<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/81971/political-controversy" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>राजनीतिक विवाद - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/81971/rss</link>
                <description>राजनीतिक विवाद RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ममता बनर्जी का दावा- भाजपा की ज्यादतियों से जल्द सत्ता में लौटेगी तृणमूल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा सरकार की कथित ज्यादतियां आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ करेंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बहुत जल्द पश्चिम बंगाल में फिर से सत्ता में आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने मध्य कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनाव आयोग का दुरुपयोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186692/mamata-banerjees-claim-trinamool-will-soon-return-to-power"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/28_08_2026_15_03_47_mam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को दावा किया कि भाजपा सरकार की कथित ज्यादतियां आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ करेंगी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस बहुत जल्द पश्चिम बंगाल में फिर से सत्ता में आएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने मध्य कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के छात्र संगठन तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावों को प्रभावित करने के लिए चुनाव आयोग का दुरुपयोग किया और मतदाता सूची से लाखों नाम हटाकर ‘वोट लूटने’ के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने कोलकाता में रेहड़ी-पटरी वालों के बेदखली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार हटाए गए फेरीवालों का पुनर्वास नहीं कर सकती तो उन्हें हर महीने 25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>पुलिस पर राजनीतिक दबाव का आरोप</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस तृणमूल कांग्रेस को सभाएं और रैलियां आयोजित करने की अनुमति नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही जिलों का दौरा कर राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगी। यदि पुलिस अनुमति नहीं देती है तो वह जनता की अनुमति से कार्यक्रम करेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि अब वह राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुमति नहीं लेंगी और अदालत का समय बर्बाद नहीं करेंगी। ममता ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह मीलों पैदल चलकर भी लोगों के बीच पहुंचेंगी।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>अभिषेक बनर्जी ने बागी गुट पर साधा निशाना</strong></h6>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी संबोधित किया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘बागी लेकिन बहुसंख्यक’ गुट और हाल में राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (एनसीपीआई) में शामिल हुए पूर्व तृणमूल सांसदों को निशाने पर लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिषेक बनर्जी ने इन नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए कहा कि वह पार्टी की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी से आग्रह करेंगे कि भविष्य में ऐसे लोगों को तृणमूल कांग्रेस में वापस नहीं लिया जाए। उन्होंने मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय से बिलबोर्ड हटाए जाने को लेकर भी भाजपा और राज्य प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से पार्टी को निशाना बनाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186692/mamata-banerjees-claim-trinamool-will-soon-return-to-power</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186692/mamata-banerjees-claim-trinamool-will-soon-return-to-power</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 21:04:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/28_08_2026_15_03_47_mam.jpg"                         length="212575"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोनिया गांधी और एनएसी को लेकर ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी से सियासी विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े माने जाने वाले मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के ताजा संपादकीय में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को लेकर की गई टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संपादकीय में एनएसी के कार्यकाल और उससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक समूहों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तथा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संपादकीय में दावा किया गया है कि अलग-अलग किसान, छात्र और अन्य आंदोलनों के पीछे इस्लामवादी, माओवादी, मिशनरी, सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठन, कुछ बुद्धिजीवी, कानूनी पेशेवर, फिल्म जगत और मीडिया के कुछ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186690/political-controversy-over-mindful-naxal-comment-regarding-sonia-gandhi-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/untitled_design_5_1-sixteen_nine.webp" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।</strong> राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े माने जाने वाले मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ के ताजा संपादकीय में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) को लेकर की गई टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संपादकीय में एनएसी के कार्यकाल और उससे जुड़े राजनीतिक-सामाजिक समूहों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तथा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संपादकीय में दावा किया गया है कि अलग-अलग किसान, छात्र और अन्य आंदोलनों के पीछे इस्लामवादी, माओवादी, मिशनरी, सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संगठन, कुछ बुद्धिजीवी, कानूनी पेशेवर, फिल्म जगत और मीडिया के कुछ हिस्सों का गठजोड़ काम कर रहा है। संपादकीय में इन समूहों की गतिविधियों को हिंदुत्व के खिलाफ व्यापक अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस शब्द के इस्तेमाल के बाद विपक्ष की ओर से भी सवाल उठाए गए थे कि इसका इस्तेमाल किन लोगों के लिए किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विपक्ष के सवालों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा है। रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच पर इस शब्द की अपनी व्याख्या देते हुए कहा था कि इसमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं तथा कथित तौर पर पूर्वोत्तर को देश से अलग करने की कोशिश करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">‘ऑर्गनाइजर’ के संपादकीय में एनएसी के संदर्भ में की गई टिप्पणी ने इस बहस को एक नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द की राजनीतिक और वैचारिक परिभाषा क्या है तथा इसके दायरे में किन विचारों और समूहों को रखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनएसी का गठन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में हुआ था और सोनिया गांधी इसकी अध्यक्ष थीं। संपादकीय में एनएसी की भूमिका और उससे जुड़े राजनीतिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, संपादकीय में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186690/political-controversy-over-mindful-naxal-comment-regarding-sonia-gandhi-and</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186690/political-controversy-over-mindful-naxal-comment-regarding-sonia-gandhi-and</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:58:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/untitled_design_5_1-sixteen_nine.webp"                         length="43332"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’:क्या यह  ब्यान संवैधानिक है या लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अतिक्रमण?”</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र में राजनेताओं द्वारा दिये गये ब्यान केवल शब्द या अभिव्यक्ति नहीं होते, वे व्यवस्था की दिशा भी तय करते हैं और राजनेताओं का आचरण। जब माननीय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसा वरिष्ठ नेतृत्व विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और स्वयं के हार के बाद यह वक्तव्य देता है कि “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी”, तो यह एक साधारण राजनीतिक वक्तव्य नहीं रह जाता, बल्कि संवैधानिकता, नैतिकता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहन बहस का विषय बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का शासन तंत्र संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है और संविधान द्वारा संचालित। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की वैधता विधानसभा</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178321/%E2%80%98i-will-not-resign%E2%80%99is-this-statement-constitutional-or-a-violation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hq720.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लेखक:प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारतीय लोकतंत्र में राजनेताओं द्वारा दिये गये ब्यान केवल शब्द या अभिव्यक्ति नहीं होते, वे व्यवस्था की दिशा भी तय करते हैं और राजनेताओं का आचरण। जब माननीय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसा वरिष्ठ नेतृत्व विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और स्वयं के हार के बाद यह वक्तव्य देता है कि “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी”, तो यह एक साधारण राजनीतिक वक्तव्य नहीं रह जाता, बल्कि संवैधानिकता, नैतिकता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गहन बहस का विषय बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का शासन तंत्र संसदीय लोकतंत्र पर आधारित है और संविधान द्वारा संचालित। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की वैधता विधानसभा में बहुमत से निर्धारित होती है।यदि किसी दल या गठबंधन के पास बहुमत नहीं है, तो वह सरकार बनाने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार खो देता है।ऐसी स्थिति में या तो वैकल्पिक बहुमत सिद्ध किया जाता है या पद छोड़ना पड़ता है।इस दृष्टि से “बहुमत के बिना इस्तीफा न देने” का कथन या यूं कहें बहुमत वाले दल के लिए सक्ता हस्तांतरण हेतु पद न  छोड़ने जैसे वक्तव्य संवैधानिक भावना के विपरीत प्रतीत होते हैं। भारत में इस तरह का ब्यान शायद अपने आप में पहला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संविधान केवल प्रावधानों का दस्तावेज नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता का भी आधार है।डॉ. भीमराव आंबेडकर ने स्पष्ट कहा था कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितनी ईमानदारी से उसका पालन करते हैं।ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है,क्या इस तरह के ब्यान देने  की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?क्या यह जनादेश का अपमान नहीं है?</div>
<div style="text-align:justify;">ममता दीदी पर मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान महामहिम राष्ट्रपति के प्रदेश आगमन पर उन्हें प्रोटोकॉल के अनुरूप सम्मान न देना, केन्द्रीय जांच एजेंसियों को सहयोग न करना, जांच में व्यवधान उत्पन्न करना,सघन मतदाता जांच का विरोध करना, चुनाव आयोग के अधिकारियों के कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करना, समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाना जैसे बहुत सारे आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। इनमें कितने आरोप संवैधानिक रूप से सही है या नहीं यह न्यायलय का तय करना का विषय है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे प्रकरण का सबसे दिलचस्प और चिंताजनक पहलू विपक्षी दलों की ममता दीदी के इस्तीफा न देने वाले ब्यान पर प्रतिक्रिया न आना  है।जहाँ एक ओर समय-समय पर कई विपक्षी दल बार-बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के शासन में “संविधान खतरे में है”, वहीं दूसरी ओर ममता दीदी के इस स्पष्ट बयान पर न तो विपक्षी दलों द्वारा अपेक्षित विरोध किया और न ही कोई  समझाइश दी गई अपितु 100 सीटों की चोरी के आरोप का समर्थन कर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े कर दिए, जबकि चुनाव में धांधली हुई या नहीं इसको तय करने के लिए न्यायालय, और उसकी शरण में जाना चाहिए यदि किसी प्रकार की आशंका है। चुनाव आयोग की हिंसा रहित निष्पक्ष चुनाव कराने के श्रम पर पानी फेरने से बचना चाहिए।ऐसा मौन समर्थन क्या भारतीय संविधान को खतरे में नहीं डालता? वास्तव में यह विरोधाभास कई सवाल खड़े करता है:क्या संविधान की चिंता केवल राजनीतिक सुविधा का विषय है?क्या संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का पैमाना दलगत आधार पर बदल जाता है?यदि एक ओर “संविधान खतरे में” का नरेटिव गढ़ा जाए और दूसरी ओर ऐसे बयानों पर चुप्पी साध ली जाए, तो क्या यह उस नरेटिव की विश्वसनीयता को कमजोर नहीं करता ?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं, बल्कि सिद्धांतों की निरंतरता का नाम है।जब राजनीतिक दल अपने विरोधियों के लिए एक मानक और अपने सहयोगियों के लिए दूसरा मानक अपनाते हैं तो इससे लोकतांत्रिक विमर्श का स्तर गिरता है।इस संदर्भ में यह स्पष्ट होता है कि:संविधान की रक्षा का प्रश्न चयनात्मक नहीं हो सकता;लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी सभी पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मेरा ऐसा मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति से उठा यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।“बहुमत हासिल न करने पर भी मैं इस्तीफा नहीं दूंगी” जैसा कथन-संवैधानिक रूप से संदिग्ध और लोकतांत्रिक दृष्टि से अनुपयुक्त प्रतीत होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही विपक्ष की चुप्पी यह संकेत देती है कि भारतीय राजनीति में सिद्धांतों की बजाय सुविधा का प्रभाव बढ़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि-सत्ता या विपक्ष में कोई भी बैठे,सबके लिए संविधान सर्वोपरि रहे, और जनादेश का सम्मान अनिवार्य।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178321/%E2%80%98i-will-not-resign%E2%80%99is-this-statement-constitutional-or-a-violation</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178321/%E2%80%98i-will-not-resign%E2%80%99is-this-statement-constitutional-or-a-violation</guid>
                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:54:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/hq720.jpg"                         length="143105"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पहुंचे सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि, गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानहानि और जालसाजी के एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।  यह मामला असम पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज किया है। पवन खेड़ा ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खेड़ा ने रविवार को एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, और इस मामले को डायरी नंबर 25523/2026 के तौर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177433/congress-leader-pawan-kheda-reached-supreme-court-and-challenged-assam"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/8figkh4o_pawan-khera-pti_625x300_27_april_23.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बता दें कि, गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानहानि और जालसाजी के एक मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।  यह मामला असम पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज किया है। पवन खेड़ा ने अपनी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, खेड़ा ने रविवार को एक स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर की है, और इस मामले को डायरी नंबर 25523/2026 के तौर पर रजिस्टर किया गया है। शाम करीब 6.26 बजे दायर की गई यह याचिका फिलहाल 'पेंडिंग' के तौर पर लिस्टेड है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह याचिका गौहाटी हाईकोर्ट की ओर से खेड़ा को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार करने के दो दिन बाद आई है। जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की सिंगल-जज बेंच ने फैसला सुनाया था कि कांग्रेस नेता 'गिरफ्तारी से पहले जमानत का विशेषाधिकार पाने के हकदार नहीं हैं।'</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौहाटी हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले को सिर्फ मानहानि का मामला नहीं कहा जा सकता। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 339 के तहत पहली नजर में मामला बनने के सबूत मौजूद हैं।असम पुलिस ने उनके खिलाफ मानहानि और जालसाजी का मामला दर्ज किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत कुमार सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने दर्ज कराया है। उन्होंने खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। खेड़ा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177433/congress-leader-pawan-kheda-reached-supreme-court-and-challenged-assam</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177433/congress-leader-pawan-kheda-reached-supreme-court-and-challenged-assam</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:35:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/8figkh4o_pawan-khera-pti_625x300_27_april_23.jpg"                         length="104886"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        