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                <title>Youth Against Drugs - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Youth Against Drugs RSS Feed</description>
                
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                <title>युवाओं को नशे के चंगुल से बचाना राष्ट्रीय संकल्प देश की शक्ति और भविष्य की रक्षा का सबसे बड़ा अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा उद्योग खेल और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि यही युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाए तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रहती बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184621/national-resolution-to-save-youth-from-the-clutches-of-drugs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002107399.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत आज दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। देश की बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और यही युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की सबसे बड़ी उम्मीद भी है। यदि यह ऊर्जा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा उद्योग खेल और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। लेकिन यदि यही युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में चला जाए तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं रहती बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर चुनौती बन जाती है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल में फंसाने के पीछे देश विरोधी ताकतों की साजिश भी हो सकती है। उनका यह संदेश केवल चेतावनी नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए जागने का आह्वान है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नशा आज केवल शराब या तंबाकू तक सीमित नहीं है। सिंथेटिक ड्रग्स हेरोइन कोकीन चरस गांजा और कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ तेजी से युवाओं तक पहुंच रहे हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से भी नशे का जाल फैलाने की कोशिशें हो रही हैं। कई बार युवाओं को आधुनिक जीवनशैली या फैशन के नाम पर नशे की ओर आकर्षित किया जाता है। शुरुआत शौक के रूप में होती है लेकिन धीरे धीरे यह लत बन जाती है और फिर व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह मस्तिष्क हृदय फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है। मानसिक तनाव अवसाद चिंता और आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होती है। नौकरी करने वाले युवाओं की कार्यक्षमता घट जाती है। कई बार नशे की लत अपराध हिंसा सड़क दुर्घटनाओं और पारिवारिक विवादों का कारण भी बनती है। इस प्रकार नशा केवल व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य अंधकारमय बना देता है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे देश में जहां युवाओं से विकसित भारत का सपना जुड़ा है वहां नशे की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। देश की अर्थव्यवस्था उद्योग कृषि रक्षा विज्ञान और तकनीक सभी क्षेत्रों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। यदि बड़ी संख्या में युवा नशे के शिकार होंगे तो देश की उत्पादक क्षमता और सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यही कारण है कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल स्वास्थ्य अभियान नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से अपील की है कि वे नशे से दूर रहें और अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें। उन्होंने यह भी कहा कि नशे के कारोबार से जुड़ा धन कई बार देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। सीमा पार से होने वाली ड्रग्स की तस्करी केवल अवैध व्यापार नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। इसलिए नशे के खिलाफ संघर्ष कानून व्यवस्था का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;">देश में केंद्र और राज्य सरकारें नशे की रोकथाम के लिए अनेक कदम उठा रही हैं। सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ड्रग्स माफिया के नेटवर्क को तोड़ने में लगी हैं। स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवा शुरुआत में ही इस खतरे को समझ सकें। इसके साथ ही नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से उपचार और परामर्श की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। माता पिता को अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना उन्हें समय देना और उनकी समस्याओं को समझना आवश्यक है। कई बार अकेलापन तनाव असफलता या गलत संगति युवाओं को नशे की ओर ले जाती है। यदि परिवार समय रहते सहयोग और मार्गदर्शन दे तो अनेक युवा इस रास्ते पर जाने से बच सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के स्थान भी हैं। यहां खेल सांस्कृतिक गतिविधियां योग ध्यान और नैतिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को सकारात्मक वातावरण दिया जा सकता है। यदि युवाओं की ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगेगी तो उनके नशे की ओर आकर्षित होने की संभावना कम होगी।</div>
<div style="text-align:justify;">समाज को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। धार्मिक संस्थाएं सामाजिक संगठन स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर जागरूकता अभियान चला सकते हैं। नशे को सामाजिक प्रतिष्ठा या आधुनिकता का प्रतीक मानने की गलत सोच को बदलना होगा। फिल्मों सोशल मीडिया और मनोरंजन के अन्य माध्यमों को भी जिम्मेदारी के साथ सकारात्मक संदेश देना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को स्वयं भी यह समझना होगा कि जीवन की वास्तविक सफलता नशे में नहीं बल्कि ज्ञान मेहनत अनुशासन और आत्मविश्वास में है। खेल संगीत साहित्य विज्ञान और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उपयोग करके वे अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी नशे का सहारा लेने के बजाय परिवार मित्रों शिक्षकों और विशेषज्ञों से सलाह लेना अधिक उचित मार्ग है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने आज दुनिया में अपनी नई पहचान बनाई है। अंतरिक्ष से लेकर डिजिटल तकनीक तक हर क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश का युवा स्वस्थ शिक्षित आत्मविश्वासी और नशामुक्त होगा। इसलिए नशे के खिलाफ अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन बनना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को यह संकल्प लेना होगा कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;">युवाओं को नशे से बचाना केवल एक सामाजिक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की रक्षा का संकल्प है। जब युवा स्वस्थ होंगे तभी परिवार मजबूत होंगे समाज सुरक्षित होगा और भारत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। यही समय है कि पूरा देश एकजुट होकर नशे के विरुद्ध आवाज उठाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित स्वस्थ और सशक्त भारत का निर्माण करे।</div>
<div style="text-align:justify;">        *कांतिलाल मांडोत</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:09:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नशे का साम्राज्य ध्वस्त करने की निर्णायक जंग: ड्रग कार्टेल्स पर केंद्र का बड़ा प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177494/decisive-battle-to-destroy-the-drug-empire-centres-big-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/696e5a86beb48-delhi-police-operation-new-year-100-crore-drugs-drug-mafia-192418438-16x9.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल ड्रग्स की सप्लाई रोकना है, बल्कि उन पूरे नेटवर्क्स को ध्वस्त करना है जो इस अवैध कारोबार को संचालित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस लड़ाई का नेतृत्व (एनसीबी) कर रही है, जो अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में समन्वित कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत अब सिर्फ छोटे तस्करों या स्थानीय सप्लायर्स को पकड़ना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स और सिंडिकेट्स को निशाना बनाया जा रहा है जो इस पूरे नेटवर्क के असली संचालक हैं। यह रणनीति स्पष्ट करती है कि सरकार अब ‘सप्लाई चेन’ के हर स्तर को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय शीर्ष दस ड्रग कार्टेल्स की पहचान करें और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्रग्स का नेटवर्क अब अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुका है। तस्कर अब डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, एजेंसियां भी अब अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इन डिजिटल नेटवर्क्स पर पैनी नजर रख रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में ड्रग्स की तस्करी के प्रमुख मार्गों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या कितनी व्यापक और जटिल है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से आने वाला ‘डेथ क्रिसेंट’ नेटवर्क हेरोइन की बड़ी मात्रा भारत तक पहुंचाता है। यह सप्लाई समुद्री मार्गों, रेगिस्तानी इलाकों, नदियों और अब ड्रोन के माध्यम से भी की जा रही है। विशेष रूप से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्य इस तस्करी के प्रमुख मार्ग बन चुके हैं। ड्रोन के जरिए सीमा पार से ड्रग्स गिराने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर राज्यों में म्यांमार के रास्ते आने वाले ड्रग्स का प्रवाह भी एक बड़ी समस्या है। वहीं गुजरात का समुद्री तट अंतरराष्ट्रीय तस्करी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य बड़े उपभोक्ता और वितरण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि ड्रग्स का नेटवर्क देश के कई हिस्सों में गहराई तक फैल चुका है, जिसे खत्म करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की इस नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ध्यान केवल तस्करी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर चल रही अवैध ड्रग लैब्स और सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन को भी खत्म करना है। सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि इन्हें आसानी से छिपाकर तैयार किया जा सकता है और इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है, खासकर शहरी युवाओं के बीच।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई के आंकड़े इस अभियान की गंभीरता और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में एनसीबी ने 1.33 लाख किलो से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए, जिनकी कीमत 1980 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई। इसके अलावा, 3889 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 77 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स को नष्ट किया गया। वर्ष 2024 में भी बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए थे, जो यह दिखाता है कि एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि पिछले पांच वर्षों के रुझानों को देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि ड्रग्स की जब्ती में लगातार वृद्धि हुई है। इसका एक अर्थ यह भी है कि तस्करी के प्रयास बढ़े हैं, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि एजेंसियों की पकड़ और क्षमता भी मजबूत हुई है। बड़ी-बड़ी खेपों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि अब नेटवर्क के ऊपरी स्तर तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे इस अवैध व्यापार को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आर्थिक नुकसान ही इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब करोड़ों और अरबों रुपये की ड्रग्स खेप पकड़ी जाती है, तो इससे न केवल तस्करों की कमर टूटती है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क की वित्तीय संरचना भी कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि सरकार अब ‘फॉलो द मनी’ यानी धन के प्रवाह को ट्रैक करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि इस कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है, तो यह सीधे तौर पर उन लाखों युवाओं तक नशे की पहुंच को रोकता है, जिन्हें इस जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही होती है। इस प्रकार, हर जब्ती केवल एक कानूनी सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक विजय भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे युवा देश में, जहां बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, ड्रग्स का खतरा और भी गंभीर हो जाता है। नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र की प्रगति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, ड्रग्स के खिलाफ यह लड़ाई केवल सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी की मांग करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें राज्यों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि तस्करी के हर प्रयास को समय रहते रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि अब यह एक ‘मिशन मोड’ में चलाया जा रहा है। जिस प्रकार नक्सलमुक्त भारत अभियान ने एक स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति के साथ काम किया, उसी प्रकार नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी अब स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। यह एक लंबी और चुनौतीपूर्ण लड़ाई जरूर है, लेकिन जिस प्रकार से एजेंसियां समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत तरीके से काम कर रही हैं, उससे यह उम्मीद मजबूत होती है कि आने वाले वर्षों में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि ड्रग्स के खिलाफ यह जंग केवल अपराध के खिलाफ नहीं, बल्कि भविष्य को बचाने की जंग है। हर जब्त की गई खेप, हर ध्वस्त किया गया नेटवर्क, और हर पकड़ा गया तस्कर इस बात का प्रमाण है कि देश अपने युवाओं को नशे के अंधकार से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इसी दृढ़ता और समन्वय के साथ यह अभियान जारी रहता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल नक्सलमुक्त, बल्कि नशामुक्त राष्ट्र के रूप में भी दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:54:04 +0530</pubDate>
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