राजनीतिक हथियार के रूप में भी किया जाता है जिससे विधायकों और सांसदों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि यदि यह कानून न हो तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है और सरकारें गिरने का खतरा बना रह सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ जनता और संवैधानिक संस्थाओं के सामने अपनी बात रखेंगे। इस पूरे मामले पर देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यह केवल सात सांसदों का मुद्दा नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा हुआ प्रश्न है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि दलबदल कानून भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इसका उपयोग निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो ताकि लोकतंत्र की मूल भावना बनी रहे। आने वाले समय में सभापति का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देगा और यह तय करेगा कि राजनीति में दल बदल की प्रवृत्ति पर कितना नियंत्रण संभव है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:18:42 +0530</pubDate>
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                <title>संजय निरुपम और संजय अनुपम</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br />संजय होना आसान बात नहीं है ।  संजय यानि सारथी। सारथी ऐसा जो आजीवन साथ निभाए । हम और आप अनेक संजयों  को जानते हैं ।  महाभारत के संजय से लेकर फिल्मों के संजय तक को ,लेकिन आज मै बात कर रहा हूँ राजनीति के दो ऐसे संजय  की जो निरुपम होते हुए भी निरुपम नहीं रहे और एक संजय से संजय अनुपम बनते दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p><br />दरअसल संजय होना बहुत कठिन काम है। सबसे पहले बात करते हैं संजय निरुपम की। संजय निरुपम पत्रकारिता से राजनीति में आये।  जब मैं दिल्ली जनसत्ता के लिए अपनी सेवाएं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140096/sanjay-nirupam-and-sanjay-anupam"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-04/afsfdd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br />संजय होना आसान बात नहीं है ।  संजय यानि सारथी। सारथी ऐसा जो आजीवन साथ निभाए । हम और आप अनेक संजयों  को जानते हैं ।  महाभारत के संजय से लेकर फिल्मों के संजय तक को ,लेकिन आज मै बात कर रहा हूँ राजनीति के दो ऐसे संजय  की जो निरुपम होते हुए भी निरुपम नहीं रहे और एक संजय से संजय अनुपम बनते दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p><br />दरअसल संजय होना बहुत कठिन काम है। सबसे पहले बात करते हैं संजय निरुपम की। संजय निरुपम पत्रकारिता से राजनीति में आये।  जब मैं दिल्ली जनसत्ता के लिए अपनी सेवाएं देता था,तब वे मुंबई संस्करण से जुड़े थे। अपनी दिलचस्पी की वजह से वे राजनीति में आये और कांग्रेस से जुड़े। कांग्रेस ने उन्हें 1996  में सीधे राज्य सभा भेज दिया। संजय ने अपनी सेवाओं से कांग्रेस मेंअपनी जगह बनाई ,नतीजा ये हुआ की उन्हें 2000  में दोबारा राजयसभा के लिए भेज दिया गया ।  खुशनसीब थे संजय निरुपम। संजय ने 2009  के   लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने मुंबई [उत्तर ] से भाजपा के प्रत्‍याशी राम नाइक को हराया और सांसद चुने गये। उनकी जीत का अंतर करीब ढाई लाख वोटों का रहा।</p>
<p><br />संजय अपनी स्पष्टवादिता और मुखरता के चलते कांग्रेस के लिए खरा सिक्का साबित हुए ।  2014  में जब देश में मोदी लहर चल रही थी तब  संजय निरुपम भाजपा के उम्मीदवार गोपाल शेट्टी से हार गए। शेट्टी ने उन्‍हें 2 लाख 17 हजार वोटों से हराया। कांग्रेस ने संजय को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया लेकिन बाद में पार्टी की पराजय के बाद संजय ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के इसी खरे सिक्के को अब कांग्रेस से छह साल के निष्काषित कर दिया गया है।</p>
<p><br />पार्टी  निर्णयों के खिलाफ खड़े हुए संजय निरुपम को निकलने के अलावा कांग्रेस के पास कोई और विकल्प था भी नही।  कहते हैं कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) द्वारा मुंबई की छह लोकसभा सीट में से मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट समेत चार के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा के बाद निरुपम ने कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व पर निशाना साधा था।   निरुपम मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट से चुनाव लड़ना चाहते थ। निरुपम का कहना था कि कांग्रेस नेतृत्व को शिवसेना (यूबीटी) के आगे दबाव में नहीं झुकना चाहिए।  उन्होंने यह भी कहा था कि मुंबई में एकतरफा उम्मीदवार उतारने के शिवसेना (यूबीटी) के फैसले को स्वीकार करना कांग्रेस को बर्बाद करने की अनुमति देने के समान है।</p>
<p><br />मुमकिन है की संजय निरुपम सही हों लेकिन जिस कांग्रेस ने उन्हें सब कुछ दिया उसके फैसले कि सामने भी उन्हें संजय निरुपम ही बने रहना चाहिए था,उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती देकर गलती की। तय है की कांग्रेस कि स्टार प्रचारक रहे संजय को अब यदि राजनीति करना है तो वे भाजपा की शरण में जायेंगे । निर्दलीय लड़ने की उनकी हैसियत नहीं है। उनके समर्थक उन्हें शायद ही क्षमा करें।<br />आइये अब बात करते हैं आम आदमी पार्टी कि संजय सिंह की। संजय सिंह खनिज इंजीनयर हैं। वे समाजसेवा करते हुए अन्ना आंदोलन के जरिये सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़े और आम आदमी पार्टी कि साथ राजनीति में आये। वे आम आदमी पार्टी कि सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल कि विश्वसनीय सारथी हैं। संजय संजय सिंह ने आम आदमी पार्टी की तरफ से 2018 तक कोई चुनाव नहीं लड़ा, मगर पार्टी के लिए शुरू से ही काम कर रहे हैं।</p>
<p>इसी का परिणाम था की आम आदमी पार्टी ने उन्हें दिल्ली से राज्यसभा भेजा, ताकि पार्टी के कार्यकर्ताओं का मन बना रहे और पार्टी के लोगों को यह भी लगे कि वह उनका ध्यान रखते हैं।इसके अलावा संजय सिंह ने किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों और जिन राज्यों में प्राकृतिक आपदाएं आती वहां सहायता करना, अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध करवाना आदि कई प्रकार के कार्य पार्टी में रहते हुए किए, जिसके कारण स्वयं और पार्टी दोनों के कद को बड़ा किया।</p>
<p><br />संजय सिंह को आम आदमी पार्टी ने 2018  में राज्य सभा में भेजा था ।  वहां वे अपनी पार्टी की ही नहीं बल्कि विपक्ष की एक मजबूत आवाज बने ।  सबसे पहले उन्हें अपनी मुखरता की सजा राज्य सभा से निलंबन कि रूप में मिली ,बाद में उन्हें ईडी ने कथित शराब घोटाले कि मामले में आरोपी बनाकर जेल भेज दिय।  संजय छह माह से जेल में थे और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत पर बाहर आये है।  जेल से बाहर आते ही उन्होने सबसे पहले जेल में बंद पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल कि घर जाकर उनकी पत्नी सुनीता से भेंट की  और आशीर्वाद लिया। अब संजय सिंह अपनी पार्टी कि लिए अनुपम बन गए हैं।  </p>
<p>संजय सिंह कि सामने विकल्प था कि वे सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा कि समाने समर्पण कर गिरफ्तारी से बच सकते थे ,किन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किय।  वे पार्टी कि प्रति निष्ठावान  रहते हुए जेल गए और छह माह  बाद जेल से बाहर आये। संजय सिंह भी संजय निरुपम की तरह अपनी पार्टी कि तमाम फैसलों से असहमत होकर पार्टी से बाहर आने की जुगत कर सकते थे ।  इस समय उन्हें भी सत्तारूढ़ पार्टी में मुंहमांगी कीमत मिल सकती थी ,लेकिन जमीर भी कोई चीज होती है । जो मुंबई कि संजय कि पास नहीं निकली लेकिन दिल्ली कि संजय कि पास इफरात में निकली ।केजरीवाल से असहमत तमाम लोगों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। कुमार विश्वास और आशुतोष जैसे तमाम लोग संजय सिंह नहीं बन पाए।  </p>
<p>राजनीति में संजय होना मुश्किल है ।  कांग्रेस कि पास संजय निरुपम से पहले एक संजय और थे। वे संजय गांधी थे। आपातकाल में अपनी कथित ज्यादतियों की वजह से खलनायक बने लेकिन उनकी अपनी शैली थी ।  वे एक दुर्घटना कि शिकार हो गए ,अन्यथा संजय निरुपम को कांग्रेस ने जो मौक़ा दिया वो शायद न मिलता। बहरहाल हम राजनीति में सत्ता कि लिए बल्दियत बदलने कि हमेशा से विरोधी रहे हैं । संजय निरुपम का कांग्रेस से बगावत करना भी हमें इसी तरह से अटपटा लग रहा है।</p>
<p>आने वाले दिनों में दोनों संजयों  का निर्णय  देश की जनता करेगी। जनता को हमेशा याद रखना होगा की कोई भी संजय निरुपम हमेशा कि लिए नहीं होता लेकिन कोई भी संजय सिंह से अनुपम भी बन सकता है। एक संजय कि पार्टी से बाहर जाने के और एक संजय कि जेल से बाहर आने के असर के बारे में आज बात करने की जरूरत नहीं है । दोनों की मौजूदगी दिल्ली ,मुंबई और देश की राजनीति में रेखांकित अवश्य की जाएगी। इति श्री संजय पुराणे अंतिम अध्याय समाप्त  ।<br /><strong>@ राकेश अचल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Apr 2024 09:26:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय सिंह की जान को खतरा, हत्या होने की आशंका: AAP का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>AAP:</strong> संजय सिंह की गिरफ्तारी और कोर्ट से उनकी 3 दिन की रिमांड और बढ़ाने को लेकर दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। आप नेता ने कहा कि कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने लिखा कि अनुमति के बगैर संजय सिंह को कहीं नहीं ले जा सकते, और मिलने के समय में कोई ऊंच नीच नहीं की जाएगी। ईडी बीजेपी की कोई रूल बुक को फॉलो कर रही है, नहीं तो कोर्ट को इतना स्पष्ट लिखित में क्यों देना पड़ता।</p>
<p>बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति का पर्दाफाश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135749/sanjay-singhs-life-in-danger-fear-of-murder-aap"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/aap_large_1205_19.webp" alt=""></a><br /><p><strong>AAP:</strong> संजय सिंह की गिरफ्तारी और कोर्ट से उनकी 3 दिन की रिमांड और बढ़ाने को लेकर दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। आप नेता ने कहा कि कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने लिखा कि अनुमति के बगैर संजय सिंह को कहीं नहीं ले जा सकते, और मिलने के समय में कोई ऊंच नीच नहीं की जाएगी। ईडी बीजेपी की कोई रूल बुक को फॉलो कर रही है, नहीं तो कोर्ट को इतना स्पष्ट लिखित में क्यों देना पड़ता।</p>
<p>बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति का पर्दाफाश हो गया। आप राज्यसभा सांसद संजय सिंह को ईडी द्वारा 2 बार अज्ञात जगह ले जाने की कोशिश की गई। जब संजय सिंह जी ने पूछा कि किससे पूछ कर लेकर जा रहे हो, क्या कोर्ट को बताया है? ईडी ने कहा कि ऊपर से आदेश है। आप नेता ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बीजेपी और ईडी संजय सिंह जी की हत्या की साज़िश रच रही है?</p>
<p>एक विशेष अदालत ने मंगलवार को संजय सिंह की ईडी हिरासत 13 अक्टूबर तक बढ़ा दी और कहा कि संघीय एजेंसी द्वारा हाल ही में की गई तलाशी में नए तथ्यों की खोज और ताजा डिजिटल सबूतों की बरामदगी के आधार पर रिमांड जरूरी है। हिरासत के विस्तार पर बहस के अंत में, सिंह ने न्यायाधीश के सामने दावा किया कि ईडी ने उन्हें "गुप्त उद्देश्य" से अपने कार्यालय से बाहर निकालने की कोशिश की। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2023 12:17:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>AAP ने किया मोदी सरकार को चैलेंज, संजय सिंह के खिलाफ कोई भी प्रूफ हो तो उसे पब्लिक करें </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>AAP:</strong> आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को केंद्र पर उसके सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर उन्हें चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके पास सिंह के खिलाफ कोई भी सबूत हो तो उसे सार्वजनिक करें। संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया था।</p>
<p><strong>छापेमारी में नहीं मिला था कोई सबूत </strong><br />यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135525/aap-challenges-modi-government-if-there-is-any-proof-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/2023_10image_12_22_552303577atishi-ll.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>AAP:</strong> आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को केंद्र पर उसके सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर उन्हें चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके पास सिंह के खिलाफ कोई भी सबूत हो तो उसे सार्वजनिक करें। संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार किया था।</p>
<p><strong>छापेमारी में नहीं मिला था कोई सबूत </strong><br />यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आप की वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया कि ईडी और सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के 500 से अधिक अधिकारियों ने पिछले 15 महीनों में आप नेताओं से जुड़े विभिन्न स्थानों पर छापे मारे, लेकिन उनके खिलाफ ‘‘एक भी सबूत नहीं मिला''। आप नेता ने कहा, ‘‘उन्होंने मनीष सिसोदिया के आवास, कार्यालयों और कई अन्य स्थानों पर छापे मारे लेकिन उन्हें एक पैसे के भी भ्रष्टाचार का सबूत नहीं मिला और अब संजय सिंह को निशाना बनाया गया है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ईडी अधिकारियों ने संजय सिंह के आवास के चप्पे-चप्पे पर छापेमारी की लेकिन कुछ नहीं मिला। उन्होंने सिंह को गिरफ्तार कर लिया क्योंकि वह लगातार केंद्र के भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते थे।</p>
<p>आतिशी ने कहा कि अगर उनके नेता के खिलाफ कोई सबूत है तो केंद्र को इसे सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देना चाहती हूं कि अगर उन्हें संजय सिंह के खिलाफ कोई सबूत मिला है, तो उन्हें इसे सार्वजनिक करना चाहिए या उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए। वे अपने अधिकारियों को ऐसी किसी भी जगह भेज सकते हैं जहां संजय सिंह गए थे और मैं गारंटी दे सकती हूं कि उन्हें उनके खिलाफ कुछ भी नहीं मिलेगा।''</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र संजय सिंह को गिरफ्तार करके उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रहा है। आतिशी ने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि जब भी कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसे चुप कराने की कोशिश की जाएगी। चूंकि वे उन्हें (सिंह को) चुप नहीं करा सके, इसलिए उन्होंने हमारे नेता को गिरफ्तार कर लिया। भाजपा को पता होना चाहिए कि आप उनकी गिरफ्तारी की धमकियों से डरने वाली नहीं है।''</p>
<p>आप के राज्यसभा सदस्य, पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसौदिया के बाद अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से संबंधित मामले में गिरफ्तार होने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के दूसरे ‘हाई प्रोफाइल' नेता बन गए हैं। सिंह (51) की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। दिल्ली के मंत्री सत्येन्द्र जैन को ईडी ने 30 मई, 2022 को धन शोधन के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>दिल्‍ली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Oct 2023 12:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Office Desk Lucknow]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संजय सिंह पर ईडी की छापेमारी को लेकर आप का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  </p>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>राहुल जायसवाल की रिपोर्ट</strong><br /><strong>नैनी प्रयागराज ।</strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी प्रयागराज के कार्यकर्ताओं ने सुभाष चौराहे पर आप सांसद संजय सिंह पर  ईडी की छापेमारी को लेकर किया विरोध।इस बीच पुलिस और आप कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नोकझोक हुई l</p>
<p>  दौरान  सर्वेश यादव ,अंजनी कुमार मिश्रा, संजय पाण्डेय प्रचण्ड,महानगर अध्यक्ष मो कादिर ,दीपक पासी, कप्तान पटेल, गीता पटेल, रेणुका राय, मित्रा कैथवास,अमन कुमार सौरभ सिंह, संजीव तिवारी बाबी शशि चंद्रा, रावेंद्र पाण्डेय,दीपक गांगुली, निखिल भारतीया, सुधा , गोलू सोनकर , गणेश चौरसिया , प्रेम प्रकाश पटेल, धीरज तिवारी, मो रिजवान,मुकेश जायसवाल, रमेश भारतीय, राम सजीवन यादव,मो जैद,</p>
<p>आयुष</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/135512/aap-protests-against-ed-raid-on-sanjay-singh"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-10/img-20231004-wa0143.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong><br /><strong>राहुल जायसवाल की रिपोर्ट</strong><br /><strong>नैनी प्रयागराज ।</strong></p>
<p>आम आदमी पार्टी प्रयागराज के कार्यकर्ताओं ने सुभाष चौराहे पर आप सांसद संजय सिंह पर  ईडी की छापेमारी को लेकर किया विरोध।इस बीच पुलिस और आप कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नोकझोक हुई l</p>
<p> दौरान  सर्वेश यादव ,अंजनी कुमार मिश्रा, संजय पाण्डेय प्रचण्ड,महानगर अध्यक्ष मो कादिर ,दीपक पासी, कप्तान पटेल, गीता पटेल, रेणुका राय, मित्रा कैथवास,अमन कुमार सौरभ सिंह, संजीव तिवारी बाबी शशि चंद्रा, रावेंद्र पाण्डेय,दीपक गांगुली, निखिल भारतीया, सुधा , गोलू सोनकर , गणेश चौरसिया , प्रेम प्रकाश पटेल, धीरज तिवारी, मो रिजवान,मुकेश जायसवाल, रमेश भारतीय, राम सजीवन यादव,मो जैद,</p>
<p>आयुष तिवारी,अर्पित साहू , के के मिश्रा सैयद , आर आर मिश्रा,नवनीत यादव ,हरेंद्र प्रताप ठाकुर,  दीपक श्रीवास्तव , कर्ण प्रताप पाण्डेय, नरेंद्रकुमार ,राजकुमार, विशाल सिंह यादव, अमित यादव, रण बहादुर पटेल, अरुण कुमार कुशवाहा,देवेंद्र ,मनीष सिंह, अमित कुमार मधुकर, संजय, हरीश कुमार वर्मा ,प्रदीप कुमार ,मनोज कुमार निषाद , प्रशांत श्रीवास्तव,सोनी कुमार आदि सैंकड़ों साथी मौजूद रहे l </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Oct 2023 22:07:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आइये अब सड़कों पर मुकाबला करें </title>
                                    <description><![CDATA[<p><br />  <br />संसद का सत्रावसान हो चुका है ।  संसद में जिन लोगों ने कथित रूप से अमर्यादित आचरण किया उन्हें एक- एककर निलंबित कर दिया गया । खुशनसीब थे राहुल गांधी जो लोकसभा की सदस्य्ता बहाली के बाद अमर्यादित आचरण की वजह से निलंबित नहीं किये गए। सदन से निलंबित सांसद अब सड़क पर अपनी बात कह सकते है ।  सड़को पर निलंबन का खतरा नहीं होता ।  सड़क की मर्यादा संसद  की मर्यादा से एकदम अलग होती है ।  सड़क पर न कोई बिरला होता है और न कोई धनकड़ जो ये तय कर सके की मर्यादा और अमर्यादा क्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/133437/lets-compete-in-the-streets"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/आइये-अब-सड़कों-पर-मुकाबला-करें.jpg" alt=""></a><br /><p><br /> <br />संसद का सत्रावसान हो चुका है ।  संसद में जिन लोगों ने कथित रूप से अमर्यादित आचरण किया उन्हें एक- एककर निलंबित कर दिया गया । खुशनसीब थे राहुल गांधी जो लोकसभा की सदस्य्ता बहाली के बाद अमर्यादित आचरण की वजह से निलंबित नहीं किये गए। सदन से निलंबित सांसद अब सड़क पर अपनी बात कह सकते है ।  सड़को पर निलंबन का खतरा नहीं होता ।  सड़क की मर्यादा संसद  की मर्यादा से एकदम अलग होती है ।  सड़क पर न कोई बिरला होता है और न कोई धनकड़ जो ये तय कर सके की मर्यादा और अमर्यादा क्या है ?</p>
<p><br />ये पहला मौक़ा था जब सांसदों  को चुन  -चुनकर निलंबित किया गया ।  निलंबन से पहले बर्खास्तगी शुरू हुई थी। राहुल गांधी पहला शिकार बने थे,लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने उनकी सदस्य्ता को बहाल करा दिया ।  उन्हीं की तरह भाजपा के एक दूसरे सांसद को सजा हुई थी किन्तु उनकी  बर्खास्तगी से पहले ही अधीनस्थ न्यायालय ने उन्हें राहत दे दी ,लेकिन अभागे थे आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और राघव चढ्ढा ,जिन्हे  कोई राहत कहीं से नहीं मिली ।  संसद का सत्रावसान होते -होते कांग्रेस के अधीर रंजन को भी निलंबित कर दिया गया।   सांसदों का निलंबन सदन के सभापतियों का विश्वशाधिकार नहीं विवेकाधिकार है। यदि पक्षकार को सभापति के विवेक पर कोई शक-सुब्हा है तो ऐसे निर्णयों को चुनौती भी दी जा सकती  है. इसके लिए अलग से मंच हैं ।</p>
<p><br />दुर्भाग्यपूर्ण ये है कि निलंबन के सभी मामलों में सदाशयता बरती ही नहीं गयी। सस्दयों को अमर्यादित आचारण के कारण निलंबित करना ही एकमात्र विकल्प नहीं है।  बिगड़ैल सदस्यों के लिए ही मार्शल का इंतजाम किया गया है ,लेकिन वे अब कहीं दिखाई नहीं देते। अब तो सभापति अपने सदन में अपनी  बात रखने की कोशिश करने वालों को मौक़ा ही नहीं देते ।  मर्यादा की मख्खी उड़ी नहीं की निलंबन का आदेश सुनाया गया। पूरे देश में सदन की सीधी कार्रवाई के दौरान कथित रूप से मर्यादा भंग करने वाले सदस्यों का आचरण भी देखा और माननीय सभापतियों का भी। ये पहला मौक़ा था जब एक परिवार को गरियाने की पूरी  छूट सदन में दी गयी और दूसरी तरफ संघ परिवार का जिक्र तक करने पर सभापति चीखने  लगे।</p>
<p><br />मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि अब सियासत की तरह लोकसभा और राज्य सभा की गरिमा में भी तेजी से गिरावट आ रही है। सदन की गरिमा की बात करना या उसमें आ रही गिरावट का जिक्र करना सदन का विशेषाधिकार हनन नहीं हो सकता। यदि ऐसा माना जाता है तो फिर लोकतंत्र की बात करना ही बेमानी ही। सदन के सभापति भले ही किसी राजनीतिक दल से चुनकर सदन में आते हों किन्तु वे जब सभापति चुन लिए जाते हैं तब वे दलगत राजनीति से ऊपर उठ जाते हैं। सभापति सदन के हरेक सदस्य का संरक्षक होता है। यदि इसमें रंचमात्र भी पक्षपात किया जाता है तो समस्या पैदा होती है। आज दुर्भाग्य से ये समस्या पैदा हो रही है।</p>
<p><br />बहरहाल बात संसद के सत्रावसान के बाद सड़क पर संग्राम  की हो रही है। अब जो मुद्दे सदन में जेरे बहस नहीं आ सके ,उनको लेकर सड़क पर विमर्श किया जा सकता है। सड़क पर विमर्श से रोकने वाला कोई नहीं है। जिसके दिल में जो है सो बोले और खुलकर बोले। अब सभापति की आसंदी पर  जनता बैठी है। जनता किसी भी अमर्यादित वक्ता को निलंबित नहीं करती.सीधे रिजेक्ट या सिलेक्ट करती है। जनता को सिलेक्शन का मौक़ा शीघ्र मिलने वाला है। जनता जिसे चाहे चुने ,जिसे चाहे न चुने। कहीं कोई जबरदस्ती नहीं। उसे पप्पू चाहिए या गप्पू ये जनता खुद तय करे। उसे इशारा करके कांग्रेस का डिब्बा गोल करने का आव्हान करने वाला नेता चाहिए या सड़क पर चलकर जनता के बीच रहने वाला नेता ?</p>
<p><br />जो संसद सदन में बोलने से हिचकते हैं ,संकोच करते हैं वे सड़क पर बोलने के लिए आजाद हैं। जरूरी नहीं की वे अंग्रेजी या हिंदी में ही बोले।  वे अपनी-अपनी मातृभाषा में बोलें । अपने लोगों के बीच में बोलें। जी भरकर बोलें। उनके बोलने  के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया जाएगा । सदन में तो पार्टी की हैसियत के हिसाब से बोलने का मौक़ा मिलता है किन्तु सड़क पर ऐसा नहीं है।  यहां सब बराबर हैं। अब भला दो-तीन मिनिट में कोई संसद सदन में अपनी बात कैसे रख सकता है ? सदन में तो सभापति ही राष्ट्रपति होता है।  वो चाहे तो आपको आपकी मातृभाषा में बोलने का आग्रह  भी कर सकता है।  जैसा कि सीता जी के साथ हुआ। उनसे चेयर ने अपनी मातृभाषा में बोलने का अनुरोध किया था।</p>
<p><br />सदन से निलंबित सदस्यों के प्रति मेरी सहानुभूति है। इस सहानुभूति   के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है। इस सहानुभूति की वजह उनके बोलने के अधिकार में कतरव्योंत है। निलंबत संसद अपने-अपने क्षेत्र की जनता की आवाज माने जाते हैं। जो चुने नहीं जाते वे मनोनीत संसद भी जनता की बात रखने के लिए सदन में भेजे जाते हैं।  उन्हें बोलने का अवसर मिलना चाहिए।  यदि सचमुच वे अमर्यादित हो रहे हैं तो उन्हें समझा-बुझाकर,डांटकर .बातचीत कर हद में रहने के लिए कहा जा सकता है लेकिन इतना कठोर नहीं हुआ जा सकता कि उन्हें पूरे सत्र के लिए ही सदन से बाहर  किया जाये .निलंबन एक कठोर सजा है।</p>
<p><br />आने वाले दिनों में हम राष्ट्रवाद के एक और उन्माद से गुजरने वाले है।  घर-घर मोदी के साथ ही घर-घर तिरंगा लगाने का उन्माद। ये उन्माद भी राजनीतिक  ही है। वरना कौन तिरंगा लगाए या न लगाए इससे सरकार या पार्टी का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए।  हम स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद करते हैं कि सरकार अब मणिपुर और हरियाणा में अमन बहाली  के लिए और ज्यादा गंभीर प्रयास करेगी। इन प्रयासों के बारे में देश को बताया जाए या नहीं ये सरकार ही जाने। सरकार सुप्रीम होती है। उसे बताने के लिए विवश नहीं किया जा सकता। और बहुमत की सरकार को तो बिलकुल ही विवश नहीं किया जा सकता।</p>
<p><br />स्वतंत्रता दिवस से कांग्रेस एक बार फिर जनता के बीच जाने वाली है। कांग्रेस भाजपा के लिए भूत और अछूत हो सकती है किन्तु जनता के लिए आज भी कांग्रेस के लिए स्थान ह।  गुंजाइश है और देश में जब भी [जब भी से मतलब जब भी से ही है ] बदलाव होगा तो कमान कांग्रेस के हाथ में ही होगी।  क्योंकि कांग्रेस ही है जो भाजपा का मुकाबला कर सकती है। भाजपा संसद में तो अपनी मर्जी के नारे लगवा सकती है लेकिन सड़क पर ऐसा मुमकिन नहीं होगा। यहां बाजीगरी से भी शायद इस बार काम न चले ,क्योंकि चेहरों पर हवाइयां और हाथों  से तोते तेजी से उड़ते दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p><br />मेरा सौभाग्य है कि मैंने देश में जनसंघ और भाजपा के संस्थापकों में से बहुत को देखा है. उन्हें काम करते देखा है. उनमें कांग्रेस के प्रति कट्टरता  को देखा है .लेकिन उनमें   विनम्रता,सौहार्द और मर्यादा को भी देखा है .जहाँ जरूरी हुआ है उन्हें कांग्रेस के पक्ष में मैदान से हटते हुए भी देखा है। कांग्रेसियों के यहां जन्मदिन,शादी-व्याह और होली-दीवाली आते -जाते हुए भी देखा है , किन्तु ये अतीत की बातें हैं।  आज के सत्तारूढ़ दल के नेता अदावत की राजनीति कर रे हैं जिस्मने सौहार्द ,सामंजस्य और सामाजिकता का कोई स्थान नहीं है। तो आइये अब सड़क पर दो-दो हाथ करने की तैयारी कीजिये। <br />@ राकेश अचल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2023 13:09:01 +0530</pubDate>
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