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                <title>Bengaluru water shortage - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Bengaluru water shortage RSS Feed</description>
                
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                <title>दीर्घकालिक लापरवाही से बढ़ रही शहरों की प्यास</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी की लहरें अभी से रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और देश के बड़े-बड़े शहरों में बिजली की मांग चरम पर पहुंच गई है। इसी के साथ जल संकट एक बार फिर सिर उठा रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और मुंबई जैसे महानगरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई इलाकों में टैंकरों की लंबी कतारें लग रही हैं तथा पानी की आपूर्ति अनियमित हो गई है। दक्षिण भारत के अनेक जलाशयों में अप्रैल महीने में ही कुल भंडारण क्षमता का लगभग </span>47<span lang="hi" xml:lang="hi">  से </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi">  प्रतिशत से भी कम पानी बचा</span>2026</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177587/the-thirst-of-cities-is-increasing-due-to-long-term"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-28-at-11.16.04.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">राजीव शुक्ला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी की लहरें अभी से रिकॉर्ड तोड़ रही हैं और देश के बड़े-बड़े शहरों में बिजली की मांग चरम पर पहुंच गई है। इसी के साथ जल संकट एक बार फिर सिर उठा रहा है। दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंगलुरु</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेन्नई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हैदराबाद और मुंबई जैसे महानगरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। कई इलाकों में टैंकरों की लंबी कतारें लग रही हैं तथा पानी की आपूर्ति अनियमित हो गई है। दक्षिण भारत के अनेक जलाशयों में अप्रैल महीने में ही कुल भंडारण क्षमता का लगभग </span>47<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से भी कम पानी बचा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि तत्काल प्रभावी और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए गए तो वर्ष </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> का ग्रीष्म कई शहरों के लिए ‘डे जीरो’ जैसी भयावह स्थिति पैदा कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत विश्व के सबसे जल-तनावग्रस्त देशों में शामिल है। नीति आयोग और विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार देश की प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता लगातार घट रही है। शहरीकरण की तेज रफ्तार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनसंख्या वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र में भूजल का अत्यधिक दोहन मुख्य कारण हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड के हालिया आकलन के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर भूजल निकासी लगभग </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कई राज्यों में यह </span>100<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत से भी अधिक पहुंच चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस वर्ष की प्रारंभिक गर्मी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। दिल्ली जैसे शहरों में भूजल अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्रों में बोरवेल अब </span>300<span lang="hi" xml:lang="hi"> फीट से भी अधिक गहराई तक जाने को मजबूर हैं। बेंगलुरु में हजारों बोरवेल सूख चुके हैं तथा कई क्षेत्र उच्च जल-तनाव वाले चिह्नित किए गए हैं। चेन्नई और हैदराबाद भी निरंतर संकट से जूझ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कारण और प्रभाव </span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट के पीछे कई गंभीर कारण हैं। अनियोजित शहरी विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षा जल संचयन की कमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तालाबों और झीलों का अतिक्रमण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपशिष्ट जल का नाकाफी उपचार तथा भूजल का अंधाधुंध दोहन प्रमुख हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनिश्चितता भी समस्या को बढ़ा रही है। शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट जल का मात्र </span>28<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत ही उपचारित हो पाता है। शेष अनुपचारित जल नदियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झीलों और भूजल को प्रदूषित कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">पेय पदार्थ कंपनियों का जल दोहन:</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">संकट को और गंभीर बनाने में कोका कोला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेप्सी तथा अन्य शीतल पेय और बोतलबंद पानी बनाने वाली बड़ी कंपनियों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। इन कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट भूजल का भारी मात्रा में उपयोग करते हैं। एक सामान्य शीतल पेय की बोतल बनाने में उत्पादन प्रक्रिया सहित सैकड़ों लीटर पानी खर्च होता है। कई क्षेत्रों में इन प्लांटों को भूजल के अत्यधिक दोहन के लिए दोषी ठहराया जाता रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केरल के प्लाचीमाडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजस्थान के काला डेरा और उत्तर प्रदेश के मेहदीगंज जैसे स्थानों पर स्थानीय किसानों और निवासियों ने आरोप लगाए हैं कि इन कंपनियों के प्लांटों के कारण भूजल स्तर तेजी से गिरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कृषि प्रभावित हुई और गांवों में पीने के पानी की कमी बढ़ी। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने भी उत्तर प्रदेश में इन कंपनियों के कुछ प्लांटों पर भूजल दोहन के लिए करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये कंपनियां लाखों लीटर भूजल प्रतिदिन निकालती हैं जबकि आसपास के गांव टैंकर पानी पर निर्भर रहते हैं। यद्यपि कंपनियां जल संरक्षण और रिचार्ज परियोजनाओं का दावा करती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कई स्वतंत्र अध्ययनों और स्थानीय शिकायतों में इन प्रयासों को अपर्याप्त बताया जाता है। जब आम नागरिक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब बड़े पैमाने पर शीतल पेय और बोतलबंद पानी का उत्पादन जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य नागरिकों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। निम्न आय वर्ग के परिवार और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग महंगे तथा अक्सर दूषित टैंकर पानी पर निर्भर हो गए हैं। जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी भारी बोझ पड़ रहा है। उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे कारोबार और कृषि कार्य सभी प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संकट और जल संकट अब एक-दूसरे से जुड़कर एक विकट चक्र बना रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">नीतिगत चुनौतियां</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु से पहले कार्य योजना जारी करती हैं – टैंकरों की व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास और जागरूकता अभियान। ये कदम सराहनीय हैं किंतु ये केवल लक्षणों का उपचार हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूल समस्या का समाधान नहीं। अपशिष्ट जल उपचार की क्षमता अभी भी बहुत कम है। वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाने और पुराने जलाशयों के पुनरुद्धार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता सीमित है। भूजल दोहन पर सख्त नियंत्रण लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पेय पदार्थ उद्योग पर भी सख्त नियमन की जरूरत है। उच्च जल-तनाव वाले क्षेत्रों में नए प्लांट स्थापित करने पर रोक तथा मौजूदा प्लांटों के जल उपयोग की स्वतंत्र निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। कृषि क्षेत्र में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की नीति भी अभी अपर्याप्त है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या किया जाना चाहिए</span>?</strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट हमें याद दिलाता है कि सतत विकास जल सुरक्षा के बिना संभव नहीं है। तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई की आवश्यकता है:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">हर इमारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉलोनी और औद्योगिक इकाई में वर्षा जल संचयन प्रणाली को अनिवार्य बनाना तथा इसके पालन के लिए पुरस्कार और दंड की स्पष्ट व्यवस्था करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग को बढ़ावा देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषकर उद्योग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निर्माण और बागवानी जैसे गैर-पीने वाले कार्यों के लिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">भूजल दोहन पर सख्त निगरानी तथा रिचार्ज प्रणाली लागू करना। उच्च जल-तनाव वाले क्षेत्रों में पेय पदार्थ कंपनियों के भूजल उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाना और उनके जल उपयोग की वार्षिक स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">शहरी नियोजन में झीलों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तालाबों और हरित क्षेत्रों का संरक्षण सुनिश्चित करना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">- <span lang="hi" xml:lang="hi">जल बचत को जन-जागरूकता के माध्यम से संस्कृति का हिस्सा बनाना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर एक मजबूत राष्ट्रीय जल सुरक्षा मिशन तैयार करना चाहिए जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय स्तर के समाधान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेटा आधारित निगरानी और जलवायु अनुकूलन सभी शामिल हों। पेय उद्योग को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जल-न्यूट्रल उत्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्ष: </span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">भीषण गर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली संकट और जल संकट अब एक साथ आ रहे हैं। ये अलग-अलग मुद्दे नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास की एक ही कहानी के विभिन्न पहलू हैं। जब बड़े उद्योग लाखों लीटर पानी का उपयोग कर रहे हों तो आम जनता की प्यास बुझाना और भी कठिन हो जाता है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि हम आज दूरदर्शी कदम नहीं उठाए तो कल का शहरी भारत विकास की राह पर ठिठक सकता है। हर बूंद कीमती है। पानी की बर्बादी रोकना हर नागरिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और सरकार की जिम्मेदारी है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समय अभी है। सतत और दूरदर्शी नीतियों के साथ-साथ सामूहिक प्रयास से ही हम इस बढ़ते संकट को नियंत्रित कर सकते हैं और एक जल-समृद्ध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतत तथा मजबूत भारत का निर्माण कर सकते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:39:15 +0530</pubDate>
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