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                <title>NCB India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>नशा, संवेदना और बचपन</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184774/drug-addiction-and-childhood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/s-th1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वामी विवेकानंद ने कहा था हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जो चरित्र का निर्माण करे, मन का बल बढ़ाए और मनुष्य को अपने पैरों पर खड़ा कर दे, नशा  शिक्षा, चरित्र और आत्मबल तीनों का सबसे बड़ा शत्रु है। मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी उसकी संवेदना और बचपन की मासूमियत है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है और बचपन उसके व्यक्तित्व की नींव रखता है। किंतु आज नशीले पदार्थों का बढ़ता जाल इन दोनों पर सबसे कड़ा प्रहार कर रहा है। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि विवेक, करुणा, परिवार, शिक्षा, संस्कृति और भविष्य को भी नष्ट कर देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस आयु में बच्चों के हाथों में पुस्तकें और सपने होने चाहिए, वहाँ यदि नशे का जहर पहुँच जाए तो आने वाला पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। भारत में पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स, सिंथेटिक नशे, हेरोइन, चरस, गांजा, अफीम तथा नशीली गोलियों का प्रसार चिंताजनक रूप से बढ़ा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। 2019 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 16 करोड़ लोग शराब, 3 करोड़ से अधिक लोग भांग या गांजा तथा लगभग 2.3 करोड़ लोग ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि) का सेवन करते पाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें बड़ी संख्या 10 से 17 वर्ष और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में पंजाब, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र तथा गोवा प्रमुख हैं। पंजाब में हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स का गंभीर संकट लंबे समय से चिंता का विषय है। पूर्वोत्तर के राज्यों में सीमा पार से होने वाली तस्करी ने युवाओं को प्रभावित किया है। राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मादक पदार्थों की तस्करी लगातार बढ़ी है। महानगरों में नशीली गोलियां, कोकीन और पार्टी ड्रग्स तेजी से फैल रहे हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि नशे की शुरुआत अब किशोरावस्था में ही होने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव, गलत संगति तथा मानसिक तनाव के कारण अनेक बच्चे नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। परिणामस्वरूप पढ़ाई छूट जाती है, अपराध बढ़ते हैं, हिंसा और आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित होती है तथा परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूटने लगते हैं। नशा सबसे पहले मनुष्य की संवेदना को समाप्त करता है। जो व्यक्ति कभी माता-पिता के प्रति श्रद्धावान था, वही नशे की लत में उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगता है। परिवार की जमा पूंजी नशे में समाप्त हो जाती है। अनेक युवा चोरी, लूट और अन्य अपराधों की ओर बढ़ जाते हैं। धीरे-धीरे रिश्तों की गर्माहट समाप्त होने लगती है और मनुष्य केवल नशे का दास बनकर रह जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने कहा था शराब और नशा मनुष्य की आत्मा का पतन कर देते हैं। डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का संदेश था शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। यह संदेश नशामुक्त समाज की स्थापना के लिए भी उतना ही आवश्यक है। नशे के विरुद्ध केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं। परिवार, विद्यालय, समाज, धार्मिक संस्थाएँ, मीडिया तथा शासन सभी को मिलकर कार्य करना होगा। बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना, खेल, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना, विद्यालयों में नशामुक्ति शिक्षा को अनिवार्य बनाना तथा नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करना समय की आवश्यकता है। सीमाओं पर तस्करी रोकने के साथ-साथ ऑनलाइन अवैध नेटवर्क पर भी कठोर कार्रवाई आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी राष्ट्र का बचपन सुरक्षित है तो उसका भविष्य भी सुरक्षित है। लेकिन यदि बचपन नशे की गिरफ्त में चला गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल आर्थिक ही नहीं, नैतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी कमजोर हो जाएँगी। इसलिए नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है।आइए संकल्प लें कि हम अपने घर, विद्यालय, समाज और कार्यस्थल पर नशामुक्ति का संदेश फैलाएँगे। हर बच्चे के हाथ में नशा नहीं, पुस्तक होगी; हर युवा की आँखों में धुंध नहीं, सपने होंगे; और हर परिवार में भय नहीं, संवेदना और विश्वास का वातावरण होगा। यही स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की वास्तविक पहचान बनेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2025–26 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़े बताते हैं कि भारत में नशीले पदार्थों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल संरक्षण का गंभीर संकट बन चुकी है। गृह मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो के अनुसार नशे की तस्करी पर लगातार कार्रवाई के बावजूद इसकी पहुँच बच्चों और युवाओं तक बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा एम्स के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 10–17 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20 लाख बच्चे कैनाबिस (गांजा), 40 लाख बच्चे ओपिओइड (अफीम, हेरोइन आदि), 30 लाख बच्चे इनहेलेंट (सूँघने वाले नशीले पदार्थ) तथा लगभग 20 लाख बच्चे नशीली दवाओं (सेडेटिव) के सेवन से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय छोड़ने वाले किशोरों और शहरी मलिन बस्तियों के बच्चों में यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रही है।मार्च 2025 में संसद में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार 2023–24 में देशभर के ओपन शेल्टरों में रहने वाले 4,158 बच्चों की पहचान नशे से प्रभावित बच्चों के रूप में की गई। म यह आँकड़े केवल सरकारी आश्रय गृहों में चिन्हित बच्चों के हैं; वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के अनुसार 2020 से मई 2025 तक राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो  ने 116 बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी मामलों का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 1,09,318 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए। यह दर्शाता है कि भारत न केवल नशे की खपत बल्कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क की चुनौती से भी जूझ रहा है। डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का विश्वास था— "यदि देश को विकसित बनाना है तो युवाओं को सही दिशा देनी होगी।" इसलिए नशामुक्त बचपन केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं, बल्कि विकसित भारत की आधारशिला है।आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय, समाज, मीडिया और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों की है। प्रत्येक बच्चे को स्नेह, संस्कार, खेल, साहित्य और रचनात्मक वातावरण मिले यही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है। संवेदनशील बचपन ही संवेदनशील समाज का निर्माण करता है; यदि बचपन बचा रहेगा, तभी भारत का भविष्य सुरक्षित रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 21:41:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नशे का साम्राज्य ध्वस्त करने की निर्णायक जंग: ड्रग कार्टेल्स पर केंद्र का बड़ा प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177494/decisive-battle-to-destroy-the-drug-empire-centres-big-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/696e5a86beb48-delhi-police-operation-new-year-100-crore-drugs-drug-mafia-192418438-16x9.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div>
<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल ड्रग्स की सप्लाई रोकना है, बल्कि उन पूरे नेटवर्क्स को ध्वस्त करना है जो इस अवैध कारोबार को संचालित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस लड़ाई का नेतृत्व (एनसीबी) कर रही है, जो अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में समन्वित कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत अब सिर्फ छोटे तस्करों या स्थानीय सप्लायर्स को पकड़ना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स और सिंडिकेट्स को निशाना बनाया जा रहा है जो इस पूरे नेटवर्क के असली संचालक हैं। यह रणनीति स्पष्ट करती है कि सरकार अब ‘सप्लाई चेन’ के हर स्तर को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय शीर्ष दस ड्रग कार्टेल्स की पहचान करें और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्रग्स का नेटवर्क अब अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुका है। तस्कर अब डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, एजेंसियां भी अब अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इन डिजिटल नेटवर्क्स पर पैनी नजर रख रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में ड्रग्स की तस्करी के प्रमुख मार्गों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या कितनी व्यापक और जटिल है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से आने वाला ‘डेथ क्रिसेंट’ नेटवर्क हेरोइन की बड़ी मात्रा भारत तक पहुंचाता है। यह सप्लाई समुद्री मार्गों, रेगिस्तानी इलाकों, नदियों और अब ड्रोन के माध्यम से भी की जा रही है। विशेष रूप से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्य इस तस्करी के प्रमुख मार्ग बन चुके हैं। ड्रोन के जरिए सीमा पार से ड्रग्स गिराने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर राज्यों में म्यांमार के रास्ते आने वाले ड्रग्स का प्रवाह भी एक बड़ी समस्या है। वहीं गुजरात का समुद्री तट अंतरराष्ट्रीय तस्करी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य बड़े उपभोक्ता और वितरण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि ड्रग्स का नेटवर्क देश के कई हिस्सों में गहराई तक फैल चुका है, जिसे खत्म करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की इस नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ध्यान केवल तस्करी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर चल रही अवैध ड्रग लैब्स और सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन को भी खत्म करना है। सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि इन्हें आसानी से छिपाकर तैयार किया जा सकता है और इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है, खासकर शहरी युवाओं के बीच।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई के आंकड़े इस अभियान की गंभीरता और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में एनसीबी ने 1.33 लाख किलो से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए, जिनकी कीमत 1980 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई। इसके अलावा, 3889 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 77 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स को नष्ट किया गया। वर्ष 2024 में भी बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए थे, जो यह दिखाता है कि एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि पिछले पांच वर्षों के रुझानों को देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि ड्रग्स की जब्ती में लगातार वृद्धि हुई है। इसका एक अर्थ यह भी है कि तस्करी के प्रयास बढ़े हैं, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि एजेंसियों की पकड़ और क्षमता भी मजबूत हुई है। बड़ी-बड़ी खेपों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि अब नेटवर्क के ऊपरी स्तर तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे इस अवैध व्यापार को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आर्थिक नुकसान ही इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब करोड़ों और अरबों रुपये की ड्रग्स खेप पकड़ी जाती है, तो इससे न केवल तस्करों की कमर टूटती है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क की वित्तीय संरचना भी कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि सरकार अब ‘फॉलो द मनी’ यानी धन के प्रवाह को ट्रैक करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि इस कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है, तो यह सीधे तौर पर उन लाखों युवाओं तक नशे की पहुंच को रोकता है, जिन्हें इस जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही होती है। इस प्रकार, हर जब्ती केवल एक कानूनी सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक विजय भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे युवा देश में, जहां बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, ड्रग्स का खतरा और भी गंभीर हो जाता है। नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र की प्रगति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, ड्रग्स के खिलाफ यह लड़ाई केवल सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी की मांग करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें राज्यों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि तस्करी के हर प्रयास को समय रहते रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि अब यह एक ‘मिशन मोड’ में चलाया जा रहा है। जिस प्रकार नक्सलमुक्त भारत अभियान ने एक स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति के साथ काम किया, उसी प्रकार नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी अब स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। यह एक लंबी और चुनौतीपूर्ण लड़ाई जरूर है, लेकिन जिस प्रकार से एजेंसियां समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत तरीके से काम कर रही हैं, उससे यह उम्मीद मजबूत होती है कि आने वाले वर्षों में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि ड्रग्स के खिलाफ यह जंग केवल अपराध के खिलाफ नहीं, बल्कि भविष्य को बचाने की जंग है। हर जब्त की गई खेप, हर ध्वस्त किया गया नेटवर्क, और हर पकड़ा गया तस्कर इस बात का प्रमाण है कि देश अपने युवाओं को नशे के अंधकार से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इसी दृढ़ता और समन्वय के साथ यह अभियान जारी रहता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल नक्सलमुक्त, बल्कि नशामुक्त राष्ट्र के रूप में भी दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:54:04 +0530</pubDate>
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