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                <title>लोकतांत्रिक प्रक्रिया - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>लोकतांत्रिक प्रक्रिया RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2027 विधानसभा चुनाव - अब आपकी बारी भारतीय जन समाज पार्टी का ऐलान।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों* पर चुनाव लड़ेगी। क्या आप विधायक बनकर अपने क्षेत्र की सेवा करना चाहते हैं? क्या आप भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं तो भारतीय जन समाज पार्टी आपको अवसर दे रही है! महिला और पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हमारी प्राथमिकता: जनसेवा की भावना क्षेत्र में जनाधार पार्टी के प्रति निष्ठा और मेहनत शिक्षा, जाति, आर्थिक स्थिति बाधा नहीं है। टिकट मिलेगा योग्यता और जनसमर्थन से सीटें सीमित हैं। पहले आएं, पहले मौका पाएं। आवेदन कैसे करें: अपनी विधानसभा का नाम + पूरा परिचय भेजें।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183617/2027-assembly-elections-now-your-turn-announcement-of-bharatiya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/604055.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों* पर चुनाव लड़ेगी। क्या आप विधायक बनकर अपने क्षेत्र की सेवा करना चाहते हैं? क्या आप भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं तो भारतीय जन समाज पार्टी आपको अवसर दे रही है! महिला और पुरुष दोनों आवेदन कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमारी प्राथमिकता: जनसेवा की भावना क्षेत्र में जनाधार पार्टी के प्रति निष्ठा और मेहनत शिक्षा, जाति, आर्थिक स्थिति बाधा नहीं है। टिकट मिलेगा योग्यता और जनसमर्थन से सीटें सीमित हैं। पहले आएं, पहले मौका पाएं। आवेदन कैसे करें: अपनी विधानसभा का नाम + पूरा परिचय भेजें।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 21:04:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिंसा राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकार संकट के बीच घिरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180926/pakistan-occupied-kashmir-surrounded-by-violence-political-instability-and-human"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;">पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) एक बार फिर गंभीर अशांति और हिंसा का केंद्र बन गया है। विधानसभा चुनावों से पहले भड़की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव और अनिश्चितता के माहौल में धकेल दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान को अतिरिक्त सुरक्षा बल और रेंजर्स तैनात करने पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">यह हिंसा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक असंतोष की लंबी पृष्ठभूमि मौजूद है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। चुनाव से पहले जिस प्रकार सीटों के आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद पैदा हुआ, उसने लोगों के भीतर पहले से मौजूद नाराजगी को और अधिक भड़का दिया। यही कारण है कि प्रदर्शन केवल किसी एक निर्णय के विरोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे व्यापक असंतोष के रूप में सामने आए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">रावलकोट में हुई झड़पों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के बाद हिंसा तेजी से फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई स्थानों पर गोलीबारी भी हुई। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ इलाकों में बिना पर्याप्त चेतावनी के बल प्रयोग किया गया, जिससे भगदड़ मच गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। इन घटनाओं ने स्थानीय जनता के भीतर सेना और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति असंतोष को और गहरा कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट का एक बड़ा कारण 27 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव भी हैं। चुनावों में 45 में से 12 सीटों को शरणार्थियों के लिए आरक्षित किए जाने के फैसले का व्यापक विरोध हो रहा है। विरोधी संगठनों का कहना है कि इस व्यवस्था से स्थानीय निवासियों के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होंगे और उनकी वास्तविक भागीदारी कम हो जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने आंदोलन तेज किया है। बंद और प्रदर्शन की घोषणाओं ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब यह असंतोष केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठानी शुरू कर दी है। ब्रिटेन में पाकिस्तान के दूतावास के बाहर प्रदर्शन किए गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने पीओके में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और बल प्रयोग के खिलाफ नारे लगाए। इससे स्पष्ट होता है कि यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">ब्रिटेन के लगभग 50 सांसदों द्वारा इस विषय पर चिंता व्यक्त किया जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से मामले पर ध्यान देने और राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए तथा राजनीतिक मतभेदों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठती ऐसी आवाजें पाकिस्तान के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, भारत ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार संबंधी प्रश्नों से ध्यान हटाने के लिए भ्रामक सूचनाओं और दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है। भारत का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पीओके में घट रही घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान हो। भारत लंबे समय से पीओके में लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और संचार व्यवस्था में व्यवधान की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। कई इलाकों में लोगों को सूचना और संवाद के साधनों से वंचित होना पड़ा है। आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में सूचना तक पहुंच को एक महत्वपूर्ण अधिकार माना जाता है। ऐसे में संचार माध्यमों पर नियंत्रण से लोगों के बीच असुरक्षा और अविश्वास की भावना और अधिक बढ़ सकती है। इससे प्रशासन और जनता के बीच संवाद की संभावनाएं भी कमजोर होती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान संकट पाकिस्तान के सामने एक बड़े राजनीतिक प्रश्न को भी खड़ा करता है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन, जनाक्रोश और प्रशासन के प्रति अविश्वास बढ़ रहा हो, तो केवल सुरक्षा बलों के सहारे स्थिति को लंबे समय तक नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि जनता की शिकायतों को सुना जाए, राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दिया जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाया जाए। इतिहास गवाह है कि जब भी जनभावनाओं की उपेक्षा की जाती है, तब असंतोष और अधिक तीव्र रूप में सामने आता है।</div>
<div style="text-align:justify;">पीओके की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि वहां के लोग अपने राजनीतिक अधिकारों, बेहतर प्रशासन और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर पहले से अधिक मुखर हो चुके हैं। यदि इन मांगों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और जटिल हो सकती है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, प्रशासन की जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण बनेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">कुल मिलाकर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भड़की हिंसा केवल एक स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह उस गहरे असंतोष का परिणाम है जो लंबे समय से वहां मौजूद है। बढ़ती मौतें, सैकड़ों घायल, व्यापक प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय चिंता और राजनीतिक विवाद यह दर्शाते हैं कि पीओके एक संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार किस प्रकार इस संकट का समाधान करती है, यह न केवल क्षेत्र की स्थिरता बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि और लोकतांत्रिक विश्वसनीयता को भी प्रभावित करेगा। पीओके के लोगों की आकांक्षाओं और अधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक समाधान ही इस संकट से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी मार्ग साबित हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>           </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्यापार मंडल चुनाव पुन:कराने की उठी मांग।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज,।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नैनी बाजार व्यापार मंडल के पुन:चुनाव को लेकर पूर्व पार्षद विनय जायसवाल बाबा सहित व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार मंडल के कार्यकारिणी सदस्यों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई।</div><div style="text-align:justify;">ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, लाल जी. जायसवाल,मंगला केशरवानी, गनेशी वर्मा,मुकेश भारतीया (पूर्व पार्षद), हरिकिशन तिवारी (बबलू) एवं दिलीप केशरवानी को सौंपा गया।इस अवसर पर मुख्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी ने बताया कि व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।जल्द ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पुनः चुनाव कराने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180922/demand-was-raised-to-re-hold-trade-board-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260608-wa0093-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज,।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नैनी बाजार व्यापार मंडल के पुन:चुनाव को लेकर पूर्व पार्षद विनय जायसवाल बाबा सहित व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यापार मंडल के कार्यकारिणी सदस्यों को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शीघ्र चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की गई।</div><div style="text-align:justify;">ज्ञापन कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, लाल जी. जायसवाल,मंगला केशरवानी, गनेशी वर्मा,मुकेश भारतीया (पूर्व पार्षद), हरिकिशन तिवारी (बबलू) एवं दिलीप केशरवानी को सौंपा गया।इस अवसर पर मुख्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी ने बताया कि व्यापार मंडल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।जल्द ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पुनः चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी,ताकि व्यापारियों को नया नेतृत्व मिल सके और संगठन की गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित होती रहें।ज्ञापन सौंपने वालों में विनय जायसवाल (बाबा), विक्की सोनी, पप्पू मास्टर, सुनील जायसवाल, मिलन डेमरी,दशरथ जायसवाल, बेटू जायसवाल, फूलचंद्र केशरवानी, अशोक केशरवानी, अंकुर तथा मोनू पासी प्रमुख रूप से शामिल रहे।</div><div style="text-align:justify;">व्यापारियों ने उम्मीद जताई कि व्यापार मंडल का चुनाव निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से जल्द संपन्न कराया जाएगा,जिससे व्यापारियों की समस्याओं के समाधान और संगठन को मजबूती मिल सके।इस मुद्दे पर मौजूदा व्यापार मंडल अध्यक्ष राकेश जायसवाल से स्वतंत्र प्रभात संवाददाता ने जब फोन से बातचीत की तो उन्हों ने कहा की हम तो चाहते है की चुनाव हो लेकीन जो पुराना ब्योरा है पहले उसको व्यापारियों के सामने सार्वजनिक करे।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:15:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वोट काउंटिंग के दौरान राज्य का नॉमिनी मौजूद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177974/west-bengal-election-commission-told-supreme-court-that-the-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ah2nk1so_supreme-court_625x300_26_january_25.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने नायडू की यह बात रिकॉर्ड की। कि ECI उसके सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा। इसलिए, उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ TMC की अपील पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "SLP में आगे किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। हम मिस्टर नायडू की बात रिकॉर्ड करते हैं कि ECI के सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए।मामले की आज अर्जेंट सुनवाई हुई क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को याचिका खारिज कर दी थी।हाई कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से नियुक्त करना इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय PSU कर्मचारी से काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट नियुक्त करने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं लगती।"इसने आगे कहा कि अगर TMC को लगता है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी BJP उम्मीदवारों का पक्ष ले रहे हैं, तो वह बाद में नतीजों को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकती है।इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:41:35 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण से पहले चुनाव आयोग सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
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<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177429/election-commission-strict-before-the-second-phase-of-assembly-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/navjivanindia_2026-04-25_svf60re9_election-commision.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।सूत्रों के अनुसार, आयोग ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त (सीपी), सभी उपायुक्त (डीसीपी), जिलों के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सहित थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास विस्फोटक सामग्री पाई जाती है या डराने-धमकाने की कोई रणनीति अपनाई जाती है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके लिए सीधे जिम्मेदार माना जाएगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को अभूतपूर्व परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने सभी पुलिस अधिकारियों को अगले 24 घंटों के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध या संदिग्ध सामग्री, विशेषकर विस्फोटक पदार्थों को तत्काल जब्त करने को कहा गया है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। आयोग का मानना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसे हर हाल में रोका जाना जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन से यह भी कहा गया है कि वे स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं। इसके अलावा, आम जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि वह चुनावों के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या हिंसा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान होगा। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विधान सभा चुनाव </category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:28:11 +0530</pubDate>
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